प्रभु की प्राप्ति किसे होती है..?

#ज्ञानवर्षा
एक सुन्दर कहानी है :--
एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था।
एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा -- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोई इछा हॆ?"
प्रजा को चाहने वाला राजा बोला -- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ हैं आपकी कृपा से राज्य मे सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक ही ईच्छा हैं कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी कृपा कर दर्शन दीजिये।"
"यह तो सम्भव नहीं है" -- ऐसा कहते हुए भगवान ने राजा को समझाया। परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से जिद्द् करने लगा।
आखिर भगवान को अपने साधक के सामने झुकना पडा ओर वे बोले -- "ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास ले आना और मैं पहाडी के ऊपर से सभी को दर्शन दूँगा ।"
ये सुन कर राजा अत्यन्त प्रसन्न हुअा और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचे, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देगें। दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर पहाडी की ओर चलने लगा।
चलते-चलते रास्ते मे एक स्थान पर तांबे कि सिक्कों का पहाड देखा। प्रजा में से कुछ एक लोग उस ओर भागने लगे। तभी ज्ञानी राजा ने सबको सर्तक किया कि कोई उस ओर ध्यान न दे, क्योकि तुम सब भगवान से मिलने जा रहे हो, इन तांबे के सिक्कों के पीछे अपने भाग्य को लात मत मारो ।
परन्तु लोभ-लालच मे वशीभूत प्रजा के कुछ एक लोग तो तांबे की सिक्कों वाली पहाड़ी की ओर भाग ही गयी और सिक्कों कि गठरी बनाकर अपने घर कि ओर चलने लगे। वे मन ही मन सोच रहे थे, पहले ये सिक्कों को समेट ले, भगवान से तो फिर कभी मिल ही लेगे ।
राजा खिन्न मन से आगे बढे। कुछ दूर चलने पर चांदी कि सिक्कों का चमचमाता पहाड़ दिखाई दिया । इस वार भी बचे हुये प्रजा में से कुछ लोग, उस ओर भागने लगे ओर चांदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपनी घर की ओर चलने लगे। उनके मन मे विचार चल रहा था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है। चांदी के इतने सारे सिक्के फिर मिले न मिले, भगवान तो फिर कभी मिल ही जायेगें. इसी प्रकार कुछ दूर और चलने पर सोने के सिक्कों का पहाड़ नजर आया। अब तो प्रजा जनो में बचे हुये सारे लोग तथा राजा के स्वजन भी उस ओर भागने लगे।
वे भी दूसरों की तरह सिक्कों कि गठरीयां लाद-लाद कर अपने-अपने घरों की
ओर चल दिये। अब केवल राजा ओर रानी ही शेष रह गये थे। राजा रानी से कहने लगे --
"देखो कितने लोभी ये लोग। भगवान से मिलने का महत्व ही नहीं जानते हैं। भगवान के सामने सारी दुनियां की दौलत क्या चीज हैं..?"
सही बात है -- रानी ने राजा कि बात का समर्थन किया और वह आगे बढने लगे कुछ दुर चलने पर राजा ओर रानी ने देखा कि सप्तरंगि आभा बिखरता हीरों का पहाड़ हैं । अब तो रानी से भी रहा नहीं गया, हीरों के आर्कषण से वह भी दौड पड़ी और हीरों कि गठरी बनाने लगी । फिर भी उसका मन नहीं भरा तो साड़ी के पल्लू मेँ भी बांधने लगी । वजन के कारण रानी के वस्त्र देह से अलग हो गये, परंतु हीरों का तृष्णा अभी भी नहीं मिटी। यह देख राजा को अत्यन्त ही ग्लानि ओर विरक्ति हुई । बड़े दुःखद मन से राजा अकेले ही आगे बढते गये ।
वहाँ सचमुच भगवान खड़े उसका इन्तजार कर रहे थे । राजा को देखते ही भगवान मुसकुराये ओर पुछा -- "कहाँ है तुम्हारी प्रजा और तुम्हारे प्रियजन । मैं तो कब से उनसे मिलने के लिये बेकरारी से उनका इन्तजार कर रहा हूॅ ।" राजा ने शर्म और आत्म-ग्लानि से अपना सर झुका दिया ।
तब भगवान ने राजा को समझाया --
"राजन, जो लोग अपने जीवन में भौतिक सांसारिक प्राप्ति को मुझसे अधिक मानते हैं, उन्हें कदाचित मेरी प्राप्ति नहीं होती और वह मेरे स्नेह तथा कृपा से भी वंचित रह जाते हैं..!!"
:
सार..
जो जीव अपनी मन, बुद्धि और आत्मा से भगवान की शरण में जाते हैं, और
सर्व लौकिक सम्बधों को छोडके प्रभु को ही अपना मानते हैं वो ही भगवान के प्रिय बनते हैं 😊 आेम शान्ति !! 🙏

Flower Pranam Belpatra +141 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 133 शेयर

कामेंट्स

Uma Vyas Aug 6, 2017
एकदम सही बात है 👍👍

RAHUL KUMAR JHA Aug 21, 2018

*रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुलिंदा है । यही सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है,मन

*📿कैसे बनायें वैदिक राखी ?📿*
...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Flower Like +7 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 16 शेयर
Narender Kumar Rosa Aug 21, 2018

*आज तक का सर्वश्रेष्ठ पोस्ट है।*

ईश्वर ने सृष्टि की रचना करते समय *तीन* विशेष रच ना की...

*1.* अनाज में *कीड़े* पैदा कर दिए, वरना लोग इसका सोने और चाँदी की तरह संग्रह करते।

*2.* मृत्यु के बाद देह (शरीर) में *दुर्गन्ध* उत्पन्न कर दी, वरना कोई अप...

(पूरा पढ़ें)
Water Pranam +2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 20 शेयर
Prakash Preetam Aug 21, 2018

एक बार हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण का हाथ प...

(पूरा पढ़ें)
Bell Tulsi Like +9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 39 शेयर

🌹💐🌷🌻🌈🌞🌈🌻🌷💐🌹
*📕✅अगर कभी कोई पानी में डूब के मर जाये और उसका शरीर 3 से 4 घंटे में मिल जाये तो उसकी जिंदगी वापस ला सकता हूँ।अगर कभी किसी को ऐसी दूर्घटना दिखे या सुनाई दे तो तुरंत हमे बताये।।। किसी की जान बच सकती है।।*
*📕आप सभी से विनम्र ...

(पूरा पढ़ें)
Like Flower Pranam +15 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 82 शेयर

ALL INDIA FEDERATION OF ASTROLOGERS SOCIETIES

वर्तमान समय में सामान्य जन अपनी मध्यम आर्थिक स्थिति के कारण तथा छोटे परिवार के कारण छोटे भूखंड पर भवन बनाते हैं। ऐसे में सभी प्रकार के कक्ष बनाना संभव नहीं हो पाता। लेकिन जो कक्ष मुख्य रूप से बनाए जात...

(पूरा पढ़ें)
Bell Like Pranam +26 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 18 शेयर
Hasmukhjadav Aug 21, 2018

🙏🌹ॐ दुर्गायै नमः🌹🙏
मुझको मालूम नहीं चाहत क्या है माँ,⚘
मैंने तेरी बातों के सिवा हर बात भुला रखी है⚘
सफर मुश्किल है मालूम है मुझे ,लेकिन ⚘
तुम मेरी हो तो हर फ़िक्र मिटा रखी हैै ⚘
🙏🌹जय जय माँ🌹🙏


Good Night Jay mataji. Mitro....

(पूरा पढ़ें)
Like Flower Pranam +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
jayati cee Aug 21, 2018

बहुत ही सुंदर कथा

कन्धे पर कपड़े का थान लादे और हाट-बाजार जाने की तैयारी करते हुए नामदेव जी से पत्नि ने कहा- भगत जी! आज घर में खाने को कुछ भी नहीं है।
आटा, नमक, दाल, चावल, गुड़ और शक्कर सब खत्म हो गए हैं।
शाम को बाजार से आते हुए घर के लिए राशन का स...

(पूरा पढ़ें)
Like Pranam +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 23 शेयर

 Chapter - 01,  Serial No 66 – 70

भक्ति को प्राप्त करने का सत्संग एक साधन है क्योंकि सत्संग में हम प्रभु के प्रभाव और स्वभाव के बारे में सुनते है जिससे प्रभु के लिए प्रेम का भाव हमारे हृदय में उदित होता है ।

प्रभु के भक्तों के विचारों का सेवन कर...

(पूरा पढ़ें)
Pranam Like Flower +19 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 8 शेयर
T.K Aug 21, 2018

,💝suprabhat💝

Pranam Bell Dhoop +17 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 146 शेयर
T.K Aug 21, 2018

https://goo.gl/AyztSQ

Sindoor Pranam Like +65 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 884 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB