Radha krishna
Radha krishna Aug 28, 2017

राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत का महत्व

राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत का महत्व

राधा अष्टमी महालक्ष्मी व्रत कथा पूजा एवम उद्यापन विधि

इस व्रत को करते वक़्त सर्वप्रथम व्रत के दिन सूर्योदय के समय स्नान आदि करके पूजा का संकल्प किया जाता है. पूजन के संकल्प और स्नान के पहले इस दिन दूर्वा को अपने शरीर पर घिसा जाता है.

संकल्प लेते समय व्रत करने वाली महिला अपने मन मे यह निश्चय करती है कि माता लक्ष्मी मै आपका यह व्रत पूरे विधी विधान से पूरा करूंगी. मै इस व्रत के हर नियम का पालन करूंगी. वो कहती है कि माता लक्ष्मी मुझ पर कृपा करे, कि मेरा यह व्रत बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाए. इस संकल्प के बाद एक सफेद डोरे मे 16 गठान लगाकर उसे हल्दी से पीला किया जाता है और फिर उसे व्रत करने वाली महिला द्वारा अपनी कलाई पर बांधा जाता है.

अब पूजन के वक़्त एक पटे पर रेशमी कपड़ा बिछाया जाता है. इस वस्त्र पर लाल रंग से सजी लक्ष्मी माता की तस्वीर और गणेश जी की मूर्ति रखी जाती है . कुछ लोग इस दिन मिट्टी से बने हाथी की पूजा भी करते है. अब मूर्ति के सामने पानी से भरा कलश स्थापित करते है और इस कलश पर अखंड ज्योत प्रज्वलित करते है. अब इसकी पूजा सुबह और शाम के वक़्त की जाती है. और मेवे तथा मिठाई का भोग लगाया जाता है.

पूजन के प्रथम दिन लाल नाड़े मे 16 गाठ लगाकर इसे घर के हर सदस्य के हाथ मे बांधा जाता है और पूजन के बाद इसे लक्ष्मी जी के चरणों मे चढ़ाया जाता है. व्रत के बाद ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है और दान दक्षिणा दी जाती है. इस सब के बाद लक्ष्मी जी से व्रत के फल प्राप्ति की प्रार्थना की जाती है.

महालक्ष्मी व्रत की कथा

इस व्रत के संदर्भ मे कई कथाये प्रचलित है। ।

प्रथम कथा – बहुत पुरानी बात है. एक गाव मे एक ब्राह्मण रहता था. वह ब्राह्मण नियमानुसार भगवान विष्णु का पूजन प्रतिदिन करता था. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिये और इच्छा अनुसार वरदान देने का वचन दिया. ब्राह्मण ने माता लक्ष्मी का वास अपने घर मे होने का वरदान मांगा. ब्राह्मण के ऐसा कहने पर भगवान विष्णु ने कहा यहा मंदिर मे रोज एक स्त्री आती है और वह यहा गोबर के उपले थापति है. वही माता लक्ष्मी है. तुम उन्हे अपने घर मे आमंत्रित करो. देवी लक्ष्मी के चरण तुम्हारे घर मे पड़ने से तुम्हारा घर धन धान्य से भर जाएगा. ऐसा कहकर भगवान विष्णु अदृश्य हो गए. अब दूसरे दिन सुबह से ही ब्राह्मण देवी लक्ष्मी के इंतजार मे मंदिर के सामने बैठ गया. जब उसने लक्ष्मी जी को गोबर के उपले थापते हुये देखा तो उसने उन्हे अपने घर पधारने का आग्रह किया. ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मी जी समझ गयी की यह बात ब्राह्मण को विष्णु जी ने ही कही है. तो उन्होने ब्राह्मण को महालक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी . लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण से कहा कि तुम 16 दिनो तक महालक्ष्मी व्रत करो और व्रत के आखिरी दिन चंद्रमा का पूजन करके अर्ध्य देने से तुम्हारा व्रत पूर्ण होगा.

ब्राह्मण ने भी महालक्ष्मी के कहे अनुसार व्रत किया और देवी लक्ष्मी ने भी उसकी मनोकामना पूर्ण की. उसी दिन से यह व्रत श्रद्धा से किया जाता है.

द्वतीय कथा – एक बार हस्तिनापूर मे महालक्ष्मी व्रत के दिन गांधारी ने नगर की सारी स्त्रियो को पूजन के लिए आमंत्रित किया, परंतु उसने कुंती को आमंत्रण नहीं दिया. गांधारी के सभी पुत्रो ने पूजन के लिए अपनी माता को मिट्टी लाकर दी और इसी मिट्टी से एक विशाल हाथी का निर्माण किया गया और उसे महल के बीच मे स्थापित किया गया. नगर की सारी स्त्रीया जब पूजन के लिए जाने लगी, तो कुंती उदास हो गयी. जब कुंती के पुत्रो ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने सारी बात बताई. इस पर अर्जुन ने कहा माता आप पूजन की तैयारी कीजिये मै आपके लिए हाथी लेकर आता हूँ. ऐसा कहकर अर्जुन इन्द्र के पास गया और अपनी माता के पूजन के लिए ऐरावत को ले आया. इसके बाद कुंती ने सारे विधी विधान से पूजन किया और जब नगर की अन्य स्त्रियो को पता चला, कि कुंती के यहा इन्द्र के ऐरावत आया है. तो वे भी पूजन के लिए उमड़ पड़ी और सभी ने सविधि पूजन सम्पन्न किया.

ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत की कहानी सोलह बार कही जाती है. और हर चीज या पूजन सामग्री 16 बार चढ़ाई जाती है.

महालक्ष्मी व्रत उद्यापन विधी

व्रत मे उद्यापन के दिन एक सुपड़ा लेते है. इस सुपड़े मे सोलह श्रंगार के सामान लेकर इसे दूसरे सुपड़े से ढक देते है. अब 16 दिये प्रज्वलित करते है. पूजन के बाद इसे देवी जी को स्पर्श कराकर दान करते है.
व्रत के बाद चंद्रमा को अर्ध्य देते है और लक्ष्मी जी को अपने घर पधारने का आमंत्रण देते है.
माता लक्ष्मी को भोग लगाते समय ध्यान रहे माता के भोजन मे लहसुन प्याज से बना भोजन वर्जित है. माता के साथ साथ उन सभी को भी भोजन दे जिन्होने व्रत किया है. भोजन मे पूड़ी सब्जी खीर रायता आदि विशेष रूप से होता है.
पूजन के बाद भगवान को भोग लगी हुई थाली गाय को खिलाते है और माता को चढ़ा हुआ श्रंगार का सामान दान करते है.
महालक्ष्मी व्रत कब किया जाता है ।

महालक्ष्मी व्रत हर वर्ष भादव माह मे कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है. इस अष्टमी को राधा अष्टमी भी कहते है. साल 2016 मे राधा अष्टमी या महालक्ष्मी का व्रत की शुरुवात 29 अगस्त 2017, मंगलवार के दिन से है. और इस व्रत का समापन 12 सितम्बर 2017, मंगलवार को है. इस साल महालक्ष्मी व्रत 14 दिन के लिए है.

महालक्ष्मी व्रत की शुरुवात महालक्ष्मी व्रत का समापन
29 अगस्त 2017 12 सितम्बर 2017

Pranam Jyot Like +165 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 80 शेयर

कामेंट्स

Swati Singh Aug 29, 2017
isme kya mahalaxmi ka vharat khewal mahila hi karati hai

Radha krishna Aug 29, 2017
@swati.singh.3 महिला पूरुष दोनो कर सकते हैं।जय माता जी, आप की हर मनोकामना पूरी करे।

#कहानी - बहन से वादा

सुबह बहन जल्दी उठती है और घर के सारे कामों को खत्म कर अपने भैया को जगाती है

बहन - भैया उठो ना,जल्दी से उठो ना, आज आज रक्षाबन्धन है ।
आप जल्दी से तैयार हो जाओ, मै सबसे पहले आपको राखी बांधुगी ।

भाई - ठीक है ।

भाई तैया...

(पूरा पढ़ें)
Bell Like Pranam +26 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 144 शेयर
H.A. Patel Aug 21, 2018

Jay shri krishna Radhe Radhe Radhe

Like +1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर

Pranam +1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर
Komal Chand jain Aug 21, 2018

Pranam Like +4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 36 शेयर

संत कबीर गांव के बाहर झोपड़ी बनाकर अपने पुत्र कमाल के साथ रहते थे. संत कबीर जी का रोज का नियम था- नदी में स्नान करके गांव के सभी मंदिरों में जल चढाकर दोपहर बाद भजन में बैठते, शाम को देर से घर लौटते.
.
वह अपने नित्य नियम से गांव में निकले थे. इधर प...

(पूरा पढ़ें)
Jyot Bell Like +183 प्रतिक्रिया 58 कॉमेंट्स • 102 शेयर
Jayshree Shah Aug 20, 2018

एक जैन मंदिर की बगल मे एक नाई की दुकान थी।
जहां वह रहता भी था।

जैन मंदिर पुजारी और नाई दोनों मित्र बन गये थे |
नाई हमेशा ही जैन मंदिर पुजारी से कहता,

ईश्वर ऐसा क्यों करता है,
वैसा क्यों करता है ?
यहाँ बाढ़ आ गई,
वहाँ सूखा हो गया,
यहाँ एक्सीडेंट...

(पूरा पढ़ें)
Bell Pranam Dhoop +186 प्रतिक्रिया 61 कॉमेंट्स • 464 शेयर
pooja kumari Aug 20, 2018

😊😊😊मन की शांति😊😊😊
एक किसान था एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था ।
उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो...

(पूरा पढ़ें)
Like Pranam Flower +130 प्रतिक्रिया 88 कॉमेंट्स • 427 शेयर
Gopal Krishan Aug 21, 2018

।।श्रीगणेशाय नमः।।

राधा और रुक्मिणी में से लक्ष्मी कौन हैं ?

चराचर जगत् में रुक्मिणी और राधा का सम्बन्ध श्रीकृष्ण से है। संसार रुक्मिणी जी को श्रीकृष्ण की पत्नी और राधाजी को श्रीकृष्ण की प्रेमिका के रूप में मानता है। आम जगत् में रुक्मिणी और राधा...

(पूरा पढ़ें)
Bell Flower Like +4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

Like Flower Milk +22 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 123 शेयर
Anuradha Tiwari Aug 21, 2018

🌹महापुरुषों की प्रेरणा महत्वपूर्ण है क्योंकि उनसे सुविचारों / मर्यादा एवं सत्कर्म का ज्ञान मिलता है , वास्तविकता में महापुरुषों का जीवन वंदना के लिए नहीं कुछ बनने के लिए प्रेरणा होता है।

🌹जबसे समाज ने महापुरुषों से पवित्र, मर्यादित, अनुशासित...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Milk Jyot +11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB