Jagdish Kumar
Jagdish Kumar Sep 14, 2017

विरुद्ध खाना एक साथ नहीँ खाना चाहिए।

विरुद्ध खाना एक साथ नहीँ खाना चाहिए।

विरुद्ध खाना एक साथ नहीँ खाना चाहिए , कुछ सूत्र जो याद रखे एक साथ नहीं खानी चाहिए जैसे -->

-चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए।
दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है ।
बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।
-सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी।
-दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।
-दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।
-गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।
-ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।
-शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।
-खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी , कटहल कभी नहीं।
-घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।
-तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।
-चावल के साथ सिरका कभी नहीं।
-चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।
-खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।
-कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे:*
-खरबूजे के साथ चीनी
-इमली के साथ गुड
-गाजर और मेथी का साग
-बथुआ और दही का रायता
-मकई के साथ मट्ठा
-अमरुद के साथ सौंफ
-तरबूज के साथ गुड
-मूली और मूली के पत्ते
-अनाज या दाल के साथ दूध या दही
-आम के साथ गाय का दूध
-चावल के साथ दही
-खजूर के साथ दूध
-चावल के साथ नारियल की गिरी
-केले के साथ इलायची
-कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाये ।
-केले की अधिकता में दो छोटी इलायची
-आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड
-जामुन ज्यादा खा लिया तो 3 - 4 चुटकी नमक
-सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम
-खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत
-तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग
-अमरूद के लिए सौंफ
-नींबू के लिए नमक
-बेर के लिए सिरका
-गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 3 - 4 बेर खा लीजिये
-चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये
-बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च
-मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये
-बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं
-खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये
-मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं
-इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये
-मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये
-मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये
-घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं
-खुरमानी ज्यादा हो जाए तो ठंडा पानी पीयें
-पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीये .
अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये 80% बीमारियों से बचे रहेंगे ।
|| आपका अपना ||
वैद्य विजेन्द्र शर्मा ( शांडिल्य )
मों. नं. 9416294632

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कामेंट्स

Shri Om Sharma Sep 16, 2017
बहुत सुन्दर राधे राधे

Maya Rathore Nov 5, 2017
बहुत सुंदर जानकारी😊🙏

Neha Sharma,Haryana Dec 11, 2019

+636 प्रतिक्रिया 80 कॉमेंट्स • 673 शेयर
yogeshraya Dec 10, 2019

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 32 शेयर

*जय वीर बजरंग बली की*🌹🌹🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🌹🌹🙏 *हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?* *हिंदू शास्त्रों में इस प्रसंग की जानकारी दी गई है कि जब लंकापति रावण को मारकर भगवान राम जी माता सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ अयोध्या आने की जिद की थी। भगवान राम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान जी को बहुत समझाया पर वह नहीं माने। क्योंकि बजरंगबली अपने जीवन को प्रभु श्रीराम की सेवा करने में बिताना चाहते थे। श्री हनुमान जी दिन रात यही प्रयास करते रहते थे। कि कैसे अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को खुश रखा जाए। *एक बार बजरंगबली ने माता सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। तो यह माता सीता से इसका कारण पूछा की माता आप अपने मांग में सिंदूर क्यों लगा रही हैं? माता सीता ने हनुमान जी को उत्तर दिया कि वह प्रभु श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर लगाती हैं। श्री हनुमान जी को अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को प्रसन्न करने का यह युक्ति बहुत ही अच्छी लगी। उन्होंने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और स्वयं के ऊपर उसे उड़ेल दिया। और अपने आराध्य भगवान श्री राम के सामने पहुंच गए।* *जब भगवान श्रीराम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान को इस स्थिति में देखा तो यह आश्चर्य में पड़ गए। और उन्होंने हनुमान से इसका कारण पूछा,तो हनुमान जी ने भगवान श्रीराम से कहा कि प्रभु मैंने आपकी प्रसन्नता के लिए ऐसा किया है। सिंदूर लगाने के कारण ही आप माता सीता से बहुत प्रसन्न रहते हैं। अब आप भी मुझ पर उतना ही प्रसन्न रहिएगा। भगवान श्रीराम को अपने भोले भाले भक्त हनुमान जी की युक्ति पर बहुत हंसी आई। और भगवान श्री राम के हृदय में अपने भक्त हनुमान जी जगह और गहरी हो गई। हमारे धर्म और पुराण बतलाते हैं, की उसी दिन से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाया जाता है।* *महिलाओं को हनुमान जी की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?*......*हमारे धर्म और पुराण के अनुसार हनुमान जी सदा ब्रह्मचारी रहे थे। कुछ शास्त्रों में हनुमान जी की शादी होने का वर्णन भी मिलता है। लेकिन हनुमान जी ने यह शादी वैवाहिक सुख प्राप्त करने की इच्छा से नहीं की थी। बल्कि उन चार प्रमुख विद्याओं की प्राप्ति हेतु किया था। जिन विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था। *इस कथा के अनुसार हनुमान जी ने अपना गुरु सूर्य देवता को बनाया था। सूर्य देवता ने अपने शिष्य हनुमान जी को 5 विद्या सिखा दी। लेकिन बाकी बची 4 विद्याओं का ज्ञान सिखाने से पहले सूर्य देवता ने अपने शिष्य हनुमान जी को शादी कर लेने के लिए कहा। क्योंकि इन 4 विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था। हनुमान जी अपने गुरु सूर्य देवता की आज्ञा मानकर विवाह करने के लिए तैयार हो गए। तब समस्या उत्पन्न हुई की हनुमान जी से विवाह के लिए किस कन्या का चयन किया जाए।* *तब सूर्य देव ने अपनी परम तेजस्वी पुत्री सुवर्चला से अपने शिष्य हनुमान जी को शादी करने के लिए कहा। हनुमान जी तैयार हो गए हनुमान जी और सुवर्चला की शादी हो गई। सूर्य देवता की बेटी और हनुमान जी की पत्नी देवी सुवर्चला परम तपस्वी थी। विवाह होने के बाद ही सुवर्चला तपस्या में मग्न हो गई। और उधर हनुमान जी अपने गुरु सूर्य देवता से अपनी बाकी बची 4 विद्याओं का ज्ञान को हासिल करने में लग गए। इस प्रकार श्री हनुमान जी विवाहित होने के बाद भी उनका ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।* *पुराणों के अनुसार श्री हनुमान जी ने प्रत्येक स्त्री को मां के समान दर्जा दिया है। यही कारण है कि किसी भी स्त्री को श्री हनुमानजी अपने सामने प्रणाम करते हुए नहीं देख सकते। बल्कि वह खुद स्त्री शक्ति को नमन करते हैं। यदि महिलाएं चाहे तो हनुमान जी की सेवा में दीपक अर्पित कर सकती हैं। हनुमान जी की स्तुति कर सकती हैं। हनुमान जी को प्रसाद अर्पित कर सकती हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार श्री हनुमानजी के 16 उपचार जिनमें मुख्य है:- स्नान,वस्त्र,चोला चढ़ाना आते हैं यह सब सेवाएं किसी महिला के द्वारा किया जाना श्री हनुमान जी स्वीकार नहीं करते। इसीलिए महिलाओं को हनुमानजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। *कैसे बाल मारुती का नाम हनुमान रख दिया गया?*.....*श्री हनुमान जी की माता अंजनी और केसरी के पुत्र थे। कथा के अनुसार, अंजनी और केसरी को विवाह के बहुत समय बाद तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी। तब दोनों पति-पत्नी ने मिलकर पवन देव की तपस्या की थी। पवन देव जी के आशीर्वाद से श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी बचपन से ही बहुत अधिक ताकतवर नटखट और विशाल शरीर वाले थे। हनुमान जी के बचपन का नाम मारुती Maruti था। एक बार Maruti ने सूर्य देवता को फल समझकर उन्हें खाने के लिए सूर्यदेव के आगे बढ़े,और उनके पास पहुंचकर सूर्यदेव को निगलने के लिए अपना मुंह बड़ा कर लिया। इंद्रदेव ने Maruti को ऐसा करते देखा तो इंद्रदेव ने Maruti पर अपने बज्र से प्रहार कर दिया। इंद्र देव का बज्र Maruti की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगी। इंद्र देव का बज्र नन्हे Maruti को लगते ही Maruti बेहोश हो गए। यह देख उनके पालक पिता पवनदेव को बहुत ही गुस्सा आ गया। पवन देव अपने पुत्र Maruti की हालत देखकर इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने सारे संसार में पवन का बहना रोक दिया। प्राण वायु के बिना सारे पृथ्वी लोक के वासी त्राहि-त्राहि करने लगे। यह सब देख कर इंद्रदेव ने पवनदेव को तुरंत मनाया। और Maruti को पहले जैसा कर दिया।  सभी देवताओं ने नन्हे Maruti को बहुत सारी शक्तियां प्रदान की। सूर्य देव के तेज अंश प्रदान करने के कारण ही श्री हनुमान जी का बुद्धि संपन्न हुआ। इंद्रदेव का बज्र Maruti के हनु पर लगा था जिसके कारण ही नन्हे Maruti का नाम हनुमान हुआ।*

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simran Dec 10, 2019

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