ओम नमो शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नम शिवाय ओम नमो शिवाय ॐ

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कामेंट्स

Ramesh Soni.33 Apr 11, 2021
जय श्री राम जय श्री राम 🌹🚩🌹ओम भगवते वासुदेवाय नमः🚩🚩🚩🌹🌹🙏🙏🌹🌹

RAJ RATHOD Apr 11, 2021
शुभ रात्रि वंदन..शुभ स्वप्न * 😊🌹 *_❥ Զเधे-Զเधे ❥_* Good night.. Sweet Dreams ¸.•*””*•.¸ *🌹💐🌹* 🙏🏻🙏🏻 *””सदा मुस्कुराते रहिये””*

R C GARG Apr 11, 2021
जय श्री कृष्णा !! शुभ रात्रि✨ 🌚⏰ वंदन जी !! 🕉🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🕉

प्रवीण चौहान २४७ Apr 11, 2021
🔱...!! हर हर हर महादेव !!...🔱 🔱💠💠💠🙏🏻💠💠💠🔱 देवाधिदेव श्री महादेव जी की कृपा भरें और सोमवती अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं सहित सस्नेह वंदन जी 🌹🙏🏻🌹 🌷‼ ओम नमः शिवाय ‼🌷 🔱💠🔱 जय माता दी 🔱💠🔱 🌼🏹🌼 जय श्री राम 🌼🏹🌼 💝💝 जय श्री राधे कृष्ण 💝💝

bhavanamishra Apr 11, 2021
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Devendra Tiwari Apr 12, 2021
🙏🌹Om Namah Shivay🌹🙏 🌹🌹Har Har mahadev 🌹🌹 Subh Prabhat Bandan ji 🙏🙏

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Jai Mata Di May 13, 2021

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X7skr May 13, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 14 मई 2021 ⛅ दिन - शुक्रवार ⛅ विक्रम संवत - 2078 (गुजरात - 2077) ⛅ शक संवत - 1943 ⛅ अयन - उत्तरायण ⛅ ऋतु - ग्रीष्म ⛅ मास - वैशाख ⛅ पक्ष - शुक्ल ⛅ तिथि - तृतीया पूर्ण रात्रि तक ⛅ नक्षत्र - मॄगशिरा पूर्ण रात्रि तक ⛅ योग - सुकर्मा 15 मई रात्रि 01:47 तक तत्पश्चात धृति ⛅ राहुकाल - सुबह 10:57 से दोपहर 12:35 तक ⛅ सूर्योदय - 06:02 ⛅ सूर्यास्त - 19:07 ⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में ⛅ व्रत पर्व विवरण - अक्षय तृतीया (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), त्रेता युगादि तिथि, अखा तीज, विष्णुपदी संक्रांति (पुण्यकाल दोपहर 12:35 से सूर्यास्त तक), तृतीया वृद्धि तिथि 💥 विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 विष्णुपदी संक्रांति 🌷 ➡ जप तिथि : 14 मई 2021 शुक्रवार को ( विष्णुपदी संक्रांति ) पुण्य काल सुबह दोपहर 12:35 से सूर्यास्त तक | 🙏🏻 विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | – (पद्म पुराण , सृष्टि खंड) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 अक्षय तृतीया 🌷 ➡ 14 मई 2021 शुक्रवार को अक्षय तृतीया है । 🙏🏻 'अक्षय' शब्द का मतलब है- जिसका क्षय या नाश न हो। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे 'अक्षय तृतीया' कहते हैं। 🌷 वैशाखे मासि राजेन्द्र! शुक्लपक्षे तृतीयिका। अक्षया सा तिथिः प्रोक्ता कृत्तिकारोहिणीयुता। तस्यां दानादिकं सर्व्वमक्षयं समुदाहृतमिति 🙏🏻 भविष्यपुराण, मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, स्कन्दपुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है। इस दिन सभी देवताओं व पित्तरों का पूजन किया जाता है। पित्तरों का श्राद्ध कर धर्मघट दान किए जाने का उल्लेख शास्त्रों में है। वैशाख मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है अतः विशेषतः विष्णु जी की पूजा करें। 🙏🏻 भविष्यपुराण, ब्राह्मपर्व, अध्याय 21 के अनुसार वैशाखे मासि राजेन्द्र तृतीया चन्दनस्य च। वारिणा तुष्यते वेधा मोदकैर्भीम एव हि ।। दानात्तु चन्दनस्येह कञ्जजो नात्र संशयः। यात्वेषा कुरुशार्दूल वैशाखे मासि वै तिथिः।। तृतीया साऽक्षया लोके गीर्वाणैरभिनन्दिता। आगतेयं महाबाहो भूरि चन्द्रं वसुव्रता।। कलधौतं तथान्नं च घृतं चापि विशेषतः। यद्यद्दत्तं त्वक्षयं स्यात्तेनेयमक्षया स्मृता।। यत्किञ्चिद्दीयते दानं स्वल्पं वा यदि वा बहु। तत्सर्वमक्षयं स्याद्वै तेनेयमक्षया स्मृता।। योऽस्यां ददाति करकन्वारिबीजसमन्वितान्। स याति पुरुषो वीर लोकं वै हेममालिनः।। इत्येषा कथिता वीर तृतीया तिथिरुत्तमा। यामुपोष्य नरो राजन्नृद्धिं वृद्धिं श्रियं भजेत्।। 🙏🏻 वैशाख मास की तृतीया को चन्दनमिश्रित जल तथा मोदक के दान से ब्रह्मा तथा सभी देवता प्रसन्न होते हैं | 🙏🏻 देवताओं ने वैशाख मास की तृतीया को अक्षय तृतीया कहा है | इस दिन अन्न-वस्त्र-भोजन-सुवर्ण और जल आदि का दान करनेसे अक्षय फल की प्राप्ति होती है | इसी तृतीया के दिन जो कुछ भी दान किया जाता है वह अक्षय हो जाता है और दान देनेवाले सूर्यलोक को प्राप्त करता है | इस तिथि को जो उपवास करता है वह ऋद्धि-वृद्धि और श्री से सम्पन्न हो जाता है | 🙏🏻 स्कन्दपुराण के अनुसार, जो मनुष्य अक्षय तृतीया को सूर्योदय काल में प्रातः स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करके कथा सुनते हैं, वे मोक्ष के भागी होते हैं। जो उस दिन मधुसूदन की प्रसन्नता के लिए दान करते हैं, उनका वह पुण्यकर्म भगवान की आज्ञा से अक्षय फल देता है। 🙏🏻 भविष्यपुराण के मध्यमपर्व में कहा गया है वैशाखे शुक्लपक्षे तु तृतीयायां तथैव च । गंगातोये नरः स्नात्वा मुच्यते सर्वकिल्बिषैः ।। 🙏🏻 वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया में गंगाजी में स्नान करनेवाला सब पापों से मुक्त हो जाता हैं | वैशाख मास की तृतीया स्वाती नक्षत्र और माघ की तृतीया रोहिणीयुक्त हो तथा आश्विन तृतीया वृषराशि से युक्त हो तो उसमें जो भी दान दिया जाता है, वह अक्षय होता है | विशेषरूप से इनमें हविष्यान्न एवं मोदक देनेसे अधिक लाभ होता है तथा गुड़ और कर्पुरसे युक्त जलदान करनेवाले की विद्वान् पुरुष अधिक प्रंशसा करते हैं, वह मनुष्य ब्रह्मलोक में पूजित होता हैं | यदि बुधवार और श्रवण से युक्त तृतीया हो तो उसमें स्नान और उपवास करनेसे अनंत फल प्राप्त होता हैं |

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X7skr May 13, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🌹अक्षय फलदायी अक्षय तृतिया : 14 मई 2021 🌹वैशाख शुक्ल तृतिया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथों में है। इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत फलदायी होते हैं, अतः इसे ʹअक्षय तृतियाʹ कहते हैं। यह सर्व सौभाग्यप्रद है। 🌹यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेता युग की प्रारम्भ तिथि है। श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था। 🌹इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है। जैसे – विवाह, गृह-प्रवेश या वस्त्र-आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है। प्रातःस्नान, पूजन, हवन का महत्त्व : 🌹इस दिन गंगा-स्नान करने से सारे तीर्थ करने का फल मिलता है। गंगाजी का सुमिरन एंव जल में आवाहन करके ब्राह्ममुहूर्त में पुण्यस्नान तो सभी कर सकते हैं। स्नान के पश्चात प्रार्थना करें- माधवे मेषगे भानौ मुरारे मधुसूदन। प्रातः स्नानेन मे नाथ फलदः पापहा भव।। **ʹ🌹हे मुरारे ! हे मधुसूदन ! वैशाख मास में मेष के सूर्य में हे नाथ ! इस प्रातः स्नान से मुझे फल देने वाले हो जाओ और पापों का नाश करो।ʹ 🌹सप्तधान्य उबटन व गोझरण मिश्रित जल से स्नान पुण्यदायी है। पुष्प, धूप-दीप, चंदन, अक्षत (साबुत चावल) आदि से लक्ष्मी नारायण का पूजन व अक्षत से हवन अक्षय फलदायी है। 🌹जप उपवास व दान का महत्त्व 🌹इस दिन किया गया उपवास, जप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है। एक बार हलका भोजन करके भी उपवास कर सकते हैं। ʹभविष्य पुराणʹ में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है। इस दिन पानी के घड़े, पंखे, ओले (खाँड के लड्डू), पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है। परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए। पूज्य बापू जी के शिष्य पूज्यश्री के अवतरण दिवस से समाज सेवा के अभायानों में नये वर्ष का नया संकल्प लेते हैं। अक्षय तृतीया के दिन तक ये अभिय़ान बहार में आ जाते हैं, जिससे उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 🌹पितृ-तर्पण का महत्त्व व विधि 🌹इस दिन पितृ तर्पण करना अक्षय फलदायी है। पितरों के तृप्त होने पर घर में सुख-शांति-समृद्धि व दिव्य संतानें आती हैं। 🌹विधिः इस दिन तिल एवं अक्षत में श्रीविष्णु एवं ब्रह्माजी को तत्त्वरूप से पधारने की प्रार्थना करें। फिर पूर्वजों का मानसिक आवाहन करने की भावना करते हुए धीरे से सामग्री किसी पात्र में छोड़ दें तथा भगवान दत्तात्रेय, ब्रह्माजी व विष्णु जी से पूर्वजों की सदगति हेतु प्रार्थना करें। 🌹आशीर्वाद पाने का दिन 🌹इस दिन माता-पिता, गुरुजनों की सेवा कर उनकी विशेष प्रसन्नता, संतुष्टि व आशीर्वाद प्राप्त करें। इसका फल भी अक्षय होता है। **

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X7skr May 12, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 13 मई 2021 ⛅ दिन - गुरुवार ⛅ विक्रम संवत - 2078 (गुजरात - 2077) ⛅ शक संवत - 1943 ⛅ अयन - उत्तरायण ⛅ ऋतु - ग्रीष्म ⛅ मास - वैशाख ⛅ पक्ष - शुक्ल ⛅ तिथि - द्वितीया 14 मई प्रातः 05:38 तक तत्पश्चात तृतीया ⛅ नक्षत्र - रोहिणी 14 मई प्रातः 05:45 तक तत्पश्चात मॄगशिरा ⛅ योग - अतिगण्ड रात्रि 12:51 तक तत्पश्चात सुकर्मा ⛅ राहुकाल - दोपहर 02:14 से शाम 03:52 तक ⛅ सूर्योदय - 06:02 ⛅ सूर्यास्त - 19:07 ⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में ⛅ व्रत पर्व विवरण - 💥 विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 समस्याओं के समाधान का बढिया उपाय 🌷 👉🏻 कोई भी समस्या आये तो बड़ी ऊँगली (मध्यमा) और अँगूठा मिलाकर भ्रूमध्य के नीचे और तर्जनी ( अँगूठे के पासवाली पहली ऊँगली) ललाट पर लगा के शांत हो जायें | श्वास अंदर जाय तो ‘ॐ’ , बाहर आये तो ‘शांति’ – ऐसा कुछ समय तक करें | आपको समस्याओं का समाधान बढिया मिलेगा | 🙏🏻 ऋषिप्रसाद – मई २०२१ से 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🌷 ससुराल मे कोई तकलीफ 🌷 👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें …उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें..भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाए, दूध रोटी खा लें..शुक्ल पक्ष की तृतीया को..अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें …नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाए बस……अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल 🙏🏻 माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया, 🙏🏻 वैशाख शुक्ल तृतीया और 🙏🏻 भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें …नमक बिना का भोजन करें ….जरुर लाभ होगा… 🙏🏻 ..ऐसा व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधती ने किया था…. ऐसा आहार नमक बिना का भोजन…. वशिष्ठ और अरुंधती का वैवाहिक जीवन इतना सुंदर था कि आज भी सप्त ऋषियों में से वशिष्ठ जी का तारा होता है , उनके साथ अरुंधती का तारा होता है…आज भी आकाश में रात को हम उन का दर्शन करते हैं … 🙏🏻 .शास्त्रों के अनुसार शादी होती तो उनका दर्शन करते हैं ….. जो जानकार पंडित होता है वो बोलता है…शादी के समय वर-वधु को अरुंधती का तारा दिखाया जाता है और प्रार्थना करते हैं कि , “जैसा वशिष्ठ जी और अरुंधती का साथ रहा ऐसा हम दोनों पति पत्नी का साथ रहेगा..” ऐसा नियम है…. 🙏🏻 चन्द्रमा की पत्नी ने इस व्रत के द्वारा चन्द्रमा की यानी २७ पत्नियों में से प्रधान हुई….चन्द्रमा की पत्नी ने तृतीया के व्रत के द्वारा ही वो स्थान प्राप्त किया था…तो अगर किसी सुहागन बहन को कोई तकलीफ है तो ये व्रत करें ….उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें … कुम-कुम का तिलक ख़ुद को भी करें उत्तर दिशा में मुख करके …. उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाये॥ 🙏🏻 सुरेशानंदजी -19th May 08, Haridwar 🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞 🙏🏻🌷🌻🍀🌹🌼💐🌸🌺🙏🏻 http://T.me/Hindupanchang

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Sanjeev Adhoya May 13, 2021

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X7skr May 12, 2021

🕉️ namah shivay 🙏 @🔰 स्वास्थ्य से संबंधित कुछ विशेष जानकारियां 1- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी। 2- कुल 13 अधारणीय वेग हैं 3-160 रोग केवल मांसाहार से होते है 4- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये। 5- 80 रोग चाय पीने से होते हैं। 6- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं। 7- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है। 8- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं। 9- ठंडेजल (फ्रिज)और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है। 10- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है। 11- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। 12- बाल रंगने वाले द्रव्यों(हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है। 13- दूध(चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है। 14- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं। 15- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं। 16- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क हो हानि पहुँचती है। 17- खड़े होकर जल पीने से घुटनों(जोड़ों) में पीड़ा होती है। 18- खड़े होकर मूत्रत्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है। 19- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है। 20- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है। 21- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है। 22- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय(टीबी) होने का डर रहता है। 23- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है। 24- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है। 25- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है। 26- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्वश्रेश्ठ है। 27- हृदयरोगी के लिए अर्जुनकी छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकरयुक्त आटा, छिलकेयुक्त अनाज औषधियां हैं। 28- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है। 29- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है। 30- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है। 31- जल सदैव ताजा(चापाकल, कुएंआदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं। 32- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है। 33- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए। 34- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए। 35- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोषकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।। 36- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषकता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं। 37- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए। 38- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड , समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए। 39- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है। 40- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते। 41- सरसों, तिल,मूंगफली , सुरजमुखी या नारियल का कच्ची घानी का तेल और देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है। 42- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है। 43- खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है। 44- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है। 45- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी(कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है। 46- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए। 47-बर्तन मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए। 48- टूथपेस्ट और ब्रश के स्थान पर दातून और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातून नहीं करना चाहिए) 49- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़ें और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है। 50- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद

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X7skr May 13, 2021

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Asha Shrivastava May 12, 2021

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[email protected] May 11, 2021

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