lalit mohan jakhmola
lalit mohan jakhmola Apr 9, 2020

***आज का स्पेशल*** @#तिरस्कार_या_मजबूरी ##आत्मीय कथा### ................................. राम गोपाल सिंह एक सेवानिवृत अध्यापक हैं । सुबह दस बजे तक ये एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे । शाम के सात बजते-बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं । परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी जिसमें इनके पालतू कुत्ते *मार्शल* का बसेरा है । राम गोपाल जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया *मार्शल* । इस कमरे में अब राम गोपाल जी , उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं ।दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये । सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन करके सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी लेकिन मिलने कोई नहीं आया । साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और राम गोपाल जी की पत्नी से बोली -"अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो , वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के" । अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए । बहुओं ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया अब राम गोपाल जी की पत्नी के हाथ , थाली पकड़ते ही काँपने लगे , पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों । इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली "अरी तेरा तो पति है तू भी ........। मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे वो अपने आप उठाकर खा लेगा" । सारा वार्तालाप राम गोपाल जी चुपचाप सुन रहे थे , उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि "कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है , मुझे भूख भी नहीं है" । इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और राम गोपाल जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । राम गोपाल जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं । पोती -पोते First floor की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं । Ground floor पर, दोनों बेटे काफी दूर अपनी माँ के साथ खड़े थे । विचारों का तूफान राम गोपाल जी के अंदर उमड़ रहा था । उनकी पोती ने उनकी तरफ हाथ हिलाते हुए Bye कहा । एक क्षण को उन्हें लगा कि 'जिंदगी ने अलविदा कह दिया' राम गोपाल जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये । उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी जिसको राम गोपाल चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे । इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी , लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे - पीछे हो लिया जो राम गोपाल जी को अस्पताल लेकर जा रही थी । राम गोपाल जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे । उनकी सभी जाँच सामान्य थी । उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी । जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मार्शल बैठा दिखाई दिया । दोनों एक दूसरे से लिपट गये । एक की आँखों से गंगा तो एक की आँखों से यमुना बहे जा रही थी । जब तक उनके बेटों की लम्बी गाड़ी उन्हें लेने पहुँचती तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे । उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये । आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम दिया जायेगा । 40 हजार - हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी उनकी जिसको वो परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करते थे। एक बार रामगोपाल जी के जगह पर स्वयं को खड़ा करो कल्पना करो कि इस कहानी में किरादार आप हो । आपका सारा अहंकार और सब मोहमाया खत्म हो जाएगा जीवन में कुछ नहीं है कोई अपना नहीं है जब तक स्वार्थ है तभी तक आपके सब हैं। यही सत्य है । 🙏🌹🙏🌹🙏🌹 जय श्री राधे कृष्णा जी***

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sanjay Awasthi May 10, 2020

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Shanti Pathak May 10, 2020

😍हैप्पी मदर्स डे मां बिना जिंदगी वीरान होती है, तन्हा सफर में हर राह सुनसान होती है, जिंदगी में मां का होना जरुरी है।, मां की दुआओं से ही हर मुश्किल आसान होती है। maa I miss you,😭 अन्धी मां एक  गाँव  में  एक  अन्धी  औरत  रहती  था |  उसका  बेटा  था  जिसे  उसने  बड़े ‘ लाड   और  प्यार’  से  पाला-पौसा था | समय  पर  तैयार  करना ,  खाना  बना  कर  खिलना  और  स्कूल  भेजना  उसका  नित्य  का  काम   था | वह  लड़का  जब  स्कूल  जाता  था  तो  बच्चे  उसे  “ अन्धी  का  बेटा “  कह  कर  चिडाते  रहते  थे |  रोजाना  हर  बात   पर उसे  ये  शब्द  सुनने  को  मिलते  थे  ,” अन्धी  का  बेटा |  इस  कारण  वह  अपनी  माँ  से  चिड़ता  था और  माँ  को  कहीं  भी  साथ  लेकर  जाने  में  हिचकिचाता  था | “’ उसे “ अन्धी  का  बेटा ‘“ सुनना  नापसंद  था  | उसकी  माँ  ने  कभी  इसका  बुरा  नहीं  माना  |  अपने  बेटे  को  खूब  पढ़ने  का  मौका  दिया |  अन्धी  होते हुए  भी  घरों  में  काम  करती , बेटे  पर  खूब  मेहनत  करती |  धीरे- धीरे  उसे  इस  लायक  बना  दिया  कि  वह  अपने  पैरों  पर खड़ा  हो  सके | प्रभु  बड़ा  दयालु  है  , उस  लड़के  कि  मेहनत  और  उसकी  माँ  का  आशीर्वाद  उसके  काम  आया  और  वह  किसी  सरकारी  विभाग  में  एक  बड़ा  अधिकारी   बन   गया  |  शादी   भी   हो  गयी  | उसके   बाद   वह  अपनी   पत्नी   को   साथ   लेकर  नौकरी  पर   दूसरे  शहर  में  रहने  चला  गया | बहुत  दिनों  तक  वह  लड़का  अपनी  माँ  से  मिलने  नहीं  गया  और  न  ही  कभी  पत्र  द्वारा हालचाल  पूछा | माँ  को  अच्छी  तरह   पता  था  कि  उसका  बेटा ,  अन्धी  होने  के  कारण  उससे  नफरत  करता  है | माँ  कि  ममता – ममता  होती  है  |  एक  दिन  उसका   मन  बेटे  को  देखने  को  अधीर  हो  गया  और  कुछ  बिना  विचार  करे  अपने  बेटे  से   मिलने  शहर  में  गयी |  घर  के  द्वार  पर  खड़े  चौकीदार  से  कहा  “  ‘बेटा’ ,  ‘तुम्हारे  साहब घर  पर  होंगे , उनसे  जा  कर  कहो , माँ  उससे  मिलने  आई  है “’ | गेटकीपर  घर  में  अंदर  गया और  बताया “ ‘ कोई  माँ  आपसे  मिलने  आई  है ‘| साहब  ने  कहा , ‘ उनसे  कहो  मैं  घर  पर  नहीं  हूँ “’ | गार्ड  ने  बूढ़ी  माँ  से  कहा कि ‘ वो  अभी घर  पर  नहीं  हैं ‘ ,| यह  सुन  कर  माँ  वापस  चल  दी  और  बाहर  किसी  दूसरे  कौने  पर  बैठ  गयी | बेटे  कि   बेरुखी   देख  कर   मन   बहुत   दुखी   हुआ   परंतु   लाचार   हो   कर   वापिस   लौट  पड़ी | थोड़ी  देर  पश्चात  जब  लड़का  अपनी  कार   से  ऑफिस  के  लिए  चला  तो  उसने  थोड़ी  दूर  चलते  ही  देखा  कि  सामने  सड़क  पर  बहुत  भीड़  लगी है | जानने  के  लिए  कि  वहाँ  भीड़  क्यों  लगी  है , देखने  चला  गया |  उसने  देखा  कि  उसकी माँ  वहाँ  मरी  पड़ी  थी  और  उसकी  एक  मुट्ठी  बंद  थी  जिसमें  कुछ  सामान  था |  उसने  मुट्ठी  खोल  कर  देखी , एक  पत्र  था  जिसमें  लिखा  था :- ‘ बेटा , जब   तू   बहुत   छोटा   था   तो   खेलते   वक्त   तेरी   आँख   में   सरिया   धंस   गया   था  और   तू   अंधा   हो    गया   था   तब   मैंने  तुम्हें  अपनी  आँखे  दे  दी  थी ‘ | यह  पढ़  कर  लड़का  ज़ोर-ज़ोर  से  रोने  लगा   परंतु  अब  उसकी  माँ  उसे  देखने  को  दुनियाँ  में  नहीं  थी |  ‘ माँ-बाप  का  कर्ज़  हम  कभी  चुका  नहीं  सकते | ‘                                    बूढ़े  माँ –बाप की  अवलेहना  स्वयं  पर  अविश्वास  का  प्रतीक है, उनके  ज्ञान  और  अनुभव  का  सदुपयोग करो, सेवा  भाव जगाओ, उन्हें उपेक्षित  महसूस  कराना , संवाद  का  सिलसिला जारी न रखना , तुम्हें  किसी  दिन झुलसा देगा , ठगा  सा  महसूस  करोगे  एक दिन | जय  हिन्द  , जय  हमारा  भारत

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JAGDISH BIJARNIA May 10, 2020

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Ragni Dhiwar May 10, 2020

*17 मई का इंतज़ार ना करें* सरकार एक निश्चित समय तक ही lockdown रख सकती है धीरे धीरे lockdown खत्म हो जाएगा सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी क्योंकि *सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है* *बीमार होने के बाद की स्थिति भी आप लोग देश में देख ही रहे हैं* अब जो समझदार हैं वह आगे लंबे समय तक अपनी दिनचर्या, काम करने का तरीका समझ ले। *सरकार 24 घंटे 365 दिन आपकी चौकीदारी नहीं करेगी* *आपके एवं आपके परिवार का भविष्य आपके हाथ में है* Lockdown खुलने के बाद सोच समझ कर घर से निकलें एवं काम पर जायें... व नीयत नियमानुसार ही अपना कार्य करें l😊क्या लगता है आपको, 17 मई के बाद एकाएक कोरोना चला जायेगा, हम पहले की तरह जीवन जीने लगेंगे ? *नहीं, कदापि नहीं।* ये वायरस अब हमारे देश में जड़ें जमा चुका है, हमे इसके साथ रहना सीखना पड़ेगा। कैसे ? सरकार कब तक lockdown रखेगी ? कब तक बाहर निकलने में पाबंदी रहेगी ? हमे स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपनी जीवन शैली में बदलाव करके, अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करके। हमे सैकड़ों साल पुरानी जीवन शैली अपनानी पड़ेगी। शुद्ध आहार लें, शुद्ध मसाले खाएं। आंवला, एलोवेरा, गिलोय, काली मिर्च, लौंग आदि पर निर्भर हों, एन्टी बाइटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करें। अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ानी होगी, फ़ास्ट फ़ूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड्रिंक भूल जाएं। अपने बर्तनों को बदलना होगा, एल्युमिनियम, स्टील आदि से हमें भारी बर्तन जैसे पीतल, कांसा, तांबा को अपनाना होगा जो प्राकृतिक रूप से वायरस की खत्म करते हैं। अपने आहार में दूध, दही, घी की मात्रा बढ़ानी होगी। भूल जाइए जीभ का स्वाद, तला-भुना मसालेदार, होटल वाला कचरा। कम से कम अगले 2 -3 साल तक तो ये करना ही पड़ेगा। तभी हम सरवाइव कर पाएंगे। जो नहीं बदले वो खत्म हो जाएंगे। इस बात को मान कर इन पर अमल करना शुरू कर दें। *बाकी*🤷🏻‍♂🤷🏻‍♂🤷🏻‍♂ *जिंदगी आपकी फैसला आपका

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anju May 10, 2020

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Pawan Saini May 8, 2020

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