🕉शनिदेवाय नमः 🌹🙏 अधर्म को क्षमा 🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹 एक बार की बात है। धर्म और अधर्म दोनों अपने अपने रथ पर बैठकर कहीं जा रहे थे। तभी उन दोनों के रथ एक ही राह में आमने सामने हो गए। अब कौन दूसरे के लिए रास्ता छोड़े, इस पर उनमें विवाद छिड़ गया। धर्म ने अधर्म को समझाया, 'भाई, तू अधर्म है, मैं धर्म हूं। मेरा मार्ग ठीक होता है। अपना रथ हटा कर मुझे रास्ता दे। मैं फलदायक, पुण्यदायक, विद्वानों द्वारा प्रशंसित और देवों तथा मनुष्यों सभी के द्वारा पूजित हूं। इसलिए मार्ग दिए जाने योग्य मैं ही हूं।' अधर्म ने जवाब दिया, 'हे धर्म, मैं अधर्म हूं और निर्भय-बलवान हूं। मैंने आज तक कभी भी किसी को मार्ग नहीं दिया। यह मेरे स्वभाव के ही विरुद्ध है। मैं तुझे कैसे मार्ग दे सकता हूं ? धर्म ने फिर समझाया, 'देखो भाई, लोक में पहले धर्म का प्रादुर्भाव हुआ, बाद में अधर्म का। धर्म ही ज्येष्ठ है, धर्म ही श्रेष्ठ है, सनातन है। इसलिए हे कनिष्ठ, तू मुझ ज्येष्ठ के लिए मार्ग छोड़ दे।' इस पर अधर्म बोला, 'यह सब कोई उचित कारण नहीं हैं। और तू मुझसे याचना थोड़े ही कर रहा है। इस तरह मैं मार्ग छोड़ूंगा भी नहीं। आओ, युद्ध करें। जिसकी जीत हो, रास्ता उसी का।' फिर धर्म ने समझाने की कोशिश की, 'हे अधर्म! मै चारों दिशाओं में फैला हुआ हूं, महाबलवान हूं, अनन्त यशस्वी और अतुलनीय हूं। सभी गुणों से युक्त हूं। मुझसे युद्ध में तू कैसे जीतेगा ?' व्यंग्य करते हुए अधर्म ने जवाब दिया, 'लोहे से सोना पिघलता है, सोने से लोहा नहीं! आज अधर्म ही धर्म को पराजित करेगा!' यह सुनकर धर्म को बड़ा दुख हुआ। लेकिन फिर अपने को संभालते हुए सहज भाव से वह बोला, 'भाई, तुझे यदि युद्ध करने की ही चाह है, तेरे लिए न कोई ज्येष्ठ है न आदरणीय, तो मैं अप्रिय की अपेक्षा प्रिय की तरह ही तुझे स्वयं मार्ग देता हूं और तेरे वचनों को भी क्षमा करता हूं।' और शांत भाव से अधर्म को जाने का मोका दे दिया ।

🕉शनिदेवाय  नमः 🌹🙏
अधर्म को क्षमा
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹
     एक बार की बात है। धर्म और अधर्म दोनों अपने अपने रथ पर बैठकर कहीं जा रहे थे। तभी उन दोनों के रथ एक ही राह में आमने सामने हो गए। अब कौन दूसरे के लिए रास्ता छोड़े, इस पर उनमें विवाद छिड़ गया। धर्म ने अधर्म को समझाया, 'भाई, तू अधर्म है, मैं धर्म हूं। मेरा मार्ग ठीक होता है। अपना रथ हटा कर मुझे रास्ता दे। मैं फलदायक, पुण्यदायक, विद्वानों द्वारा प्रशंसित और देवों तथा मनुष्यों सभी के द्वारा पूजित हूं। इसलिए मार्ग दिए जाने योग्य मैं ही हूं।'
   अधर्म ने जवाब दिया, 'हे धर्म, मैं अधर्म हूं और निर्भय-बलवान हूं। मैंने आज तक कभी भी किसी को मार्ग नहीं दिया। यह मेरे स्वभाव के ही विरुद्ध है। मैं तुझे कैसे मार्ग दे सकता हूं ? धर्म ने फिर समझाया, 'देखो भाई, लोक में पहले धर्म का प्रादुर्भाव हुआ, बाद में अधर्म का। धर्म ही ज्येष्ठ है, धर्म ही श्रेष्ठ है, सनातन है। इसलिए हे कनिष्ठ, तू मुझ ज्येष्ठ के लिए मार्ग छोड़ दे।'
   इस पर अधर्म बोला, 'यह सब कोई उचित कारण नहीं हैं। और तू मुझसे याचना थोड़े ही कर रहा है। इस तरह मैं मार्ग छोड़ूंगा भी नहीं। आओ, युद्ध करें। जिसकी जीत हो, रास्ता उसी का।' फिर धर्म ने समझाने की कोशिश की, 'हे अधर्म! मै चारों दिशाओं में फैला हुआ हूं, महाबलवान हूं, अनन्त यशस्वी और अतुलनीय हूं। सभी गुणों से युक्त हूं। मुझसे युद्ध में तू कैसे जीतेगा ?'
   व्यंग्य करते हुए अधर्म ने जवाब दिया, 'लोहे से सोना पिघलता है, सोने से लोहा नहीं! आज अधर्म ही धर्म को पराजित करेगा!' यह सुनकर धर्म को बड़ा दुख हुआ। लेकिन फिर अपने को संभालते हुए सहज भाव से वह बोला, 'भाई, तुझे यदि युद्ध करने की ही चाह है, तेरे लिए न कोई ज्येष्ठ है न आदरणीय, तो मैं अप्रिय की अपेक्षा प्रिय की तरह ही तुझे स्वयं मार्ग देता हूं और तेरे वचनों को भी क्षमा करता हूं।' और शांत भाव से अधर्म को जाने का मोका दे दिया ।

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कामेंट्स

K K MORI May 9, 2020
ऊँ हं हनुमंते नम:🚩 शुभ रात्रि वंदन🙏 सिया राम जी एवं बजरंग बली जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे आप का दिन शुभ एवं मंगलमय हो🌹 🌸

ಗಿರಿಜಾ ನೂಯಿ May 9, 2020
Good Night,Sweet Dreams Ji 🕉️🕉️🕉️🕉️Om Shri Sham Shanishwaraye Namo Namah🙏✳️✳️🙏 🚩🚩🚩🚩🚩Jai Shri Ram☀️☀️☀️☀️ 🚩🚩🚩🚩Jai Shri Hanuman Ji🌳🌳🌳🌳 Super Post Ji👌👌👌👌👌 Have a wonderful weekend, happy sleep,Shri Ram Hanuman, Shanidev ji bless you & your family always be happy, healthy & wealthy dear sister ji🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌸🌸🌸🌸💐💐💐💐🏵️🏵️🏵️🏵️🌻🌻🌻🌻✳️🌟✳️🌜✳️🌟✳️🌜✳️🌟✳️🌜✳️🌟✳️🌜✳️🌟✳️🌜✳️

Sanjay Sharma May 9, 2020
जय श्री राधे श्याम जय श्री सीताराम जय श्री शनिदेव ओम् शन् शनिश्चराय नमः शुभ संध्या जी मेरी बहन आप कैसे हैं बहन आप सदा खुश रहिए और सदा तरक्की की राह पर अग्रसर रहे ईश्वर मेरी बहन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती रहे आपका हर पल सुखमय हो

Preeti jain May 9, 2020
🍃🍃🙏🙏🌹🙋🏼‍♀️ जय श्री कृष्णा राधे राधे जी भेजते रहिए अपनेपन के रंग एक दूसरे तक जी मुलाकात चाहे जब भी हो 🍂🌼🌼🥀🥀👌👌👈🍁🍃🙏🌹🙏 अपनेपन का एहसास है तो रोज महसूस होता रहे जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि वंदन आप सभी का आने वाला कल मंगलमय हो जी🥀🥀🥀🍂🍂🍃🍃🌹🙏🙏

Anilkumar Marathe May 9, 2020
🙏जय श्री कृष्ण नमस्कार आदरणीय देवी जी !! 🌹अपने हौंसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी है, अपनी तकलीफ को यह बताओ कि तुम्हारा हौंसला कितना बड़ा है, जीतता वोही है जिसके इरादों में जान होती है !! भगवान आनेवाले सभी संकटो से आपकी रक्षा करे !! 🙏शुभरात्री स्नेह वंदन जी !!

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 May 9, 2020
Good Night My Sister ji 🙏🙏 Jay Shree Radhe Radhe Radhe ji 🙏 God bless you and your Family Always Be Happy My Sister ji 🙏 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji Aap Hamesha Khush Rahe ji 🙏🙏🌹🔔🔔🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Archana Singh May 9, 2020
जय श्री राम शुभ रात्रि वंदन मेरी प्यारी बहना जी आपका हर पल मंगलमय हो🙏🙏🌹🌹

Anjana Gupta May 9, 2020
राम राम मेरी प्यारी बहना जी आपकी हर मनोकामना राम जी पूरी करे आप का हर पल खुशियों भरा हो शुभ रात्रि वंदन मेरी प्यारी बहना जी 🌹🙏

Mohanmira.nigam May 9, 2020
Jay shri Sita Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay Jay vishnu.hari.ji Radhe krishna.ji nice

Mohanmira.nigam May 9, 2020
Jay shri ganesh ji SANI dev ji hanuman ji Bholay.baba.ki.jay

🌼कृष्णा🌼 May 9, 2020
🏵️🌹🏵️जय श्री कृष्ण जय श्री माता की जय महावीर हनुमान की जय श्री शनिदेव की बहन, सादर चरण स्पर्श करता हूँ मेरी प्यारी बहना रानी,प्रभु और श्रीमाता की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे आपका हर एक पल खुशियों से भरा रहे बहन,श्रीहनुमान जी सदा रक्षा करें शुभरात्रि वन्दन बहन🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹

j p Shrivastava May 9, 2020
jai shree Krishna jai shree Radhe jai shree Ganesh good night Shree jee

🇮🇳🇮🇳Jay Hind 🇮🇳🇮🇳 May 9, 2020
Jay Shri Ram Jai Veer Hanuman Jai Bajrangbali Jai Sani Dav ki kirpa ap or appka pirvar par sada Bani Raha app ka ana walla Din Shubh ho mangalmay ho aap Sada khush raho Meri Bahana ji 🌹🙏

Ramesh Soni.33 May 9, 2020
🌹🌹 Jay Bajrangbali ki 🚩☘☘Jay Shri Maharaj ki🏴🏴🏴🏴🏴🏴🏴🙏🙏🏴🏴🏴🏴🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

neeta trivedi May 10, 2020
जय श्री राम शुभ प्रभात वंदन प्यारी बहना जी आप का हर एक पल शुभ और मंगलमय हो happy mother's day sweet sweet bahena ji 🙏🌹🌹🙏

brijmohan kaseara May 11, 2020
धर्म की जय हो जय श्री महाकाल जी ।बहुत बढ़िया प्रस्तुति है आपकी ।धन्यवाद बहुत सुन्दर । Happy mothars day to celebrate

Anjana Gupta May 9, 2020

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Sumitra Soni May 9, 2020

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suman Kumar Singh May 8, 2020

👉जब शनि देव ने ली पांडवों की परीक्षा, पढ़ें कथा👈 पाण्डवों का अज्ञातवास समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था। पांचों पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल में छूपने का स्थान ढूंढ रहे थे,उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन में विचार आया कि इन सबमें बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाए। देव ने कई योजन दूरी में एक माया का महल बनाया उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।   अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी। और वह आकर्षित हो गए। भीम, यधिष्ठिर से बोले-भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ। भीम महल के द्वार पर पहुंचे वहां शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे, भीम ने कहा,  मुझे महल देखना है...  शनिदेव ने कहा-इस महल की कुछ शर्तें हैं  :    पहली शर्त :  महल के चार कोने में से आप एक ही कोना देख सकते हैं।   दूसरी शर्त :  महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करना होगी।    तीसरी शर्त : अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।   भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूं ऐसा ही होगा।    और वह महल के पूर्व छोर की तरफ गए।    वहां जाकर उन्होंने अद्भुत पशु-पक्षी और फूलों व फलों से लदे वृक्षों का नजारा किया, आगे जाकर देखते हैं कि तीन कुएं है अगल-बगल में छोटे और बीच में एक बडा कुंआ।   बीच वाला बड़े कुए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो पर बडे कुएं का पानी आधा ही रहता है, पूरा नहीं भरता। इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौट कर दरबान के पास आता है।   दरबान -क्या देखा आपने?   भीम- महाशय मैंने ऐसे पेड़-पौधे पशु-पक्षी देखे जो मैंने पहले कभी नही देखे। एक बात समझ में नही आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं  भर पाता यह समझ में नही आया।   दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गए हैं। और भीम को बंदी घर में बैठा दिया गया।   अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बतादी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चले गए।   आगे जाकर अर्जुन क्या देखते हैं। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल।   बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही थी। अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।   दरबान ने पूछा क्या देखा,   अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।   देव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी है।   नकुल आया बोला मुझे महल देखना है फिर वह उतर दिशा की और गया वहां उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियाओं का दूध पीती है उसके कुछ समझ नही आया द्वार पर आया।     क्या देखा?   नकुल बोला महाशय गाय बछियाओं का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया।   सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की तरफ अंतिम कोना देखने के लिए गया। क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डौले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है। समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।   चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गए।   भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वह शर्त अनुसार बंदी है।   युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा?   भीम ने कुएं के बारे में बताया।     तब युधिष्ठिर ने कहा-यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पाएंगे।   भीम को छोड दिया।   अर्जुन से पूछा तुमने क्या देखा ?   उसने फसल के बारे में  बताया युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग मे होने वाला है वंश परिवर्तन अर्थात ब्राहमन के घर बनिये की लड़की और बनिये के घर शुद्र की लडकी ब्याही जाएगी। अर्जुन भी छूट गया। नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृत्तांत बताया।  तब युधिष्ठिर ने कहा-कलियुग में माताएं अपनी बेटियों के घर में पलेगी बेटी का दाना खाएगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे। तब नकुल भी छूट गया। सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृत्तांत बताया...  तब युधिष्ठिर बोले-कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।। चारों भाई मुक्त हुए। शनिदेव ने माना कि युधिष्ठिर सबसे अधिक बुद्धिमान है। कथा के अनुसार कलयुग में सब घटित हो रहा है।

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Archana Singh May 9, 2020

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जो व्यक्ति शनि कवच का पाठ नियम से करता है उसे शनि महाराज डराते नहीं है. शनि की दशा हो, अन्तर्दशा हो, शनि की ढैय्या हो अथवा शनि की साढ़ेसाती ही क्यों ना हो, कवच का पाठ करने पर कष्ट, व्याधियाँ, विपत्ति, आपत्ति, पराजय, अपमान, आरोप-प्रत्यारोप तथा हर प्रकार के शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक कष्टों से दूर रहता है. जो व्यक्ति इस कवच का पाठ निरंतर करता है उसे अकाल मृत्यु तथा हत्या का भय भी नहीं रहता है क्योंकि ढाल की तरह व्यक्ति की सुरक्षा होती है और ना ही ऎसे व्यक्ति को लकवे आदि का डर ही होता है, यदि किसी कारणवश आघातित हो भी जाए तब भी विगलांग नहीं होता है. चिकित्सा के बाद व्यक्ति फिर से चलना-फिरना आरंभ कर देता है. विनियोग : अस्य श्रीशनैश्चर कवच स्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द: शनैश्चरो देवता, श्रीं शक्ति: शूं कीलकम्, शनैश्चर प्रीत्यर्थे पाठे विनियोग: ।    नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी गृध्रस्थितत्रासकरो धनुष्मान् । चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रसन्न: सदा मम स्याद्वरद: प्रशान्त:।।1।। श्रृणुध्वमृषय: सर्वे शनिपीडाहरं महत् । कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम् ।।2।। कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम् । शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम् ।।3।। ऊँ श्रीशनैश्चर: पातु भालं मे सूर्यनंदन: । नेत्रे छायात्मज: पातु कर्णो यमानुज: ।।4।। नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । स्निग्धकण्ठश्च मे कण्ठ भुजौ पातु महाभुज: ।।5।। स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रद: । वक्ष: पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्थता ।।6।। नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । ऊरू ममाSन्तक: पातु यमो जानुयुगं तथा ।।7।। पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेन् मे सूर्यनन्दन: ।।8।। इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य य: । न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवन्ति सूर्यज: ।।9।। व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा । कलत्रस्थो गतोवाSपि सुप्रीतस्तु सदा शनि: ।।10।। अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे । कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित् ।।11।। इत्येतत् कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा। जन्मलग्नस्थितान्दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभु: ।।12।।  इस कवच को “ब्रह्माण पुराण” से लिया गया है, जिन व्यक्तियों पर शनि की ग्रह दशा का प्रभाव बना हुआ है उन्हें इसका पाठ अवश्य करना चाहिए. जो व्यक्ति इस कवच का पाठ कर शनिदेव को प्रसन्न करता है उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं. जन्म कुंडली में शनि ग्रह के कारण अगर कोई दोष भी है तो वह इस कवच के नियम से किए पाठ से दूर हो जाते हैं.

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🚩 🌿🌹जय श्री राम🌹🌿🚩 ⛲⛲⛲⛲⛲⛲⛲⛲⛲ 🎎🌺🕯️महाराणा प्रताप सिंह जयंती🌺🕯️🎎 🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️ 🎪🌲🌺ॐ श्री शनिदेवाय नमः🌺🌲🎪 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🚩🎆🍑ॐ श्री हनुमन्ते नमः🍑🎆🚩 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ⚛️🌳🏵️शुभ शनिवार🏵️🌳⚛️ 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🌹🌻🎆 सुप्रभात 🌻 🎆🌹 🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅 🌹🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌹 🙏आपको सपरिवार महाराणा प्रताप सिंह जयंती और शुभ शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🎎आप और आपके सम्पूर्ण परिवार पर श्रीराम भक्त🥀 🍑हनुमान जी भगवान शनिदेव जी और की कृपा 🌹 💐दृष्टि सदा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 🙏 🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆 🍑आपका शनिवार का प्रातः काल शुभ अतिसुन्दर🍑 🎭चिन्तामुक्त शांतिमय और मंगलमय व्यतीत हो🎭 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🚩🌿🌺जय श्री राम🌹🌿🚩 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️

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