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s.r.pareek rajasthan Mar 7, 2021
@krishnarish thanks for reply meri pyari bhatiji सदा खुश रहें जी सुखी रहें जी चिरंजीवी रहें सदा मुस्कराती रहें जी मेरे लिये नही सभी के लिये लिखा है कि किसी के दर्द की दवा बने ।धन्यवाद जी प्यारी बहना 🙏🏻🙏🏻🍒🍒🍒🌠🍒🍒🍒🌠🍒🍒🍒🍒🌠

🔶️navin patel🔶️ Mar 7, 2021
🙏दोपहर प्रणाम जी🙏 🌹 जयश्री राधे कृष्ण 🌹 🌹आपका हर पल शुभ मंगलमय हो🌹

s.r.pareek rajasthan Mar 7, 2021
@krishnarish धन्यवाद् जी मेरी प्यारी बहना जी अती सुन्दर कोमैट रिपलाई व अती सुन्दर पोस्ट ...जिन्दगी मे ऐसे कई मौके खुशी के कई गम के आते हैं परन्तु कुछ ऐसे भी आते है कि ईन्सान भूल नही सकता भुलना चाहे तो भी वह भूल नही सकता बहना होता वही जो हरि चाहे होनी है सो होय सी अनहोनी ना होय ईन्सान के जखमो की भरपाई ईश्वर कर देता है but ईश्वर द्वारा दिया गया जख्म बहना कभी नहीं भरता 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

s.r.pareek rajasthan Mar 7, 2021
@krishnarish thanks meri pyari chhoti bahina shree sada khush raho ji comment like kiya pasand kiya thanks bahina shree radhe radhe 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌠🌠🌠🌠बहिना जिसने चोट सही हो उसको ही सही मालुम होता है सुमधुर शुभ रात्रि वंदन जी🙏🏻🙏🏻🌿🌿🙏🏻🙏🏻

💫Shuchi Singhal💫 Mar 8, 2021
@srpareek It's My pleasure Bhai ji🙏🌿Radhe Radhe Shub Ratri Bhaiya ji Bhole Baba ki kirpa aapki family pe bni rhe Bhai ji🌿🙏🌿🙏

Neeta Trivedi Apr 10, 2021

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प्रेम से बड़ कर कुछ नहीं _*एक दिन एक औरत अपने घर के बाहर आई और उसने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा* –_ _*“कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”*_ _*संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”*_ _*औरत ने कहा – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”*_ _*संत बोले – “हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।”*_ _*शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।*_ _*औरत के पति ने कहा –*_ _*“जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”*_ _*औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के लिए कहा।*_ _*संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।”*_ _*“पर क्यों?” – औरत ने पूछा।*_ _*उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है” फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम*_ _*सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”*_ _*औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब बताया। उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और बोला –*_ “ _*यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित करना चाहिए। हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।”*_ _*लेकिन उसकी पत्नी ने कहा – “मुझे लगता है कि हमें सफलता को आमंत्रित करना चाहिए।”*_ _*उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी। वह उनके पास आई और बोली –*_ “ _*मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”*_ _*“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम को ही बुलाना चाहिए” –*_ _*उसके माता-पिता ने कहा।*_ _*औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा*_ – _*“आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”*_ _*प्रेम घर की ओर बढ़ चले। बाकी के दो संत भी उनके पीछे चलने लगे।*_ _*औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा – “मैंने तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग भीतर क्यों जा रहे हैं?”*_ *उनमें से एक ने कहा _– “यदि आपने धन और सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता तो केवल वही*_ _*भीतर जाता। आपने प्रेम को आमंत्रित किया है। प्रेम कभी अकेला नहीं जाता। प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता उसके पीछे जाते हैं।*_ 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 जय श्री कृष्णा जय जगन्नाथ

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ritu saini Apr 10, 2021

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🌹 *सहयोग* 🌹 *एक सज्जन रेलवे स्टेशन पर बैठे गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे . तभी जूते पॉलिश करने वाला एक लड़का आकर बोला : ‘‘साहब ! बूट पॉलिश ?’’* *उसकी दयनीय सूरत देखकर उन्होंने अपने जूते आगे बढ़ा दिये , बोले : ‘‘लो , पर ठीक से चमकाना .’’* *लड़के ने काम तो शुरू किया परंतु अन्य पॉलिशवालों की तरह उसमें स्फूर्ति नहीं थी .* *वे बोले :‘‘कैसे ढीले ढीले काम करते हो ? जल्दी-जल्दी हाथ चलाओ !’’ वह लड़का मौन रहा . इतने में दूसरा लड़का आया . उसने इस लड़के को तुरंत अलग कर दिया और स्वयं फटाफट काम में जुट गया . पहले वाला गूँगे की तरह एक ओर खड़ा रहा . दूसरे ने जूते चमका दिये .* *‘पैसे किसे देने हैं ?’ इस पर विचार करते हुए उन्होंने जेब में हाथ डाला . उन्हें लगा कि ‘अब इन दोनों में पैसों के लिए झगड़ा या मारपीट होगी !’ फिर उन्होंने सोचा , ‘जिसने काम किया , उसे ही दाम मिलना चाहिए .’ इस लिए उन्होंने बाद में आनेवाले लड़के को पैसे दे दिये .* *उसने पैसे ले तो लिये परंतु पहलेवाले लड़के की हथेली पर रख दिये . प्रेम से उसकी पीठ थपथपायी और चल दिया .* *वह आदमी विस्मित नेत्रों से देखता रहा ! उसने लड़के को तुरंत वापस बुलाया और पूछा : ‘‘यह क्या चक्कर है ?’’* *लड़का बोला : ‘‘साहब ! यह तीन महीने पहले चलती ट्रेन से गिर गया था . हाथ पैर में बहुत चोटें आयी थीं . ईश्वर की कृपा से बेचारा बच गया , नहीं तो इसकी वृद्धा माँ और तीन बहनों का क्या होता !’’* *फिर थोड़ा रुककर वह बोला : ‘‘साहब ! यहाँ जूते पॉलिश करनेवालों का हमारा जूथ है और उसमें एक देवता जैसे हम सबके प्यारे चाचाजी हैं , जिन्हें सब ‘सत्संगी चाचाजी’ कह के पुकारते हैं . वे सत्संग में जाते हैं और हमें भी सत्संग की बातें बताते रहते हैं .* *उन्होंने सुझाव रखा कि ‘साथियो ! अब यह पहले की तरह स्फूर्ति से काम नहीं कर सकता तो क्या हुआ , ईश्वर ने हम सबको अपने साथी के प्रति सक्रिय हित , त्याग भावना , स्नेह , सहानुभूति और एकत्व का भाव प्रकटाने का एक अवसर दिया है .* *जैसे पीठ , पेट , चेहरा , हाथ , पैर भिन्न भिन्न दिखते हुए भी हैं एक ही शरीर के अंग . ऐसे ही हम सभी शरीर से भिन्न भिन्न दिखते हुए भी हैं एक ही आत्मा . हम सब एक हैं .’* *स्टेशन पर रहनेवाले हम सब साथियों ने मिलकर तय किया कि हम अपनी एक जोड़ी जूते पॉलिश करने की आय प्रतिदिन इसे दिया करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसके काम में सहायता भी करेंगे .’’* *जूते पॉलिश करनेवालों के जूथ में आपसी प्रेम , सहयोग , एकता तथा मानवता की ऐसी ऊँचाई देखकर वे सज्जन चकित रह गये .* *एक सत्संगी व्यक्ति के सम्पर्क में आने वालों का जीवन मानवीयता , सहयोग और सुहृदयता की बगिया से महक जाता है . सत्संगी अपने सम्पर्क में आने वाले लोगों को अपने जैसा बना देता है . हमें भी बुरी अच्छी संगत वालों से ही मित्रता करनी चाहिए .* *अपने वो नहीं , जो तस्वीर में साथ दिखे , अपने तो वो है, जो तकलीफ में साथ दिखें .* *राधे राधे* 🙏🙏

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