397 साल बाद फिर करीब आ रहे बृहस्पति और शनि, सोमवार को दिखेगा प्रकृति का अद्भुत नजारा सौरमंडल में सोमवार को एक बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान हमारे सौर मंडल के दो बड़े ग्रह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के बेहद नजदीक आ जाएंगे। ये दोनों ग्रह इससे पहले 17वीं शताब्दी में महान खगोलविद गैलीलियो के जीवनकाल में इतने पास आए थे।      केप केनवरल सौरमंडल में सोमवार को एक बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान हमारे सौर मंडल के दो बड़े ग्रह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के बेहद नजदीक आ जाएंगे। ये दोनों ग्रह इससे पहले 17वीं शताब्दी में महान खगोलविद गैलीलियो के जीवनकाल में इतने पास आए थे। इस घटना को लोग सोमवार को सूर्यास्त के बाद लोग बिना किसी उपकरण की मदद के देख सकते हैं शनि और बृहस्पति ग्रह का मिलन आसानी से देखा जा सकता है ग्रहों का मिलन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि हमारे सौरमंडल में दो बड़े ग्रहों का नजदीक आना बहुत दुर्लभ नहीं है। बृहस्पति ग्रह अपने पड़ोसी शनि ग्रह के पास से प्रत्येक 20 साल पर गुजरता है, लेकिन इसका इतने नजदीक आना खास है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों ग्रहों के बीच उनके नजरिए से सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी रह जाएगी। अगर मौसम स्थिति अनुकूल रहती है तो ये आसानी से सूर्यास्त के बाद दुनिया भर से देखे जा सकते हैं।

397 साल बाद फिर करीब आ रहे बृहस्पति और शनि, सोमवार को दिखेगा प्रकृति का अद्भुत नजारा

सौरमंडल में सोमवार को एक बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान हमारे सौर मंडल के दो बड़े ग्रह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के बेहद नजदीक आ जाएंगे। ये दोनों ग्रह इससे पहले 17वीं शताब्दी में महान खगोलविद गैलीलियो के जीवनकाल में इतने पास आए थे।

    

केप केनवरल
सौरमंडल में सोमवार को एक बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दौरान हमारे सौर मंडल के दो बड़े ग्रह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के बेहद नजदीक आ जाएंगे। ये दोनों ग्रह इससे पहले 17वीं शताब्दी में महान खगोलविद गैलीलियो के जीवनकाल में इतने पास आए थे। इस घटना को लोग सोमवार को सूर्यास्त के बाद लोग बिना किसी उपकरण की मदद के देख सकते हैं

शनि और बृहस्पति ग्रह का मिलन


आसानी से देखा जा सकता है ग्रहों का मिलन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि हमारे सौरमंडल में दो बड़े ग्रहों का नजदीक आना बहुत दुर्लभ नहीं है। बृहस्पति ग्रह अपने पड़ोसी शनि ग्रह के पास से प्रत्येक 20 साल पर गुजरता है, लेकिन इसका इतने नजदीक आना खास है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दोनों ग्रहों के बीच उनके नजरिए से सिर्फ 0.1 डिग्री की दूरी रह जाएगी। अगर मौसम स्थिति अनुकूल रहती है तो ये आसानी से सूर्यास्त के बाद दुनिया भर से देखे जा सकते हैं।

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* *[$][$][$][$][$][$][$][$][$][$][$][$][]* *🚩।।श्री गणेशाय नम:।।🚩* *🏺🌷-: दैनिक पंचांग:-🌷🏺* *[$][$][$[[$][$][$][$][$][$][$][$][$][$]* *🏺 श्रीमाधोपुर-पंचांग* *🏺 तिथि त्रयोदशी 17:20:37* *🏺 नक्षत्र पुष्य 13:17:57* *🏺 करण :* *तैतिल 17:20:37* *गर 28:41:00* *🏺 पक्ष शुक्ल* *🏺 योग शोभन 25:07:20* *🏺 वार गुरूवार* *🏺 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ* *🏺 सूर्योदय 06:56:29* *🏺 चन्द्रोदय 16:26:00* *🏺 चन्द्र राशि कर्क* *🏺 सूर्यास्त 18:25:30* *🏺 चन्द्रास्त 30:22:00* *🏺 ऋतु वसंत* *🏺 हिन्दू मास एवं वर्ष* *🏺 शक सम्वत 1942 शार्वरी* *🏺 कलि सम्वत 5122* *🏺 दिन काल 11:29:00* *🏺 विक्रम सम्वत 2077* *🏺 मास अमांत माघ* *🏺 मास पूर्णिमांत माघ* *🏺 शुभ और अशुभ समय* *🏺 शुभ समय* *🏺 अभिजित 12:18:02 - 13:03:58* *🏺 अशुभ समय* *🏺 दुष्टमुहूर्त :* *10:46:10 - 11:32:06* *15:21:46 - 16:07:42* *🏺कंटक 15:21:46 - 16:07:42* *🏺 यमघण्ट 07:42:25 - 08:28:21* *🏺 राहु काल 14:07:07 - 15:33:15* *🏺 कुलिक 10:46:10 - 11:32:06* *🏺 कालवेला या अर्द्धयाम 16:53:38 - 17:39:34* *🏺 यमगण्ड 06:56:29 - 08:22:37* *🏺 गुलिक काल 09:48:45 - 11:14:52* *🏺 दिशा शूल* *🏺 दिशा शूल दक्षिण* *=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢=¢* *🌵 चौघड़िया मुहूर्त 🌵* *{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{∆}{}* *🌵शुभ 06:56:29 - 08:22:37* *🌵रोग 08:22:37 - 09:48:45* *🌵उद्वेग 09:48:45 - 11:14:52* *🌵चल 11:14:52 - 12:41:00* *🌵लाभ 12:41:00 - 14:07:07* *🌵अमृत 14:07:07 - 15:33:15* *🌵काल 15:33:15 - 16:59:22* *🌵शुभ 16:59:22 - 18:25:30* *🌵अमृत 18:25:30 - 19:59:15* *🌵चल 19:59:15 - 21:33:00* *🌵रोग 21:33:00 - 23:06:46* *🌵काल 23:06:46 - 24:40:31* *🌵लाभ 24:40:31 - 26:14:16* *🌵उद्वेग 26:14:16 - 27:48:02* *🌵शुभ 27:48:02 - 29:21:47* *🌵अमृत 29:21:47 - 30:55:32* *[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]* *🍓🌵-:लग्न-तालिका:-🌵🍓* *[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]* *सूर्योदय का समय: 06:56:29* *सूर्योदय के समय लग्न कुम्भ स्थिर* *311°42′33″* *🍋 कुम्भ स्थिर* *शुरू: 06:20 AM समाप्त: 07:50 AM* *🍋 मीन द्विस्वाभाव* *शुरू: 07:50 AM समाप्त: 09:16 AM* *🍋 मेष चर* *शुरू: 09:16 AM समाप्त: 10:52 AM* *🍋 वृषभ स्थिर* *शुरू: 10:52 AM समाप्त: 12:48 PM* *🍋 मिथुन द्विस्वाभाव* *शुरू: 12:48 PM समाप्त: 03:03 PM* *🍋 कर्क चर* *शुरू: 03:03 PM समाप्त: 05:23 PM* *🍋 सिंह स्थिर* *शुरू: 05:23 PM समाप्त: 07:39 PM* *🍋 कन्या द्विस्वाभाव* *शुरू: 07:39 PM समाप्त: 09:55 PM* *🍋 तुला चर* *शुरू: 09:55 PM समाप्त: अगले दिन 00:14 AM* *🍋 वृश्चिक स्थिर* *शुरू: अगले दिन 00:14 AM समाप्त: अगले दिन 02:32 AM* *🍋 धनु द्विस्वाभाव* *शुरू: अगले दिन 02:32 AM समाप्त: अगले दिन 04:37 AM* *🍋 मकर चर* *शुरू: अगले दिन 04:37 AM समाप्त: अगले दिन 06:20 AM* *{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}{}* 2️⃣5️⃣🔷0️⃣2️⃣🔷2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}{०}* *🛑🦚जय श्रीकृष्णा🦚🛑* *(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)(₹)* *ज्योतिषशास्त्री-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* *{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}{×}* 🚧🔷🚧🔷🚧🔷🚧🔷🚧🔷

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Neha Sharma, Haryana Feb 23, 2021

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"क्या आप जानते हैं ?" 01. हाई बी. पी. मरीज के लिये बहुत फायदेमंद है मूँग, इससे रोग तुरन्त कन्ट्रोल होता है। 02. सवेरे खाली पेट अखरोट की तीन-चार गिरि खाने से घुटनों का दर्द समाप्त हो जाता है। 03. ताजा हरा धनिया सूँघने से छींके आनी बन्द हो जाती हैं। 04. गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बन्द गला खुल जाता है। 05. सिंघाड़ा खाने से फटी एडियाँ भी ठीक हो जाती हैं, इसके अतिरिक्त शरीर में किसी भी स्थान पर दर्द या सूजन होनेपर इसका लेप बनाकर लगाने से बहुत फायदा होता है। 06. जामुन के बीज को बारिक पीसकर पानी या दही के साथ लेना केंसर और पथरी के लिये लाभदायक है। 07. पत्थरचट्टा का एक पत्ता और चार दाने मिश्री के पीसकर एक कप पानी के साथ खाली पेट पिये पथरी की समस्या खत्म हो जायेगी। 08. तुलसी के पौधे का हर हिस्सा औषधि है। मुँह के छालों के लिये इसके पत्तों को धोकर चबाने से आराम मिलता है। 09. रोज गाजर का जूस पीने से दमें की बीमारी जड़ से दूर हो जाती है। 10. दाद पर कच्चे पपीते का रस लगाने से दाद और खुजली की समस्या कुछ ही दिनों में ठीक होने लगेगी। 11. आम के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म कर लें। अब इसक दो-तीन बूँदें कान में डालें, कान दर्द में आराम मिलेगा। 12 हर रोज सुबह एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से लिवर की कमजोरी दूर होती है। 13. अदरक और गुड़ को मिलाकर उनका रस निकालकर उसकी बूँदें नाक में टपकाने से आधा सिर दर्द में आराम होता है। 14. जिन बच्चों की शारिरिक लम्बाई कम होती है या शरीर कमजोर होता है उन्हें प्रतिदिन पपीता खिलाना चाहिये। 15. रात को सोने से पहले ग्रीन टी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म कम होता है। यही कारण है कि इससे रातभर आपका बजन कम होता रहता है। 16. 6-7 काली मिर्च में थोडा सा मक्खन और शहद मिलाकर रोज खाने से दिमाग तेज होता है। 17. शकरकंदी शरीर को गर्म रखती है और साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट और डायट्री फाइबर भरपूर होते हैं। 18. एलोवेरा जैल लगाने से स्किन साफ्ट होती है और झुर्रियाँ आने की प्रासेस धीमी पड़ जाती है। तथा शरीर की हीलिंग प्रोसेस तेज हो जाती है। 19. पाचन क्रिया हेतु अमरूद सबसे उत्तम फल है। इसे काला नमक छिड़ककर सेवन करने से पाचन सम्बन्धी समस्याओं के साथ कब्ज भी दूर होती है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधेकृष्णा" 🌸🌸🙏🌸🙏🌸🌸 ************************************************* #जामुन_की_लकड़ी_का_महत्त्व . अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल या हरी काई नहीं जमती और पानी सड़ता नहीं । टंकी को लम्बे समय तक साफ़ नहीं करना पड़ता । जामुन की एक खासियत है कि इसकी लकड़ी पानी में काफी समय तक सड़ता नही है।जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।नाव का निचला सतह जो हमेशा पानी में रहता है वह जामून की लकड़ी होती है। गांव देहात में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है। आजकल लोग जामुन का उपयोग घर बनाने में भी करने लगे है। जामून के छाल का उपयोग श्वसन गलादर्द रक्तशुद्धि और अल्सर में किया जाता है। दिल्ली के महरौली स्थित निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में जीर्णोद्धार हुआ है । 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ पानी के सोते बंद नहीं हुए हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था। इस बावड़ी में भी जामुन की लकड़ी इस्तेमाल की गई थी जो 700 साल बाद भी नहीं गली है। बावड़ी की सफाई करते समय बारीक से बारीक बातों का भी खयाल रखा गया। यहाँ तक कि सफाई के लिए पानी निकालते समय इस बात का खास खयाल रखा गया कि इसकी एक भी मछली न मरे। इस बावड़ी में 10 किलो से अधिक वजनी मछलियाँ भी मौजूद हैं। इन सोतों का पानी अब भी काफी मीठा और शुद्ध है। इतना कि इसके संरक्षण के कार्य से जुड़े रतीश नंदा का कहना है कि इन सोतों का पानी आज भी इतना शुद्ध है कि इसे आप सीधे पी सकते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि पेट के कई रोगों में यह पानी फायदा करता है। पर्वतीय क्षेत्र में आटा पीसने की पनचक्की का उपयोग अत्यन्त प्राचीन है। पानी से चलने के कारण इसे "घट' या "घराट' कहते हैं।घराट की गूलों से सिंचाई का कार्य भी होता है। यह एक प्रदूषण से रहित परम्परागत प्रौद्यौगिकी है। इसे जल संसाधन का एक प्राचीन एवं समुन्नत उपयोग कहा जा सकता है। आजकल बिजली या डीजल से चलने वाली चक्कियों के कारण कई घराट बंद हो गए हैं और कुछ बंद होने के कगार पर हैं। पनचक्कियाँ प्राय: हमेशा बहते रहने वाली नदियों के तट पर बनाई जाती हैं। गूल द्वारा नदी से पानी लेकर उसे लकड़ी के पनाले में प्रवाहित किया जाता है जिससे पानी में तेज प्रवाह उत्पन्न हो जाता है। इस प्रवाह के नीचे पंखेदार चक्र (फितौड़ा) रखकर उसके ऊपर चक्की के दो पाट रखे जाते हैं। निचला चक्का भारी एवं स्थिर होता है। पंखे के चक्र का बीच का ऊपर उठा नुकीला भाग (बी) ऊपरी चक्के के खांचे में निहित लोहे की खपच्ची (क्वेलार) में फँसाया जाता है। पानी के वेग से ज्यों ही पंखेदार चक्र घूमने लगता है, चक्की का ऊपरी चक्का घूमने लगता है।पनाले में प्रायः जामुन की लकड़ी का भी इस्तेमाल होता है |फितौडा भी जामुन की लकड़ी से बनाया जाता है । जामुन की लकड़ी एक अच्छी दातुन है। जलसुंघा ( ऐसे विशिष्ट प्रतिभा संपन्न व्यक्ति जो भूमिगत जल के स्त्रोत का पता लगाते है ) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 ************************************************ . "क्यों पूजनीय है स्त्री ?" एक बार सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा, "मैं आप को कैसी लगती हूँ ?" श्रीकृष्ण ने कहा, "तुम मुझे नमक जैसी लगती हो।" सत्यभामा इस तुलना को सुन कर क्रुद्ध हो गयी, तुलना भी की तो किस से, आपको इस संपूर्ण विश्व में मेरी तुलना करने के लिए और कोई पदार्थ नहीं मिला। श्रीकृष्ण ने उस समय तो किसी तरह सत्यभामा को मना लिया और उनका गुस्सा शांत कर दिया। कुछ दिन पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने महल में एक भोज का आयोजन किया छप्पन भोग की व्यवस्था हुई। सर्वप्रथम सत्यभामा से भोजन प्रारम्भ करने का आग्रह किया श्रीकृष्ण ने। सत्यभामा ने पहला कौर मुँह में डाला मगर यह क्या सब्जी में नमक ही नहीं था। कौर को मुँह से निकाल दिया। फिर दूसरा कौर हलवे का मुँह में डाला और फिर उसे चबाते-चबाते बुरा सा मुँह बनाया और फिर पानी की सहायता से किसी तरह मुँह से उतारा। अब तीसरा कौर फिर कचौरी का मुँह में डाला और फिर आक्क थू ! तब तक सत्यभामा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था। जोर से चीखीं किसने बनाई है यह रसोई ? सत्यभामा की आवाज सुन कर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए सत्यभामा के पास आये और पूछा क्या हुआ देवी ? कुछ गड़बड़ हो गयी क्या ? इतनी क्रोधित क्यों हो ? तुम्हारा चेहरा इतना तमतमा क्यूँ रहा है ? क्या हो गया ? सत्यभामा ने कहा किसने कहा था आपको भोज का आयोजन करने को ? इस तरह बिना नमक की कोई रसोई बनती है ? किसी वस्तु में नमक नहीं है। मीठे में शक्कर नहीं है। एक कौर नहीं खाया गया। श्रीकृष्ण ने बड़े भोलेपन से पूछा, तो क्या हुआ बिना नमक के ही खा लेतीं। सत्यभामा फिर क्रुद्ध कर बोली लगता है दिमाग फिर गया है आपका ? बिना शक्कर के मिठाई तो फिर भी खायी जा सकती है मगर बिना नमक के कोई भी नमकीन वस्तु नहीं खायी जा सकती है। तब श्रीकृष्ण ने कहा तब फिर उस दिन क्यों गुस्सा हो गयी थीं जब मैंने तुम्हे यह कहा कि तुम मुझे नमक जितनी प्रिय हो। अब सत्यभामा को सारी बात समझ में आ गयी की यह सारा आयोजन उसे सबक सिखाने के लिए था और उनकी गर्दन झुक गयी। #तात्पर्य:- स्त्री जल की तरह होती है, जिसके साथ मिलती है उसका ही गुण अपना लेती है। स्त्री नमक की तरह होती है, जो अपना अस्तित्व मिटा कर भी अपने प्रेम-प्यार तथा आदर-सत्कार से परिवार को ऐसा बना देती है। माला तो आप सबने देखी होगी। तरह-तरह के फूल पिरोये हुए पर शायद ही कभी किसी ने अच्छी से अच्छी माला में अदृश्य उस सूत को देखा होगा जिसने उन सुन्दर-सुन्दर फूलों को एक साथ बाँध कर रखा है। लोग तारीफ़ तो उस माला की करते हैं जो दिखाई देती है मगर तब उन्हें उस सूत की याद नहीं आती जो अगर टूट जाये तो सारे फूल इधर-उधर बिखर जाते हैं। स्त्री उस सूत की तरह होती है, जो बिना किसी चाह के, बिना किसी कामना के, बिना किसी पहचान के, अपना सर्वस्व खो कर भी किसी के जान-पहचान की मोहताज नहीं होती है। और शायद इसीलिए दुनिया राम के पहले सीता को और श्याम के पहले राधे को याद करती है। अपने को विलीन कर के पुरुषों को सम्पूर्ण करने की शक्ति भगवान् ने स्त्रियों को ही दी है। -----------:::×:::--------- "जय जय श्री राधेकृष्णा" 🌸🌸🙏🌸🙏🌸🌸 ************************************************

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