Monu Raikwar orai U.P.
Monu Raikwar orai U.P. Mar 11, 2018

charitra ka nirmad kaise kare

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🚩 *श्री गणेशाय नम:🚩* *🕉🌷गीताज्ञान🌷🕉* *तद्विद्धि प्रणिपातेन* *परिप्रश्नेन सेवया ।* *उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं* *ज्ञानिनस्तत्वदर्शिनः ॥ (३४)* *✍भावार्थ : यज्ञों के उस ज्ञान को तू गुरू के पास जाकर समझने का प्रयत्न कर, उनके प्रति पूर्ण-रूप से शरणागत होकर सेवा करके विनीत-भाव से जिज्ञासा करने पर वे तत्वदर्शी ब्रह्म-ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्व-ज्ञान का उपदेश करेंगे। (३४)* 📜 *दैनिक पंचांग* 📜 ☀ *28 - Mar - 2020* ☀ *पंचांग-श्रीमाधोपुर* 🌷 तिथि चतुर्थी 24:19:31 🌷 नक्षत्र भरणी 12:52:52 🌷 करण : वणिज 11:19:10 विष्टि 24:19:31 🌷 पक्ष शुक्ल 🌷 योग विश्कुम्भ 17:53:08 🌷 वार शनिवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🌷 सूर्योदय 06:22:16 🌷 चन्द्रोदय 08:43:00 🌷 चन्द्र राशि मेष - 19:31:08 तक 🌷 सूर्यास्त 18:43:17 🌷 चन्द्रास्त 22:11:00 🌷 ऋतु वसंत ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🌷 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🌷 कलि सम्वत 5121 🌷 दिन काल 12:21:01 🌷 विक्रम सम्वत 2077 🌷 मास अमांत चैत्र 🌷 मास पूर्णिमांत चैत्र ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🥗 अभिजित 12:08:04 - 12:57:29 ☀ अशुभ समय 🥗 दुष्टमुहूर्त : 06:22:16 - 07:11:40 07:11:40 - 08:01:04 🥗 कंटक 12:08:04 - 12:57:29 🥗 यमघण्ट 15:25:41 - 16:15:05 🥗 राहु काल 09:27:31 - 11:00:09 🥗 कुलिक 07:11:40 - 08:01:04 🥗 कालवेला या अर्द्धयाम 13:46:53 - 14:36:17 🥗 यमगण्ड 14:05:24 - 15:38:02 🥗 गुलिक काल 06:22:16 - 07:54:53 ☀ दिशा शूल 🥗 दिशा शूल पूर्व ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🥗 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद ☀ चन्द्रबल 🥗 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ 📜 *चौघडिया-मुहूर्त* 📜 🌷काल06:22:16 -07:54:53 🌷शुभ 07:54:53 -09:27:31 🌷रोग 09:27:31- 11:00:09 🌷उद्वेग11:00:09-12:32:46 🌷चल 12:32:46 -14:05:24 🌷लाभ14:05:24- 15:38:02 🌷अमृत15:38:02-17:10:40 🌷काल17:10:40 -18:43:18 🌷लाभ18:43:17 -20:10:31 🌷उद्वेग20:10:31-21:37:45 🌷शुभ 21:37:45 -23:04:59 🌷अमृत23:04:59-24:32:13 🌷चल 24:32:13 -25:59:27 🌷रोग 25:59:27 -27:26:41 🌷काल27:26:41 -28:53:55 🌷लाभ28:53:55 -30:21:08 *🕰🌷लग्न-तालिका🌷🕰* सूर्योदय का समय: 06:22:16 सूर्योदय के समय लग्न मीन द्विस्वाभाव 342°36′23″ 🥗 *मीन द्विस्वाभाव* शुरू: 05:46 AM समाप्त: 07:12 AM 🥗 *मेष चर* शुरू: 07:12 AM समाप्त: 08:49 AM 🥗 *वृषभ स्थिर* शुरू: 08:49 AM समाप्त: 10:45 AM 🥗 *मिथुन द्विस्वाभाव* शुरू: 10:45 AM समाप्त: 01:00 PM 🥗 *कर्क चर* शुरू: 01:00 PM समाप्त: 03:20 PM 🥗 *सिंह स्थिर* शुरू: 03:20 PM समाप्त: 05:36 PM 🥗 *कन्या द्विस्वाभाव* शुरू: 05:36 PM समाप्त: 07:52 PM 🥗 *तुला चर* शुरू: 07:52 PM समाप्त: 10:10 PM 🥗 *वृश्चिक स्थिर* शुरू: 10:10 PM समाप्त: अगले दिन 00:29 AM 🥗 *धनु द्विस्वाभाव* शुरू: अगले दिन 00:29 AM समाप्त: अगले दिन 02:33 AM 🥗 *मकर चर* शुरू: अगले दिन 02:33 AM समाप्त: अगले दिन 04:17 AM 🥗 *कुम्भ स्थिर* शुरू: अगले दिन 04:17 AM समाप्त: अगले दिन 05:46 AM 2⃣8⃣🚦0⃣3⃣🚦2⃣0⃣ *🕉🙏जयश्रीराम🙏🕉* *सुरेन्द्र चेजारा व्याख्याता* *ज्योतिषशास्त्री श्रीमाधोपुर* 🌹🥗🌹🥗🌹🥗🌹🥗

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भारतीय आयुर्वेद और योग विज्ञान पर विश्वास करने वालों के लिए - कोरोना वायरस से बचाव के लिए Respiratory system को मजबूत करना आवश्यक है। उसके उपाय- 1. भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित रूप से करें। 2. Lungs की strengh को जानने के लिए गहरी श्वास ले कर कुम्भक लगाएं अर्थात रोके और कितने seconds रोक सकते हैं check करें। यदि 35 से 45 seconds रोक सकते हैं तो यह फेफड़ों की मजबूत स्थिति बताता है। लेकिन यदि यह कम है तो कोरोना वायरस के attack से बचने के लिए निम्न उपाय करें- 1. प्राणायाम दिन में दो बार करें खाली पेट या भोजन के 3 - 4 घंटे बाद। 2. गहरी सांस ले कर रोके अपनी क्षमता के अनुसार और श्वास निकलने के बाद भी इसी प्रकार रोकें। 3. गर्म पानी में हल्दी और फिटकरी डाल कर दिन में कई बार गरारे /gargle करें। 4. प्रत्येक एक डेढ़ घंटे के बाद चाहे थोड़ा सा ही लें गर्म पानी पी लें। 5. पानी को उबाल लें और उबलने के बाद उसमें नीलगिरी तेल/ eucalyptus oil की कुछ बूंदे डाल कर स्टीम लें। स्थिति के अनुसार यह एक से चार समय तक लें सकते हैं। 6. घर मे दोनो समय थोड़ी सी लकड़ी/ गाय के गोबर के उपले को गाय के घी से जला कर उस पर थोड़ा सा गुड़ या शक्कर डाले, कुछ दाने किशमिश के, दो तीन लोंग डालें। जब यह पूरा जल जाय और कुछ अँगारे रहें तो उस पर कपूर तथा गुग्गल के कुछ टुकड़े डाल कर उसके धुएं/ खुशबू को पूरे घर में फैल जाने दें। 7. भोजन हल्का लें और फलों की तथा पानी की मात्रा बढ़ा दें। 8. एकांतवास जरूरी है बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। 9. पानी मे गिलोय, तुलसी, अदरख का छोटा टुकड़ा , एक दो लोंग, एक दो काली मिर्च, कुछ नीम के पत्ते डाल कर काढ़ा बनाये और सुबह शाम लें। 10. दिन में कई बार दोनों नासिकाओं/ nostrils में सरसों का तेल लगाएं। घर से बाहर जाते समय जरूर लगाएं। 11. Mobile फ़ोन का प्रयोग कम करें। 12. ताली बजाने या शंख ध्वनि को व्यर्थ न समझे। करने पर लाभ ही होगा। सामान्य लोग भी कुछ समय तक, जब तक वायरस के संक्रमण का खतरा टलता नही है, ऊपर दिए उपायों को करें चाहे कम मात्रा में तो लाभकारी होगा। क्योंकि कोरोना वायरस का attack हो जाने के बाद चार पांच दिन तक तो पता भी नही चलता। हां, कुछ लोग सरकार के नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। यह स्वभावगत है। शायद अपने शरीर की मजबूती को बताना चाह रहे

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Rudra sharma Mar 27, 2020

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🚩 *श्री गणेशाय नम:🚩* 🚨 *26 - Mar - 2020* *🕉🍋गीताज्ञान🍋🕉* *एवं बहुविधा यज्ञा* *वितता ब्रह्मणो मुखे ।* *कर्मजान्विद्धि तान्सर्वान्* *एवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ॥* *✍भावार्थ : इसी प्रकार और भी अनेकों प्रकार के यज्ञ वेदों की वाणी में विस्तार से कहे गए हैं, इस तरह उन सबको कर्म से उत्पन्न होने वाले जानकर तू कर्म-बंधन से हमेशा के लिये मुक्त हो जाएगा। (३२)* 🥫 *दैनिक पंचांग* 🥫 🚨 *26 - Mar - 2020* 🛑 *पंचांग-श्रीमाधोपुर* 🥗 तिथि द्वितीया 19:55:17 🥗 नक्षत्र रेवती 07:17:10 🥗 करण : बालव 06:42:34 कौलव 19:55:17 🥗 पक्ष शुक्ल 🥗 योग एन्द्र 16:28:17 🥗 वार गुरूवार 🌹 *सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ* 🥗 सूर्योदय 06:24:29 🥗 चन्द्रोदय 07:37:59 🥗चन्द्रराशि मीन-07:17:10 तक 🥗 सूर्यास्त 18:42:17 🥗 चन्द्रास्त 20:25:00 🥗 ऋतु वसंत 🌹 *हिन्दू मास एवं वर्ष* 🥗 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🥗 कलि सम्वत 5121 🥗 दिन काल 12:17:47 🥗 विक्रम सम्वत 2077 🥗 मास अमांत चैत्र 🥗 मास पूर्णिमांत चैत्र 🌹 *शुभ और अशुभ समय* 🌹 *शुभ समय* 🥗 अभिजित 12:08:47 - 12:57:59 🟡 *अशुभ समय* 🥗 दुष्टमुहूर्त : 10:30:25 - 11:19:36 15:25:32 - 16:14:43 🥗 कंटक 15:25:32 - 16:14:43 🥗 यमघण्ट 07:13:41 - 08:02:52 🥗 राहु काल 14:05:36 - 15:37:50 🥗 कुलिक 10:30:25 - 11:19:36 🥗 कालवेला या अर्द्धयाम 17:03:54 - 17:53:05 🥗 यमगण्ड 06:24:29 - 07:56:43 🥗 गुलिक काल 09:28:56 - 11:01:10 🌹 *दिशा शूल* 🥗 दिशा शूल दक्षिण 🌹 *चन्द्रबल और ताराबल* 🌹 *ताराबल* 🥗 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती 🌹 *चन्द्रबल* 🥗 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन 📜 *चौघडिया-मुहूर्त* 📜 🥗शुभ 06:24:29 -07:56:43 🥗रोग07:56:43 - 09:28:56 🥗उद्वेग09:28:56-11:01:10 🥗चल11:01:10- 12:33:23 🥗लाभ12:33:23- 14:05:36 🥗अमृत14:05:36-15:37:50 🥗काल 15:37:50-17:10:03 🥗शुभ17:10:03 - 18:42:16 🥗अमृत18:42:17-20:09:55 🥗चल 20:09:55- 21:37:33 🥗रोग 21:37:33- 23:05:11 🥗काल 23:05:11-24:32:50 🥗लाभ24:32:50- 26:00:28 🥗उद्वेग26:00:28-27:28:06 🥗शुभ 27:28:06- 28:55:44 🥗अमृत28:55:44-30:23:23 *🕰🌻लग्न-तालिका🌻🕰* 🥗सूर्योदय का समय: 06:24:29 🥗सूर्योदय के समय लग्न मीन द्विस्वाभाव 340°37′27″ 🥗 *मीन द्विस्वाभाव* शुरू: 05:54 AM समाप्त: 07:20 AM 🥗 *मेष चर* शुरू: 07:20 AM समाप्त: 08:57 AM 🥗 *वृषभ स्थिर* शुरू: 08:57 AM समाप्त: 10:53 AM 🥗 *मिथुन द्विस्वाभाव* शुरू: 10:53 AM समाप्त: 01:08 PM 🥗 *कर्क चर* शुरू: 01:08 PM समाप्त: 03:28 PM 🥗 *सिंह स्थिर* शुरू: 03:28 PM समाप्त: 05:44 PM 🥗 *कन्या द्विस्वाभाव* शुरू: 05:44 PM समाप्त: 08:00 PM 🥗 *तुला चर* शुरू: 08:00 PM समाप्त: 10:18 PM 🥗 *वृश्चिक स्थिर* शुरू: 10:18 PM समाप्त: अगले दिन 00:37 AM 🥗 *धनु द्विस्वाभाव* शुरू: अगले दिन 00:37 AM समाप्त: अगले दिन 02:41 AM 🥗 *मकर चर* शुरू: अगले दिन 02:41 AM समाप्त: अगले दिन 04:25 AM 🥗 *कुम्भ स्थिर* शुरू: अगले दिन 04:25 AM समाप्त: अगले दिन 05:54 AM 2⃣6⃣🚦0⃣3⃣🚦2⃣0⃣ *🍋🙏जयश्रीराम🙏🍋* *सुरेन्द्र चेजारा व्याख्याता* *ज्योतिषशास्त्री श्रीमाधोपुर* 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥

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🌹🌹जय हो मां भवानी🚩🚩 नवार्ण मंत्र' दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नौ शक्तियां जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ 'नौ' तथा अर्ण का अर्थ 'अक्षर' होता है। अतः नवार्ण नौ अक्षरों वाला वह मंत्र है । नवार्ण मंत्र- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ।' नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ' ऐं ' है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्रि' को की जाती है। दूसरा अक्षर ' ह्रीं ' है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है। तीसरा अक्षर ' क्लीं ' है, जो मंगल ग्रह को नियंत्रित करता है।इसका संबंध दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा से है, जिसकी पूजा तीसरे नवरात्रि को होती है। चौथा अक्षर 'चा' है जो बुध को नियंत्रित करता है। इनकी देवी कुष्माण्डा है जिनकी पूजा चौथे नवरात्री को होती है। पांचवां अक्षर 'मुं' है जो गुरु ग्रह को नियंत्रित करता है। इनकी देवी स्कंदमाता है पांचवे नवरात्रि को इनकी पूजा की जाती है। छठा अक्षर 'डा' है जो शुक्र ग्रह को नियंत्रित करता है। छठे नवरात्री को माँ कात्यायिनी की पूजा की जाती है। सातवां अक्षर 'यै' है जो शनि ग्रह को नियंत्रित करता है। इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। आठवां अक्षर 'वि' है जो राहू को नियंत्रित करता है । नवरात्री के इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। नौवा अक्षर 'च्चै ' है। जो केतु ग्रह को नियंत्रित करता है। नवरात्री के इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है,, जय माता दी अज्ञात

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Swami Lokeshanand Mar 27, 2020

गजब बात है, भगवान गर्भ में आए, भीतर उतर आए तो ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों पुष्ट हो गए। दशरथजी के चेहरे पर तो तेज आ ही गया, बाहर भी सब ओर मंगल ही मंगल छा गया, अमंगल रहा ही नहीं। देखो, जड़ को पानी देने से फूल पत्ते अपने आप छा जाते हैं, जलपात्र में नमक डाल दें तो सब जलकणों में नमक आ जाता है, यों भगवान को मना लें तो सब अनुकूल हो जाते हैं। वर्ना भीतर पढ़ाई न हो तो लाख चश्मा बदलो, पढ़ा कैसे जाए? विवेकानन्द जी कहते थे, ये दुनिया कुत्ते की दुम है, संत पकड़े रहे तो सीधी रहे, छोड़ते ही फिर टेढ़ी। ध्यान दो, दुनिया बार बार बनती है, बार बार मिटती है, पर ठीक नहीं होती, दुनिया बदलते बदलते कितने दुनिया से चले गए, दुनिया है कि आज तक नहीं बदली। जिन्हें भ्रम हो कि दुनिया आज ही बिगड़ी है, पहले तो ठीक थी, वे विचार करें कि हिरण्याक्ष कब हुआ? हिरण्यकशिपु, तारकासुर, त्रिपुरासुर, भस्मासुर कब हुए? देवासुर संग्राम कब हुआ? दुनिया तो ऐसी थी, ऐसी है, और रहेगी भी ऐसी ही। आप इसे बदलने के चक्कर में पड़ो ही मत, आप इसे यूं बदल नहीं पाओगे। आप स्वयं बदल जाओ, तो सब बदल जाए। जो स्वयं काँटों में उलझा है, जबतक उसके स्वयं के फूल न खिल जाएँ, वह क्या खाक किसी दूसरे के जीवन में सुगंध भरेगा? हाँ, उसे छील भले ही दे। जबतक भगवान आपके भीतर न उतर आएँ, अपना साधन करते चलो, दूसरे पर ध्यान मत दो। आप दूसरे को ठीक नहीं कर सकते, दूसरा आपको भले ही बिगाड़ डाले। लाख समस्याओं का एक ही हल है, भगवान को भीतर उतार लाओ। अब विडियो देखें- मंगल भवन अमंगल हारी https://youtu.be/_BF-H0AmPK4

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