Anita Sharma
Anita Sharma Oct 21, 2019

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Anita Sharma Dec 13, 2019

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amarjit pandey Dec 13, 2019

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Anita Sharma Dec 12, 2019

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Nitin Kharbanda Dec 13, 2019

श्री राम चरित मानस में प्रभु की नाम वंदना का एक सुन्दर प्रसंग है – “सुमिरि पवन सुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू॥” (‘श्री हनुमान्‌जी ने पवित्र नाम का स्मरण करके श्री रामजी को अपने वश में कर रखा है।’) हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के उपरान्त प्रभु श्रीराम जी से कहते हैं कि हे प्रभु! आज मेरा ये भ्रम टूट गया कि मै ही सबसे बड़ा भक्त, राम नाम का जप करने वाला हूँ। भगवान बोले वह कैसे ? हनुमान जी बोले – वास्तव में तो भरत जी संत है और उन्होंने ही राम नाम जपा है। आपको पता है जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी तो मै संजीवनी लेने गया पर जब मुझे भरत जी ने बाण मारा और मै गिरा, तो भरत जी ने, न तो संजीवनी मंगाई, न वैद्य बुलाया। कितना भरोसा है उन्हें आपके नाम पर, आपको पता है उन्होंने क्या किया। “जौ मोरे मन बच अरू काया। प्रीति राम पद कमल अमाया॥ तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौ मो पर रघुपति अनुकूला॥ सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा॥” यदि मन वचन और शरीर से श्री राम जी के चरण कमलों में मेरा निष्कपट प्रेम हो तो यदि रघुनाथ जी मुझ पर प्रसन्न हो तो यह वानर थकावट और पीड़ा से रहित हो जाए। यह वचन सुनते ही मै श्री राम, जय राम, जय-जय राम कहता हुआ उठ बैठा। मै नाम तो लेता हूँ पर भरोसा भरत जी जैसा नहीं किया, वरना मै संजीवनी लेने क्यों जाता। (बस ऐसा ही हम सब करते है हम नाम तो भगवान का लेते है पर भरोसा नही करते, बुढ़ापे में बेटा ही सेवा करेगा, बेटे ने नहीं की तो क्या होगा? उस समय हम भूल जाते है कि जिस भगवान का नाम हम जप रहे हैं वे हैं न, पर हम भरोसा नहीं करते। बेटा सेवा करे न करे पर भरोसा हम उसी पर करते है।) हनुमान जी कहते हैं – दूसरी बात प्रभु! बाण लगते ही मैं गिरा, पर्वत नहीं गिरा, क्योंकि पर्वत तो आप उठाये हुए थे और मैं अभिमान कर रहा था कि मैं उठाये हुए हूँ। मेरा दूसरा अभिमान भी टूट गया। (इसी तरह हम भी यही सोच लेते है कि गृहस्थी के बोझ को मै उठाये हुए हूँ।) फिर हनुमान जी कहते है – और एक बात प्रभु ! आपके तरकस में भी ऐसा बाण नहीं है जैसे बाण भरत जी के पास है। आपने सुबाहु मारीच को बाण से बहुत दूर गिरा दिया, आपका बाण तो आपसे दूर गिरा देता है, पर भरत जी का बाण तो आपके चरणों में ला देता है। मुझे बाण पर बैठाकर आपके पास भेज दिया। भगवान बोले – हनुमान जब मैंने ताडका को मारा और भी राक्षसों को मारा तो वे सब मरकर मुक्त होकर मेरे ही पास तो आये, इस पर हनुमान जी बोले प्रभु आपका बाण तो मरने के बाद सबको आपके पास लाता है पर भरत जी का बाण तो जिन्दा ही भगवान के पास ले आता है। भरत जी संत है और संत का बाण क्या है? संत का बाण है उसकी वाणी। लेकिन हम करते क्या हैं, हम संत वाणी को समझते तो हैं पर सेवन नहीं करते हैं, और औषधि सेवन करने पर ही फायदा करती है। हनुमान जी को भरत जी ने पर्वत सहित अपने बाण पर बैठाया तो उस समय हनुमान जी को थोडा अभिमान हो गया कि मेरे बोझ से बाण कैसे चलेगा ? परन्तु जब उन्होंने रामचंद्र जी के प्रभाव पर विचार किया तो वे भरत जी के चरणों की वंदना करके चल देते हैं। इसी तरह हम भी कभी-कभी संतों पर संदेह करते हैं कि ये हमें कैसे भगवान तक पहुँचा देंगे? संत ही तो हैं जो हमें सोते से जगाते है जैसे हनुमान जी को जगाया, क्योंकि उनका मन, वचन, कर्म सब भगवान में लगा है। आप उन पर भरोसा तो करो, तुम्हें तुम्हारे बोझ सहित भगवान के चरणों तक पहुँचा देंगे। 🌸सादर हरि ॐ🌸 🌻जयश्रीराम🌻 🌷जयश्रीमहाकाल🌷

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K K Pandit Dec 13, 2019

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