Naresh Bhai
Naresh Bhai Mar 23, 2019

Night story🌝🌝 🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂👨🏻‍🦳👨🏻‍🦳 *✍ एक बहुत अमीर आदमी ने रोड के किनारे एक भिखारी से पूछा.. "तुम भीख क्यूँ मांग रहे हो जबकि तुम तन्दुरुस्त हो...??"* *भिखारी ने जवाब दिया... "मेरे पास महीनों से कोई काम नहीं है...* *अगर आप मुझे कोई नौकरी दें तो मैं अभी से भीख मांगना छोड़ दूँ"* *अमीर मुस्कुराया और कहा.. "मैं तुम्हें कोई नौकरी तो नहीं दे सकता ..* *लेकिन मेरे पास इससे भी अच्छा कुछ है* *क्यूँ नहीं तुम मेरे बिज़नस पार्टनर बन जाओ* *भिखारी को उसके कहे पर यकीन नहीं हुआ* *"ये आप क्या कह रहे हैं क्या ऐसा मुमकिन है...?"* *"हाँ मेरे पास एक चावल का प्लांट है.. तुम चावल बाज़ार में सप्लाई करो और जो भी मुनाफ़ा होगा उसे हम महीने के अंत में आपस में बाँट लेंगे.."* *भिखारी के आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े "आप मेरे लिए जन्नत के फ़रिश्ते बन कर आये हैं मैं किस कदर आपका शुक्रिया अदा करूँ.."* *फिर अचानक वो चुप हुआ और कहा.. "हम मुनाफे को कैसे बांटेंगे..?* *क्या मैं 20% और आप 80% लेंगे ..या मैं 10% और आप 90% लेंगे..* *जो भी हो ...मैं तैयार हूँ और बहुत खुश हूँ..."* *अमीर आदमी ने बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ रखा "मुझे मुनाफे का केवल 10% चाहिए बाकी 90% तुम्हारा .. ताकि तुम तरक्की कर सको.."* *भिखारी अपने घुटने के बल गिर पड़ा.. और रोते हुए बोला...* *"आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा... मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूँ ...।* *और अगले दिन से भिखारी ने काम शुरू कर दिया.. उम्दा चावल और बाज़ार से सस्ते... और दिन रात की मेहनत से.. बहुत जल्द ही उसकी बिक्री काफी बढ़ गई... रोज ब रोज तरक्की होने लगी....* *और फिर वो दिन भी आया जब मुनाफा बांटना था और वो 10% भी अब उसे बहुत ज्यादा लग रहा था... उतना उस भिखारी ने कभी सोचा भी नहीं था... अचानक एक शैतानी ख्याल उसके दिमाग में आया...* *"दिन रात मेहनत मैंने की है...और उस अमीर आदमी ने कोई भी काम नहीं किया.. सिवाय मुझे अवसर देने की.. मैं उसे ये 10% क्यूँ दूँ ... वो इसका हकदार बिलकुल भी नहीं है..।* *और फिर वो अमीर आदमी अपने नियत समय पर मुनाफे में अपना हिस्सा 10% वसूलने आया और भिखारी ने जवाब दिया* *" अभी कुछ हिसाब बाक़ी है, मुझे यहाँ नुकसान हुआ है, लोगों से कर्ज की अदायगी बाक़ी है, ऐसे शक्लें बनाकर उस अमीर आदमी को हिस्सा देने को टालने लगा."* *अमीर आदमी ने कहा के "मुझे पता है तुम्हे कितना मुनाफा हुआ है फिर कयुं तुम मेरा हिस्सा देनेसे टाल रहे हो ?"* *उस भिखारी ने तुरंत जवाब दिया "तुम इस मुनाफे के हकदार नहीं हो ..क्योंकि सारी मेहनत मैंने की है..."* *अब सोचिये... अगर वो अमीर हम होते और भिखारी से ऐसा जवाब सुनते .. तो ...हम क्या करते ?????* *ठीक इसी तरह..... भगवान ने हमें जिंदगी दी.. हाथ- पैर.. आँख-कान.. दिमाग दिया.. समझबूझ दी... बोलने को जुबान दी... जज्बात दिए..."* *हमें याद रखना चाहिए कि दिन के 24 घंटों में 10% भगवान का हक है....* *हमें इसे राज़ी ख़ुशी भगवान के नाम सिमरन में अदा करना चाहिए.* *अपनी Income से 10% निकाल कर अच्छे कामो मे लगाना चाहिए और...* *🙇भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिसने हमें जिंदगी दी सुख दिए ....* 🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻

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प्यारे सुंदर युगल सरकार राधा सच्चिदानंद ठाकुर जी की जय 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 अनेकों भकतवृंदो ने ठाकुर जी को अनेको विधियों की उपासना करके पाया बस शरत इतनी है कि लगन सच्ची और मन में दृढ़ विश्वास होना चाहिए। मेरे पिता जी कहते थे कि ठाकुर जी उनसे बातें करते हैं। दासी पहले भी विश्वास करती थी अब भी करती है। 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 विश्वास की कथा है ये 😊🌹 *कहानी* 🌹☺ एक बेटी ने एक संत से आग्रह किया कि वो घर आकर उसके बीमार पिता से मिलें, प्रार्थना करें...बेटी ने ये भी बताया कि उसके बुजुर्ग पिता पलंग से उठ भी नहीं सकते... जब संत घर आए तो पिता पलंग पर दो तकियों पर सिर रखकर लेटे हुए थे... एक खाली कुर्सी पलंग के साथ पड़ी थी...संत ने सोचा कि शायद मेरे आने की वजह से ये कुर्सी यहां पहले से ही रख दी गई... संत...मुझे लगता है कि आप मेरी ही उम्मीद कर रहे थे... पिता...नहीं, आप कौन हैं... संत ने अपना परिचय दिया...और फिर कहा...मुझे ये खाली कुर्सी देखकर लगा कि आप को मेरे आने का आभास था... पिता...ओह ये बात...खाली कुर्सी...आप...आपको अगर बुरा न लगे तो कृपया कमरे का दरवाज़ा बंद करेंगे... संत को ये सुनकर थोड़ी हैरत हुई, फिर भी दरवाज़ा बंद कर दिया... पिता...दरअसल इस खाली कुर्सी का राज़ मैंने किसी को नहीं बताया...अपनी बेटी को भी नहीं...पूरी ज़िंदगी, मैं ये जान नहीं सका कि प्रार्थना कैसे की जाती है...मंदिर जाता था, पुजारी के श्लोक सुनता...वो सिर के ऊपर से गुज़र जाते....कुछ पल्ले नहीं पड़ता था...मैंने फिर प्रार्थना की कोशिश करना छोड़ दिया...लेकिन चार साल पहले मेरा एक दोस्त मिला...उसने मुझे बताया कि प्रार्थना कुछ नहीं भगवान से सीधे संवाद का माध्यम होती है....उसी ने सलाह दी कि एक खाली कुर्सी अपने सामने रखो...फिर विश्वास करो कि वहां भगवान खुद ही विराजमान हैं...अब भगवान से ठीक वैसे ही बात करना शुरू करो, जैसे कि अभी तुम मुझसे कर रहे हो...मैंने ऐसा करके देखा...मुझे बहुत अच्छा लगा...फिर तो मैं रोज़ दो-दो घंटे ऐसा करके देखने लगा...लेकिन ये ध्यान रखता कि मेरी बेटी कभी मुझे ऐसा करते न देख ले...अगर वो देख लेती तो उसका ही नर्वस ब्रेकडाउन हो जाता या वो फिर मुझे साइकाइट्रिस्ट के पास ले जाती... ये सब सुनकर संत ने बुजुर्ग के लिए प्रार्थना की...सिर पर हाथ रखा और भगवान से बात करने के क्रम को जारी रखने के लिए कहा...संत को उसी दिन दो दिन के लिए शहर से बाहर जाना था...इसलिए विदा लेकर चले गए.. दो दिन बाद बेटी का संत को फोन आया कि उसके पिता की उसी दिन कुछ घंटे बाद मृत्यु हो गई थी, जिस दिन वो आप से मिले थे... संत ने पूछा कि उन्हें प्राण छोड़ते वक्त कोई तकलीफ़ तो नहीं हुई... बेटी ने जवाब दिया...नहीं, मैं जब घर से काम पर जा रही थी तो उन्होंने मुझे बुलाया...मेरा माथा प्यार से चूमा...ये सब करते हुए उनके चेहरे पर ऐसी शांति थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी...जब मैं वापस आई तो वो हमेशा के लिए आंखें मूंद चुके थे...लेकिन मैंने एक अजीब सी चीज़ भी देखी...वो ऐसी मुद्रा में थे जैसे कि खाली कुर्सी पर किसी की गोद में अपना सिर झुकाया हो...संत जी, वो क्या था... ये सुनकर संत की आंखों से आंसू बह निकले...बड़ी मुश्किल से बोल पाए...काश, मैं भी जब दुनिया से जाऊं तो ऐसे ही जाऊं... जय श्री कृष्ण अखण्डमंडला त्रिभुवन नायक नयनाभिराम प्यारे युगल सरकार राधा सच्चिदानंद ठाकुर जी की जय 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹

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