Sn Vyas
Sn Vyas Aug 17, 2017

माता शबरी की कथा ओर नवधाभक्ति का उपदेश रामचरितमानस से।

माता शबरी की कथा ओर नवधाभक्ति का उपदेश रामचरितमानस से।

माता शबरी की कथा ओर नवधाभक्ति का उपदेश #रामचरितमानस से।

भगवान #श्रीराम के अनन्य भक्तों में एक भील जाति की कन्या भी थी श्रमणा। जिसे बाद में शबरी के नाम से जाना गयाl उसे जब भी समय मिलता, वह भगवान की पूजा- अर्चना करती। बड़ी होने पर जब उसका विवाह होने वाला था तो अगले दिन भोजन के लिए काफी बकरियों की बलि दी जानी थी।

यह पता लगते ही उसने अपनी माता से इस जीव हत्या का विरोध किया पर उसकी माता ने बताया कि वे भील हैं और यह उनके यहां का नियम है कि बारात का स्वागत इसी भोजन से होता है! वह यह बात सह नहीं कर सकी और चुप चाप रात के समय घर छोड़ कर जंगलों की और निकल पड़ी!

जंगल में वह ऋषि-मुनियों की कुटिया पर गयी पर भील जाति की होने के कारण सबने उसे दुत्कार दिया! आखिर में मतंग ऋषि ने उसे अपने आश्रम में रहने के लिए आश्रय दिया। शबरी अपने व्यवहार और कार्य−कुशलता से शीघ्र ही आश्रमवासियों की प्रिय बन गई।

मतंग ऋषि ने अपनी देह त्याग के समय उसे बताया कि भगवान राम एक दिन उसकी कुटिया में आएंगे! वह उनकी प्रतिक्षा करे ! वही तुम्हारा उद्धार करेंगे l दिन बीतते रहे। शबरी रोज सारे मार्ग की और कुटिया की सफाई करती और प्रभु राम की प्रतीक्षा करती! ऐसे करते वह बूढी हो चली, पर प्रतिक्षा नही छोडी क्यूंकि गुरु के वचन जो थे !

अंत मे शबरी की प्रतिक्षा की खत्म हुई और भगवान श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज करते हु्ए मतंग ऋषि के आश्रम में जा पहुंचे। शबरी ने उन्हें पहचान लिया। उन्होंने दोनों भाईयों का यथायोग्य सत्कार किया। शबरी भागकर कंद−मूल लेने गई। कुछ क्षण बाद वह लौटी।

कंद−मूलों के साथ वह कुछ जंगली बेर भी लाई थी। कंद−मूलों को उसने भगवान को अर्पण कर दिया। पर बेरों को देने का साहस नहीं कर पा रही थी। कहीं बेर ख़राब और खट्टे न निकलें, इस बात का उसे भय था। उसने बेरों को चखना आरंभ कर दिया। अच्छे और मीठे बेर वह बिना किसी संकोच के श्रीराम को देने लगी। श्रीराम उसकी सरलता पर मुग्ध थे। उन्होंने बड़े प्रेम से जूठे बेर खाए। श्रीराम की कृपा से शबरी का उसी समय उद्धार हो गया।

शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश।

* नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं॥
प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरि रति मम कथा प्रसंगा॥

भावार्थ:- मैं तुझसे अब अपनी नवधा भक्ति कहता हूँ। तू सावधान होकर सुन और मन में धारण कर। पहली भक्ति है संतों का सत्संग। दूसरी भक्ति है मेरे कथा प्रसंग में प्रेम॥

* गुर पद पंकज सेवा तीसरि भगति अमान।
चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान॥

भावार्थ:- तीसरी भक्ति है अभिमानरहित होकर गुरु के चरण कमलों की सेवा और चौथी भक्ति यह है कि कपट छोड़कर मेरे गुण समूहों का गान करें॥

* मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा॥
छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा॥

भावार्थ:- मेरे (राम) मंत्र का जाप और मुझमें दृढ़ विश्वास- यह पाँचवीं भक्ति है, जो वेदों में प्रसिद्ध है। छठी भक्ति है इंद्रियों का निग्रह, शील (अच्छा स्वभाव या चरित्र), बहुत कार्यों से वैराग्य और निरंतर संत पुरुषों के धर्म (आचरण) में लगे रहना॥

* सातवँ सम मोहि मय जग देखा। मोतें संत अधिक करि लेखा॥
आठवँ जथालाभ संतोषा। सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा॥

भावार्थ:- सातवीं भक्ति है जगत्‌ भर को समभाव से मुझमें ओतप्रोत (राममय) देखना और संतों को मुझसे भी अधिक करके मानना। आठवीं भक्ति है जो कुछ मिल जाए, उसी में संतोष करना और स्वप्न में भी पराए दोषों को न देखना॥

* नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना॥
नव महुँ एकउ जिन्ह कें होई। नारि पुरुष सचराचर कोई॥

भावार्थ:- नवीं भक्ति है सरलता और सबके साथ कपटरहित बर्ताव करना, हृदय में मेरा भरोसा रखना और किसी भी अवस्था में हर्ष और दैन्य (विषाद) का न होना। इन नवों में से जिनके एक भी होती है, वह स्त्री-पुरुष, जड़-चेतन कोई भी हो-॥

* सोइ अतिसय प्रिय भामिनि मोरें। सकल प्रकार भगति दृढ़ तोरें॥
जोगि बृंद दुरलभ गति जोई। तो कहुँ आजु सुलभ भइ सोई॥

भावार्थ:- हे भामिनि! मुझे वही अत्यंत प्रिय है। फिर तुझ में तो सभी प्रकार की भक्ति दृढ़ है। अतएव जो गति योगियों को भी दुर्लभ है, वही आज तेरे लिए सुलभ हो गई है॥

Like Milk Flower +284 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 142 शेयर
Jai Shri Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram...
Rajput Boys
31 प्रतिक्रिया • 13 शेयर
🚩जय श्री राम मित्रों🚩
अंकित कुमार सिंह
28 प्रतिक्रिया • 41 शेयर
Sri Sri Radha vrindavan Bihari bhagwan ki Jay ho... 🙏🌸🌹🌺🌻
Pavan Kesarkar
12 प्रतिक्रिया • 3 शेयर
jai shree ram
Sacchanand Hemnani
3 प्रतिक्रिया • 1 शेयर
S.R..s.k.p
Sheeta Ram meena
3 प्रतिक्रिया • 1 शेयर
श्रीरामचरितमानस चिंतन no 66
॥ ॐ सोमसिध्द ☝॥
2 प्रतिक्रिया • 3 शेयर
🌿🍁छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्थल🍁🌿
🌺2) श्री राम जी का भव्य मंदिर रायपुर (छ. ग.)🌺
Neelam Dhiwar
37 प्रतिक्रिया • 22 शेयर
श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम जी। शुभ दिन मंगलमय हो।...
Jasveer Giri Maharaj Jiहिमाचल
71 प्रतिक्रिया • 249 शेयर
Shubh Ratri 🌼🌼 Radhe-Krishna😇😇😇
Kiran sunaria
53 प्रतिक्रिया • 87 शेयर
Jai Shri Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram...
Rajput Boys
22 प्रतिक्रिया • 25 शेयर

कामेंट्स

Sunil Ag Aug 17, 2017
jai jai siya ram jai jai Hanuman

Badrilal Imliwale Aug 17, 2017
जा पर क्रपा राम की होई ता पर क्रपा करे सब कोई जय जय श्री राम

A K Sarin Aug 17, 2017
बोलो सिया वर राम चन्द्र जी की जय . जाकी रही भावना जैसी , तेहि मूरत देखि तिन तैसी .

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB