Raghvendra Joshi
Raghvendra Joshi Sep 27, 2017

देवी श्रृंगार दर्शन

देवी श्रृंगार दर्शन
देवी श्रृंगार दर्शन
देवी श्रृंगार दर्शन
देवी श्रृंगार दर्शन

ॐ श्री परमात्मने नमः
🌹आज के मङ्गलमय दर्शन🌹 🚩सप्तमं कालरात्रि 🚩 🚩माता महाकाली (अष्टधातु)🚩
🙏🏻आज का श्रृंगार,हरितवर्ण (हरे वस्त्रों) में🙏🏻
🌹"जय हो माँ"🌹
🚩हम गरीब भी इतने हैं,कि हमारी एक साँस भी अपनी नहीं है-----
🚩किंतु अमीर भी इतने हैं, कि तीनों लोकों की "स्वामिनी" भी हमारी हैं----

🙏 माता महाकाली सभी की मनोकामना पूर्ण करती हैं🙏

स्थान:- ठाकुरजी का द्वारा ठाकुरद्वारा "मंदिर श्रीरघुनाथजी महाराज" मौहल्ला दिनदारपुरा महानगर मुरादाबाद उत्तर प्रदेश 244001 भारत

गुरूकृपा हि केवलं,गुरूकृपा हि केवलं
गुरूकृपा हि केवलं,गुरूकृपा हि केवलं

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🚩🌞"जय श्रीराम"🌙🚩

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Jai Mata Di May 14, 2021

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Rajeev Thapar May 14, 2021

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Anju Mishra May 14, 2021

🙏जय माता दी🙏 अक्षय तृतीया विशेष 🥀'न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।  न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।'🌷 🌞अर्थ--वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है। 🥀श्री परशुराम का एक प्रसंग 🥀 👉परशुराम दशावतारों में हैं। क्या उन्हें इतना भी आभास नहीं होगा कि यह धनुष किसने तोड़ा? क्या वह साधारण पुरुष हैं? श्री राम द्वारा धनुष तोड़ने के बाद समस्त राजाओं की दुरभिसंधि हुई कि श्री राम ने धनुष तो तोड़ लिया है, लेकिन इन्हें सीता स्वयंवर से रोकना होगा। वे अतः अपनी-अपनी सेनाओं की टुकड़ियों के साथ धनुष यज्ञ में आए समस्त राजा एकजुट होकर श्री राम से युद्ध के लिए कमर कस कर तैयार हो गए। धनुष यज्ञ गृह युद्ध में बदलने वाला था, ऐसी विकट स्थिति में वहां अपना फरसा लहराते हुए परशुराम जी प्रकट हो गए। वे राजा जनक से पूछते हैं कि तुरंत बताओ कि यह शिव धनुष किसने तोड़ा है, अन्यथा जितने राजा यहां बैठे हैं.... मैं क्रमशः उन्हें अपने परशु की भेंट चढ़ाता हूं। तब श्री राम विनम्र भाव से कहते हैं- हे नाथ शंकर के धनुष को तोड़ने वाला कोई आपका ही दास होगा। परशुराम-राम संवाद के बीच में ही लक्ष्मण उत्तेजित हो उठे, विकट लीला प्रारंभ हो गई। संवाद चलते रहे लीला आगे बढ़ती रही परशुराम जी ने श्री राम से कहा अच्छा मेरे विष्णु धनुष में तीर चढ़ाओ... तीर चढ़ गया, परशुराम जी ने प्रणाम किया और कहा मेरा कार्य अब पूरा हुआ, आगे का कार्य करने के लिए श्री राम आप आ गए हैं। गृह युद्ध टल गया। जय श्री राम

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