चिराग
चिराग Nov 8, 2017

ॐ आप भी जान लें राधा कृष्ण की जोड़ी आखरी बार कब और कैसे अलग हुई?ॐ

ॐ आप भी जान लें राधा कृष्ण की जोड़ी आखरी बार कब और कैसे अलग हुई?ॐ

आप भी जान लें राधा कृष्ण की जोड़ी आखरी बार कब और कैसे अलग हुई?

हिन्दू धर्म में ऐसे कई रहस्य है जो बहुत कम ही व्यक्तियों को ज्ञात है. ऐसा ही एक रहस्य भगवान् कृष्ण और राधा के विषय में है. राधा कृष्ण अभिन्न है इसलिए इनका नाम एक साथ लिया जाता है राधे कृष्ण...इस नाम को जपने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते है. भगवान् श्री कृष्ण और राधा की प्रेम लीला के विषय में तो सब जानते है किन्तु क्या आप जानते है की भगवान् श्री कृष्ण के जाने के बाद राधा की मृत्यु कैसे हुई और उनकी अंतिम इच्छा क्या थी? आज हम आपको बताने जा रहे है की भगवान् श्री कृष्ण की प्रीय राधा की मृत्यु कैसे हुई?

राधा की मृत्यु का कारण - जब भगवान् कृष्ण और बलराम अपने मामा कंश के आमंत्रण पर मथुरा गए उस समय प्रथम बार राधा और कृष्ण अलग हुए. इसके पश्चात राधा और कृष्ण भगवान् की भेंट एक बार पुनः हुई जब राधा स्वयं भगवान् कृष्ण की नगरी द्वारका पहुंची. अपने सम्मुख राधा को देखकर भगवान् कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और दोनों ही सांकेतिक भाषा में एक दूसरे से बातें करने लगे. उस समय द्वारका नगरी में राधा को कोई भी नहीं पहचानता था. राधा के निवेदन पर भगवान् श्री कृष्ण ने उन्हें अपने महल में एक देविका के पद पर नियुक्त कर दिया जिससे वह भगवान् कृष्ण के निकट रहें.

राधा का द्वारका से प्रस्थान- समय के साथ-साथ अपनी बढ़ती उम्र के कारण उन्हें भगवान् कृष्ण से दूर जाने के लिए विवश होना पड़ा. एक दिन रात्री के समय वह बिना बताये महल से दूर किसी अज्ञात स्थान पर चली गयीं. किन्तु इसकी जानकारी भगवान् कृष्ण को थी.समय बीतने के साथ राधा एकदम अकेली हो गयीं और उनके मन में भगवान् कृष्ण के दर्शन की इच्छा प्रगट हुई. उनकी इच्छा से अवगत होकर भगवान् उनके सम्मुख आ गए.

राधा की अंतिम इच्छा - भगवान् कृष्ण को अपने सम्मुख देखकर राधा बहुत प्रसन्न हुई वह समय राधा का अंतिम समय था और वह भगवान् कृष्ण के अंतिम दर्शन करना चाहती थी.भगवान् कृष्ण ने राधा की अंतिम इच्छा जानने का आग्रह किया किन्तु राधा ने मना कर दिया. भगवान् कृष्ण के आग्रह करने के बाद उन्होंने भगवान् कृष्ण से बांसुरी बजाने का निवेदन किया और भगवान् कृष्ण की बांसुरी सुनते सुनते राधा ने अपना शरीर त्याग दिया.

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कामेंट्स

Ravi pandey Nov 8, 2017
jai shree Radhe Krishna radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe Radhe radhe

SeemaGupta Nov 8, 2017
Jay Shree Radhey किर्श्ना

geeta Nov 8, 2017
radhe radhe koi dharmik prashnottari shuruat kare

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Swami Lokeshanand Apr 24, 2019

कौशल्याजी ने भरतजी को अपनी गोद में बैठा लिया और अपने आँचल से उनके आँसू पोंछने लगीं। कौशल्याजी को भरतजी की चिंता हो आई। दशरथ महाराज भी कहते थे, कौशल्या! मुझे भरत की बहुत चिंता है, कहीं राम वनवास की आँधी भरत के जीवन दीप को बुझा न डाले। राम और भरत मेरी दो आँखें हैं, भरत मेरा बड़ा अच्छा बेटा है, उन दोनों में कोई अंतर नहीं है। और सत्य भी है, संत और भगवान में मात्र निराकार और साकार का ही अंतर है। अज्ञान के वशीभूत होकर, अभिमान के आवेश में आकर, कोई कुछ भी कहता फिरे, उनके मिथ्या प्रलाप से सत्य बदल नहीं जाता कि भगवान ही सुपात्र मुमुक्षु को अपने में मिला लेने के लिए, साकार होकर, संत बनकर आते हैं। वह परमात्मा तो सर्वव्यापक है, सबमें है, सब उसी से हैं, पर सबमें वह परिलक्षित नहीं होता, संत में भगवान की भगवत्ता स्पष्ट झलकने लगती है। तभी तो जिसने संत को पहचान लिया, उसे भगवान को पहचानने में देरी नहीं लगी, जो सही संत की दौड़ में पड़ गया, वह परमात्मा रूपी मंजिल को पा ही गया। भरतजी आए तो कौशल्याजी को लगता है जैसे रामजी ही आ गए हों। भरतजी कहते हैं, माँ! कैकेयी जगत में क्यों जन्मी, और जन्मी तो बाँझ क्यों न हो गई ? कौशल्याजी ने भरतजी के मुख पर हाथ रख दिया। कैकेयी को क्यों दोष देते हो भरत! दोष तो मेरे माथे के लेख का है। ये माता तुम पर बलिहारी जाती है बेटा, तुम धैर्य धारण करो। यों समझते समझाते सुबह हो गई और वशिष्ठजी का आगमन हुआ। यद्यपि गुरुजी भी बिलखने लगे, पर उन्होंने भरतजी के माध्यम से, हम सब के लिए बहुत सुंदर सत्य सामने रखा। कहते हैं, छ: बातें विधि के हाथ हैं, इनमें किसी का कुछ बस नहीं है और नियम यह है कि अपरिहार्य का दुख नहीं मनाना चाहिए। "हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ"

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sompal Prajapati Apr 24, 2019

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🌹🌹🌹😊😀मुस्कान 😀😊🌹🌹🌹 होंठों की मुस्कान ही मनुष्य का वास्तविक परिधान है,,, रहिमन अपनी विपत्ति को जाय ना कहिये रोय, सुनते ही सब हँसेगे बाट ना लेईहै कोय,, हम जो नहीं कर पाए उसके लिए उदास क्यों होना, हम आज जो कर सकते हैं उस पर बीते दिनों का असर आखिर क्यों आने देना चाहिए। बीती बातों को भुलाकर अगर आज में ही अपनी उर्जा लगाई जाए तो बेहतर नतीजे हमें आगे बढ़ने को ही प्रेरित करेंगे। कल में अटके रहकर हम अपने आज को भी प्रभावित करते हैं और आने वाले कल को भी। थोड़ा संयम थोड़ा हौसले की जरूरत है हंसते रहे मन को किसी भी परिस्थिति में 😔 उदास ना होने दे,, कितना जानता है वह शख्स मेरे बारे में मेरे मुस्कराने पर भी पूंछ लिया तुम्हे तकलीफ क्या है हर हर महादेव जय शिव शंकर

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Durga Pawan Sharma Apr 24, 2019

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