मायमंदिर फ़्री कुंडली
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अध्यापिता ये गुरून्नाद्रियन्ते, विप्रा वाचा मनसा कर्मणा वा| यथैव ते न गुरोर्भोजनीया स्तथैव तान्न भुनक्ति श्रुतं तत्|| ================================ जो पढ़ाये गए शिष्य वाणी, मन और व्यवहार से अपने गुरु का आदर नहीं करते, वे गुरु की कृपा के पात्र नहीं हो पाते और उसी प्रकार उनका प्राप्त किया हुआ ज्ञान भी सफल नहीं होता| ==================================

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Joginder Raika Jun 17, 2019

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Hemang Nangia Jun 17, 2019

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mamta kapoor Jun 17, 2019

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mamta kapoor Jun 17, 2019

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