Neha Sharma, Haryana
Neha Sharma, Haryana Sep 28, 2020

*हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार | *पवनसुत विनती बारम्बार || *अष्ट सिद्धि नव निद्दी के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविदाता | *सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उधार || *अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी | *भक्ति भाव से ध्याऊं तुम्हे, कर दुखों से पार || *जपूं निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा | *राम भक्त मोहे शरण मे लीजे भाव सागर से तार || *जय श्रीराम जय हनुमान*🙏🌷🌷 *शुभ प्रभात् नमन*🙏🌷🌷 🌹🌹🌹🌹रावण #विद्वान था, हनुमान जी #विद्यावान थे विद्वान और विद्यावान में अन्तर: ********************************* विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ एक होता है विद्वान और एक विद्यावान । दोनों में आपस में बहुत अन्तर है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं, रावण विद्वान है और हनुमान जी विद्यावान हैं। रावण के दस सिर हैं । चार वेद और छह: शास्त्र दोनों मिलाकर दस हैं । इन्हीं को दस सिर कहा गया है जिसके सिर में ये दसों भरे हों, वही दस शीश हैं । रावण वास्तव में विद्वान है । लेकिन विडम्बना क्या है ? सीता जी का हरण करके ले आया। कईं बार विद्वान लोग अपनी विद्वता के कारण दूसरों को शान्ति से नहीं रहने देते। उनका अभिमान दूसरों की सीता रुपी शान्ति का हरण कर लेता है और हनुमान जी उन्हीं खोई हुई सीता रुपी शान्ति को वापिस भगवान से मिला देते हैं । हनुमान जी ने कहा — विनती करउँ जोरि कर रावन । सुनहु मान तजि मोर सिखावन ॥ हनुमान जी ने हाथ जोड़कर कहा -कि मैं विनती करता हूँ, तो क्या हनुमान जी में बल नहीं है ? नहीं, ऐसी बात नहीं है । विनती दोनों करते हैं, जो भय से भरा हो या भाव से भरा हो । रावण ने कहा -कि तुम क्या, यहाँ देखो कितने लोग हाथ जोड़कर मेरे सामने खड़े हैं । कर जोरे सुर दिसिप विनीता । भृकुटी विलोकत सकल सभीता ॥ रावण के दरबार में देवता और दिग्पाल भय से हाथ जोड़े खड़े हैं और भृकुटी की ओर देख रहे हैं। परन्तु हनुमान जी भय से हाथ जोड़कर नहीं खड़े हैं । इस पर रावण ने कहा — की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही । देखउँ अति असंक सठ तोही ॥ “तुमने मेरे बारे में सुना नहीं है ? तू बहुत निडर दिखता है !” हनुमान जी बोले –“क्या यह जरुरी है कि तुम्हारे सामने जो आये, वह डरता हुआ आये ?” रावण बोला –“देख लो, यहाँ जितने देवता और अन्य खड़े हैं, वे सब डरकर ही खड़े हैं । हनुमान जी बोले –“उनके डर का कारण यह है कि वे तुम्हारी भृकुटी की ओर देख रहे हैं ।” "भृकुटी विलोकत सकल सभीता।" परन्तु मैं भगवान राम की भृकुटी की ओर देखता हूँ । उनकी भृकुटी कैसी है ? "—भृकुटी विलास सृष्टि लय होई । सपनेहु संकट परै कि सोई ॥" जिनकी भृकुटी टेढ़ी हो जाये तो प्रलय हो जाए और उनकी ओर देखने वाले पर स्वप्न में भी संकट नहीं आए मैं उन श्रीराम जी की भृकुटी की ओर देखता हूँ । रावण बोला –“यह विचित्र बात है । जब राम जी की भृकुटी की ओर देखते हो तो हाथ हमारे आगे क्यों जोड़ रहे हो ? हनुमान जी बोले –“यह तुम्हारा भ्रम है । हाथ तो मैं उन्हीं को जोड़ रहा हूँ ।” रावण बोला –“वह यहाँ कहाँ हैं ?” हनुमान जी ने कहा -कि “यही समझाने आया हूँ । मेरे प्रभु राम जी ने कहा था — सो अनन्य जाकें असि मति न टरइ हनुमन्त मैं सेवक सचराचर रुप स्वामी भगवन्त ॥ सब में मुझको देखना । इसीलिए मैं तुम्हें नहीं, तुझमें भी भगवान को ही देख रहा हूँ ।” इसलिए हनुमान जी कहते हैं — खायउँ फल प्रभु लागी भूखा । और सबके देह परम प्रिय स्वामी ॥ हनुमान जी रावण को प्रभु और स्वामी कहते हैं,यही विद्यावान का लक्षण है कि अपने को गाली देने वाले में भी जिसे भगवान दिखाई दे, वही विद्यावान है. और रावण — मृत्यु निकट आई खल तोही । लागेसि अधम सिखावन मोही ॥ रावण खल और अधम कहकर हनुमान जी को सम्बोधित करता है । विद्यावान का लक्षण है - विद्या ददाति विनयं । विनयाति याति पात्रताम् ॥ पढ़ लिखकर जो विनम्र हो जाये, वह विद्यावान और जो पढ़ लिखकर अकड़ जाये, वह विद्वान । तुलसी दास जी कहते हैं — बरसहिं जलद भूमि नियराये । जथा नवहिं वुध विद्या पाये ॥ जैसे बादल जल से भरने पर नीचे आ जाते हैं, वैसे विचारवान व्यक्ति विद्या पाकर विनम्र हो जाते हैं । इसी प्रकार हनुमान जी हैं – विनम्र और रावण है – विद्वान । यहाँ प्रश्न उठता है कि विद्वान कौन है ? इसके उत्तर में कहा गया है कि जिसकी दिमागी क्षमता तो बढ़ गयी, परन्तु दिल खराब हो, हृदय में अभिमान हो, वही विद्वान है. और अब प्रश्न है कि विद्यावान कौन है ? उत्तर में कहा गया है कि जिसके हृदय में भगवान हो और जो दूसरों के हृदय में भी भगवान को बिठाने की बात करे, वही विद्यावान है । हनुमान जी ने कहा –“रावण ! और तो ठीक है, पर तुम्हारा दिल ठीक नहीं है । कैसे ठीक होगा ? कहा कि — राम चरन पंकज उर धरहू । लंका अचल राज तुम करहू ॥ अपने हृदय में राम जी को बिठा लो और फिर मजे से लंका में राज करो। यहाँ हनुमान जी रावण के हृदय में भगवान को बिठाने की बात करते हैं, इसलिए वे विद्यावान हैं । सीख : इसलिए विद्वान ही नहीं बल्कि “विद्यावान” बनने का प्रयत्न करें। 🌹🙏🌹

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कामेंट्स

Madhuben patel Sep 29, 2020
जय श्री हनुमानजी शुभप्रभात स्नेहवंदन प्यारी बहना जी संकटमोचन जी का आशीर्वाद हर पल बनी रहेवे जी

B K Patel Sep 29, 2020
जय श्री मंगलमुर्ती हनुमंतेय नमः जय सीताराम शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🌹🙏🙏

Kamlesh Sep 29, 2020
जय श्री राम

HAZARI LAL JAISWAL Sep 29, 2020
जय जय श्री हनुमान पवनसुत हनुमान की जय 🙏🙏🌹 शुभ प्रभात वंदन जी

Kavita Sant Sep 29, 2020
Jay Shree Ram 🌹🌿🌹🌹🌹🌿🌹👋🌹🌻🌹🌹🌹👋🌹🌿🌹🌿🌿🌹

राजकुमार Sep 29, 2020
🌹जय बजरंग 🌹 🙏सुप्रभात वंदन 🙏 🌻🌻आपका दिन शुभ हो 🌻🌻

Ravi Kumar Taneja Sep 29, 2020
मंगल कामनाओं के साथ इस मधुर सी सुबह का प्यार भरा जय श्री कृष्ण।*🌷🌷🌷 🕉🙏🏻 *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* *༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* 🙏🏾🌹 *जय श्री कृष्णा*🌹🙏🏾

ramkumarverma Oct 19, 2020

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Rcnegi Oct 19, 2020

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simran Oct 19, 2020

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🌹VANITA KALE Oct 19, 2020

🙏🍀शुभ सोमवार 🍀🙏🙏🍀हरहर महादेव 🍀🙏🙏🍀🌹 जय माता दी🌹🍀🙏🌹 माता रानी का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे....👏🙏🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒👏☜☆☞☜☆☞☜☆☜☆☞ ☜☆☞☜☆☞☜☆☞☜☆ 🙏🌹माता रानी के 108नाम👇👇👇👇👇👇👇👇 दुर्गा के 108 नाम सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा, चंद्रघंटा, महातपा, बुद्धि, अहंकारा, चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमंत्रमयी, सत्ता, सत्यानंदस्वरुपिणी, अनंता, भाविनी, भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता, चिंता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला, पाटलावती, पट्टाम्बरपरिधाना, कलमंजरीरंजिनी, अमेयविक्रमा, क्रूरा, सुन्दरी, सुरसुन्दरी, वनदुर्गा, मातंगी, मतंगमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, एंद्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुंडा, वाराही, लक्ष्मी, पुरुषाकृति, विमला, उत्कर्षिनी, ज्ञाना, क्रिया, नित्या, बुद्धिदा, बहुला, बहुलप्रिया, सर्ववाहनवाहना, निशुंभशुंभहननी, महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहंत्री, चंडमुंडविनाशिनी, सर्वसुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी, सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिनी, अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिनी, कुमारी, एककन्या, कैशोरी, युवती, यति, अप्रौढ़ा, प्रौढ़ा, वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी, घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी, कालरात्रि, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली, विष्णुमाया, जलोदरी, शिवदुती, कराली, अनंता, परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्षा, ब्रह्मावादिनी।

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Ramesh Agrawal Oct 19, 2020

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Ravi Mishra Oct 19, 2020

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