Mamta Chauhan
Mamta Chauhan Nov 24, 2020

Jai Shri Ram 🌿🌷🌿Tera Ram Ji Krege Beda Par Udasi Man Kahe Ko Kre 🌿🌷🌿Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram 🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿 🌷🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

CG Sahu Nov 24, 2020
radhe Krishna ji nice good afternoon radhe Krishna ji nice good morning 🙏🏻🌹🥀🍵🙋‍♀️

kishor modi Nov 24, 2020
jai shree ram jai hanuman ji ki Good morning 👌🙏🌹🕉

pawaR Jalindar Nov 24, 2020
जय श्री राम जय बजरंग बली की जय हो जय

Seema Sharma. Himachal (chd) Nov 24, 2020
*मैं जब किसी गरीब को हँसते हुए देखता हूँ तो*,,,,,,😊💐 *यकीन आ जाता है कि खुशियों का ताल्लुक दौलत से नहीं है*😊 हंसते मुस्कुराते रहिए 😊🌺💐🌷 *आपका दिन मंगलमय हो* बहुत बहुत धन्यवाद जी 😊🙏💐🌺🌷

Ajit sinh Parmar Nov 24, 2020
गुड मॉर्निंग र।धेकृषण 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 बहुत ही सुंदर पोस्ट र।धेकृषण आप कैसे हो जी

सूरज चौहान Nov 24, 2020
रामजी करेंगे बेड़ा पार दे बेड़ा पार शुभ दोपहर

Manish👉🌹 .. Soni..😊 Nov 24, 2020
🙏जय श्री राम भक्त हनुमान की🙏,,,,, ✍️.. बादशाह तो वक़्त होता है.. .... तो यूं ही गुरुर करता है है... 😊

दुर्गा शर्मा Nov 24, 2020
Jay Shree Radhe Krishna Ji ki Radhe Radhe Ji 🙏 🌹 good afternoon di and God bless you and your family 👪 🙏 di nice post di Jay mahadev 👌👌👍

Harish Bist Nov 24, 2020
जय श्री राम जय श्री राम जय जय बजरंग बली 🌹🌹🌹🌺🌹🌹🌺🌺🌹🌹🌺🌺❤️🙏

Ansouya Nov 24, 2020
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय बजरंग बली हनुमान जी 🙏 सुख समृद्धि और खुशियों की कामना करते हुए शुभ दोपहर प्यारी बहना जी 🌷🙏🌷प्रभु श्री राम जी और हनुमान जी की कृपा से आप का परिवार सदा सुखी रहे आनंदित रहे सम्पन्नता बनी रहे बहना जी 🌷🙏🌷🙏

Sharmila Singh Nov 24, 2020
जय श्री राम राम 🙏🌹 मेरी प्यारी बहना जी आपका हर पल खुशियों भरा हो 👍🌹

k l तिवारी Nov 24, 2020
🌷🚩🌹जय श्रीराम जय महावीर हनुमान की बहन🌼🌷 सादर चरण स्पर्श करता हूँ मेरी प्यारी प्यारी स्वीट सी भोली सी रानी बहन🌼प्रभु श्रीराम तुम्हारा हर पल शुभ और मंगलमय करें🌺 स्वस्थ रखें ख़ुश रखें🌸 जुग जुग जियो मेरी रानी बहन🌷हमेशा हँसती मुस्कराती रहो बहन🌹🌾हे कान्हा मेरी लाडली बहना का आँचल खुशियों से भरा रखना🌿शुभसंध्या वंदन बहना🌼🌹🙏🙏🙏🌹🌼

सुभद्र कुमार Nov 28, 2020
🌸🌸🌸🙏🏻ऊँ🙏🏻🌸🌸🌸 🌸🌸🌸🙏🏻शाँतिं🙏🏻🌸🌸🌸 🌸🌸🌸🙏🏻दीदी🙏🏻🌸🌸🌸 🌸🌸🌸🙏🏻जी🙏🏻🌸🌸🌸

Rani Kasturi Jan 19, 2021

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sn vyas Jan 19, 2021

...........!! *श्रीराम: शरणं मम* !!......... ।।श्रीरामकिंकर वचनामृत।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° *असीम जब अपने आप को सीमा में घेर लेगा,* *तो वह अपने आप को स्वयं ही छोटा बना लेगा।* °" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "° परशुरामजी से किसी ने पूछा -- "महाराज! धनुष यज्ञ में प्रभु श्रीराम के हाथों आपका धनुष भी चला गया, फिर भी आप तो बड़े प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं ?" उन्होंने कहा -- “भाई ! अगर हम बहुत दिनों से कंधे पर बोझ ढो रहे हों और अचानक कोई बोझ ढोने वाला मिल जाय, तो प्रसन्नता होती है कि बुरा लगता है। इसी प्रकार बहुत दिनों से मैंने जिस धनुष का बोझ उठाया आज उसे श्रीराम ने ले लिया। जिस उद्देश्य के लिए धनुष था, उसके कार्य को अब श्रीराम पूरा करेंगे। मेरा भार हल्का हो गया।" भार हल्का होने का अभिप्राय है अहंकार का विनाश क्योंकि *सारा भार तो अभिमान का ही होता है।* परशुरामजी ने जिसे स्वीकार कर लिया है, वह है 'मैं' और 'मेरापन' । जब हम अपने को किसी एक वर्ग-विशेष का कहेंगे, तब क्या सचमुच हम बड़े रह सकेंगे ? जब सारा संसार ब्रह्म का ही रूप है, तो फिर अपने आपको ब्रह्म का मान लेना सत्य है या किसी जाति-विशेष का मान लेना ? और प्रश्न यह है कि जाति-विशेष का मानने वाला छोटा हो गया या नहीं ? परशुरामजी गर्व से कहते हैं -- *बाल ब्रह्मचारी अति कोही।* *बिस्व विदित छत्रिय कुल द्रोही॥* अभिप्राय यह है कि द्वैत स्वीकार कर लिया गया क्योंकि जब एकमात्र अद्वैत तत्त्व ही है तो फिर कौन किसका द्रोही होगा ? परशुरामजी सोचते हैं कि क्षत्रिय बुरे हैं, इसलिए उन्हें दण्ड देना मेरा कार्य है। यही विकृति है। *बड़े से बड़ा व्यक्ति जहाँ 'अहम्' को स्वीकार करेगा, वहीं उसके सामने समस्या आ जाएगी।* अगर हम गम्भीरता से विचार करके देखें तो *सारी समस्या के मूल में केवल दो शब्द हैं 'अहमता' और 'ममता'।* परशुरामजी ने 'अहम्' स्वीकार कर लिया और वह 'अहम्' कितना प्रबल है, इसका पता तब चला जब वे भगवान् श्रीराम से कहते हैं कि तुम मुझसे लड़ो। भगवान् राम कहते हैं कि महाराज ! न लड़ना चाहें तो कोई और उपाय है क्या ? उन्होंने कहा -- "हाँ ! उसका तो बस एक ही उपाय है कि *करु परितोष मोर संग्रामा।* *नाहिं न छांडु, कहाउब रामा॥* आज से तुम अपने आपको 'राम' कहलाना छोड़ दो। कोई और नाम रख लो तो मैं शान्त हो जाऊंगा।" अब यहाँ पर दोनों राम में एक अन्तर पड़ गया और वह अन्तर बड़ा महत्त्वपूर्ण है। श्रीराम के विषय में आप पढ़ते हैं कि वे जब रावण, कुंभकर्ण आदि का वध करते हैं तो उन्हें अपने में लीन कर लेते हैं। इसका अभिप्राय है कि एक 'राम' वे हैं जो चाहते हैं कि सब राम हो जायें। और दूसरे राम वे बन गए जो कहते हैं कि मुझे छोड़कर ये दूसरा राम कौन आ गया ? महाराज श्रीदशरथ ने सोचा था कि रामराज्य तब बनेगा, जब राम सिंहासन पर बैठेंगे। पर भगवान् राम का तात्पर्य था कि अकेले राम से रामराज्य नहीं बनेगा, *वस्तुतः रामराज्य तो तब बनेगा जब संसार के सभी जीव राम हो जाएंगे। इसीलिए भगवान् राम की वनयात्रा होती है जो कि सबको राम बनाने की यात्रा है। इस यात्रा में वे निषाद से प्रारंभ करके रावण तक सबको राम बना देते हैं । तब कहीं जाकर अन्त में रामराज्य बनता है। इसका सीधा-सा अभिप्राय है कि असीम जब अपने आप को सीमा में घेर लेगा, तो वह अपने आप को स्वयं ही छोटा बना लेगा।* 👥 जय गुरुदेव जय सियाराम 🙏

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Rekha Jan 19, 2021

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Rekha Jan 19, 2021

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