AMIT KUMAR INDORIA
AMIT KUMAR INDORIA Apr 8, 2021

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m.r.gupta Apr 8, 2021
Jai shri Hari Ji ki. shri varah bhagwan Ji ki jai ho Charno me koti koti pranam Prabhu

Uma shankar Pandey Apr 8, 2021
🕉नमो भगवते वासुदेवाय। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ प्रभात,बन्दन।

Meenakshi Patel Apr 8, 2021
श्री मन नारायण नारायण हरि हरि श्री मन नारायण नारायण हरि हरि तेरी लीला प्रभु है प्यारी-प्यारी हरि हरि श्री मन नारायण नारायण हरि हरि

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Mukesh Sharma Apr 15, 2021

♦️♦️♦️ ⚜🕉⚜ ♦️♦️♦️ *🙏ॐ श्रीगणेशाय नम:🙏* *🙏शुभप्रभातम् जी🙏* *इतिहास की मुख्य घटनाओं सहित पञ्चांग-मुख्यांश ..* *📝आज दिनांक 👉* *📜 15 अप्रैल 2021* *बृहस्पतिवार* *🏚नई दिल्ली अनुसार🏚* *🇮🇳शक सम्वत-* 1943 *🇮🇳विक्रम सम्वत-* 2078 *🇮🇳मास-* चैत्र *🌓पक्ष-* शुक्लपक्ष *🗒तिथि-* तृतीया-15:28 तक *🗒पश्चात्-* चतुर्थी *🌠नक्षत्र-* कृत्तिका-20:33 तक *🌠पश्चात्-* रोहिणी *💫करण-* गर-15:28 तक *💫पश्चात्-* वणिज *✨योग-* आयुष्मान-17:18 तक *✨पश्चात्-* सौभाग्य *🌅सूर्योदय-* 05:56 *🌄सूर्यास्त-* 18:46 *🌙चन्द्रोदय-* 07-48 *🌛चन्द्रराशि-* वृषभ-दिनरात *🌞सूर्यायण -* उत्तरायण *🌞गोल-* दक्षिणगोल *💡अभिजित-* 11:55 से 12:47 *🤖राहुकाल-* 13:57 से 15:34 *🎑ऋतु-* वसन्त *⏳दिशाशूल-* दक्षिण *✍विशेष👉* *_🔅आज बृहस्पतिवार को 👉 चैत्र सुदी तृतीया 15:28 तक पश्चात् चतुर्थी शुरु , गणगौर / गणगौरी व्रत , नवरात्रि का तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा व्रत - पूजा , अरून्धती व्रत - पूजन , सौभाग्य शयन तृतीया , आन्दोलन 3 , सायं दोलारुढ़ शिव गौरी पूजन , सरहुल (बिहार) , मनोरथ तृतीया व्रत , मन्वादि 3 , सर्वदोषनाशक रवि योग 20:33 से , विघ्नकारक भद्रा 28:47 से , यमघण्ट योग सूर्योदय से 20:32 तक , सौर ( मेष ) वैशाख मासारम्भ , मेवाड़ उत्सव प्रारम्भ ( उदय. ) , भगवान कुन्थुनाथ ज्ञान कल्याणक ( चैत्र शुक्ल तृतीया ) ,श्री मत्स्य जयन्ती , गुरु नानक देव जयन्ती ( तारीखानुसार ) , गुरु अर्जुनदेव जयन्ती (तारीखानुसार) , दक्षिणी पश्चिमी कमान दिवस ( 2005 ) व हिमाचल प्रदेश दिवस ( 1948 , पूर्ण राज्य 25 जनवरी 1971 को ) ।_* *नोट- सभी तरह की लेटेस्ट विविध एवं शैक्षणिक खबरों एवं इस पंचांग के लिए "हरियाणा एजुकेशनल अपडेट" फेसबुक पेज ज्वाइन करें।* *_🔅कल शुक्रवार को 👉 चैत्र बदी चतुर्थी 18:07 तक पश्चात् पंचमी शुरु , वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत , ब्रह्मावर्त (बिठूर) में सिद्ध गणेश मंदिर में अभिषेक , नवरात्रि का चौथा दिन - मां कुष्मांडा व्रत - पूजा , बुध अश्विनी नक्षत्र मेष राशि में 20ः57 पर , सर्वदोषनाशक रवि योग 11:40 तक , विघ्नकारक भद्रा 18:06 तक , यमघण्ट योग सूर्योदय से 23:40 तक , सौभाग्यसूचक रोहिणी व्रत (जैन ) , गुरू अंगददेव जोति जोत (प्राचीनपरम्परानुसार ) , मेला गणगौर का दूसरा दिन , राजस्थान पुलिस दिवस , भारतीय रेलवे परिवहन दिवस , Foursquare Day , World Voice Day & National Healthcare Decisions Day (US)._* *🎯आज की वाणी👉* 🌹 *पिण्डजप्रवरारूढा* *चण्डकोपास्त्रकैर्युता।* *प्रसादं तनुते मह्यं* *चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥* *भावार्थ👉* _पिंडज प्राणियों में श्रेष्ठ अर्थात् सिंह पर सवार, भयानक व शत्रुओं के संहार के लिए सन्नद्ध अस्त्रों से सुसज्जित विख्यात चंद्रघंटा देवी की कृपा मुझ पर छाई रहे ।_ 🌹 *15 अप्रॅल की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ👉* 1689 – फ्रांस ने स्पेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1715 - दक्षिण कैरोलिना में यकाय युद्ध की शुरुआत पोकोलागो नरसंहार से हुई। 1716 - ग्रेट नॉर्दर्न वॉर: प्रशियाई सैनिकों ने स्वीडन के जर्मन नियंत्रण विस्मर के बंदरगाह पर कब्जा कर किया। 1726 - न्यूटन विलियम ने सुप्रीम पी आइजैक स्टैकली को अपने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत बारे में बताया। 1729 - लीपज़िग के शहर जोहान सेबस्टियन बाख में "सेंट मैथ्यू पैशन" का उद्घाटन हुआ। 1755 - शमूएल जॉनसन का "ए डिक्शनरी ऑफ द इंग्लिश लैंग्वेज" लंदन में प्रकाशित की गयी। 1784 – आयरलैंड में दुनिया का पहला गुब्बारा उड़ाया गया। *ये पंचांग डायरेक्ट प्राप्त करें👇* https://www.facebook.com/groups/1677111972387804/ *शिक्षक समाज हरियाणा टेलीग्राम👇* http://t.me//sikshahsamajharyana 1817 – अमेरिका में पहला स्कूल बधिर बच्चों के लिए खोला गया। 1820 - वुर्टेमबर्ग के राजा विलियम-I ने अपने चचेरे भाई पॉलिन थेरेसे से स्टटगार्ट में शादी की। 1840 - किंग्स कॉलेज अस्पताल लंदन में खुला। 1847 - लॉरेंस स्कूल सानवार की स्थापना की गयी। 1858 - अज़ीमघुर की लड़ाई, मैक्सिकन स्पैनिश को हराया। 1877 - टोक्यो विश्वविद्यालय आधिकारिक तौर पर जापान में स्थापित किया गया। 1892 - जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी न्यूयॉर्क में स्थापित की गयी। 1895 – बाल गंगाधर तिलक ने राजगढ़ किले में शिवाजी उत्सव का उद्घाटन किया। 1923 – डाईबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए इंन्सुलिन बाजार में उपलब्ध हुआ। 1927 – स्विट्जरलैंड और तत्कालीन सोवियत संघ राजनयिक संबंध बनाने पर सहमत हुए। 1940 – मैकडोनाल्ड का पहला रेस्त्रां कैलिफोर्निया में खुला। 1948 – हिमाचल प्रदेश राज्य की स्थापना हुई। 1986 – अमरीका ने लीबिया के त्रिपोली और बिनग़ाज़ी नगरों पर आक्रमण किया। 1992 – संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने लीबिया पर वायु और हथियार प्रतिबंध लगाने से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किया और इस देश से बाहर इस देश की सारी सम्पत्ति को जब्त कर लिया। 1994 - भारत सहित 109 देशों द्वारा 'गैट' समझौते की स्वीकृति। 1999 - पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो तथा उनके पति आसिफ़ अली जरदारी को सरकारी ठेकों में दलाली खाने के आरोप में पांच वर्ष की क़ैद की सज़ा, पाकिस्तान ने परमाणु क्षमता वाले अपने दूसरे प्रक्षेपास्त्र शाहीन-1 का परीक्षण किया। 2000 - आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग के आहवान के साथ जी -77 शिखर सम्मेलन हवाना में सम्पन्न। 2002 – दक्षिण कोरिया में बुसान के निकट एयर चाइना का विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 128 लोगों की मौत हुई। 2003 - ब्रिटेन में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने हथियार डाल देने का निर्णय लिया। 2004 - राजीव गांधी हत्याकांड से जुड़े लिट्टे उग्रवादी वी. मुरलीधरन की कोलम्बो में हत्या की गयी। 2006 – नेपाल में माओवादीयों ने संघर्षविराम की घोषणा की। 2006 - इंटरपोल ने जकार्ता सम्मेलन में एंटी करप्शन एकेडमी के गठन का प्रस्ताव सुझाया। 2008 - राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नव निर्वाचित 55 सदस्यों में से 50 को शपथ दिलायी। 2008 - भारतीय मूल के कनाडाई मंत्री दीपक ओबेरॉय को अफ़ग़ानिस्तान पर गठित कनाडाई संसद की विशेष समिति का सदस्य चुना गया। 2010 - भारत में निर्मित पहले क्रायोजेनिक रॉकेट जीएसएलवी-डी3 का प्रक्षेपण नाकाम हो गया। 2012 – पाकिस्तान की एक जेल पर हमले के बाद 400 आतंकवादी फरार हुए। 2013 – इराक में बम विस्फोट से 33 मरे और 163 घायल हुए। 2013 – निकोलस मदुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। 2019 - पेरिस के 850 साल पुराने विश्वप्रसिद्ध चर्च नॉट्र डाम में आग लग गई जिससे चर्च की मुख्य मीनार और उसकी छत ढह गई । 2019 - प्रथम स्वदेशी (भारत में निर्मित )क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ का सफल परीक्षण , DRDO ने किया कीर्तिमान स्थापित। 2020 - इलेक्‍ट्रोनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आरोग्‍य ऐप विकसित किया।इस ऐप की शुरूआत से 13 दिन के अंदर ही पांच करोड़ से अधिक लोग इसे डाउनलोड कर चुके। *15 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति👉* 1452 - लिओनार्दो दा विंची, इटलीवासी, महान चित्रकार। 1469 – सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक का जन्म हुआ। 1563 - गुरु अर्जन देव - सिक्खों के पाँचवें गुरु। 1707 – स्वीटज़रलैंड के खगोलशास्त्री गणितज्ञ और भौतिकशस्त्री लयूनार्ड ओलेर का जन्म हुआ। 1731 – ब्रिटिश दार्शनिक और भौतिकशास्त्री हेनरी काउन्डेश का फ़्रांस में जन्म हुआ।य 1865 - अयोध्यासिंह उपाध्याय - खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्यकार। 1919 - अर्जन सिंह - भारतीय वायु सेना के सबसे वरिष्ठ और पांच सितारा वाले रैंक तक पहुँचने वाले एकमात्र मार्शल थे (भारतीय वायु सेना के पहले एयर चीफ मार्शल)। 1940 - सुल्तान ख़ान - भारत के प्रसिद्ध सारंगी वादक और शास्त्रीय गायक। 1960 - नरोत्तम मिश्रा - मध्य प्रदेश की राजनीति में 'भारतीय जनता पार्टी' के प्रसिद्ध नेता। 1972 - मंदिरा बेदी- बालीवुड अभिनेत्री, क्रिकेट ग्लैमर और फैशन की मूर्ति। *15 अप्रॅल को हुए निधन👉* 1865 - अब्राहम लिंकन - अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति थे। 1985 - शंभुनाथ डे - हैजा के जीवाणु पर शोध कार्य करने वाले भारतीय वैज्ञानिक थे। 1998 – थम्पी गुरु के नाम से प्रसिद्ध फ़्रेडरिक लेंज का निधन हुआ। 2020 - दिग्गज अभिनेता रंजीत चौधरी का निधन। *15 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉* 🔅 मेवाड़ उत्सव प्रारम्भ ( उदय. )। 🔅 भगवान कुन्थुनाथ ज्ञान कल्याणक (जैन , चैत्र शुक्ल तृतीया)। 🔅 श्री मतस्य जयन्ती। 🔅 गुरु नानक देव जयन्ती (तारीखानुसार) । 🔅 गुरु अर्जुनदेव जयन्ती (तारीखानुसार) । 🔅 हिमाचल प्रदेश दिवस (1948 , पूर्ण राज्य 25 जनवरी 1971 को) । 🔅 दक्षिणी पश्चिमी कमान दिवस ( 2005 ) । 🔅 विश्व कला दिवस। *कृपया ध्यान दें जी👉* *यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है ।* 🌻आपका दिन *_मंगलमय_* हो जी ।🌻 ⚜⚜ 🌴 💎 🌴⚜⚜

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shiv bhakte Apr 16, 2021

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Ammbika Apr 15, 2021

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Neha Sharma, Haryana Apr 17, 2021

. ॥हरि ॐ तत्सत्॥ श्रीमद्भागवत-कथा श्रीमद्भागवत-महापुराण पोस्ट - 185 स्कन्ध - 09 अध्याय - 02 इस अध्याय में:- पृषध्र आदि मनु के पाँच पुत्रों का वंश श्रीशुकदेव जी कहते हैं- परीक्षित! इस प्रकार जब सुद्युम्न तपस्या करने के लिये वन में चले गये, तब वैवस्वत मनु ने पुत्र की कामना से यमुना के तट पर सौ वर्ष तक तपस्या की। इसके बाद उन्होंने सन्तान के लिये सर्वशक्तिमान भगवान श्रीहरि की आराधना की और अपने ही समान दस पुत्र प्राप्त किये, जिसमें सबसे बड़े इक्ष्वाकु थे। उन मनुपुत्रों में से एक का नाम था पृषध्र। गुरु वसिष्ठ जी ने उसे गायों की रक्षा में नियुक्त कर रखा था, अतः वह रात्रि के समय बड़ी सावधानी से वीरासन से बैठा रहता और गायों की रक्षा करता। एक दिन रात में वर्षा हो रही थी। उस समय गायों के झुंड में एक बाघ घुस आया। उससे डरकर सोयी हुई गौएँ उठ खड़ी हुईं। वे गोशाला में ही इधर-उधर भागने लगीं। बलवान् बाघ ने एक गाय को पकड़ लिया। वह अत्यन्त भयभीत होकर चिल्लाने लगी। उसका वह क्रन्दन सुनकर पृषध्र गाय के पास दौड़ आया। एक तो रात का समय और दूसरे घनघोर घटाओं से आच्छादित होने के कारण तारे भी नहीं दीखते थे। उसने हाथ में तलवार उठाकर अनजान में ही बड़े वेग से गाय का सिर काट दिया। वह समझ रहा था कि यही बाघ है। तलवार की नोक से बाघ का भी कान कट गया, वह अत्यन्त भयभीत होकर रास्ते में खून गिराता हुआ वहाँ से निकल भागा। शत्रुदमन पृषध्र ने यह समझा कि बाघ मर गया। परंतु रात बीतने पर उसने देखा कि मैंने तो गाय को ही मार डाला है, इससे उसे बड़ा दुःख हुआ। यद्यपि पृषध्र ने जान-बूझकर अपराध नहीं किया था, फिर भी कुलपुरोहित वसिष्ठ जी ने उसे शाप दिया कि ‘तुम इस कर्म से क्षत्रिय नहीं रहोगे; जाओ, शूद्र हो जाओ’। पृषध्र ने अपने गुरुदेव का यह शाप अंजलि बाँधकर स्वीकार किया और इसके बाद सदा के लिये मुनियों को प्रिय लगने वाले नैष्ठिक ब्रह्मचर्य-व्रत को धारण किया। वह समस्त प्राणियों का अहैतुक हितैषी एवं सबके प्रति समान भाव से युक्त होकर भक्ति के द्वारा परमविशुद्ध सर्वात्मा भगवान् वासुदेव का अनन्य प्रेमी हो गया। उसकी सारी आसक्तियाँ मिट गयीं। वृत्तियाँ शान्त हो गयीं। इन्द्रियाँ वश में हो गयीं। वह कभी किसी प्रकार का संग्रह-परिग्रह नहीं रखता था। जो कुछ दैववश प्राप्त हो जाता, उसी से अपना जीवन-निर्वाह कर लेता। वह आत्मज्ञान से सन्तुष्ट एवं अपने चित्त को परमात्मा में स्थित करके प्रायः समाधिस्थ रहता। कभी-कभी जड़, अंधे और बहरे के समान पृथ्वी पर विचरण करता। इस प्रकार का जीवन व्यतीत करता हुआ वह एक दिन वन में गया। वहाँ उसने देखा की दावानल धधक रहा है। मननशील पृषध्र अपनी इन्द्रियों को उसी अग्नि में भस्म करके परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त हो गया। मनु का सबसे छोटा पुत्र था कवि। विषयों से वह अत्यन्त निःस्पृह था। वह राज्य छोड़कर अपने बन्धुओं के साथ वन में चला गया और अपने हृदय में स्वयंप्रकाश परमात्मा को विराजमान पर किशोर अवस्था में ही परमपद को प्राप्त हो गया। मनुपुत्र करूष से कारूष नामक क्षत्रिय उत्पन्न हुए। वे बड़े ही ब्राह्मण भक्त, धर्मप्रेमी एवं उत्तरापथ के रक्षक थे। धृष्ट के धार्ष्ट नामक क्षत्रिय हुए। अन्त में वे इस शरीर से ही ब्राह्मण बन गये। नृग का पुत्र हुआ सुमति, उसका पुत्र भूतज्योति और भूतज्योति का पुत्र वसु था। वसु का पुत्र प्रतीक और प्रतीक का पुत्र ओघवान। ओघवान के पुत्र का नाम भी ओघवान ही था। उनके एक ओघवती नाम की कन्या भी थी, जिसका विवाह सुदर्शन से हुआ। मनुपुत्र नरिष्यन्त से चित्रसेन, उससे ऋक्ष, ऋक्ष से मीढ्वान्, मीढ्वान् से कूर्च और उससे इन्द्रसेन की उत्पत्ति हुई। इन्द्रसेन से वीतिहोत्र, उससे सत्यश्रवा, सत्यश्रवा से ऊरूश्रवा और उससे देवदत्त की उत्पत्ति हुई। देवदत्त के अग्निवेश्य नामक पुत्र हुए, जो स्वयं अग्नि देव ही थे। आगे चलकर वे ही कानीन एवं महर्षि जातूकर्ण्य के नाम से विख्यात हुए। परीक्षित! ब्राह्मणों का ‘आग्निवेश्यायन’ गोत्र उन्हीं से चला है। इस प्रकार नरिष्यन्त के वंश का मैंने वर्णन किया, अब दिष्टि का वंश सुनो। दिष्ट के पुत्र का नाम था नाभाग। यह उस नाभाग से अलग है, जिसका मैं आगे वर्णन करूँगा। वह अपने कर्म के कारण वैश्य हो गया। उसका पुत्र हुआ भलन्दन और उसका वत्सप्रीति। वत्सप्रीति का प्रांशु और प्रांशु का पुत्र हुआ प्रमति। प्रमति के खनित्र, खनित्र के चाक्षुष और उनके विविंशति हुए। विविंशति के पुत्र रम्भ और रम्भ के पुत्र खनिनेत्र-दोनों ही परम धार्मिक हुए। उनके पुत्र करन्धम और करन्धम के अवीक्षित्। महाराज परीक्षित! अवीक्षित् के पुत्र मरुत्त चक्रवर्ती राजा हुए। उनसे अंगिरा के पुत्र महायोगी संवर्त्त ऋषि ने यज्ञ कराया था। मरुत्त का यज्ञ जैसा हुआ वैसा और किसी का नहीं हुआ। उस यज्ञ के समस्त छोटे-बड़े पात्र अत्यन्त सुन्दर एवं सोने के बने हुए थे। उस यज्ञ में इन्द्र सोमपान करके मतवाले हो गये थे और दक्षिणाओं से ब्राह्मण तृप्त हो गये थे। उसमें परसने वाले थे मरुद्गण और विश्वेदेव सभासद् थे। मरुत्त के पुत्र का नाम था दम। दम से राज्यवर्धन, उससे सुधृति और सुधृति से नर नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई। नर से केवल, केवल से बन्धुमान्, बन्धुमान् से वेगवान, वेगवान से बन्धु और बन्धु से राजा तृणबिन्दु का जन्म हुआ। तृणबिन्दु आदर्श गुणों के भण्डार थे। अप्सराओं में श्रेष्ठ अलम्बुषा देवी ने उसको वरण किया, जिससे उनके कई पुत्र और इडविडा नाम की कन्या उत्पन्न हुई। मुनिवर विश्रवा ने अपने योगेश्वर पिता पुलस्त्य जी से उत्तम विद्या प्राप्त करके इडविडा के गर्भ से लोकपाल कुबेर को पुत्ररूप में उत्पन्न किया। महाराज तृणबिन्दु के अपनी धर्मपत्नी से तीन पुत्र हुए- विशाल, शून्यबिन्दु और धूम्रकेतु। उनसे राजा विशाल वंशधर हुए और उन्होंने वैशाली नाम की नगरी बसायी। विशाल से हेमचन्द्र, हेमचन्द्र से धूम्राक्ष, धूम्राक्ष से संयम और सयंम से दो पुत्र हुए-कृशाश्व और देवज। कृशाश्व के पुत्र का नाम था सोमदत्त। उसने अश्वमेध यज्ञों के द्वारा यज्ञपति भगवान् की आराधना की और योगेश्वर संतों का आश्रय लेकर उत्तम गति प्राप्त की। सोमदत्त का पुत्र हुआ सुमति और सुमति से जनमेजय। ये सब तृणबिन्दु की कीर्ति को बढ़ाने वाले विशालवंशी राजा हुए। ~~~०~~~ *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। *हे नाथ नारायण वासुदेवाय॥ "जय जय श्री हरि" 🌸🌸🙏🌸🌸 *************************************************

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Gd Bansal Apr 15, 2021

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shiva Apr 15, 2021

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