AARYAM
AARYAM Sep 19, 2017

MEDITATION GOVERNS ALL SENCES BY AARYAM

https://youtu.be/abRyRxrzw_8

*"आर्यम-सूत्र"*

*"Meditation Governs All Sences"*

हम अपनी आंख से कोई दृश्य देखते हैं लेकिन क्या हमने सोचा है कि वह कौन है जो उस दृश्य को हमारे मन-मस्तिष्क में निरूपित करता है या उसका आंकलन करता है! उसी तरह हम अपनी नाक से कोई गंध लेते हैं या कोई चीज सूंघते हैं, लेकिन उस गंध का क्या स्वभाव है! क्या स्वरूप है! वह गंध हमें भाती है या नही भाती है या फिर हमारे लिए अनुकूल या प्रतिकूल है! इस बात का निर्धारण कौन करता है।
वैसे ही हम कान से कुछ सुनते हैं और सुनी हुई बात हमारे लिए प्रिय है या अप्रिय है! हमारी श्रवण इंद्रियों को क्या उस ध्वनि या संगीत को सुन कर मधुरता का भान होता है या उबाऊ लगता है? इन सभी बातों का निर्धारण कौन है जो करता है, इनके संतुलन का पैमाना कहा से निर्धारित होता है? हमारी जितनी भी ज्ञाननेद्रियाँ व कर्मेन्द्रियाँ हैं का निर्धारण किस तत्व के आधार पर होता है? कौन सा वह बिंदु है जिसके यह मापा जाता है और हमारे मस्तिष्क तक हमारे शरीर के द्वारा कोई सूचना पहुँचाई जाती है। यह काम किया जाता है ध्यान के माध्यम से! ध्यान उसको(सूचना) संग्रहीभूत करता है, उस एक बिंदु पर केंद्रित करता है और फिर उस बात के लिए हम निर्धारण कर पाते हैं कि किस चीज़ का क्या वास्तविक स्वरूप है! वह कितनी महत्वपूर्ण है!अगर हमारा ध्यान नही होता है तो वह चीज हमारे लिए मायने नही रखतीं उदाहरण के रूप में इसे समझने के लिए हम मान लें कि- हमारे घर पर आगज़नी की घटना घट गई है तो फिर कितनी ही असहज स्थिति में हम कहीं भी रहें हमारा तत्काल प्रयास होगा कि हम वहां पहुंच कर जल्द से जल्द आग पे काबू पा लें, उस वक़्त हमारा ध्यान सिर्फ वहां होगा जहां होना चाहिए ऐसे में किसी राहगीर के अप्रिय वचन या कृत्य भी हमारे ध्यान को बांट नही सकेंगे न ही कोई मनमोहक चीज भी हमारा ध्यान आकर्षित नही कर सकेंगे चूँकि उस वक़्त हमारी चेतना का केंद्र उस 'अग्नि' पर निर्धारित होगा जिसे हमें बुझाना है! यदि हमारा ध्यान वहां से हट जाता है तो हमारा ध्यान का विषय भी वह घटना नही रह जाती। संक्षेप में सोचा जाए कि इन सभी बातों को निर्देशों को कौन एकत्रित करता है? कौन है वह जो इन्हें ला कर एक बिंदु पर स्थापित करता है !!! *यही ध्यान है।*

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Sajjan Singhal Mar 27, 2020

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कोरोनावायरस से डरिए मत।यह आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि मनुष्य ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ और सबसे शक्तिशाली प्राणी है जिसमें अजर-अमर और सर्वशक्तिमान सत्ता-आत्मा का निवास है । हमारी आत्मा में अनन्त शक्ति है लेकिन अज्ञानतावश स्वयं को निर्बल और असहाय महसूस करते हैं। आत्मा से बढ़कर कोई चिकित्सक नहीं है और भोजन से बढ़कर कोई दवा नहीं है।स्वयं को जानने के लिए प्रतिदिन कम-से-कम दस मिनट ध्यान और प्राणायाम करें तथा आवश्यकतानुसार रुचिकर भोजन करें। भोजन अपनी इच्छानुसार करें न कि दूसरों या चिकित्सक के परामर्शानुसार। आपकी इच्छा और आवश्यकता को वहीं जान सकता है जो स्वयं यानी अपनी आत्मा या soul को जानते हों।प्रश्न यह उठता है कि स्वयं को जाननेवाले कितने लोग हैं? बहुत कम।नगण्य।

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Sajjan Singhal Mar 26, 2020

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