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Anuradha Tiwari
Anuradha Tiwari May 20, 2019

" केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी " एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी। पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे। बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है। आपकी भक्ति को प्रणाम। 🌺🌺हर हर महादेव🌺🌺 🌺🌺ॐ नमः शिवाय🌺🌺

" केदारनाथ को क्यों कहते हैं

 ‘जागृत महादेव’ ?, 

दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी "

एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता।

 मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए।

 आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। 

केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है।

 वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये

 । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।

पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है।

 और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया।

 लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी।

 उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। 

बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।

बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे ।

 इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। 

उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये।

 पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए !

 उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।

उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। 

तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है।

 तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। 

पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो।

 तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। 

यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है। आपकी भक्ति को प्रणाम।
🌺🌺हर हर महादेव🌺🌺
🌺🌺ॐ नमः शिवाय🌺🌺

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कामेंट्स

Munna Yadav May 20, 2019
हे भोलेनाथ मेरे दोस्त को जेल से बाहर निकलवा देना

Munna Yadav May 20, 2019
मैं आपको प्रार्थना करता हूं और करता ही रहूंगा मेरे दोस्त को जेल से जितना जल्दी बाहर निकलवा दे

S.p .sharma May 20, 2019
🔔🕭very very nice anu ji har har mahadev suprabhat🕭🕭

Rajesh Gupta May 20, 2019
🌹🙏Om Namah Shivay 🙏🌹 🙏🌹Har Har Mahadev 🌹🙏

Seema Parmar May 20, 2019
हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय

BHAGAT RAM May 20, 2019
हर हर महादेव कृपा करो मेरे प्रभु भोले शंकर

Aaru May 20, 2019
bahut achcha lga pad ke 🙏🙏🙏🙏

Gopal Sajwan"कुँजा जी" May 20, 2019
🔱जय बाबा केदारनाथ🔱 ❤•*°°*•.¸🌄¸.•*°°*•❤ ┊💚┊💚┊💚┊ ┊💚┊💚┊💚┊ 💓💓💓💓•••••••💦 ┊ ┊ ┊ 💕जय भोलेनाथ ┊ हर हर महादेव 🔱 ❤ 🕉 नमः शिवाय्🔱 💜💚शुभ दिन💚💜 🙏ⓀⓊⓃⒿⒶ ⒿⒾ🙏

Sushma Sharma Jun 19, 2019

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Sanjay Nagpal Jun 17, 2019

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"नमस्कार ' दोस्तों,🌹👫👬 हर मनुष्य को अपने जीवन में इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए कि एक दिन मृत्यु आनी निश्चित है। जिस प्रकार इस संपूर्ण संसार में दान जैसा उत्तम कोई कार्य नहीं, ठीक उसी प्रकार लोभ व लालच जैसा कोई शत्रु नहीं, सभ्यता और अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नहीं और शांति व संतोष जैसा संपूर्ण संसार में कोई धन नहीं। किसी के घर जाए तो वश में रखें अपनी अंतरात्मा को, किसी के निमंत्रण में जाएं तो बस में रखें अपने आखों को। जब कभी भी क्रोध आ जाए तो बस में रखी अपनी जीभ को, जब प्रार्थना करें ईश्वर की तो बस में रखें अपने हृदय और मन को। जिस प्रकार मनुष्य अपनी बहन और बेटी को सम्मान देता है ठीक उसी प्रकार मनुष्य को चाहिए कि वह दूसरे की बहन और बेटी को भी उसी तरह सम्मान दें फिर देखिए जीवन कितना, सुखमय व्यतीत होता है। किंतु मनुष्य समान लेना चाहता है मगर देना कभी नहीं चाहता। क्योंकि वह ईर्ष्या वश किसी के आगे झुकना नहीं चाहता और यही बढ़ते वक्त के साथ उसके पतन का कारण बनता है। आप एक सभ्य और बुद्धिमान व्यक्ति हैं आप भली-भांति जानते हैं कि आपको क्या करना चाहिए जैसा आपका कर्म होगा परिणाम भी ठीक वक्त आने पर आपको वैसे ही प्राप्त होगा। इसमें कर्म आप पर निर्भर है और परिणाम ईश्वर के हाथ में है।" - नमस्कार 🙏 शुभ संध्या वंदन 🚩 👏 👣 🌄 🙏 जय श्री गुरुदेव जय श्री गणेश जी जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏 ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 नमस्कार 🙏 जय श्री कृष्ण जय श्री राधे राधे नमस्कार 🙏

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