Jai Mata Di
Jai Mata Di Apr 9, 2021

Jai Mata Di 🙏🙏🙏🙏 Shubh Ratri 9212899445 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

Jai Mata Di
🙏🙏🙏🙏
Shubh Ratri 9212899445
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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कामेंट्स

Bhagat ram Apr 9, 2021
🌹🌹 जय माता दी 🙏🙏🌿💐🌺🌹 शुभ रात्रि वंदन 🙏🙏🌿💐🌺🌹🌹

Ragni Dhiwar Apr 9, 2021
🥀राधे-राधे जी 🥀आपका हरपल मंगलमय हो 🌼शुभ रात्रि वंदन भैया जी🥀🙏🥀

Shanti pathak Apr 9, 2021
🌷🙏जय माता दी ,जय मां जगदम्बे🙏 शुभरात्रि वंदन भाई जी 🌷मातारानी की कृपामयी दृष्टि आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🌷आपका हर पल शुभ एवं खुशियों से परिपूर्ण रहे जी🌷🙏🌷

Archana Singh Apr 9, 2021
🙏🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🙏 शुभ रात्रि वंदन भाई जी🙏🌹 कान्हा जी आपको सदा सुखी रखे ,आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भाई जी🙏🙏🌹🌹

💫Shuchi Singhal💫 Apr 9, 2021
Jai Mata Di Shub Ratri Bhaiya ji Mata Rani ki kirpa aapki family pe bni rhe Bhai ji🙏🍁❇️

Brajesh Sharma Apr 10, 2021
प्रेम से बोलो जय माता दी जय माता दी राम राम जी

r h Bhatt Apr 10, 2021
Jai Ram ji ki Ram ram ji aapka Den magalmay our Shubh Ho ji Vandana ji Jai matage

madan pal 🌷🙏🏼 Apr 10, 2021
जय माता दी शूभ रात्रि वंदन जी माता रानी जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹🌹🌹👏👏👏👏👏🕉️

(((( गोविन्द-गोविन्द नाम )))) . भगवान् की गोवर्धन लीला के समय जब इंद्र देव वर्षा और विनाश का तांडव करके थक गए... . वह वृन्दावन और वृन्दावन वासिओं का कुछ भी अहित नहीं कर पाए तब वह बहुत लज्जित हुए... . वह भगवान् लीला और उनकी शक्ति को पहचान चुके थे, उनका अभिमान चूर-चूर हो चुका था... . वह भगवान् से अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगने की सोंच रहे थे किन्तु साहस नहीं कर पा रहे थे... . तभी आकाश मार्ग में तेज प्रकाश उत्तपन्न हुआ और घंटियों की मधुर ध्वनि गूंजने लगी... . कुछ ही देर में गौ माता सुरभि वहाँ प्रकट हुई और इंद्र को सम्बोधित करते हुए बोली.. . हे देवराज मैंने अब तक आप को गौ वंश का रक्षक ही समझा था, किन्तु अब मेरा भ्रम टूट चुका है... . आपने अपने अहंकार के कारण वृन्दावन के सम्पूर्ण गो वंश को समाप्त करने के लिए अपनी पूरी शक्ति का प्रयोग किये... . किन्तु धन्य है भगवान् श्री कृष्ण जिन्होंने गो वंश ही नहीं समस्त वृन्दावन वासिओं की आपके कोप से रक्षा की... . सत्य में तो वही गौ रक्षक हैं, जिन्होंने गौ वंश के किसी भी प्राणी का तनिक भी अहित नहीं होने दिया.. . अतः में आपको गो वंश का रक्षक मानने से इंकार करती हूँ... . में जा रही हूँ वृन्दावन की पावन धरती पर जहां भगवान् श्री कृष्ण अपनी लीला कर रहे हैं, में जा रही हूँ, श्री हरी के चरणो की वंदना करने... . ऐसा कह कर गौ माता सुरभी वृन्दावन की और चल दी । . वृन्दावन पहुँच कर गौ माता सुरभी भगवान् श्री कृष्ण के सम्मुख प्रकट हुई। . गौ माता को अपने सम्मुख देख कर भगवान कृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए उन्होंने उनके आने का कारण पूंछा... . गौ माता सुरभी बोली, हे स्वामी आप तीनो लोकों के पालन हार हैं, आज आपने अपनी लीला से वृन्दावन के समस्त गौ वंश की रक्षा की है... . में आपके चरणो की वंदना करती हूँ, हे नाथ आज में बहुत प्रसन्न हूँ। . हे स्वामी यू तो समस्त सृष्टि आपके संकेत मात्र से ही चलायमान है, आप ही समस्त सृष्टि की उत्त्पत्ति का कारण है... . आप ही एक मात्र दाता है, समस्त संसार आप ही से उपभोग प्राप्त करता है, किन्तु हे स्वामी आज में आपको कुछ देना चाहती हूँ, कृपया स्वीकार करें... . तब भगवान् प्रेम पूर्वक बोले... हे माता आप मुझको अपनी माता के सामान ही प्रिय हैं, आप जो भी देंगी उसको प्राप्त करना मेरा सौभाग्य होगा। . यह सुनकर गौ माता सुरभी अत्यंत प्रसन्न हुई और बोलीं.. हे स्वामी आपके इस संसार में अनेको नाम हैं.. . किन्तु आज में भी आपको एक नाम देना चाहती हूँ कृपया इसे स्वीकार करें... . तब भगवान् अत्यंत प्रसन्न होते हुए बोले... अवश्य माता, शीघ्र ही बताएं... . गौ माता सुरभी बोलीं हे, नाथ आपने समस्त गौ वंश की रक्षा की इस लिए आज से आप "गोविन्द" नाम से पुकारे जायेंगे... . "गोविन्द" नाम सुनकर भगवान् कृष्ण प्रसन्ता से झूम उठे और गौ माता सुरभी से बोले... . हे माता.. आपका दिया यह नाम अत्यंत सुन्दर है, में इसको सहर्ष स्वीकार करता हूँ.. . मेरे जितने भी नाम है उन सभी नामो में यह नाम मुझको सबसे अधिक प्रिय होगा.. . मैं आपको वचन देता हूँ कि आज से मेरा जो भी भक्त मुझको "गोविन्द" नाम से पुकारेगा, उसके सभी दुःख मैं स्वयं ही वहन करूँगा। . भगवान् और गौमाता सुरभी के मध्य यह वार्तालाप चल ही रहा था तभी वहां देवराज इंद्र भी आप पहुंचे... . उन्होंने भगवान् से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी और "गोविन्द" नाम से भगवान् की वंदना की.. . भगवान् ने प्रसन्न हो कर इन्द्र को क्षमा कर दिया। तत्पश्चात देवराज इंद्र और गौ माता सुरभी ने प्रभु से विदा ली। . इस प्रकार मेरे ठाकुर जी का एक और नाम पड़ा “गोविन्द”... . क्योंकि भगवान् कृष्ण को गायों से विशेष स्नेह था अतः गौ माता द्वारा दिया गया यह गोविन्द नाम भगवान् को अत्यंत प्रिय है। . जो भी भक्त भगवान् को गोविन्द नाम से पुकारता है भगवान् उसकी प्रार्थना को इस प्रकार स्वीकार करते है जैसे गौ माता उनको पुकार रही हो। . इसलिए, भगवान् के जिस भी भक्त को भगवान् का आश्रय प्राप्त करना हो उसे जीवन के प्रत्येक क्षण में गोविन्द-गोविन्द नाम रटते रहना चाहिए। . कृष्ण गोविन्द गोपाल गाते चलो मन के विषयों को हरदम हटाते चलो काम करते चलो नाम जपते चलो हर समय कृष्ण का ध्यान धरते चलो काम की वासना को मिटाते चलो कृष्ण गोविन्द गोपाल गाते चलो .. ~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~

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Mamta Chauhan May 17, 2021

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Renu Singh May 17, 2021

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐अहंकार का सिर नीचा💐💐* प्राचीनकाल में सुंदर नगर में अक्षय भद्र नाम का एक सेठ था | एक दिन उसका सोने में तुलादान हुआ | उस सोने को गरीबों में बांटा गया | उसने ऐलान कर दिया कि कोई भी खाली हाथ न रह जाये | उसने अपने आदमियों को यह देखने के लिये कि नगर में कौन सोने से वंचित रह गया है, दौड़ा दिया | उसके आदमियों ने पूरा नगर छान मारा, किंतु उन्हें ऐसा कोई आदमी नहीं मिला | उन्होंने यह बात आकर सेठ को बता दी | किंतु सेठ को उनकी बात से संतुष्टि नहीं हुयी | वह खुद यह देखने के लिये निकल पड़ा | चलते-चलते उनका काफिला जंगल में से गुजरा | वहां एक मुनि साधना कर रहे थे | सेठ ने मुनि का आशीर्वाद लिया और उन्हें सोना देने की बात कही | मुनि ने नकारात्मक जवाब दिया – “ सेठ जी ! यह आपने अच्छा किया कि गरीबों में सोना बटवा दिया | लेकिन मुझे इससे क्या मतलब मैं मुनी हूं, ईश्वर की साधना और उसकी कृपया ही मेरे लिए दुनिया का सबसे बड़ा धन है |” सेठ को मुनि की यह बात बुरी लगी | उसने कठोर स्वर में कहा – “ दुनिया में ईश्वर की कृपा का कोई मोल नहीं |” मुनी ! सेठ के अहंकार को तोड़ गये | बोले – “ मैं कभी दान नहीं लेता | मेरा प्रभु मुझे उतना दे देता है जितने की मुझे आवश्यकता होती है | फिर भी यदि आप आग्रह कर ही रहे है, तो इस तुलसी के पत्ते के बराबर सोना मुझे दे दे |” इतना कहकर मुनि ने तुलसी के पत्ते पर “ राम ” का नाम लिखकर सेठ को दे दिया | यह देखते ही सेठ का अहंकार बलवत हो उठा | बोला – “ आप मेरा मजाक उड़ा रहे हैं | मुनिदेव ! मेरे घर में सोने की कमी नहीं है | आप निर्धनता में रहते हैं, इसलिए मैं आपकी सहायता करना चाहता था |” “ ठीक है! आप मुझे इस पत्ते के बराबर सोना दे दे |” मुनि ने कहा | सेठ ने खोज कर तराजू मंगाई | उसके एक पलड़े में पता रख दिया और दूसरे में कुछ सोना | किंतु, वह सोना कम रहा, तो सेठ ने और सोना पल्लडे में डाल दिया | लेकिन जैसे-जैसे वह पल्लडे में सोना बढ़ता जा रहा था | वैसे ही सोना कम पड़ता जा रहा था | पन्ने वाला पलड़ा अपनी जगह से हिलाने का नाम तक नहीं ले रहा था | यह देखकर सेठ हक्का-बक्का रह गया | उसे अपनी भूल का एहसास हुआ | वह मुनि के चरणों में गिर पड़ा – “ मुनीव्वर ! मेरी आंखों पर अहंकार का पर्दा पड़ा था | वह उठ गया है, मैं आपका सच्चे दिल से आभारी हूं | सच्चे धनी तो आप ही हैं | सचमुच दुनिया में ईश्वर की कृपया का ही महत्व है, और किसी का नहीं |” इसके बाद सेठ बिल्कुल बदल गया | उसके अंदर का अहंकार बिल्कुल समाप्त हो गया | *मित्रों" “अहंकार एक ऐसा दैत्य हैं, कि जिसके सिर पर चढ़ जाता है | उसकी बुद्धि भ्रष्ट करके रख देता है | साधु-संतों, ऋषि-मुनियों के सामने अहंकार करने वाला सदा मुंह की खाता है | जैसे कि सेठ अक्षय भद्र का मुनि के सम्मुख किया गया | अहंकार ने उसे नीचा देखने पर मजबूर कर दिया |”* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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Shanti pathak May 17, 2021

**जय श्री राधे कृष्णा जी** **शुभरात्रि वंदऩ** एक प्रेरक प्रसंग भीतर   के   ” मैं ”   का   मिटना   ज़रूरी   है  | यूनान के महान दार्शनिक सुकरात  समुन्द्र  तट  पर  टहल  रहे  थे |  उनकी  नजर  तट  पर  खड़े  एक  रोते  बच्चे  पर  पड़ी  | वो  उसके  पास  गए  और  प्यार  से  बच्चे  के  सिर  पर  हाथ  फेर  कर  पूछा  , -‘ ‘तुम  क्यों  रो  रहे  हो  ? लड़के  ने  कहा – ‘ ये  जो  मेरे  हाथ  में  प्याला  है  मैं  उसमें  इस  समुन्द्र  को  भरना  चाहता  हूँ  पर  यह  मेरे  प्याले  में  समाता  ही  नहीं  | बच्चे  की  बात  सुनकर  सुकरात  विस्माद  में  चले  गये  और  स्वयं  रोने  लगे  | अब  पूछने  की  बारी  बच्चे  की  थी  | बच्चा  कहने  लगा – आप  भी  मेरी  तरह  रोने  लगे  पर  आपका  प्याला  कहाँ  है ? सुकरात  ने  जवाब  दिया –  बालक ,  तुम  छोटे  से  प्याले  में  समुन्द्र  भरना  चाहते  हो , और  मैं  अपनी  छोटी  सी  बुद्धि  में  सारे  संसार की  जानकारी  भरना  चाहता  हूँ  | आज  तुमने  सिखा  दिया  कि  समुन्द्र  प्याले  में  नहीं  समा  सकता  है  ,  मैं  व्यर्थ  ही  बेचैन  रहा  |’ यह  सुनके  बच्चे  ने  प्याले  को  दूर  समुन्द्र  में  फेंक  दिया  और  बोला-  “सागर  अगर  तू  मेरे  प्याले  में  नहीं  समा  सकता  तो  मेरा  प्याला तो  तुम्हारे  में  समा  सकता  है  | इतना  सुनना  था  कि  सुकरात  बच्चे  के  पैरों  में  गिर  पड़े  और  बोले- बहुत  कीमती  सूत्र  हाथ  में  लगा  है  | हे  परमात्मा  !  आप  तो   सारा  का  सारा  मुझ  में  नहीं  समा  सकते  हैं  पर  मैं  तो  सारा  का  सारा  आपमें  लीन  हो  सकता  हूँ  | ईश्वर  की  खोज  में  भटकते  सुकरात  को  ज्ञान  देना  था  तो  भगवान  उस  बालक  में  समा  गए  | सुकरात  का  सारा  अभिमान  ध्वस्त  कराया  |  जिस  सुकरात  से  मिलने  के लिए सम्राट  समय  लेते  थे  वह  सुकरात  एक  बच्चे  के चरणों  में  लोट  गए  थे  | ईश्वर  जब  आपको  अपनी  शरण  में  लेते  हैं  तब  आपके  अंदर  का  ” मैं ”  सबसे  पहले  मिटता  है  | या  यूँ  कहें  जब  आपके  अंदर  का  ” मैं ”  मिटता  है  तभी  ईश्वर  की  कृपा  होती  है । एक प्रेरक प्रसंग टी  एन  शेषन  मुख्य  चुनाव  आयुक्त  थे  तब  एक  बार  वे  उत्तर  प्रदेश  की  यात्रा  पर  गए ।   उनके  साथ  उनकी  पत्नी  भी  थीं । रास्ते  में  एक  बाग  के  पास  वे  लोग  रुके ।  बाग  के  पेड़  पर  बया  पक्षियों  के  घोसले  थे ।  उनकी  पत्नी  ने  कहा  दो घोंसले मंगवा  दीजिए  मैं  इन्हें  घर  की  सज्जा  के  लिए  ले  चलूंगी ।  उन्होंने  साथ  चल  रहे  पुलिस  वालों  से  घोसला  लाने  के  लिए कहा ।  पुलिस  वाले  वहीं  पास  में  गाय  चरा  रहे  एक  बालक  से  पेड़  पर  चढ़कर  घोसला    लाने के बदले दस रुपए देने की बात  कही  ,  लेकिन  वह  लड़का  घोसला  तोड़  कर  लाने  के  लिए  तैयार  नहीं  हुआ ।  टी  एन  शेषन  उसे  दस  की  जगह  पचास  रुपए देने की बात कही फिर भी वह लड़का  तैयार नहीं हुआ।   उसने  शेषन  से  कहा  साहब  जी !  घोसले  में  चिड़िया  के  बच्चे  हैं  शाम  को  जब  वह  भोजन  लेकर  आएगी  तब  अपने  बच्चों  को  न  देख  कर  बहुत  दुखी  होगी ,  इसलिए  आप  चाहे  जितना  पैसा  दें  मैं  घोसला  नहीं  तोड़  सकता । इस  घटना  के  बाद  टी. एन . शेषन  को  आजीवन  यह  ग्लानि  रही  कि  जो  एक  चरवाहा  बालक  सोच  सका  और  उसके  अन्दर  जैसी  संवेदनशीलता  थी ,  इतने  पढ़े- लिखे  और  आई ए एस  होने  के  बाद  भी  वे  वह  बात  क्यों  नहीं  सोच  सके ,  उनके  अन्दर  वह  संवेदना  क्यों  नहीं  उत्पन्न  हुई  ? उन्होंने   कहा  उस  छोटे  बालक  के  सामने  मेरा  पद  और  मेरा  आई ए एस  होना  गायब  हो  गया ।  मैं  उसके  सामने  एक  सरसों के  बीज  के  समान  हो  गया ।  शिक्षा ,  पद  और  सामाजिक  स्थिति  मानवता  के  मापदण्ड  नहीं  हैं । प्रकृति  को  जानना  ही  ज्ञान  है ।  बहुत  सी  सूचनाओं  के  संग्रह  से  कुछ  नहीं  प्राप्त  होता ।  जीवन  तभी  आनंददायक  होता  है जब  ज्ञान , संवेदना  और  बुद्धिमत्ता  हो ।*

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Archana Singh May 17, 2021

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*दिनचर्या में बदलाव कर पाएं सेहतमंद जिंदगी* 1. व्यायाम हमारे लिए बहुत जरूरी होता है। एक्सरसाइज के जरिए आप फिट तो रहते हैं ही, साथ ही आपको स्फूर्ति भी महसूस होगी इसलिए अपने दैनिक जीवन में व्यायाम को जरूर शामिल करें। 2. रोज खूब पानी पिएं। यह आपके शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है, साथ ही आपके चेहरे पर भी ग्लो आएगा। इसलिए पानी पीने में कंजूसी न करें।कोशिश करें कि अपनी डाइट में प्रोटीन को जरूर शामिल करें। 3. रात का भोजन जल्दी कर लें, साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि रात में ज्यादा हैवी खाना खाने से बचें। 4. मसालेदार खाने का कम से कम सेवन करें 5. बैलेंस डाइट पर ज्यादा ध्यान दें, साथ ही इसमें पोषक तत्वों को शामिल करें। 6. किसी-किसी की जल्दी-जल्दी खाना खाने की आदत होती है। अगर आप भी इसमें शुमार हैं तो इस आदत को जल्द से जल्द सुधार लें और धीरे-धीरे खाना खाने की आदत डालें।फ्रूट्स को करें अपनी डाइट में शामिल। मौसमी फलों का सेवन जरूर करें। *ऐसे और भी कई आयुर्वेद में बताये गए एवं माने हुए सुप्रसिद् व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाले कारगर नुस्ख़े पढ़ने और लाभ प्राप्त करने के लिए एप्प इंस्टॉल करे*p

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sanjay Awasthi May 17, 2021

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R.S.RANA May 17, 2021

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ANITA THAKUR May 17, 2021

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