yogesh chopra
yogesh chopra Aug 4, 2017

1⃣ मूर्ती पूजा का रहस्य जरूर पढ़े :- _____________________________________ कोई कहे की की हिन्दू मूर्

#ज्ञानवर्षा
1⃣ मूर्ती पूजा का रहस्य जरूर पढ़े :-

कोई कहे की की हिन्दू मूर्ती पूजा क्यों
करते हैं तो उन्हें बता दें
मूर्ती पूजा का रहस्य :-
स्वामी विवेकानंद को एक राजा ने
अपने भवन में बुलाया और बोला,
“तुम हिन्दू लोग मूर्ती की पूजा करते हो!
मिट्टी, पीतल, पत्थर की मूर्ती का.!
पर मैं ये सब नही मानता।
ये तो केवल एक पदार्थ है।”
उस राजा के सिंहासन के पीछे
किसी आदमी की तस्वीर लगी थी।
विवेकानंद जी कि नजर उस
तस्वीर पर पड़ी।
विवेकानंद जी ने राजा से पूछा,
“राजा जी, ये तस्वीर किसकी है?”
राजा बोला, “मेरे पिताजी की।”
स्वामी जी बोले, “उस तस्वीर को अपने
हाथ में लीजिये।”
राज तस्वीर को हाथ मे ले लेता है।
स्वामी जी राजा से : “अब आप उस
तस्वीर पर थूकिए!”
राजा : “ये आप क्या बोल रहे हैं
स्वामी जी.?
“स्वामी जी : “मैंने कहा उस
तस्वीर पर थूकिए..!”
राजा (क्रोध से) : “स्वामी जी, आप होश मे
तो हैं ना? मैं ये काम नही कर सकता।”
स्वामी जी बोले, “क्यों?
ये तस्वीर तो केवल
एक कागज का टुकड़ा है,
और जिस पर कूछ रंग लगा है।
इसमे ना तो जान है,
ना आवाज,
ना तो ये सुन सकता है,
और ना ही कूछ बोल सकता है।”
और स्वामी जी बोलते गए,
“इसमें ना ही हड्डी है और ना प्राण।
फिर भी आप इस पर कभी थूक
नही सकते।
क्योंकि आप इसमे अपने
पिता का स्वरूप देखते हो।
और आप इस तस्वीर का अनादर
करना अपने पिता का अनादर करना
ही समझते हो।”
थोड़े मौन के बाद स्वामी जी आगे कहाँ,
“वैसे ही, हम हिंदू भी उन पत्थर, मिट्टी,
या धातु की पूजा भगवान का स्वरूप मान
कर करते हैं।
भगवान तो कण-कण मे है, पर
एक आधार मानने के लिए और
मन को एकाग्र करने के
लिए हम मूर्ती पूजा करते हैं।”
स्वामी जी की बात सुनकर राजा ने
स्वामी जी के चरणों में गिर कर
क्षमा माँगी।
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2⃣ 👇👇👇👇👇👇👇👇👇

*एक बार एक ग्वालन दूध बेच रही थी और सबको दूध नाप-नाप कर दे रही थी । उसी समय एक नौजवान दूध लेने आया तो ग्वालन ने बिना नापे ही उस नौजवान का बरतन दूध से भर दिया।*
*वहीं थोड़ी दूर एक साधु हाथ में माला लेकर मनके गिन-गिन कर माल फेरते थे। तभी उनकी नजर ग्वालन पर पड़ी, उन्होंने ये सब देखा और पास ही बैठे व्यक्ति से सारी बात बताकर इसका कारण पूछा । उस व्यक्ति ने बताया कि जिस नौजवान को उस ग्वालन ने बिना नाप के दूध दिया है, वह उस नौजवान से प्रेम करती है, इसलिए उसने उसे बिना नाप के दूध दे दिया ।*
*यह बात साधु के दिल को छू गयी और उन्होंने सोचा कि एक दूध बेचने वाली ग्वालन जिससे प्रेम करती है तो उसका हिसाब नहीं रखती और मैं अपने जिस ईश्वर से प्रेम करता हुँ, उनके लिए सुबह से शाम तक मनके गिन-गिन कर माला फेरता हूं। मुझसे तो अच्छी यह ग्वालन ही है और उन्होंने माला छोड़ दी।*
*जीवन भी ऐसा ही है। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ हिसाब-किताब नहीं होता, और जहाँ हिसाब-किताब होता है, वहाँ प्रेम नहीं होता, सिर्फ व्यापार होता है।...

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*_प्रेम से भरी हुईं "आँखें"_*
*_श्रद्धा से झुका हुआ "सर",_*
*_सहयोग करते हुऐ "हाथ",_*
*_सन्मार्ग पर चलते हुए "पाँव",_*
*_और सत्य से जुडी हुई "जीभ",_*
*_ईश्वर को बहुत पसंद है_*
🐚☀🐚
👏🏻 *_स्नेह वंदन_* 👏🏻
🌿 *_आपका दिन शुभ हो_* 🌿
🐚☀🐚☀🐚☀🐚☀🐚☀
आपका दिन मंगलमय हो

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कामेंट्स

Pashupati Nath Singh Aug 4, 2017
अतिसुन्दर विषय का उल्लेख आपने किया, आपको साधुवाद, हम हिन्दुओं को इसी मुल तत्व को समझना होगा, जहां श्रद्धा और विश्वास वहीं हमारा पुर्णब्रह्म प्रमेश्वर है।जय माता दी ।

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