Narayan Tiwari
Narayan Tiwari Dec 27, 2017

सत्संग वाणी

सत्संग वाणी

सत्संग में फरमाते हैं कि यदि कोई कुएँ में गिर जाए और उसे निकालने के लिए ऊपर से रस्सी डाली जाए और गिरने वाला व्यक्ति उस रस्सी को न पकड केवल बचाव के लिए चिल्लाता रहे तो वह कैसे बचेगा ?
इसी तरह यदि हम सिर्फ शोर करते रहें और मालिक की ओर भजन सुमिरन किये बिना यह समझें कि वो नैय्या पार लगा देगा तो ऐसा सोचना गलत है।

मालिक तो इंसानी देह में आते ही जीव को मुक्ति दिलाने के लिए हैं।

हम सब पापी हैं गुनाहगार हैं,
यदि हम गुनाहों से मुक्त होते तो हमें मुक्ति मिल गई होती। हम सभी कैदखाने के जीव हैं और कैदी क्या चाहता है...
सिर्फ आजादी...मुक्ति।

बहुत भाग्यशाली जीव होते हैं जिन्हें पूर्ण गुरु मिलता है।
उन जीवों की सोचिये जो निगुरे रह जाते हैं ।

यह भी सच है कि भक्ति करना हम जीवों के बस की बात नहीं।
इस के लिए भी गुरु की दया चाहिए। इस लिये हमें चाहिए कि हम गुरु से पल पल माफी मांगें,
उसे पुकारें ही नहीं उस से भजन
की दया मांगें, मालिक दयावान हैं बख्शनहार हैं, तैयार बैठे हैं हमारा हाथ पकडने को...क्यों की उनका तो काम ही हम पर दया कर के मुक्ति दिलाना है। हमें अपना तन मन धन सब गुरु की भक्ति में लगाना चाहिए।

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कामेंट्स

Ajnabi Dec 27, 2017
jay shree Radhe krishna veeruda

Mani Rana Dec 27, 2017
Radhe Radhe ji good evening ji nice g

Santosh Chandoskar Dec 27, 2017
Bhahut.Sundar.Satsang.Vani.Sadguru.Maharaj.Ko.Pranam.Aapka.Din.Mangalmay.Ho.Om.NamAH.Shivay.Good.Evening

Rai Sahab Suthar Dec 28, 2017
सुप्रभात अति सुन्दर ज्ञान जय गुरुदेवाय नम:

ramnarayanbehl Dec 28, 2017
bilkul sahi koshshi karana hamara karam hai prabhuji jarur unka hatta pakde hain .

anil bajpai Oct 23, 2018

#आदिकाव्य_रामायण_के_सृष्टा_और_मंत्रद्रष्टा_ऋषि_थे #महर्षि_वाल्मीकि...!!

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भारतीय परम्परा में महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि माना जाता है तथा उनकी अमर कृति ‘रामायण’ आदिकाव्य के रूप में प्रसिद्ध है। वर्तमान में राम के चरि...

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S.singh Oct 23, 2018

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dev dil mor happy Oct 23, 2018

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!! श्रेष्ठता और सद्गति चाहते हो तो प्रकृति से संवाद करना सीख लो !!

तुम्हारा सन्दर्भ जो तुमने मेरे समक्ष रखा है की तुम कुछ नहीं जानते और सबकुछ जानना चाहते हो तो क्या करना चाहिए?

सबसे पहले मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ की तुम सबकुछ जान सकते हो तु...

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Pranam Jyot Fruits +10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 29 शेयर

*।।ॐ श्रीसद्गुरवे नमः।।*
*बोध-कथाएँ – 19. विषयों के आनंद में तृप्ति नहीं*
*(“महर्षि मेँहीँ की बोध-कथाएँ” नामक पुस्तक से) - सम्पादक : श्रद्धेय छोटे लाल बाबा*

*मनुष्य-शरीर का यह फल नहीं कि विषय-सुख के लिए लगे रहो।* क्यों? इसलिए कि जिनको स्वर्गादि क...

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anil bajpai Oct 23, 2018

#आजादी_अंतरात्मा_की!!!
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जामा मस्जिद के समीप एक मार्किट है । यहां पिंजरा बन्द पक्षी मिलते हैं । गत वर्ष एक मित्र के साथ वहां जाना हुआ था । मित्र की बिटिया की फरमाईश एक पिंजरा बन्द "मियां मिठ्ठू" की थी।

मार्किट में पहुंच...

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Tulsi Belpatra Lotus +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर
suraj kamboj Oct 23, 2018

Bell Pranam Lotus +59 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 177 शेयर
Ram Kumar Rathour Oct 23, 2018

Pranam +3 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 18 शेयर

*।।ॐ श्रीसद्गुरवे नमः।।*
*बोध-कथाएँ - 17. ईश्वर-भक्ति का अर्थ*
*(“महर्षि मेँहीँ की बोध-कथाएँ” नामक पुस्तक से) - सम्पादक : श्रद्धेय छोटे लाल बाबा*

ईश्वर-भक्ति एक खास चीज है। *‘भक्ति' कहते हैं सेवा को।* ‘भजन' भी सेवा करने को कहते हैं। किसी की सेवा ...

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sandhya sharma Oct 22, 2018

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