Poonam Aggarwai
Poonam Aggarwai Oct 18, 2020

💐💐💐 जय ब्रह्मचारिणी मां जय माता दी 💐💐💐 💐💐 शुभ द्वितीय नवरात्रि शुभ दिवस 💐💐 💐💐💐🐾🐾👣👣🐾🐾💐💐

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कामेंट्स

मेरे साईं (Indian woman) Oct 18, 2020
🐅चलो बुलावा आया है,माता ने बुलाया है 🎊 👣वैष्णोदेवी के मंदिर में लोग मुरादे पाते है🎊 😭रोते र्रोते आते है और हँसते हँसते जाते है😃 🥀ये तो माँ का ही प्यार है सबको गले लगाती है 💗 ⚜️ खुशकिस्मत है हम जिन पर माँ मेहर बरसाती है 🙌 ✍️प्रेम और मन से पुकारो🌹 "जय माता दी "🌹🤲🤲

GOVIND CHOUHAN Oct 18, 2020
JAI MATA RANI 🌹 JAI MAA SHERO VAALI 🌹 JAI MAA BRAHMACHARINI MATA 🌹 SUBH PRABHT VANDAN PRNAM JII DIDI 🙏 🙏 🌷 🌷 👏 👏

Ravi Kumar Taneja Oct 18, 2020
🌹🕉️🌹🕉️🌹नवरात्रि के पावन पर्व की बहुत-बहुत बधाई। 🌹🕉️🌹🕉️🌹जगत जननी मां जगदंबा आप के जीवन में सुख🌷शांति 🌼और समृद्धि 💐का संचार करें।🌸🌸🌸 🙏🐾🙏 जय माता दी! 🙏🐾🙏

prem chand shami Oct 18, 2020
जय माता दी 🙏🙏 शुभ प्रभात मंगलमय की शुभकामनायें प्रणाम बहन जी 💐🙏

Radha Sharma Oct 18, 2020
Jai mata di.. 🙏Good morning dear sister ji and Happy Navratri ji 🙏

madan pal Singh 🙏🏼 Oct 18, 2020
jai mata di shubh parbhat jiii Mata Rani ki karpa sadev AAP v aapka pariwar par bani rahe jiii 🌷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🕉️🌹

Brajesh Sharma Oct 18, 2020
प्रेम से बोलो "जय माता दी"

rAj Oct 18, 2020
जय अम्बे

Mita Vadiwala Oct 18, 2020
🙏जय माता दी जय माँ ब्रह्मचारिणी 🌹आप और आपके परिवार को शारदीय नवरात्रि के द्वितीय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं | सुख, शांति, समृद्धि,संपत्ति एवं धन धान्य से माँ ब्रह्मचारिणी सभी भक्त जनों का भंडार भरे | शुभ प्रभात वंदन जी आप सभी का दिन शुभ एवं मंगलमय हो | 🌷 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा || 🌷🙏

Vinod Agrawal Oct 18, 2020
🙏🌹जय माता दी जय माँ ब्रह्मचारिणी माता 🌹🙏

Ranveer Soni Oct 18, 2020
🌹🌹जय माता रानी🌹🌹

ಗಿರಿಜಾ ನೂಯಿ Oct 18, 2020
🙏🙏 Good Night, Sweet Dreams Ji🌹🌹 🕉️🕉️🕉️Om Shri Mata Brahmacharini Namo Namah🙏🙏🙏 Super Video Song Ji 👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍 🙏🐯🔱🙏 Navaratri Ki Hardik Shubhakamnayein Ji🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 Have a happy sleep,Mata Di ji bless you & your family always be happy, healthy & wealthy dear sister ji🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌸🌸🌸🌸💐💐💐💐🏵️🏵️🏵️🏵️✴️🌟✴️🌜✴️🌟✴️🌜✴️🌟✴️🌜✴️🌟✴️🌜✴️

🙏ANJALI 😊MISHRA🙏 Oct 18, 2020
🙏जय माता दी🌺🙏 🙏हैप्पी नवरात्रि 🔱💐 🙏नवरात्रि के द्वितीय दिवस की आपको एवं आपके समस्त परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं बहना 🙏माँं दुर्गा आपको बल, बुद्धि, सुख, ऐश्वर्या और संपन्नता प्रदान करें🙌 भगवान सूर्य देव आपको सदा स्वस्थ रखें आपका हर दिन शुभ और मंगलमय हो👌👌शुभ रात्रि वंदन मेरे आदरणीय प्यारी बहना जी 🙏जय माता दी🚩🌺🙏

Neha Sharma, Haryana Oct 22, 2020
जय माता की 🌸🙏🌸 शुभ रात्रि नमन 🌸🙏माता रानी की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी। आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहनाजी🙏🌸

simran Oct 25, 2020

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Neha Sharma, Haryana Oct 25, 2020

*रावण और कुबेर दोनों भाई थे तो फिर रावण असुर (राक्षस) और कुबेर सुर(देव) क्यों कहलाए? *पौराणिक संदर्भों के अनुसार पुलत्स्य ऋषि ब्रह्मा के दस मानसपुत्रों में से एक माने जाते हैं। इनकी गिनती सप्तऋषियों और प्रजापतियों में की जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने पुलत्स्य ऋषि को पुराणों का ज्ञान मनुष्यों में प्रसारित करने का आदेश दिया था। पुलत्स्य के पुत्र विश्रवा ऋषि हुए, जो हविर्भू के गर्भ से उत्पन्न हुए थे। विश्रवा ऋषि की एक पत्नी इलबिड़ा से कुबेर और कैकसी के गर्भ से रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा पैदा हुए थे। सुमाली विश्रवा के श्वसुर व रावण के नाना थे। विश्रवा की एक पत्नी माया भी थी, जिससे खर, दूषण और त्रिशिरा पैदा हुए थे और जिनका उल्लेख तुलसी की रामचरितमानस में मिलता है। *दो पौराणिक संदर्भ रावण की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए जरूरी हैं। एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के दर्शन हेतु सनक, सनंदन आदि ऋषि बैकुंठ पधारे परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया। ऋषिगण अप्रसन्न हो गए और क्रोध में आकर जय-विजय को शाप दे दिया कि तुम राक्षस हो जाओ। जय-विजय ने प्रार्थना की व अपराध के लिए क्षमा माँगी। भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से क्षमा करने को कहा। तब ऋषियों ने अपने शाप की तीव्रता कम की और कहा कि तीन जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना पड़ेगा और उसके बाद तुम पुनः इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे। इसके साथ एक और शर्त थी कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा। *यह शाप राक्षसराज, लंकापति, दशानन रावण के जन्म की आदि गाथा है। भगवान विष्णु के ये द्वारपाल पहले जन्म में हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु राक्षसों के रूप में जन्मे। हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था और उसने पृथ्वी को उठाकर पाताललोक में पहुँचा दिया था। पृथ्वी की पवित्रता बहाल करने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा था। फिर विष्णु ने हिरण्याक्ष का वधकर पृथ्वी को मुक्त कराया था। हिरण्यकशिपु भी ताकतवर राक्षस था और उसने वरदान प्राप्तकर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया था। *भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करनेकी वजह से हिरण्यकशिपु विष्णु विरोधी था और अपने विष्णुभक्त पुत्र प्रह्लाद को मरवाने के लिए भी उसने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फिर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया था। खंभे से नृसिंह भगवान का प्रकट होना ईश्वर की शाश्वत, सर्वव्यापी उपस्थिति का ही प्रमाण है। *त्रेतायुग में ये दोनों भाई रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए और तीसरे जन्म में द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, तब ये दोनों शिशुपाल व दंतवक्त्र नाम के अनाचारी के रूप में पैदा हुए थे। इन दोनों का ही वध भगवान श्रीकृष्ण के हाथों हुआ। त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों से सर्वत्र त्राहि-त्राहि मची हुई थी। रावण का अत्यंत विकराल स्वरूप था और वह स्वभाव से क्रूर था। उसने सिद्धियों की प्राप्ति हेतु अनेक वर्षों तक तप किया और यहाँ तक कि उसने अपने सिर अग्नि में भेंट कर दिए। ब्रह्मा ने प्रसन्ना होकर रावण को वर दिया कि दैत्य, दानव, यक्ष, कोई भी तुम्हें परास्त नहीं कर सकेगा, परंतु इसमें 'नर' और 'वानर' को शुमार नहीं किया गया था। इसलिए नर रूप में भगवान श्रीराम ने जन्म लिया, जिन्होंने वानरों की सहायता से लंका पर आक्रमण किया और रावण तथा उसके कुल का विनाश हुआ। प्रकांड पंडित एवं ज्ञाता होने के नाते रावण संभवतः यह जानता था कि श्रीराम के रूप में भगवान विष्णु का अवतार हुआ है। छल से वैदेही का हरण करने के बावजूद उसने सीता को महल की अपेक्षा अशोक वाटिका में रखा था क्योंकि एक अप्सरा रंभा का शाप उसे हमेशा याद रहता था कि 'रावण, यदि कभी तुमने बलात्कार करने का प्रयास भी किया तो तुम्हारा सिर कट जाएगा।' खर, दूषण और त्रिशिरा की मृत्यु के बाद रावण को पूर्ण रूप से अवगत हो गया था कि वे 'मेरे जैसे बलशाली पुरुष थे, जिन्हें भगवान के अतिरिक्त और कोई नहीं मार सकता था। 'रावण एक विचारक व दार्शनिक पुरुष था। वह आश्वस्त था कि यदि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान हैं तो उनके हाथों मरकर उनके लोक में जाना उत्तम है और यदि वे मानव हैं तो उन्हें परास्त कर सांसारिक यश प्राप्त करना भी उचित है। अंततः रावण का परास्त होना इस बात काशाश्वत प्रमाण है कि बुराइयों के कितने ही सिर हों, कितने ही रूप हों, सत्य की सदैव विजय होती है। विजयादशमी को सत्य की असत्य पर विजय के रूप में देखा जाता है। कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में नवरात्रि का व्रत करने के बाद ही रावण का वध किया था। पुलत्स्य ऋषि के उत्कृष्ट कुल में जन्म लेने के बावजूद रावण का पराभव और अधोगति के अनेक कारणों में मुख्य रूप से दैविक एवं मायिक कारणों का उल्लेख किया जाता है। दैविक एवं प्रारब्ध से संबंधित कारणों में उन शापों की चर्चा की जाती है जिनकी वजह से उन्हें राक्षस योनि में पैदा होना पड़ा। मायिक स्तर पर शक्तियों के दुरुपयोग ने उनके तपस्या से अर्जित ज्ञान को नष्ट कर दिया था। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद अशुद्ध, राक्षसी आचरण ने उन्हें पूरी तरह सराबोर कर दिया था और हनुमानजी को अपने समक्ष पाकर भी रावण उन्हें पहचाननहीं सका था कि ये उसके आराध्य देव शिव के अवतार हैं। रावण के अहंकारी स्वरूप से यह शिक्षा मिलती है कि शक्तियों के नशे में चूर होने से विनाश का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्त के लिए विनयशील, अहंकाररहित होना प्राथमिक आवश्यकता है *स्रोत:- पुराणों से* ******************* *इँसान के लिए दो ही चीजें अहम हैं।* *ईश्वर का डर* *और* *ईश्वर का दर* *ईश्वर का डर रहेगा तो इँसान गुनाहों से बचता रहेगा।* *ईश्वर का दर रहेगा तो उसकी रहमतें बरसती रहेंगी ।* 🌸🙏आप सभी भाई-बहनों को सपरिवार दशहरा के पावन पर्व की हार्दिक *शुभकामनाएँ 🙏🌸 🚩*अधर्म पर धर्म की विजय*🚩 🚩*असत्य पर सत्य की विजय*🚩 🚩*बुराई पर अच्छाई की विजय*🚩 🚩*पाप पर पुण्य की विजय*🚩 🚩*अत्याचार पर सदाचार की विजय*🚩 🚩*क्रोध पर दया, क्षमा की विजय*🚩 🚩*अज्ञान पर ज्ञान की विजय*🚩 🌸🙏रावण पर श्रीराम की विजय के प्रतीक पावन पर्व *विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायेँ🙏🌸

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Ravi Mishra Oct 25, 2020

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Ravi Mishra Oct 25, 2020

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saroj singh Baghel Oct 25, 2020

🚩❤️🚩 हैप्पी मां नव दुर्गा 🙏माता विसर्जन🚩❤️🚩 🙏👣नवरात्र नो दिन माई दसम दिन 🎧💛 🎧💛 🎧💛🎧💛🎧💛 बिदाई विसर्जन मां चली:::::;;;🚩 🙋‍♀️ 🌷🌷जय माता दी शुभ संध्या🌷🌷 🙏 विशेष स्पेशल पोस्ट 🙏 💝 💛 💝 हैप्पी शारदीय नवरात्रि नौवां दिवस 🥀 आप और आपके परिवार को नवरात्रि की महानवमीऔर💚❤️💚 दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं💚❤️💚❤️💚❤️🙋‍♀️आप औरआपके पूरे परिवार पर🎿👣🎿👣🎿👣🎿👣🎿माता जी का आशीर्वाद सदा सदा बना रहे जी!!👣🎈💝25 अक्टूबर 2020 महीने के चौथे रविवार की शुभ संध्या की ढेर सारी शुभकामनाएं आप सभी भक्तों पर बनी रहे जी,आप सभी के जीवन में ✍️💲✍️💲✍️💲✍️✍️ सदा खुशियां ही खुशियां हों ग़मों का साया ✍️✍️ कोसों दूर रहे इसी मनोकामना 🎣👣🎣 👣🎣 👣🎣👣⛳👣 के साथ शुभ रविवार शुभ संध्या वंदन जी 🙋‍♀️🌹📿👬💏👬 दोस्ती यारी सदा🙋‍♀️बनी रहे जी 📿🌹🏆🔔💛🔔💛 🔔💛🔔💛 🔔💛🔔 💛🔔 🏆

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Neha Sharma, Haryana Oct 25, 2020

*जय माता की*🌸🙏🌸*शुभ प्रभात् नमन* *नवरात्री के नवें दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना विधि..... 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप...... 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *नवरात्र-पूजन के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए। सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। नवरात्र के नौवें दिन जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की जाती है। तथा नवरात्रों का की नौ रात्रियों का समापन होता है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री हैं, इन रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का होता है। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है, देवी की चार भुजाएं हैं दायीं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है, मां बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। प्रसन्न होने पर माँ सिद्धिदात्री सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। माँ की सिद्धियां 〰️〰️〰️〰️〰️ मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। वे सिद्धिदात्री, सिंह वाहिनी, चतुर्भुजा तथा प्रसन्नवदना हैं। मार्कंडेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व- ये आठ सिद्धियां बतलाई गई हैं। इन सभी सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री मां हैं। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, तमस, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, क‌र्त्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है। हमारी तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके हमारी अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी जी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिव जी का स्वरूप अ‌र्द्धनारीश्वर का हो गया था। इसके अलावा ब्रह्ववैवर्त पुराण में अनेक सिद्धियों का वर्णन है जैसे 1. सर्वकामावसायिता 2. सर्वज्ञत्व 3. दूरश्रवण 4. परकायप्रवेशन 5. वाक्‌सिद्धि 6. कल्पवृक्षत्व 7. सृष्टि 8. संहारकरणसामर्थ्य 9. अमरत्व 10 सर्वन्यायकत्व। कुल मिलाकर 18 प्रकार की सिद्धियों का हमारे शास्त्रों में वर्णन मिलता है। यह देवी इन सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं। इनकी पूजा से भक्तों को ये सिद्धियां प्राप्त होती हैं। माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं। उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा कर लेनी चाहिए। हवन करते वक्त सभी देवी दवताओं के नाम से हवि यानी अहुति देनी चाहिए. बाद में माता के नाम से अहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत:सप्तशती के सभी श्लोक के साथ आहुति दी जा सकती है। देवी के बीज मंत्र “ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:” से कम से कम 108 बार अहुति दें। माँ सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥ स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्। शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥ पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्। कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो। स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता। नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥ परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता। विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी। भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी। मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥ माँ सिद्धिदात्री कवच 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ओंकारपातु शीर्षो मां ऐं बीजं मां हृदयो। हीं बीजं सदापातु नभो, गुहो च पादयो॥ ललाट कर्णो श्रीं बीजपातु क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो। कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनो॥ माँ सिद्धिदात्री जी की आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जै सिद्धि दात्री मां तूं है सिद्धि की दाता| तूं भक्तों की रक्षक तूं दासों की माता|| तेरा नाम लेटे ही मिलती है सिद्धि| तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि|| कठिन काम सिद्ध करती हो तुम| जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम|| तेरी पूजा में तो न कोई विधि है| तूं जगदम्बे दाती तूं सर्व सिद्धि है|| रविवार को तेरा सुमिरन करे जो| तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो|| तूं सब काज उसके करती हो पूरे| कभी काम उसके रहे न अधूरे|| तुम्हारी दया और तुम्हारी है माया| रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया|| सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्य शाली| जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली|| हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा| महा नन्दा मंदिर में है वास तेरा|| मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता| चमन है सवाली तूं जिसकी दाता|| माँ दुर्गा की आरती 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *नवरात्र का नोवां दिन, माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा *माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। *देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है। वह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

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simran Oct 24, 2020

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