Avinash Mishra
Avinash Mishra Dec 20, 2016

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priyanka singh Feb 28, 2021

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bhavanamishra Feb 28, 2021

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Anita Sharma Feb 28, 2021

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मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है। ● हम वो आखरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिका जेट देखें हैं। बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है। ● हम वो आखरी पीढ़ी हैं जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनी हैं। जमीन पर बैठ कर खाना खाया है और प्लेट में चाय पी है। ● हम वो आखरी पीढ़ी हैं जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का तेल लगा कर स्कूल और शादियों में जाया करते थे। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर नुक्कड़ से भाग कर घर आ जाया करते थे और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे। ● हम वो आखरी लोग हैं जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं। ● हम वो आखरी लोग हैं जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं। ● हम निश्चित ही वो आखरी लोग हैं जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे प्रोग्राम पूरी शिद्दत से सुने हैं। ● हम वो आखरी लोग हैं जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं। ● हम एकमात्र वह पीढी है जिसने अपने माँ-बाप की बात भी मानी और बच्चों की भी मान रहे है। ● हम वो आखरी लोग हैं जिन्होंने रिश्तों की मिठास अपनों के अलावा अपने पडोसियों, मोहल्ले वालों और गांव वालों से भी महसूस की है। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुदगर्ज़ी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन व निराशा में खोते जा रहे हैं। और यकीनन... ● हम वो खुशनसीब लोग हैं जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं! 🙏🙏 जय श्री कृष्णा *ॐ नमः भगवतेय वासुदेवाय नमः* हर वक्त हरे कृष्णा ओर इस महामंत्र का जाप करते रहिऐ *108 *बार* हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे *राधे राधे जी* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🙏🙏 *।। जय श्री कृष्णा ।।*🙏🙏 🌹 *जन्माष्टमी के शुभ अवसर से* 🌹 प्रभु जी आप सभी को निवेदन है कि आप भी भगवद गीता का लाभ उठायें *मेरा आप से यही कहना है* की आप भी ये ग्रुप join कर लीजिए *Whatsapp के लिए* 👇👇👇👇👇👇👇 https://chat.whatsapp.com/IW1kuloS55s7yslN4ohwiN *Teligram के लिए* 👇👇👇👇👇👇 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

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Vandana Singh Feb 28, 2021

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