Krishna Singh
Krishna Singh Dec 7, 2017

एक मंदिर ऐसा भी है जहां पर पैरालायसिस ( लकवे )का इलाज होता है।

एक मंदिर ऐसा भी है जहां पर पैरालायसिस ( लकवे )का इलाज होता है।

पैरालायसिस(लकवे ) के रोग से मुक्त होकर जाते है यह धाम नागोर जिले के कुचेरा क़स्बे के पास है, अजमेर- नागोर रोड पर यह गावं है ! लगभग ५०० साल पहले एक संत होए थे चतुरदास जी वो सिद्ध योगी थे, वो अपनी तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे ! आज भी इनकी समाधी पर सात फेरी लगाने से लकवा जड़ से ख़त्म हो जाता है ! नागोर जिले के अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त होकर जाते है हर साल वैसाख, भादवा और माघ महीने मे पूरे महीने मेला लगता है !
सन्त चतुरदास जी महाराज के मन्दिर ग्राम बुटाटी में लकवे का इलाज करवाने देश भर से मरीज आते हैं| मन्दिर में नि:शुल्क रहने व खाने की व्यवस्था भी है| लोगों का मानना है कि मंदिर में परिक्रमा लगाने से बीमारी से राहत मिलती है|

राजस्थान की धरती के इतिहास में चमत्कारी के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं| आस्था रखने वाले के लिए आज भी अनेक चमत्कार के उदाहरण मिलते हैं, जिसके सामने विज्ञान भी नतमस्तक है| ऐसा ही उदाहरण नागौर के 40 किलोमीटर दूर स्तिथ ग्राम बुटाटी में देखने को मिलता है। लोगों का मानना है कि जहाँ चतुरदास जी महाराज के मंदिर में लकवे से पीड़ित मरीज का राहत मिलती है।

वर्षों पूर्व हुई बिमारी का भी काफी हद तक इलाज होता है। यहाँ कोई पण्डित महाराज या हकीम नहीं होता ना ही कोई दवाई लगाकर इलाज किया जाता। यहाँ मरीज के परिजन नियमित लगातार 7 मन्दिर की परिक्रमा लगवाते हैं| हवन कुण्ड की भभूति लगाते हैं और बीमारी धीरे-धीरे अपना प्रभाव कम कर देती है| शरीर के अंग जो हिलते डुलते नहीं हैं वह धीरे-धीरे काम करने लगते हैं। लकवे से पीड़ित जिस व्यक्ति की आवाज बन्द हो जाती वह भी धीरे-धीरे बोलने लगता है।

यहाँ अनेक मरीज मिले जो डॉक्टरो से इलाज करवाने के बाद निरास हो गए थे लेकिन उन मरीजों को यहाँ काफी हद तक बीमारी में राहत मिली है। देश के विभिन्न प्रान्तों से मरीज यहाँ आते हैं और यहाँ रहने व परिक्रमा देने के बाद लकवे की बीमारी आश्चर्यजनक राहत मिलती है। मरीजों और उसके परिजनों के रहने व खाने की नि:शुल्क व्यवस्था होती है।

दान में आने वाला रुपया मन्दिर के विकास में लगाया जाता है। पूजा करने वाले पुजारी को ट्रस्ट द्वारा तनखाह मिलती है। मंदिर के आस-पास फेले परिसर में सैकड़ों मरीज दिखाई देते हैं, जिनके चेहरे पर आस्था की करुणा जलकती है| संत चतुरदास जी महारज की कृपा का मुक्त कण्ठ प्रशंसा करते दिखाई देते।

Pranam Agarbatti Water +192 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 279 शेयर

कामेंट्स

Ajnabi Dec 7, 2017
कृष्णा जी यह बुटाटी घाम है यहाँ पर देश के हर जिलो से लोग आते है ओर फायदा होता है यह धाम हमारे इघर ही है और रोगी ओर उसके परिवार वालों को सारी ब्यवस्थाऐ मिलती है रहना,खाना फ्री यहां मरीज 7दिन कम से कम रहना होता है maya mahadev ki

dr.S Dec 7, 2017
भईया आप राजस्थान से हो क्या

dr.S Dec 7, 2017
@veeruda विक्की भाईया आप भी राजस्थान है। क्या

Ajnabi Dec 7, 2017
@pg जी हा मेरे से यह घाम 100km दूरी पर है कभी काम पडे तो याद करना

dr.S Dec 7, 2017
@veeruda mere qt bro aisa kam kisi ko n ho bhgwan kre mgr aap njadik rhte h to mujhe kisi ke bare m puchna tha so mgr 100 km, ab itni duri pe koun sa sahar padta h mne to ye b malum nahi ok gud night

Ajnabi Dec 8, 2017
good morning Someya ji sorry me kal aap ko jawab nahi de Paya kal Mere nat problema tha me ajmer k pahle kishangarh marble nagri ka rhanwala hu

Yogesh Kumar Sharma Dec 8, 2017
आप और आपके परिवार पर सदैव माता रानी की कृपा दृष्टि बनी रहे,जय माता की

Ajnabi Dec 8, 2017
good morning krishna g jay shree Radhe krishna veeruda

भारत ही केवल एक ऐसा देश है जिसकी संस्कृति की जड़े बहुत प्राचीन है। इससे जुड़े किस्से व कहानिया जगह-जगह पर बने मंदिरो में देखने को मिलते है। हिमालय के पहाड़ी इलाकों से लद्दाख के पहाड़ों तक, तमिलनाडु के गांवों से लेकर महाराष्ट्र की गुफाओं तक, यहाँ तक ...

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Narender Kumar Rosa Dec 15, 2018

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हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार महापापी मृतआत्मा को सिर्फ श्रीमद्भागवत कथा से मुक्ति मिलती है
जीनके घर में हर वक्त भय और मृत आत्माओं का वास होता है उस घर में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा करवाने से मृतआत्माओं को मुक्ति मिलती है

....जय श्री कृष्ण.......

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"शिव गायत्री मंत्र- ।। ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात ।।

शिव नमस्कार मंत्र

पूजा से पूर्व इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें: “नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शन्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ...

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Narayan Tiwari Dec 16, 2018

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श्री शिव जी के सिर पर चन्द्र कैंसे पहुंचे-:--:- शि‌व पुराण के अनुसार चन्द्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। यह कन्‍याएं 27 नक्षत्र हैं। इनमें चन्द्रमा रोहिणी से विशेष स्नेह करते थे। इसकी शिकायत जब...

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Kamal Kumar Varshney Dec 16, 2018

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