Devendra
Devendra Aug 23, 2017

*गणपती क्यों बिठाते हैं ?*

#गणेशजी #ज्ञानवर्षा
*गणपती क्यों बिठाते हैं ?*

हम सभी हर साल गणपती की स्थापना करते हैं, साधारण भाषा में गणपती को बैठाते हैं।
लेकिन क्यों ???
किसी को मालूम है क्या ??
हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है।
लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था।
अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपती जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की।
गणपती जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था।
अतः गणपती जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की।
मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा।
महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला।
अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ।
वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया।
इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए।
तभी से गणपती बैठाने की प्रथा चल पड़ी।
इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं।।

*🌺गणपती बाप्पा मोरया🌸*

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*1.कुंडली के भावों पे विभिन्न मत-* *2.मार्केश ग्रह के लक्षण व समाधान-* *3.पुत्र द्वारा धन प्राप्ति के योग-* *4- वास्तु टिप्स-* *1.किसी भी जन्म कुंडली मे चन्द्रमा 10 वें अंक अर्थात मकर राशि मे किसी भी घर में स्थित हो तो उस व्यक्ति को जीवन में एक बार तो अवश्य ही भयँकर विफलता झेलनी ही होगी , समाज में अपना मुख दिखाने में भी संकोच करेगा।* *2.चन्द्रमा के साथ एक ही घर में शनि , राहु अथवा मंगल जैसे दुष्ट ग्रह हो तो वह व्यक्ति मानसिक रूप से इतना परेशान होगा कि लगे पागल है।* *3.चन्द्रमा चार दुष्ट ग्रहों शनि , राहु , मंगल , केतु में से किसी दो के साथ किसी भी घर मे हो अथवा दो दुष्ट ग्रह चन्द्रमा को देखते हैं तब भी उपरोक्त से मिलता जुलता प्रभाव ही पड़ता है। । यदि दो दुष्ट ग्रह चंद्र के साथ न हों किन्तु उससे अगले पिछले घर में हों तो भी मानसिक यातना और परेशानी का अनुभव उस व्यक्ति को होता ही है ।* *4. यदि किसी की कुंडली मे मंगल और शुक्र एक ही भाव मे साथ हों तो उस व्यक्ति के विवाह पश्चात भी अन्यत्र सम्बन्ध होते ही हैं ।चाहे वो कितना ही संयमी और सदाचारी हो।* *5.यदि कुंडली मे 10 नम्बर अर्थात मकर राशि का मंगल हो तो दो परिणाम होंगे , यदि कुंडली महिला की है तो उसके पिता का स्वभाव बात बात में भद्दी गालियां देना होगा और यदि पुरुष की है तो ऐसी ही अभद्र भाषा का प्रयोग उसके चाचा करेंगे । साथ ही वह व्यक्ति उत्तम श्रेणी का विद्यार्थी भी होगा।* *6.शनि यदि तुला राशि 7 अंक में होगा तब वह विद्वान और श्रेष्ठ विद्यार्थी होगा।* *7.यदि गुरु 4 अंक में अर्थात कर्क राशि मे उच्च होगा तो वो व्यक्ति सज्जन , उदार ह्रदय , चरित्रवान और सत्यवादी होगा ।* *8. यदि लग्न में मंगल हो और अस्त न हो तो व्यक्ति क्रोधी होगा ही।* *9. यदि लग्न मेष है तो व्यक्ति धैर्यहीन होगा।* *10. कर्क लग्न में या नौवें घर अथवा भाव कहें में गुरु और चन्द्र स्थित हों तो वह व्यक्ति महान नेता , निडर सत्यवादी और ख्याति प्राप्त हो।* *11. यदि मकर लग्न में अकेला केतु हो वो व्यक्ति जर्जर शरीर , जिसके देह में माँस न दिखता हो पीत शरीर वाला होता है और क्षय रोग tb से पीड़ित हो ।* *12. तीसरे भाव का मंगल व्यक्ति को साहसी बनाता है।* *13.किसी भी भाव में मकर राशि मे चार ग्रह वाला व्यक्ति कलंक , लज्जा या पराजय की भावना से ग्रस्त होता है और समाज के उच्च लोगो के सामने प्रकट होने में लज्जा महसूस करे।* *14. किसी भी घर मे चन्द्र और राहु साथ हों वो व्यक्ति कारावास , आरोप , मुक़्क़दमें , अकस्मात दुःख आदि से ग्रस्त हो ।* *15.किसी भी भाव में गुरु और चन्द्र अथवा शुक्र और चन्द्र साथ हों , वो व्यक्ति बहुत सुंदर आकर्षक होगा और यदि यही सहयोग चौथे भाव में हों तो माता का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है । यदि यही सहयोग सप्तम भाव अर्थात पत्नी के भाव मे हो तो पत्नी लुभावन होगी ।और यदि दशम भाव हो तो पिता सुंदर होंगें ।* *16.चन्द्र ,शनि एक साथ चौथे घर हों तो बचपन और जवानी घोर आपदाओं में बीते ।* *चंद्र और राहु युति के प्रभाव से माता या पत्नी को कष्ट होता है, मानसिक तनाव रहता है, आर्थिक परेशानियाँ, गुप्त रोग, भाई से बैर और परिजनों का व्यवहार भी परायों जैसा होने के फल मिल सकते हैं।* *दरअसल चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। अब यदि बुध की युति राहु के साथ है तो यह जड़त्व योग बन जाता है। इन योगों के प्रभाव स्वरुप भाव स्वामी की स्थिति के अनुसार ही अशुभ फल मिलते हैं। वैसे चंद्र की युति राहु के साथ कभी भी शुभ नही मानी जाती है। ऐसे में शिव आराधना अच्छा लाभ दे सकती है।* *कुंडली के भावों पे विभिन्न मत-* *वैदिक ज्योतिष में आचार्यो के विभिन्न्न मत की बात करे तो सभी विद्धवान के विभिन्न मत है जो यहाँ लिख रहे है।* *लग्नेश सदैव शुभ फल देता है।* *लग्नेश यदि अष्टमेश हो तो भी शुभ होता है।* *लग्नेश यदि ष्टमेश हो तो थोड़ा दोष युक्त होता है।* *लग्नेश यदि द्वादेश हो तो भी थोड़ा दोष युक्त होता है।* *लग्नेश चाहे शुभ ग्रह हो किंतु निकृष्ट स्थान का भी स्वामी हो तो कुछ पाप फल उसमे आ जाता है।* *द्वितीयेश और व्ययेश-* *यह स्वयं न शुभ होते है और न पाप होते है जैसी इनकी दूसरी राशि होती है उसके स्वामित्व के अनुसार ही जैसे शुभ या पाप ग्रह बैठे हो वैसा ही फल करते है यह मारक भी होते है।* *त्रिकोण-* *त्रिकोण सदैव शुभ फल करते है।* *त्रिकोण यदि अष्टमेश हो तो दोष युक्त होते है।* *त्रिकोण यदि अष्टमेश भी हो और पंचम में बैठा हो यो पाप नही होता।* *त्रिकोण यदि व्ययेश भी हो तो शुभ ही रहता है।* *त्रिकोण यदि द्वितीयेश हो तो मारक भी हो जाता है किंतु भाग्य उदय उसी में ही होता है।* *त्रिकोण यदि केन्द्रेश भी हो तो योगकारक होता है।* *त्रिकोण यदि ष्टमेश भी हो तो दोषयुक्त हो जात है |* *मार्केश ग्रह के लक्षण व समाधान-* *मारक ग्रह के बारे में तो सुना ही होगा, क्योंकि प्रत्येक कुंडली में कुछ ग्रह मारक का काम करते हैं, माना जाता है कि जब भी इन ग्रहों की दशा या अंतर्दशा आती है तो उस समय यह ग्रह जातक को कष्ट देते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि सभी को एक जैसा ही कष्ट और परेशानी दें, यह सब अलग-2 लग्नो के हिसाब से कष्ट देते हैं, और यह प्रत्येक कुंडली में शुभ अशुभ ग्रह, ग्रहों की अच्छी व बुरी दृष्टि पर ही निर्भर करता है इसलिए घबराना नहीं चाहिए।* *आप अपनी कुंडली चेक कर जान सकते हैं कि कौन सा ग्रह आपके लिए मारक मतलब कष्टकारक होंगे।* *कुंडली में लग्न से गिनने पर दूसरा घर और सातवां घर मारक स्थान या भाव कहलाते हैं, (कुछ विद्वान 12वें घर को भी मारक मानते है) इन घरों में जो भी राशि आती है उनके स्वामी मारकेश कहलाते हैं।* *लक्षण-* *मारकेश की दशा/अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में मानसिक व शारीरिक कष्ट, चोट लगना, दुर्घटना होना, कोई लंबी बीमारी, मानसिक तनाव, अपयश, कार्यों में बाधाएं और अड़चने, वैवाहिक जीवन में क्लेश, बिना वजह क्लेश, डर व घबराहट, आत्म विश्वास की कमी आदि परेशानियां हो सकती है।* *सौम्य और शुभ ग्रह यदि मारकेश हैं तो इतने कष्टकारी नहीं होते किन्तु यदि पापी और क्रूर ग्रह मारकेश हैं तो फिर कुछ कष्ट अवस्य देते हैं।* *चंद्रमा और सूर्य यदि मारकेश हों तो मारकेश होकर भी मारकेश नहीं होते मतलब अशुभ फल नहीं देते।* *उपाय- यदि मारकेश की दशा/अंतर /प्रत्यंतर चल रहा हो तो घबराना नहीं चाहिए क्योंकि जहां चाह वहां राह होती है, अगर ज्योतिष में कुछ बुरे योग हैं तो वहां उपाय भी हैं।* *शिव आराधना से लाभ मिलता है, शिवजलाभिषेख करें।* *मारक ग्रहों की दशा मे उनके उपाय करना चाहिए.* *महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र इस प्रकार है-* *ॐ हौं जूं स: ॐ भू: भुव: स्वःॐत्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्द्धनम्।* *उर्व्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतातॐ भू:भूव: स्वः ॐ जूं स: हौं ॐ।।* *इस विषय में राम रक्षा स्त्रोत, महामृत्युंजय मन्त्र, लग्नेश और राशीश के मन्त्रों का अनुष्ठान और गायत्री मन्त्रों द्वारा इनमे कुछ वृद्धि की जा सकती है।* *चार बातें नोट कर लीजिए-* *कभी भी उच्च के ग्रहों का दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों की कभी पूजा नहीं करनी चाहिए।* *कुंडली में गुरु दसम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो किसी भी प्रकार के धार्मिक निर्माण के लिए धन नहीं देना चाहिए यह अशुभ होता है और जातक को कभी भी फांसी तक पहुंचा सकता है। आप चाहें तो शारीरिक श्रम दान दे सकते हैं।* *कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले रंग के वस्त्र दान नहीं करने चाहिए।* *बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा। इससे परिवार की वृद्धि तक भी रुक सकती है।* *सूर्य पापी व्यक्ति के लिए बुरा है , चंद्र तार्किक व्यक्ति के लिए बुरा है , शुक्र वैरागी व्यक्ति के लिए बुरा है, गुरु अधर्मी व्यक्ति के लिए बुरा है , राहु सत्यवादी व्यक्ति के लिए बुरा है , बुध भावप्रधान व्यक्ति के लिए बुरा है , मंगल शांतिप्रिय व्यक्ति के लिए बुरा है , शनि अत्याचारी व्यक्ति के लिए बुरा है, केतु सांसारिक लोभी व्यक्ति के लिए बुरा है।* *उदाहरण-* *मान लीजिए किसी का शराब का व्यापार है, तो गुरु उसके व्यापार में लाभ नही देगा, या किसी की हवन पूजन सामग्री की दुकान है तो राहु उसके व्यापार में लाभ नही देगा।* *इसी प्रकार ग्रहों के कारकत्व का विस्तार में विश्लेषण करें फिर स्वयं ही पता चल जाएगा की ज्योतिष फलित क्यो नही हो-* *पुत्र द्वारा धन प्राप्ति के योग-* *जन्मपतरी से कैसे मालूम हो कि आपको पुत्र से धन प्राप्ति होगी कि नही।* *जन्मपत्री का दूसरा भाव आपकी सन्तान का। देवगुरु बृहस्पति सन्तान के कारक* *जब कभी भी दूसरे भाव के स्वामी का सम्बन्ध पंचमेश या पंचम भाव से होगा जातक को सन्तान से धन की प्राप्ति अवश्य ही होगी।* *देवगुरु बृहस्पति पंचम भाव मे हो और उस पर नवमेश की दृश्टि हो तब भी जातक को पुत्र से धन की प्राप्ति होती है।* *किसी भी योग को फलित होने के लिए लगनेश का बलवान होना अत्यंत आवश्यक है। यदि लगनेश कमजोर हो जाये तो जन्मपत्री के शुभ योगो में कमी आ जाती है। अतः लगनेश की स्तिथि अवश्य ही देख ले।* *कुछ वास्तु टिप्स-* *केक्टस और किसी भी प्रकार के काँटे वाले पौधे घर में स्थापित करना शुभ नहीं होता है।आज के जमाने में केक्टस राहु के कारक हैं।* *केतु इमली का वृक्ष, तिल के पौधे तथा केले के फल का कारक है। यदि केतु खराब हो तो इन पौधों को घर के आसपास लगाना घर के मालिक के बेटे के लिए अशुभ फल का कारक हो जाता है,क्योंकि कुंडली में केतु हमारे बेटे को कारक भी है।*

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Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 *स्नान कब और कैसे करें घर की समृद्धि बढ़ाना हमारे हाथ में है। सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए हैं। *1* *मुनि स्नान।* जो सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है। . *2* *देव स्नान।* जो सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। . *3* *मानव स्नान।* जो सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। . *4* *राक्षसी स्नान।* जो सुबह 8 के बाद किया जाता है। ▶मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ▶देव स्नान उत्तम है। ▶मानव स्नान सामान्य है। ▶राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। . किसी भी मानव को 8 बजे के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . *मुनि स्नान .......* 👉घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विद्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है। . *देव स्नान ......* 👉 आप के जीवन में यश , कीर्ती , धन, वैभव, सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है। . *मानव स्नान.....* 👉काम में सफलता ,भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता, मंगलमय , प्रदान करता है। . *राक्षसी स्नान.....* 👉 दरिद्रता , हानि , क्लेश ,धन हानि, परेशानी, प्रदान करता है । . किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। *खास कर जो घर की स्त्री होती थी।* चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो, बहन के रूप में हो। . घर के बड़े बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए। . *ऐसा करने से धन, वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।* . उस समय...... एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा परिवार पल जाता था, और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते हैं तो भी पूरा नहीं होता। . उस की वजह हम खुद ही हैं। पुराने नियमों को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए हमने नए नियम बनाए हैं। . प्रकृति ......का नियम है, जो भी उस के नियमों का पालन नहीं करता, उस का दुष्परिणाम सब को मिलता है। . इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमों को अपनायें और उन का पालन भी करें । . आप का भला हो, आपके अपनों का भला हो। . मनुष्य अवतार बार बार नहीं मिलता। . अपने जीवन को सुखमय बनायें। जीवन जीने के कुछ जरूरी नियम बनायें। ☝ *याद रखियेगा !* 👇 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।* *सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोएं।* *पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।* मृत्यु उपरांत एक सवाल ये भी पूछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायु (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ों पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शोक में 4. मन्दिर में 5. कथा में सिर्फ 1 बार ये message भेजो बहुत लोग इन पापों से बचेंगे ।। अकेले हो? परमात्मा को याद करो । परेशान हो? ग्रँथ पढ़ो । उदास हो? कथाएं पढ़ो। टेन्शन में हो? भगवत् गीता पढ़ो । फ्री हो? अच्छी चीजें करो हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियों पर कृपा करो...... *सूचना* क्या आप जानते हैं ? हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है। व्रत,उपवास करने से तेज बढ़ता है, सरदर्द और बाल गिरने से बचाव होता है । आरती----के दौरान ताली बजाने से दिल मजबूत होता है । ये मैसेज असुर भेजने से रोकेगा मगर आप ऐसा नहीं होने दें और मैसेज सब नम्बरों को भेजें । श्रीमद् भगवद्गीता, भागवत्पुराण और रामायण का नित्य पाठ करें। . ''कैन्सर" एक खतरनाक बीमारी है... बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ... बहुत मामूली इलाज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ... अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते हैं ... खाना खाने के बाद "पानी" ख़ून में मौजूद "कैन्सर "का अणु बनाने वाले '''सैल्स'''को '''आक्सीजन''' पैदा करता है... ''हिन्दु ग्रंथों में बताया गया है कि... खाने से पहले 'पानी' पीना अमृत" है... खाने के बीच मे 'पानी' पीना शरीर की 'पूजा' है ... खाना खत्म होने से पहले 'पानी' पीना "औषधि'' है... खाने के बाद 'पानी' पीना बीमारियों का घर है... बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीयें ... ये बात उनको भी बतायें जो आपको 'जान' से भी ज्यादा प्यारे हैं ... हरि हरि जय जय श्री हरि !!! रोज एक सेब नो डाक्टर । रोज पांच बादाम, नो कैन्सर । रोज एक निंबू, नो पेट बढ़ना । रोज एक गिलास दूध, नो बौना (कद का छोटा)। रोज 12 गिलास पानी, नो चेहरे की समस्या । रोज चार काजू, नो भूख । रोज मन्दिर जाओ, नो टेन्शन । रोज कथा सुनो मन को शान्ति मिलेगी । "चेहरे के लिए ताजा पानी"। "मन के लिए गीता की बातें"। "सेहत के लिए योग"। और खुश रहने के लिए परमात्मा को याद किया करो । अच्छी बातें फैलाना पुण्य का कार्य है....किस्मत में करोड़ों खुशियाँ लिख दी जाती हैं । जीवन के अंतिम दिनों में इन्सान एक एक पुण्य के लिए तरसेगा ।

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Mahesh Bhargava Jan 26, 2020

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Durga Pawan Sharma Jan 26, 2020

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एक भक्त था वह परमात्मा को बहुत मानता था, बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था । एक दिन भगवान से कहने लगा – मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई । मैं चाहता हूँ कि आप भले ही मुझे दर्शन ना दे पर ऐसा कुछ कीजिये की मुझे ये अनुभव हो की आप हो। भगवान ने कहा ठीक है, तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो, जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरो की जगह चार पैर दिखाई देंगे । दो तुम्हारे पैर होंगे और दो पैरो के निशान मेरे होंगे । इस तरह तुम्हे मेरी अनुभूति होगी । अगले दिन वह सैर पर गया, जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिये वह बड़ा खुश हुआ । अब रोज ऐसा होने लगा । एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ सब कुछ चला गया, वह रोड़ पर आ गया उसके अपनो ने उसका साथ छोड दिया । देखो यही इस दुनिया की प्रॉब्लम है, मुसीबत में सब साथ छोड़ देते है । अब वह सैर पर गया तो उसे चार पैरों की जगह दो पैर दिखाई दिये । उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुरे वक्त में भगवान ने भी साथ छोड दिया। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा फिर सब लोग उसके पास वापस आने लगे । एक दिन जब वह सैर पर गया तो उसने देखा कि चार पैर वापस दिखाई देने लगे । उससे अब रहा नही गया, वह बोला- भगवान जब मेरा बुरा वक्त था तो सब ने मेरा साथ छोड़ दिया था पर मुझे इस बात का गम नहीं था क्योकि इस दुनिया में ऐसा ही होता है, पर आप ने भी उस समय मेरा साथ छोड़ दिया था, ऐसा क्यों किया? भगवान ने कहा – तुमने ये कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हारा साथ छोड़ दूँगा, तुम्हारे बुरे वक्त में जो रेत पर तुमने दो पैर के निशान देखे वे तुम्हारे पैरों के नहीं मेरे पैरों के थे, उस समय में तुम्हे अपनी गोद में उठाकर चलता था और आज जब तुम्हारा बुरा वक्त खत्म हो गया तो मैंने तुम्हे नीचे उतार दिया है । इसलिए तुम्हे फिर से चार पैर दिखाई दे रहे । So moral is never loose faith on God. U believe in him, he will look after u forever. ✔जब भी बड़ो के साथ बैठो तो परमात्मा का धन्यवाद , क्योंकि कुछ लोग इन लम्हों को तरसते हैं । ✔जब भी अपने काम पर जाओ तो परमात्मा का धन्यवाद , क्योंकि बहुत से लोग बेरोजगार हैं । ✔परमात्मा का धन्यवाद कहो कि तुम तन्दुरुस्त हो , क्योंकि बीमार किसी भी कीमत पर सेहत खरीदने की ख्वाहिश रखते हैं । ✔ परमात्मा का धन्यवाद कहो कि तुम जिन्दा हो , क्योंकि मरे हुए लोगों से पूछो जिंदगी की कीमत । दोस्तों की ख़ुशी के लिए तो कई मैसेज भेजते हैं । देखते हैं परमात्मा के धन्यवाद का ये मैसेज कितने लोग शेयर करते हैं । किसी पर कोई दबाव नही है ।

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Krishna Singh Jan 25, 2020

महाभारत के युद्ध के दौरान लाखों लोगों का भोजन कौन बनाता था? और उन भोजन बनाने वाले को भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध के बाद क्या आशीर्वाद दिया था। आज से करीब 5000 साल पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत की लड़ाई लड़ी गई। इस सेना में कौरव पक्ष की 11 लाख और पांडव पक्ष की 7 लाख की सेना करीब 18 दिन तक युद्ध लड़ी थी। और करीब 50 लाख योद्धा रणभूमि पर गए थे और 1 लाख के आसपास दूसरे लोग भी यहां जुटे थे। लेकिन आप सबके मन में एक यक्ष प्रश्न यह होगा कितने लोगों को उस वक्त खाना कौन खिलाता होगा?? और उनके खाने की क्या व्यवस्था होती होगी? युद्ध के शुरुआत में सैनिकों का आंकड़ा 50 लाख था लेकिन हर दिन तमाम सैनिक युद्ध में मारे जाते थे इसलिए हर रोज जीवित रहे सैनिकों के संख्या के अनुसार भोजन की मात्रा में भी फेरफार करनी पड़ती थी। आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे भारत में सैनिकों के भोजन की सारी व्यवस्था महाराजा उदुपी की सेना ने संभाली थी। उडुपी जो आज कर्नाटक में है और आज यही कारण है कि उडुपी में बेहद पौराणिक श्री कृष्ण मठ है। महाभारत युद्ध में 3 व्यक्तियों ने प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में भाग नहीं लिया था और तठस्थ रहे एक थे बलराम और दूसरे थे भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी के भाई रुकमी और इसके अलावा इस युद्ध में एक तीसरे भी व्यक्ति थे जो निष्पक्ष थे और वह थे महाराजा उडुपी। महाभारत के युद्ध में लड़ने के लिए उडुपी के महाराजा को कौरव और पांडव दोनों ने आमंत्रित किया था और युद्ध का आमंत्रण स्वीकार कर उडुपी के महाराजा सेना लेकर तो आए थे फिर यहां आकर उडुपी के महाराजा ने देखा कौरव और पांडवों में दूसरे राजाओं को अपने पक्ष में रखने के लिए काफी खींचतान चल रही है तब उडुपी के महाराजा ने सोचा कि वह युद्ध में भाग नहीं लेंगे फिर उडुपी के महाराजा भगवान श्री कृष्ण को मिले और उनसे कहा कि वासुदेव यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं कुरुक्षेत्र में इकट्ठी हुई सेना के लिए अपने सैनिकों से भोजन प्रबंध की व्यवस्था करवाउँ भगवान श्री कृष्ण उडुपी महाराजा के विचार से बहुत प्रभावित हुए और भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें युद्ध में भोजन व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दे दी। लेकिन एक बात और आश्चर्य है कि महाभारत के युद्ध में जहां लाखों सैनिक थे और हर रोज हजारों सैनिक मरते भी थे लेकिन कभी ना भोजन की कमी हुई ना कभी भोजन को फेंकना पड़ा। 18 दिवस चलने के बाद महाभारत का युद्ध खत्म हो गया पांडवो की विजय हुई और हस्तिनापुर की गद्दी पर महाराजा युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ फिर यही प्रश्न महाराजा युधिष्ठिर के मन में भी था कि आखिर महाभारत की युद्ध के दौरान भोजन का कभी घट बढ़ क्यों नहीं हुआ ? उसके बाद महाराजा युधिष्ठिर ने दरबार में हाजिर उडुपी राज से यही सवाल पूछा फिर महाराजा उडुपी ने उल्टे युधिष्ठिर से सवाल किया कि धर्मराज आपके पास सात लाख सेना थी और कौरव के पास ग्यारह अक्षौहिणी यानी लाख सेना थी, संख्या बल में दुर्योधन की सेना आपसे सवा गुना ज्यादा ताकतवर थी उसके बावजूद भी आप जीते तो उसका श्रेय किसे जाता है? तब युधिष्ठिर ने जवाब दिया भगवान श्री कृष्ण को तब महाराजा उडुपी ने कहा तो जो मैंने भोजन का इतना शानदार प्रबंध किया उसका श्रेय भी भगवान श्री कृष्ण को जाता है... युद्ध के दरमियान मैं रात को शिविर में भगवान श्री कृष्ण के पास गिन कर मूंगफली लेकर जाता था। मेरी दी हुई मूंगफली भगवान श्री कृष्ण खाते थे और जितनी मूंगफली वह खा लेते थे उसका हजार गुना सैनिकों का खाना अगले दिन नहीं बनाना होता था मैं यह समझ लेता था। यानी कि अगर वासुदेव श्री कृष्ण दस मूंगफली खाएं तो इसका मतलब यह है कि अगले दिन मुझे 10,000 सैनिकों का खाना नहीं बनाना है यानी 10000 सैनिक वीरगति को प्राप्त होंगे । कहते हैं इस युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण ने उडुपी के सभी सैनिकों को यह आशीर्वाद दिया की जाओ पीढ़ी दर पीढ़ी तुम्हारे हाथ में इतनी शानदार पाक कला और इतना शानदार भोजन प्रबंधन होगा कि तुम पूरे विश्व में पाक कला में राज करोगे और आज यही कारण है कि हमें पूरे विश्व के कोनों में उडुपी रेस्टोरेंट और उडुपी के आसपास के रहने वाले रसोइए ही मिलते है।

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