एक मार्मिक कथा।

एक मार्मिक कथा।

💧एक बुढ़िया का स्वभाव था कि जब तक वह किसीसे लड़ न लेती, उसे भोजन नहीँ पचता था।
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💧बहू घर मेँ आयी तो बुढ़िया ने सोचा, 'अब घर में ही लड़ लो, बाहर किसलिए जाना ?' अब वह बात-बात पर बहू को जली-कटी सुनाती : 💧"तुम्हारे बाप ने तुम्हें क्या सिखाया है ? माँ ने क्या यही शिक्षा दी है ? अरी, बोलती क्यों नहीँ ? तेरे मुँह में जीभ नहीँ है क्या ?"
💧वह चुप साधे सुनती रहती और मुस्कुरा देती। पड़ोसी सुनकर सोचते: 'यह कैसी सास है !
💧बहू को चुप देखकर सास कहती : "अरी ! धरती पर पाँव पटकें तो भी धप की आवाज आती है और मैं इतना बोलती हूँ फिर भी तू चुप रहती है ?"
💧यह सब देखकर एक पड़ोसिन बोली: "बुढ़िया ! लड़ने का इतना ही चाव है तो हमसे लड़ ले, तेरी इच्छा पूरी हो जायेगी।इस बेचारी गाय को क्यों सताती है ?"
💧तभी बहू ने पड़ोसिन को नम्रतापूर्वक कहा : "इन्हें कुछ मत कहो मौसी! ये तो मेरी माँ हैं।माँ बेटी को नहीँ समझायेगी तो और कौन समझायेगा ? "
💧सास ने यह बात सुनी तो पानी-पानी हो गयी।उस दिन से बहू को उसने अपनी बेटी मान लिया और झगड़ा करना छोड़कर प्रेम से रहने लगी।
💧यह बहू की सहनशक्ति, सास के प्रति सदभाव और मातृत्व की भावना का ही कमाल था कि उसने सास का स्वभाव बदल दिया।
💧सास- बहू के जोड़े में चाहे सास का स्वभाव थोडा ऐसा-वैसा हो चाहे बहू का , परंतु दूसरा पक्ष थोडा सूझबूझवाला, स्नेही हो तो समय पाकर उसका स्वभाव अवश्य बदल जाता है और घर का वातावरण मंगलमय हो जाता है।
💧हे भारत की माताओँ-बहनो-देवियो ! आप अपने और परिवार के सदस्यों की जीवन-वाटिका को सुंदर-सुंदर सद्गुणोंरूपी फूलों से महका सकती हो।
💧आपमें ऐसा सामर्थ्य है कि आप चाहो तो घर को नन्दनवन बना सकती हो और उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हो।

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कामेंट्स

Naresh Attri Sep 14, 2017
भगवान् ऐसी सद बुद्धि सभी बहनो और बहुओ में भी देना

Anuradha Tiwari Aug 18, 2018

देवो की तपोभूमि हिमाचल के कागंडा मे वैजनाथ से 5 km की दूरी पर कुसंल नामक जगह पर स्थापित है शिवशंकर भगवान के तप प्रकाश से स्वंयभू उत्पन्न शिवलिगं | जिसे महाकाल मन्दिर के नाम से जाना जाता है | सम्पूर्ण विश्व मे उज्जैन व वैजनाथ मे महाकाल के दो ही मन्...

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Belpatra Pranam Bell +23 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 4 शेयर
Anuradha Tiwari Aug 18, 2018

कंचन वन में शेर सिंह का राज समाप्त हो चुका था पर वहां बिना राजा के स्थिति ऐसी हो गई थी जैसे जंगल राज हो जिसकी जो मर्जी वह कर रहा था। वन में अशांति, मारकाट, गंदगी, इतनी फैल गई थी कि वहां जानवरों का रहना मुश्किल हो गया। कुछ जानवर शेरसिंह को याद कर र...

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Anuradha Tiwari Aug 18, 2018

समुद्रतट पर एक व्यक्ति चिंतातुर बैठा था, इतने में उधर से विभीषण निकले। उन्होंने उस चिंतातुर व्यक्ति से पूछाः क्यों भाई! तुम किस बात की चिंता में पड़े हो? मुझे समुद्र के उस पार जाना हैं परंतु मेरें पास समुद्र पार करने का कोई साधन नहीं हैं। अब क्या ...

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Gopal Krishan Aug 17, 2018

🌿 तुलसी की महिमा 🌿
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मैया की यह रोचक कहानी जरुर पढ़े
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राजस्थान में जयपुर के पास एक इलाका है– लदाणा। पहले वह एक छोटी सी रियासत थी। उसका राजा एक बार शाम के समय बैठा हुआ था। उसका ...

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Pranam Jyot Water +98 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 151 शेयर
Anuradha Tiwari Aug 17, 2018

गाय के अंगों में सम्पूर्ण देवताओं का निवास बताया गया है । गाय की छाया भी बड़ी शुभ मानी गयी है । यात्रा के समय गाय या साँड़ दाहिने आ जाय तो शुभ माना जाता है और उसके दर्शन से यात्रा सफल हो जाती है । दूध पिलाती गाय का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है‒‘सुरभी...

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Pranam Milk Jyot +14 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 50 शेयर
Anuradha Tiwari Aug 17, 2018

मैं एक घर के करीब से गुज़र रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई। उस बच्चे की आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका।

अंदर जा कर मैने देखा कि एक माँ अपने ...

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Gopal Krishan Aug 17, 2018

एक गांव के अंत पर एक साधु रहता था।
अकेला एक झोपड़े में,
जिसमें कि द्वार भी नहीं थे और कुछ भी नहीं था,
जिसके लिए कि द्वारों की आवश्यकता हो!

एक दिन कुछ सैनिक उधर आए।
वे उस झोपड़े में जल मांगने गए।
उनमें से किसी ने साधु से पूछा ‘
आप कैसे साधु है...

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Anuradha Tiwari Aug 16, 2018

,,,,,,,,,,, “पुण्य ",,,,,की महत्ता मूल्य के आधार पर नहीं, कर्म की उपयोगिता के आधार पर होती है। ,,,,,,,,,,,,,,,

(🔴 ईश्वर के प्रति स्वहितार्थ प्रदर्शित भक्ति की अपेक्षा परहितार्थ कार्य करना अधिक पुण्यदायी होता है और ऐसा करने वाला ही सही मायनों मे...

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Pranam Dhoop Flower +16 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 31 शेयर
Gopal Krishan Aug 17, 2018

गुरू की शिक्षा

एक व्यक्ति अपने गुरु के पास गया और बोला, गुरुदेव, दुख से छूटने का कोई उपाय बताइए। शिष्य ने थोड़े शब्दों में बहुत बड़ा प्रश्न किया था। दुखों की दुनिया में जीना लेकिन उसी से मुक्ति का उपाय भी ढूंढना! बहुत मुश्किल प्रश्न था।

गुरु ने क...

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Bell Pranam Flower +7 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 19 शेयर

एक शख्स सुबह सवेरे उठा साफ़ कपड़े पहने और मस्जिद की तरफ हो लिया ताकि फज्र की नमाज़ बा जमात अदा कर सके, रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा कपड़े कीचड़ से सन गए वापस घर आया कपड़े बदलकर वापस मस्जिद की तरफ रवाना हुआ फिर ठीक उसी जगह ठोकर खा कर गिर पड़ा और वापस घर आ...

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Pranam Like +2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

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