anju mishra
anju mishra Feb 18, 2019

🔥🍃🔥ऊँ नमः शिवाय हर हर महादेव🔥🍃🔥 🌿🌿🌿🍁🍁🍁🌿🌿🌿 🔥🔥ऊँ नमः शिवाय चरणं शरणं ममह🔥🔥 (भगवान शिव का अनुपम सौंदर्य) "एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा, पिताश्री ! आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में। पिताजी आप एक बार कृपा करके अच्छे से स्नान करके माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें। भगवान शिवजी ने गणेशजी की बात मान ली। कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं, बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी। सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते ही रहे। वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाय। भगवान शिव ने अपना रूप कभी देखा ही नहीं न कभी उसे प्रकट किया। शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन किये दे रहा था। गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले - मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए। भगवान शिव ने पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - क्षमा पिताश्री मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता। और शिवजी मुस्कुराते हुए अपने पुराने स्वरूप में लौट आये। कई संत महात्माओं ने अपने अनुभव से कहा है कि कर्पूरगौर शंकर तो भगवान श्रीराम से भी सुंदर हैं परन्तु वह अपना निज स्वरूप कभी प्रकट नहीं करते क्योंकि इससे उनके प्रियतम आराध्य श्रीराम की सुंदरता के यश की प्रशंसा में कमी होगी।" जय गजानन महाराज की ।। हर हर महादेव !!

🔥🍃🔥ऊँ नमः शिवाय हर हर महादेव🔥🍃🔥
🌿🌿🌿🍁🍁🍁🌿🌿🌿
🔥🔥ऊँ नमः शिवाय चरणं शरणं ममह🔥🔥
(भगवान शिव का अनुपम सौंदर्य)
"एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा, पिताश्री ! आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में। पिताजी आप एक बार कृपा करके अच्छे से स्नान करके माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें। भगवान शिवजी ने गणेशजी की बात मान ली। कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं, बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी। सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते ही रहे। वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाय। भगवान शिव ने अपना रूप कभी देखा ही नहीं न कभी उसे प्रकट किया। शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन किये दे रहा था। गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले - मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए। भगवान शिव ने पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - क्षमा पिताश्री मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता। और शिवजी मुस्कुराते हुए अपने पुराने स्वरूप में लौट आये। कई संत महात्माओं ने अपने अनुभव से कहा है कि कर्पूरगौर शंकर तो भगवान श्रीराम से भी सुंदर हैं परन्तु वह अपना निज स्वरूप कभी प्रकट नहीं करते क्योंकि इससे उनके प्रियतम आराध्य श्रीराम की सुंदरता के यश की प्रशंसा में कमी होगी।"
जय गजानन महाराज की ।।
हर हर महादेव !!

+57 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 19 शेयर

कामेंट्स

Harpal bhanot Feb 18, 2019
Om Namah Shivay ji 🌷🌷🌷 Good afternoon ji 🙏🙏🙏

Babita Sharma Feb 18, 2019
शुभ दोपहर वंदन बहना 🙏 हर हर महादेव

Harpal bhanot Feb 18, 2019
Om Namah Shivay ji 🌷🌷🌷 very Good Night ji 🙏🙏🙏

A. R RathobA. Mar 26, 2019

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर
bhavnajoshi Mar 25, 2019

+10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 21 शेयर
sunilyadav Mar 26, 2019

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Anjana Gupta Mar 25, 2019

+1116 प्रतिक्रिया 267 कॉमेंट्स • 491 शेयर
NARENDER KUMAR SONI Mar 25, 2019

+10 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 33 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB