Ashish Pratihast
Ashish Pratihast Sep 7, 2017

🙏🙏 !! श्री राधे !! 🙏🙏 *ऐसे करें भगवान के दर्शन*

🙏🏾🙏🏾 !! श्री राधे !! 🙏🏾🙏🏾

👉🏿 *ऐसे करें भगवान के दर्शन*

मनु और शतरूपा की संतानों की कथा आती है। जब मनु और शतरूपा ने भगवान के पहली बार दर्शन किए तो भगवान के दर्शन को लेकर मनु और शतरूपा ने जो भाव प्रकट किया वो हमें अपने भीतर भी रखना चाहिए :-

*छबि समुद्र हरि रूप बिलोकी, एकटक रहे नयन पट रोकी। चितवहीं सादर रूप अनूपा, तृप्ति न मानही मनु-शतरूपा।छबि समुद्र हरि रूप बिलोकी*

अर्थात भगवान के रूप को देखकर ऐसा लगे कि ये छवि का समुद्र है, सौंदर्य का सागर है । पहला भाव ये होना चाहिए।

*एकटक रहे नयन पट रोकी*

अर्थात एकटक हो जाइए, अचंभित हो जाइए जैसे बहुत समय बाद हमारा परिचित मिले तो हम उसको देखकर चौंक जाते हैं, ऐसे ही भगवान को देखकर एकदम अचंभित होने का भाव लाइए।

*नयनपट रोकी,*

पलकों को झुकाना बंद कर दीजिए। पलक तो दुनिया के सामने झुकाई जाती है भगवान को देखें तो एकटक देखते रहें।
नैनो को रोक दीजिए आंख खुली रखकर देखते जाइए-देखते जाइए।

*चितवहीं सादर रूप अनूपा,*

चौथी बात प्रतिमा को देखें तो सादर, आदर का भाव रखें। मूर्ति के प्रति सम्मान का भाव रखें, गरिमा से खड़े रहें।

*चितवहीं सादर रूप अनूपा,*

एक शब्द आया अनूपा, भगवान के रूप को देखें तो प्रतिपल अनूप लगना चाहिए, नया-नया लगना चाहिए।

छठी सबसे महत्वपूर्ण बात :

*तृप्ति न मानहीं मनु-शतरूपा।*

दर्शन करने के बाद मनु-शतरूपा को तृप्ति नहीं हुई। अतृप्त भाव बना रहे। भगवान के दर्शन करने के बाद तृप्ति का भाव न बना रहे।

इन छह तरीकों से भगवान के दर्शन करने चाहियेंं ।

*जय श्री राधे श्याम*
🌺. 🍁. 🌺

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कामेंट्स

Ashok Misra Sep 7, 2017
bhut sunder kathan Hai iswer ko AISE he dekhungaaa

भारतीय आयुर्वेद और योग विज्ञान पर विश्वास करने वालों के लिए - कोरोना वायरस से बचाव के लिए Respiratory system को मजबूत करना आवश्यक है। उसके उपाय- 1. भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित रूप से करें। 2. Lungs की strengh को जानने के लिए गहरी श्वास ले कर कुम्भक लगाएं अर्थात रोके और कितने seconds रोक सकते हैं check करें। यदि 35 से 45 seconds रोक सकते हैं तो यह फेफड़ों की मजबूत स्थिति बताता है। लेकिन यदि यह कम है तो कोरोना वायरस के attack से बचने के लिए निम्न उपाय करें- 1. प्राणायाम दिन में दो बार करें खाली पेट या भोजन के 3 - 4 घंटे बाद। 2. गहरी सांस ले कर रोके अपनी क्षमता के अनुसार और श्वास निकलने के बाद भी इसी प्रकार रोकें। 3. गर्म पानी में हल्दी और फिटकरी डाल कर दिन में कई बार गरारे /gargle करें। 4. प्रत्येक एक डेढ़ घंटे के बाद चाहे थोड़ा सा ही लें गर्म पानी पी लें। 5. पानी को उबाल लें और उबलने के बाद उसमें नीलगिरी तेल/ eucalyptus oil की कुछ बूंदे डाल कर स्टीम लें। स्थिति के अनुसार यह एक से चार समय तक लें सकते हैं। 6. घर मे दोनो समय थोड़ी सी लकड़ी/ गाय के गोबर के उपले को गाय के घी से जला कर उस पर थोड़ा सा गुड़ या शक्कर डाले, कुछ दाने किशमिश के, दो तीन लोंग डालें। जब यह पूरा जल जाय और कुछ अँगारे रहें तो उस पर कपूर तथा गुग्गल के कुछ टुकड़े डाल कर उसके धुएं/ खुशबू को पूरे घर में फैल जाने दें। 7. भोजन हल्का लें और फलों की तथा पानी की मात्रा बढ़ा दें। 8. एकांतवास जरूरी है बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। 9. पानी मे गिलोय, तुलसी, अदरख का छोटा टुकड़ा , एक दो लोंग, एक दो काली मिर्च, कुछ नीम के पत्ते डाल कर काढ़ा बनाये और सुबह शाम लें। 10. दिन में कई बार दोनों नासिकाओं/ nostrils में सरसों का तेल लगाएं। घर से बाहर जाते समय जरूर लगाएं। 11. Mobile फ़ोन का प्रयोग कम करें। 12. ताली बजाने या शंख ध्वनि को व्यर्थ न समझे। करने पर लाभ ही होगा। सामान्य लोग भी कुछ समय तक, जब तक वायरस के संक्रमण का खतरा टलता नही है, ऊपर दिए उपायों को करें चाहे कम मात्रा में तो लाभकारी होगा। क्योंकि कोरोना वायरस का attack हो जाने के बाद चार पांच दिन तक तो पता भी नही चलता। हां, कुछ लोग सरकार के नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। यह स्वभावगत है। शायद अपने शरीर की मजबूती को बताना चाह रहे

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Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

श्रीरामचरित मानस  Serial No 437 (अयोध्याकाण्ड)    2/234/1  चौपाई / छंद / दोहा - मोरें सरन रामहि की पनही । राम सुस्वामि दोसु सब जनही ॥ व्यक्त भाव एवं प्रेरणा - श्री भरतलालजी श्री चित्रकूटजी में प्रभु श्री रामजी से मिलने के पूर्व विचार करने लगे कि क्या प्रभु उनके मिलने पर उन्हें त्याग देंगे या सेवक मानकर उन्हें अपना लेंगे । श्री भरतलालजी सोचने लगे कि प्रभु श्री रामजी तो अच्छे से भी अच्छे स्वामी है पर दोष तो उनके दास श्री भरतलालजी का ही है । फिर जो श्री भरतलालजी ने सोचा वह अद्भुत है । श्री भरतलालजी अपने मन में विचार करते हैं कि वे प्रभु श्री रामजी के श्री कमलचरणों की शरण के लायक तो शायद नहीं हैं पर प्रभु श्री रामजी के श्री कमलचरणों की पादुका की ही शरण उन्हें मिल जाये तो भी उनका कल्याण हो जायेगा । www.devotionalthoughts.in

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Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

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Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

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Chandrashekhar Karwa Mar 27, 2020

*भक्ति हमें जो प्रभु को प्रिय लगता है वह करने के लिए प्रेरित करती है । प्रभु के लिए नियम पालन करना भक्ति हमें सिखाती है । मन को सही मार्ग पर ले जाने का एक ही उपाय है, भक्ति, केवल भक्ति और केवल भक्ति ।* *कभी भी, कितने भी जन्म के बाद भी आखिर मिलना तो प्रभु से ही होगा क्योंकि वे ही हमारे मूल स्वरूप हैं । इसलिए बुद्धिमानी यही है कि इस मानव जन्म में ही ऐसा प्रयास किया जाये । यह सिद्धांत है कि सजातीय तत्व ही मिलता है । हम चेतन तत्व हैं और प्रभु चेतन हैं इसलिए हमारा मिलना प्रभु से ही हो सकता है । संसार जड़ है इसलिए हम कितना भी संसार से चिपके पर संसार से हम कभी भी मिल नहीं पायेंगे ।* प्रभु से जोड़ने वाले इस तरह के रोजाना सुबह व्हाट्सएप पर एक मैसेज पाने के लिए 9462308471 पर SHREE HARI लिखकर व्हाट्सएप करें www.bhaktivichar.in GOD GOD & only GOD जो प्रभु के चिंतन से दिन की शुरुआत करना चाहते हैं उन्हें यह फॉरवर्ड करें और ऐसे ग्रुपों में शेयर करें

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Chandrashekhar Karwa Mar 26, 2020

श्रीरामचरित मानस Serial No 435 (अयोध्याकाण्ड)   2/231/दोहा  चौपाई / छंद / दोहा - भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ ॥ कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ ॥ व्यक्त भाव एवं प्रेरणा - जब श्री लक्ष्मणजी ने यह कहा कि राज्य का मद सबसे कठिन मद है तो प्रभु श्री रामजी ने श्री भरतलालजी के बचाव में जो कहा वह ध्यान देने योग्य है । प्रभु ने कहा कि श्री अयोध्याजी के राज्य की बात ही क्या है अगर श्री त्रिदेवजी श्री भरतलालजी को त्रिलोकी का राज्या भी दे देवें तो भी उन्हें राज्य मद नहीं हो सकता । प्रभु ने उपमा देते हुये कहा कि क्या खटाई की कुछ बूंदों से क्षीरसागर फट सकता है । जैसे यह कतई संभव नहीं वैसे ही श्री भरतलालजी को राज्य मद हो यह कतई संभव नहीं है । www.devotionalthoughts.in

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Chandrashekhar Karwa Mar 26, 2020

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