Sn Vyas
Sn Vyas Nov 3, 2017

सूर्य पुत्र कर्ण

सूर्य पुत्र कर्ण

*अनसुनी कथाएं*

*कृष्ण ने कर्ण को* *दिए थे तीन वरदान*

*(कर्ण का विवाह)*
द्रौपदी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद कर्ण ने दो विवाह किए थे पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कर्ण ने रुषाली नाम की एक सूतपुत्री से विवाह किया कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था सुप्रिया का जिक्र महाभारत की कहानी मे ज्यादा नही किया गया है

*(नौ पुत्र)*
रुषाली और सुप्रिया से कर्ण के नौ पुत्र थे वृशसेन वृशकेतु चित्रसेन सत्यसेन सुसेन शत्रुंजय व्दिपात प्रसेन और बनसेन कर्ण के सभी पुत्र भी महाभारत के युध्द मे शामिल हुए जिनमे से 8 विरगति को प्राप्त हो गए प्रसेन की मौत सात्यकि हाथो हुई शत्रुंजय वृशसेन और व्दिपात की अर्जुन बनसेन की भीम चित्रसेन सत्यसेन और सुशेन कि नकुल के व्दारा मृत्यु हुई थी

*(रुषाली हुई सती)*
कर्ण की मौत के पशचात उसकी पत्नी रुषाली उसकी चिता मे सती हो गई थी वृशकेतु एकमात्र ऐसा पुत्र था जो जीवित रहा महाभारत के युध्द के पशचात जब पांडवो को यह बात पता चली कि कर्ण उन्ही का ज्येष्ठ था तब उन्होने कर्ण के जीवित पुत्र वृशकेतु को इन्द्रप्रस्थ की गद्दी सौपी थी अर्जुन के संरक्षण मे वृशकेतु ने कई युध्द भी लड़े थे

*(दानवीर कहलाए)*
जब कर्ण मृत्युशैया पर थे तब कृष्ण उनके पास उनके दानवीर होने की परीक्षा लेने के लिए आए कर्ण ने कृष्ण को कहा कि उसके पास देने के लिए कुछ भी नही है ऐसे मे कृष्ण ने उनसे उनका सोने का दांत मांग लिया कर्ण ने अपने समीप पड़े पत्थर को उठाया और उससे अपना दात तोड़कर कृष्ण को दे दिया कर्ण ने एक बार फिर दानवीर होने का प्रमाण दिया जिससे कृष्ण काफी प्रभावित हुए कृष्ण ने कर्ण से कहा कि वह उनसे कोई भी वरदान माग सकते है

*(कृष्ण ने दिए वरदान)*
कर्ण ने कृष्ण से कहा कि एक निर्धन सूत पुत्र होने की वजह से उनके साथ बहुत छल हुए है अगली बार जब कृष्ण धरती पर आए तो वह पिछड़े वर्ग के लोगो के जीवन को सुधारने के लिए प्रयत्न करे दूसरे वरदान के रुप मे कर्ण ने मागा कि अगले जन्म मे कृष्ण उन्ही के राज्य मे जन्म ले और तीसरे वरदान मे उन्होने कृष्ण कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहा कोई पाप ना हो

*हथेलीपर किया अंतिम संस्कर*
पूरी पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नही होने के कारण कृष्ण ने कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथो पर किया इस तरह दानवीर कर्ण मृत्यु के पशचात साक्षात वैकुण्ठ धाम को प्राप्त हुए।

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कामेंट्स

Kanchan Bhagat Nov 4, 2017
जय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय,

Kanchan Bhagat Nov 4, 2017
इतनी जानकारी नहीं थी,धन्यवाद

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