naman sharma
naman sharma Jul 19, 2017

naman sharma ने यह पोस्ट की।

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jaya Rathor Apr 2, 2020

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PRABHAT KUMAR Apr 2, 2020

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#जय_माता_दी* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_जय_माता_दी* 🙏 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है। इस दौरान नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। नवदुर्गा के सिद्धि और मोक्ष देने वाले स्वरूप को सिद्धिदात्री कहते हैं। माना जाता है कि माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को समस्त प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। इतना ही नहीं, माँ सिद्धिदात्री शोक, रोग एवं भय से मुक्ति भी देती हैं। सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मनुष्य ही नहीं, देव, गंदर्भ, असुर, ऋषि आदि सभी इनकी पूजा करते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव भी इनके आराधक हैं। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 आज चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि है, यह तिथि महानवमी के नाम से प्रसिद्ध है। महानवमी के दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि विधान से की जाती है। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति को कार्य सिद्धि प्राप्ति होती है, साथ ही शोक, रोग एवं भय से भी मुक्ति मिलती है। देव, गंदर्भ, असुर, ऋषि आदि भी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए माँ सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। देवों के देव महादेव भी इनकी पूजा करते हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री के साथ भगवान राम की भी पूजा की जाती है। आइए जानते हैं महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त एवं महत्व के बारे में— 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️ *#माँ_सिद्धिदात्री_पूजा_मुहूर्त* 🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी चैत्र नवरात्रि की महानवमी का प्रारंभ 02 अप्रैल दिन वृहस्पतिवार को प्रात:काल 03 बजकर 40 मिनट पर हो रहा है। महानवमी का समापन 03 अप्रैज दिन शुक्रवार को तड़के 02 बजकर 43 मिनट पर होगा। ऐसे में आपको महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा ब्रह्म मुहूर्त में कर लेना चाहिए। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ ।। *#प्रार्थना*।। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#स्तुति* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️ । *#माँ_सिद्धिदात्री_बीज_मंत्र* । 🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#मंत्र* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 ओम देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। अमल कमल संस्था तद्रज:पुंजवर्णा, कर कमल धृतेषट् भीत युग्मामबुजा च मणिमुकुट विचित्र अलंकृत कल्प जाले; भवतु भुवन माता संत्ततम सिद्धिदात्री नमो नम:। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#ध्यान* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 वन्दे वांछितमनरोरार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्। कमलस्थिताचतुर्भुजासिद्धि यशस्वनीम्॥ स्वर्णावर्णानिर्वाणचक्रस्थितानवम् दुर्गा त्रिनेत्राम। शंख, चक्र, गदा पदमधरा सिद्धिदात्रीभजेम्॥ पटाम्बरपरिधानांसुहास्यानानालंकारभूषिताम्। मंजीर, हार केयूर, किंकिणिरत्नकुण्डलमण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदनापल्लवाधराकांत कपोलापीनपयोधराम्। कमनीयांलावण्यांक्षीणकटिंनिम्ननाभिंनितम्बनीम्॥ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#स्तोत्र* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 कंचनाभा शंखचक्रगदामधरामुकुटोज्वलां। स्मेरमुखीशिवपत्नीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥ पटाम्बरपरिधानांनानालंकारभूषितां। नलिनस्थितांपलिनाक्षींसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥ परमानंदमयीदेवि परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति,परमभक्तिसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥ विश्वकतींविश्वभर्तीविश्वहतींविश्वप्रीता। विश्वद्दचताविश्वतीतासिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥ भुक्तिमुक्तिकारणीभक्तकष्टनिवारिणी। भवसागर तारिणी सिद्धिदात्रीनमोअस्तुते।। धर्माथकामप्रदायिनीमहामोह विनाशिनी। मोक्षदायिनीसिद्धिदात्रीसिद्धिदात्रीनमोअस्तुते॥ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ ।। *#कवच* ।। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 ओंकाररू पातुशीर्षोमां, ऐं बीजंमां हृदयो। हीं बीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥ ललाट कर्णोश्रींबीजंपातुक्लींबीजंमां नेत्र घ्राणो। कपोल चिबुकोहसौरूपातुजगत्प्रसूत्यैमां सर्व वदनो॥ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️ । *#सिद्धि_के_प्रकार* । 🕉️🕉️🕉️🕉️ पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से सिध्दियों को प्राप्त किया था व इन्हें के द्वारा भगवान शिव को अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त हुआ। अणिमा, महिमा,गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियाँ हैं, जिनका मार्कण्डेय पुराण में उल्लेख किया गया है। इसके अलावा ब्रह्ववैवर्त पुराण में अनेक सिद्धियों का वर्णन है, जैसे 1. सर्वकामावसायिता 2. सर्वज्ञत्व 3. दूरश्रवण 4. परकायप्रवेशन 5. वाक् सिद्धि 6. कल्पवृक्षत्व 7. सृष्टि 8. संहारकरणसामर्थ्य 9. अमरत्व 10 सर्वन्यायकत्व। कुल मिलाकर 18 प्रकार की सिद्धियों का हमारे शास्त्रों में वर्णन मिलता है। यह देवी इन सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं। इनकी पूजा से भक्तों को ये सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️ *#सिद्धिदात्री_की_स्तोत्र_पाठ* 🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो। स्मेरमुखी शिवपत्नी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता। नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥ परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति, परमभक्ति, सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता। विश्व वार्चिता विश्वातीता सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी। भव सागर तारिणी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी। मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️ । *#जीवन_पर_प्रभाव*। 🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 सिद्धार्थ प्राप्त पंच महाभूत में विलीन नवम दुर्गा केतु स्वरूपा सिद्धिदात्री शाश्वत जीवन में ये स्वरुप उस देह त्याग कर चुकी उस आत्मा का है जिसने जीवन में सर्व सिद्धि प्राप्त करके स्वयं को परमेश्वर में विलीन कर लिया है। *#उपाय : मोक्ष कि प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री पर केले का भोग लगाएं।* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️ । *#कौन_हैं_माँ_सिद्धिदात्री* । 🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 कमल के फूल पर विराजमान और सिंह की सवारी करने वाली मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं में गदा, चक्र, कमल का फूल और शंख धारण करती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माण्ड के आरंभ में सर्वशक्तिमान देवी आदि पराशक्ति भगवान शिव के शरीर के बाएं भाग पर सिद्धिदात्री स्वरूप में प्रकट हुई थीं। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️ *#माँ_सिद्धदात्री_की_पूजा_का_महत्व* 🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की होने वाली पूजा से व्यक्ति को समस्त प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं। माँ सिद्धिदात्री को प्रसन्न करके आप अपने समस्त शोक, रोग एवं भय से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है कि देवों के देव महादेव जब तारक मन्त्र देते हैं तो माँ सिद्धिदात्री मन्त्र धारण करने वाले व्यक्ति को मोक्ष प्रदान करती हैं। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️ *#महानवमी_की_पूजा_विधि* 🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 आज महानवमी के दिन प्रात:काल में स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके पश्चात माँ सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा करें, जिसमें उनको पुष्प, अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, फल आदि समर्पित करें। आज के दिन माँ सिद्धिदात्री को तिल का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपके जीवन में आने वाली अनहोनी से अपका बचाव होगा। माँ सिद्धदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं, इनकी पूजा ब्रह्म मुहूर्त में करना उत्तम होता है। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#कन्या_पूजा* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 माँ सिद्धिदात्री की आरती के पश्चात महानवमी को भी लोग कन्या पूजन करते हैं। कन्याओं को माँ दुर्गा का साक्षात् स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन के लिए आप कन्याओं को अपने यहाँ निमंत्रित करें। उनके आगमन पर उनका चरण धोकर स्वागत करें और उनको श्रद्धा पूर्वक आसन पर बैठाएंं। अब उनका अक्षत्, पुष्प आदि से पूजन करें और आरती उतारें। इसके पश्चात उनको घर पर बने पकवान भोजन के लिए परोसें। भोजन हो जाने के बाद उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें तथा दान-दक्षिणा देकर उनको खुशी-खुशी विदा करें। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#हवन_सामग्री* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 दुर्गा नवमी के दिन सबसे पहले तो माँ सिद्धिदात्री की विधि विधान के साथ पूजा कर लें। उसके बाद हवन इत्यादि कर पूजा संपन्न करें। हवन सामग्री में इन चीजों का होना जरूरी है। एक सूखा नारियल या गोला, कलावा या लाल रंग का कपड़ा और एक हवन कुंड। इसके अतिरिक्त आम की लकड़ी, तना और पत्ता, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, मुलैठी की जड़, पीपल का तना और छाल, बेल, नीम, पलाश, गूलर की छाल, कर्पूर, तिल, चावल, लौंग, गाय का घी, गुग्गल, लोभान, इलायची, शक्कर और जौ। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#हवन_विधि* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 महा नवमी के दिन माता की पूजा अर्चना के बाद हवन की तैयारी करें। हवन कुंड को पूजा स्थल पर ही किसी साफ स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद हवन सामग्री को किसी बड़े पात्र में ठीक से मिला लें। अब आम की सूखी लकड़ी को कपूर की सहायता से जला लें। अग्नि प्रज्जवलित करने के बाद इन मंत्रों के साथ घर के सदस्य बारी बारी से आहुति देना शुरू करें। ओम गणेशाय नम: स्वाहा ओम गौरियाय नम: स्वाहा ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा ओम दुर्गाय नम: स्वाहा ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा ओम हनुमते नम: स्वाहा ओम भैरवाय नम: स्वाहा ओम कुल देवताय नम: स्वाहा ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा ओम विष्णुवे नम: स्वाहा ओम शिवाय नम: स्वाहा ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमस्तुति स्वाहा। ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा। ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते। इसके बाद नारियल में कलावा या फिर लाल कपड़ा बांध लें। उस पर पूरी, खीर, पान, सुपारी, लौंग, बतासा आदि स्थापित करके उसे हवन कुंड के बीचोबीच रख दें। इसके बाद बचे हुए हवन सामग्री को समेट पर पूर्ण आहुति मंत्र का उच्चारण करें- ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा। और उनको हवन कुंड में डाल दें। अंत में माँ दुर्गा की आरती उतारें। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🕉️🕉️।। *#माता_सिद्धिदात्री_की_आरती* ।। 🕉️🕉️ 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता, तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम हाथ सेवक के सर धरती हो तुम, तेरी पूजा में न कोई विधि है तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है रविवार को तेरा सुमरिन करे जो तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो, तू सब काज उसके कराती हो पूरे कभी काम उस के रहे न अधूरे तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया, सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा महानंदा मंदिर में है वास तेरा, मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता वंदना है सवाली तू जिसकी दाता। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *#नोट : उक्त जानकारी Google के माध्यम से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰

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Ravi Chouhan Keer Apr 2, 2020

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pramod kumar Apr 2, 2020

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hemang Apr 2, 2020

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hemang Apr 2, 2020

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deepu Apr 2, 2020

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