पञ्चमकार

पञ्चमकार

तन्त्राणामतिगूढ़त्वात्तदभावो अप्यतिगोपित
ब्राह्मणों वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञो बुद्घिमान वशी ।।
गुढतंत्रार्थ भावस्य निर्मथ्योद्घरणे क्षम: ।
बाममार्गेअधिकारी स्थदितरो दु:खभाग् भवेत्।।
(भावचूड़ामनी)
अर्थात तंत्रो को अति गूढ़ होने के कारण उनका भाव भी अत्यंत गुप्त है।इसलिये वेडशास्त्रो
के अर्थ तत्व को जानने वाला जो बुद्घिमान और
जितेन्द्रिय पुरुष गूढ़ तन्त्रार्थ के भाव का मन्थन
करके उद्घार करने में समर्थ हो वही बाम मार्ग का अधिकारी हो सकता है।उसके सिवा दूसरा दू:ख का भी भागी हो सकता है
इस तरह तन्त्र गर्न्थो में बाममार्ग के अधिकारी का वर्णन बहुत जगह पाया जाता है।इससे स्पस्ट
बिदित होता है की इन्द्रियों-लोलुप लोगो का धर्म-
मार्ग में कोई अधिकारी नही,बल्कि उसका अधिकारी जितेन्द्रिय ही है।
पञ्चमकार् का उल्लेख भी तन्त्र के गर्न्थो में बहुतायता से पाया जाता है।यथा-----

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कामेंट्स

pt bk upadhyay Dec 22, 2017
भाई आप के कथन से मैं भी सहमत हूँ। गोपनीय ज्ञान को चंद लाइक्स के लालच मे लोग सार्वजनिक करते हैं जिससे व्यर्थ टिप्पणी शुरु हो जाती हैं व उसके अपमान के कारण बनते हैं। पात्र न होने पर भी अनुष्ठान करते हैं व हानि होती है तो विद्या को कोसते हैं। बेहतर है हम एप के उद्देश्य हृदयंगम करें व तदनुसार चले। पोस्ट स्तुत्य है। शुभ रात्रि।

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