अमरत्व की निरर्थकता

अमरत्व की निरर्थकता

*🌷अमरत्व की निरर्थकता☘*

🌅धर्म ग्रंथों में एक कथा है कि ख्वाजा खिजर की कृपा से सिकन्दर उस अमृत को पीने को ही था… कि पास में बैठे हुए

कौए ने चिल्लाकर कहा––“ ऐ बदनसीब इंसानǃ खुदा के वास्ते! इस पानी को न पीना।“

सिकंदर ने हैरान होकर पूछा–“ क्योंॽ”

कौए ने उत्तर दिया– “मैने एक बार बदनसीबी से इस पानी की एक बूँद पी ली। अब बुड्ढा और कमजोर हूँ। साथी–संगी सब मर गए, पर मैं अकेला उनकी याद करता हुआ रात–दिन बैठा–बैठा रोया करता हूँ। अकेला भटकता हूँ, नए पैदा होने वाले बच्चों के उल्लास को देख–देखकर मन मसोस कर रह जाता हूँ। जीने से मेरा दिल भर गया है, पर प्राण नहीं निकलते। सो, ऐ बादशाहǃ अगर तू इस पानी को पी लेगा, तो तेरा भी यही हाल होगा।“

सिकंदर कुछ देर स्तब्ध खड़ा हुआ कौए की बातों पर गौर करता रहा और आवेहयात् (अमृत) को बिना पिए ही उल्टे पाँव वापस लौट आया।

यदि मनुष्य शरीर से अमर हो भी जाए, तो यह बात उसके लिए अंततः दुःख का कारण ही बनेगी।

*आध्यात्मिक अमृत ही वह अमरता है, जो मनुष्य को संतोष और शांति प्रदान करने की क्षमता रखती है।*
🍁💦🙏Զเधे👣Զเधे🙏🏻💦🍁
*☘🌷!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!💖*
*☘💞हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!🌹💐*

÷सदैव जपिए एवँ प्रसन्न रहिए÷

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कामेंट्स

Mamta Sharma Oct 5, 2018
जय श्री राधे कृष्णा राधे जू तेरे चेहरे में वो जादू है बिन डोर खिंचा आती हूं जाना होता कहीं और तेरी और चली जाती हूं कृष्णा कृष्णा राधे राधे

Namrata Oct 5, 2018
जय श्री राधे कृष्णा जी🙏🙏

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