PDJOSHI
PDJOSHI Jun 1, 2018

JAI JAI BHAIROO NATH

NAKODA.BHEROO.NATH

+17 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 53 शेयर
Rajesh Jain Feb 26, 2021

+36 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 52 शेयर

Ram Ram ji 🙋‍♀️🌹🌹🌹🌹🌹✍️✍️🙏 *पानि जोरी आगे भइ ठाढी,* *प्रभुहि बिलोकि प्रीति अति बाढी।* *केहि बिधी अस्तुति करौ तुम्हारी*, *अधम जाति मैं जड़मति भारी।।* एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुंह से बोल फूटे: "कहो राम! सबरी की डीह ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ?" राम मुस्कुराए: "यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मूल्य...?" *"जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ जब तुम जन्में भी नहीं थे।* यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो? कैसे दिखते हो? क्यों आओगे मेरे पास..? *बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा..."* राम ने कहा: *"तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को सबरी के आश्रम में जाना है।"* "एक बात बताऊँ प्रभु! *भक्ति के दो भाव होते हैं। पहला मर्कट भाव, और दूसरा मार्जार भाव। बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है ताकि गिरे न... उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर को पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। दिन रात उसकी आराधना करता है........* ".....पर मैंने यह भाव नहीं अपनाया। *मैं तो उस बिल्ली के बच्चे की भाँति थी जो अपनी माँ को पकड़ता ही नहीं, बल्कि निश्चिन्त बैठा रहता है कि माँ है न, वह स्वयं ही मेरी रक्षा करेगी, और माँ सचमुच उसे अपने मुँह में टांग कर घूमती है... मैं भी निश्चिन्त थी कि तुम आओगे ही, तुम्हे क्या पकड़ना...।"* *राम मुस्कुरा कर रह गए।* भीलनी ने पुनः कहा: *"सोच रही हूँ बुराई में भी तनिक अच्छाई छिपी होती है न... कहाँ सुदूर उत्तर के तुम, कहाँ घोर दक्षिण में मैं। तुम प्रतिष्ठित रघुकुल के भविष्य, मैं वन की भीलनी... यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो तुम कहाँ से आते?"* राम गम्भीर हुए। कहा: *"भ्रम में न पड़ो मां! राम क्या रावण का वध करने आया है?* ......... *अरे रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से बाण चला कर कर सकता है।* ......... *राम हजारों कोस चल कर इस गहन वन में आया है तो केवल तुमसे मिलने आया है मां, ताकि हजारों वर्षों बाद जब कोई पाखण्डी भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे तो इतिहास चिल्ला कर उत्तर दे कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी माँ ने मिल कर गढ़ा था।* ............ *जब कोई कपटी भारत की परम्पराओं पर उँगली उठाये तो काल उसका गला पकड़ कर कहे कि नहीं! यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ...... एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक दरिद्र वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है।* .......... *राम वन में बस इसलिए आया है ताकि जब युगों का इतिहास लिखा जाय तो उसमें अंकित हो कि सत्ता जब पैदल चल कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तभी वह रामराज्य है।* ............ *राम वन में इसलिए आया है ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतीक्षाएँ अवश्य पूरी होती हैं। राम रावण को मारने भर के लिए नहीं आया मां...!"* सबरी एकटक राम को निहारती रहीं। राम ने फिर कहा: *"राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता! राम की यात्रा प्रारंभ हुई है भविष्य के लिए आदर्श की स्थापना के लिए।* ........... *राम निकला है ताकि विश्व को बता सके माँ ,की अवांछनीय इच्छओं को भी पूरा करना ही 'राम' होना है।* .............. *राम निकला है कि ताकि भारत को सीख दे सके कि किसी सीता के अपमान का दण्ड असभ्य रावण के पूरे साम्राज्य के विध्वंस से पूरा होता है।* .............. *राम आया है ताकि भारत को बता सके कि अन्याय का अंत करना ही धर्म है,* ............ *राम आया है ताकि युगों को सीख दे सके कि विदेश में बैठे शत्रु की समाप्ति के लिए आवश्यक है कि पहले देश में बैठी उसकी समर्थक सूर्पणखाओं की नाक काटी जाय, और खर-दूषणों का घमंड तोड़ा जाय।* ......और, .............. *राम आया है ताकि युगों को बता सके कि रावणों से युद्ध केवल राम की शक्ति से नहीं बल्कि वन में बैठी सबरी के आशीर्वाद से जीते जाते हैं।"* सबरी की आँखों में जल भर आया था। उसने बात बदलकर कहा: "बेर खाओगे राम? राम मुस्कुराए, "बिना खाये जाऊंगा भी नहीं मां..." सबरी अपनी कुटिया से झपोली में बेर ले कर आई और राम के समक्ष रख दिया। राम और लक्ष्मण खाने लगे तो कहा: "मीठे हैं न प्रभु?" *"यहाँ आ कर मीठे और खट्टे का भेद भूल गया हूँ मां! बस इतना समझ रहा हूँ कि यही अमृत है...।"* सबरी मुस्कुराईं, बोलीं: *"सचमुच तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो, राम!"* *संकलित*

+500 प्रतिक्रिया 165 कॉमेंट्स • 667 शेयर

लक्ष्मी नारायण ♥ एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी को बोले, “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते है!” ..तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!:-) मेरे को पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” ..तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जप थोड़े ही ना करते है!” ..तो माता लक्ष्मी बोली की , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!" 🙂 ..भगवान नारायण एक गाँव में ब्राम्हण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के है?” तो भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा कीर्तन करना चाहते है…” ..यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहेना…” …गाँव के कुछ लोग इकठठा हो के सब तैय्यारी कर दी….पहेले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा करते तो गर्दी बढ़ी! 2रे 3 रे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..की कितनी भक्ति है लोगो में….! लक्ष्मी माता ने सोचा अब जाने जैसा है ! 🙂 ..लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी की , माता पहुंची! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!” तो वो महिला बोली,”माताजी , साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!” ..लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहोत प्यास लगी है..” तो वो महिला लोटा भर के पानी लायी….माता ने पिया और लोटा लौटाया तो सोने का हो गया था!! 🙂 ..महिला अचंबित हो गयी की लोटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का! कैसे चमत्कारिक माता जी है!..अब तो वो महिला हाथा-जोड़ी करने लगे की , “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना भी खा लीजिये..!” ये सोचे की खाना खाएगी तो थाली भी, कटोरी भी सोने की हो जाए!! माता लक्ष्मी बोली, “तुम जा बेटी, तेरा टाइम हो गया!” ..वो महिला प्रवचन में तो आई तो सही …लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी…. ..अब महिलायें वो बात सुनकर चालु सत्संग में से उठ के गयी !! दुसरे दिन से कथा में लोगो की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा की , “लोगो की संख्या कैसे कम हो गयी?” …. किसी ने कहा एक चमत्कारिक माताजी आई है नगर में… जिस के घर दूध पीती तो ग्लास सोने का हो जाता…. थाली में रोटी सब्जी खाती तो थाली सोने की हो जाती!… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..” ..भगवान नारायण समझ गए की लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है! इतनी बात सुनते ही देखा की जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए! ..पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास! बोले, “ माता मैं तो भगवान की कथा का आयोजन करता और लक्ष्मी जी माता आप ने मेरे घर को छोड़ दिया!” माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहेले आनेवाली थी!लेकिन तुम्हारे घर में जिस कथाकार को ठहेराया है ना , वो चला जाए तो मैं अभी आऊं !” सेठ जी बोला, “बस इतनी सी बात!… अभी उन को धरम शाला में कमरा दिलवा देता हूँ!” ..जैसे ही महाराज कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोला, “महाराज बिस्तरा बांधो!आप की व्यवस्था धरम शाला में कर दी है!!” महाराज बोले, “ अभी 2/3 दिन बचे है कथा के….. यही रहेने दो” सेठ बोला, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ!मैं कुछ नहीं सुनने वाला!” ..इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा की , “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!” 🙂 माता लक्ष्मी जी बोली, “प्रभु , अब तो मान गए?” 🙂 भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी की तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!” Apna Bana Ke Dekho ddtSposnsor2hed · तीनो लोकन से प्यारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी

+526 प्रतिक्रिया 126 कॉमेंट्स • 497 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB