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Balram Kaswan
Balram Kaswan Jul 11, 2019

Jai Mata Di

Jai Mata Di

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sumitra Jul 19, 2019

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जय माँ महालक्ष्मी नमो नमः सभी भक्तों और भाई-बहनों को सुप्रभात का सादर प्रणाम माता रानी आपकी मनोकामना को पूर्ण करे आप सभी को सुख समृद्धि धन वैभव मान सम्मान से परिपूर्ण करे आपका जीवन खुशियों से परिपूर्ण करे। 🔯🗼🔯🗼🔯🗼🔯🗼🔯🗼🙏🌷   माता लक्ष्मी का ये रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान... अंजू जोशी पुराणों में माता लक्ष्मी की उत्पत्ति के बारे में विरोधाभास पाया जाता है। एक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान निकले रत्नों के साथ हुई थी, लेकिन दूसरी कथा के अनुसार वे भृगु ऋषि की बेटी हैं। दरअसल, पुराणों की कथा में छुपे रहस्य को जानना थोड़ा मुश्किल होता है, इसे समझना जरूरी है। आपको शायद पता ही होगा कि शिवपुराण के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के माता-पिता का नाम सदाशिव और दुर्गा बताया गया है। उसी तरह तीनों देवियों के भी माता-पिता रहे हैं। समुद्र मंथन से जिस लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी, दरअसल वह स्वर्ण के पाए जाने के ही संकेत रहा हो।   *जन्म समय : शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। कार्तिकेय का जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को उनकी पूजा की जाती है।   *नाम : देवी लक्ष्मी। *नाम का अर्थ : 'लक्ष्मी' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है- एक 'लक्ष्य' तथा दूसरा 'मी' अर्थात लक्ष्य तक ले जाने वाली देवी लक्ष्मी। अन्य नाम : श्रीदेवी, कमला, धन्या, हरिवल्लभी, विष्णुप्रिया, दीपा, दीप्ता, पद्मप्रिया, पद्मसुन्दरी, पद्मावती, पद्मनाभप्रिया, पद्मिनी, चन्द्र सहोदरी, पुष्टि, वसुंधरा आदि नाम प्रमुख हैं।   *माता-पिता : ख्याति और भृगु। *भाई : धाता और विधाता *बहन : अलक्ष्मी *पति : भगवान विष्णु। *पुत्र : 18 पुत्रों में से प्रमुख 4 पुत्रों के नाम हैं- आनंद, कर्दम, श्रीद, चिक्लीत।   *निवास : क्षीरसागर में भगवान विष्णु के साथ कमल पर वास करती हैं। *पर्व : दिवाली। *दिन : ज्योतिषशास्त्र एवं धर्मग्रंथों में शुक्रवार की देवी मां लक्ष्मी को माना गया है।   *वाहन : उल्लू और हाथी। एक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू है और धन की देवी महालक्ष्मी का वाहन हाथी है। कुछ के अनुसार उल्लू उनकी बहन अलक्ष्मी का प्रतीक है, जो सदा उनके साथ रहती है।

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Amar Jeet Mishra Jul 19, 2019

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"मंत्र- दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। फायदे- - इस मंत्र के उच्चारण से समस्त पापों का नाश होता है।   - इस मंत्र को बोलने से शत्रुओं का नाश होता है। - इस मंत्र के जाप से आरोग्य यानी अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। - घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। - इस मंत्र के उच्चारण से धन-संपत्ति में भी वृद्धि होती है। - इस मंत्र के उच्चारण से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है। जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी जय श्री महाकाल जी जय श्री महाकाली माता की जय श्री गणेश जी 🙏 शुभ संध्या वंदन 🚩 👏 👣 🌄 🚩 👏 👣 नमस्कार 🙏 जय श्री लक्ष्मी नारायण ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमोऽस्तु

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