"पशुराम ने क्यों किया क्षत्रियों का 21 बार संहार"

"पशुराम ने क्यों किया क्षत्रियों का 21 बार संहार"

"पशुराम ने क्यों किया क्षत्रियों का 21 बार संहार"
महिष्मती नगर के राजा सहस्त्रार्जुन क्षत्रिय समाज के हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य और रानी कौशिक के पुत्र थे। सहस्त्रार्जुन का वास्तवीक नाम अर्जुन था। उन्होने दत्तत्राई को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। दत्तत्राई उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उसे वरदान मांगने को कहा तो उसने दत्तत्राई से 10000 हाथों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उसका नाम अर्जुन से सहस्त्रार्जुन पड़ा। इसे सहस्त्राबाहू और राजा कार्तवीर्य पुत्र होने के कारण कार्तेयवीर भी कहा जाता है।
कहा जाता है महिष्मती सम्राट सहस्त्रार्जुन अपने घमंड में चूर होकर धर्म की सभी सीमाओं को लांघ चूका था। उसके अत्याचार व अनाचार से जनता त्रस्त हो चुकी थी। वेद – पुराण और धार्मिक ग्रंथों को मिथ्या बताकर ब्राह्मण का अपमान करना, ऋषियों के आश्रम को नष्ट करना, उनका अकारण वध करना, निरीह प्रजा पर निरंतर अत्याचार करना, यहां तक की उसने अपने मनोरंजन के लिए मद में चूर होकर अबला स्त्रियों के सतीत्व को भी नष्ट करना शुरू कर दिया था।
एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना के साथ झाड – जंगलों से पार करता हुआ जमदग्नि ऋषि के आश्रम में विश्राम करने के लिए पहुंचा। महर्षि जमदग्रि ने सहस्त्रार्जुन को आश्रम का मेहमान समझकर स्वागत सत्कार में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहते हैं ऋषि जमदग्रि के पास देवराज इन्द्र से प्राप्त दिव्य गुणों वाली कामधेनु नामक अदभुत गाय थी। महर्षि ने उस गाय के मदद से कुछ ही पलों में देखते ही देखते पूरी सेना के भोजन का प्रबंध कर दिया। कामधेनु के ऐसे विलक्षण गुणों को देखकर सहस्त्रार्जुन को ऋषि के आगे अपना राजसी सुख कम लगने लगा। उसके मन में ऐसी अद्भुत गाय को पाने की लालसा जागी। उसने ऋषि जमदग्नि से कामधेनु को मांगा। किंतु ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु को आश्रम के प्रबंधन और जीवन के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया बताकर कामधेनु को देने से इंकार कर दिया। इस पर सहस्त्रार्जुन ने क्रोधित होकर ऋषि जमदग्नि के आश्रम को उजाड़ दिया और कामधेनु को ले जाने लगा। तभी कामधेनु सहस्त्रार्जुन के हाथों से छूट कर स्वर्ग की ओर चली गई।
जब परशुराम अपने आश्रम पहुंचे तब उनकी माता रेणुका ने उन्हें सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई। परशुराम माता-पिता के अपमान और आश्रम को तहस नहस देखकर आवेशित हो गए। पराक्रमी परशुराम ने उसी वक्त दुराचारी सहस्त्रार्जुन और उसकी सेना का नाश करने का संकल्प लिया। परशुराम अपने परशु अस्त्र को साथ लेकर सहस्त्रार्जुन के नगर महिष्मतिपुरी पहुंचे। जहां सहस्त्रार्जुन और परशुराम का युद्ध हुआ। किंतु परशुराम के प्रचण्ड बल के आगे सहस्त्रार्जुन बौना साबित हुआ। भगवान परशुराम ने दुष्ट सहस्त्रार्जुन की हजारों भुजाएं और धड़ परशु से काटकर कर उसका वध कर दिया।
सहस्त्रार्जुन के वध के बाद पिता के आदेश से इस वध का प्रायश्चित करने के लिए परशुराम तीर्थ यात्रा पर चले गए। तब मौका पाकर सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने अपने सहयोगी क्षत्रियों की मदद से तपस्यारत महर्षि जमदग्रि का उनके ही आश्रम में सिर काटकर उनका वध कर दिया। सहस्त्रार्जुन पुत्रों ने आश्रम के सभी ऋषियों का वध करते हुए, आश्रम को जला डाला। माता रेणुका ने सहायतावश पुत्र परशुराम को विलाप स्वर में पुकारा। जब परशुराम माता की पुकार सुनकर आश्रम पहुंचे तो माता को विलाप करते देखा और माता के समीप ही पिता का कटा सिर और उनके शरीर पर 21 घाव देखे।
यह देखकर परशुराम बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने शपथ ली कि वह हैहय वंश का ही सर्वनाश नहीं कर देंगे बल्कि उसके सहयोगी समस्त क्षत्रिय वंशों का 21 बार संहार कर भूमि को क्षत्रिय विहिन कर देंगे। पुराणों में उल्लेख है कि भगवान परशुराम ने अपने इस संकल्प को पूरा भी किया।
पुराणों में उल्लेख है कि भगवान परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करके उनके रक्त से समन्तपंचक क्षेत्र के पांच सरोवर को भर कर अपने संकल्प को पूरा किया | कहा जाता है की महर्षि ऋचीक ने स्वयं प्रकट होकर भगवान परशुराम को ऐसा घोर कृत्य करने से रोक दिया था तब जाकर किसी तरह क्षत्रियों का विनाश भूलोक पर रुका | तत्पश्चात भगवान परशुराम ने अपने पितरों के श्राद्ध क्रिया की एवं उनके आज्ञानुसार अश्वमेध और विश्वजीत यज्ञ किया |
🚩जय श्री राम🚩

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कामेंट्स

anil bajpai Dec 10, 2017
बेहतरीन जानकारी दी

Kamaraj Dec 10, 2017
जेय परशुरामं !

Brijmohan pachapandey Dec 10, 2017
Jay shree purushottam.bhgwan.ki.jay ho.aapki. Good posts thank you very much like it good night ji

Ajnabi Dec 10, 2017
very nice good night jay shree Radhe krishna vickeyda

MANOJ VERMA Dec 11, 2017
राधे राधे ll राधे राधे 🚩

Bell Sindoor Like +76 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 452 शेयर
Neha Dwvedi Aug 19, 2018

1. "राधे कृष्ण" का मतलब,
"राह दे कृष्ण"
2. "राधिका कृष्ण" का मतलब,
"राह दिखा कृष्ण"
3. "मीरा कृष्ण" का मतलब,
"मेरा कृष्ण‘
4. "हरे कृष्ण" का मतलब,
"हर एक का कृष्ण"
🌷 जय श्री राधे कृष्णा🙏⛳
*🙏#शुभरात्रि...

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ऊँ🙏 शुभ पंचांग🌹शुभ राशिफल 🙏ऊँ

सोमवार 2⃣0⃣ अगस्त 2⃣0⃣1⃣8⃣

तिथि: दशमी - २९:१६+ तक

#Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)

#Whatsapp no :- 09911020152

सूर्योदय: ०५:५२
सूर्यास्त: १८:५५
हिन्दु सूर्योदय: ०५:५६
हिन्दु सूर्यास्त: १८:५१
चन्द्रोदय: १४:३०
...

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घोड़ा वहीं जीतता है जिसका सवार अच्छा हो और परिवार वही सुखी रहता है जिसका मुखिया समझदार हो

Bell Jyot Fruits +26 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 83 शेयर
Aechana Mishra Aug 19, 2018

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Ashish shukla Aug 19, 2018

Like Pranam Belpatra +117 प्रतिक्रिया 45 कॉमेंट्स • 693 शेयर

⚘🌻⚘🌻⚘good night ji ⚘🌻⚘🌻⚘

Dhoop Milk Fruits +65 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 199 शेयर
Kamal Kumar Varshney Aug 19, 2018

Jai Hind Jai Bharat
Good morning everyone s
Jai Shri Ram Jai Shri Krishna
OM Nmh Shivay OM Nmh Shivay

Pranam Like +4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 65 शेयर
seema Aug 19, 2018

शंख की पूजा के लिये मंत्र
शंख की पूजा इस मन्त्र से करनी चाहिए-त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते।🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

🐚
शंख का नाम लेते ही मन में पूजा - और भक्ति
की भावना आ जाती है ...... !

�...

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