🌹🌹🌹🌹🌹ॐ सूर्याय नमः🙏🙏🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

बेबी कुंभार Nov 22, 2020
🌼🕉नमः शिवाय 🌼 शुभ सकाळ 🙏प्रनाम दादाजी सुप्रभात

Ravi Kumar Taneja Nov 22, 2020
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 Suprabhat Vandana ji *जय जय श्री कृष्ण जी* *प्रेम से गाएं - ✡️हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे* *हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे✡️ Prabhu Kripa karenge 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Renu Singh Nov 22, 2020
Radhe Radhe Bhai ji 🙏 Gopashtami ki Anant Shubh Kamnayein 🙏 Surya Bhagwan Aapko aur Aàpke Pariwar ko Swasth aur Nirog rakhein Aàpka Din Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

umasharma Nov 22, 2020
radhe Krishna 🙏 apko gopastmi ki bht bht subhkamnaye 🙏🙏 surya Narayana ki kripa ap pr hamesa bani rhe god bless you and your family 🙏

सर्व कान्त शुक्ला Nov 22, 2020
।।।। शुभ गोपाष्टमी।।।। ।।।। ॐ सूर्य देवाय नमः।।।। ।।।। शुभ प्रभात वंदन।।।।।

Radha sharma Nov 22, 2020
जय श्री सूर्यदेव भगवान 🌹🙏

Radha sharma Nov 22, 2020
राधे राधे भैया जी🙏 सुप्रभात वंदन जी 🙏

Sharmila Singh Nov 22, 2020
आदरणीय भाई जी शुभ प्रभात वंदन 🙏🌹

Kailash Pandey Nov 22, 2020
ओम सूर्याय नमः सुप्रभात वंदन भाई जी

🙋ANJALI🌹 MISHRA🙏 Nov 22, 2020
🙏🌞ॐ भास्कराय नमः🙏 जय श्री राम चाचा जी सुप्रभात वंदन🙏सूर्यदेव की कृपा से आपके सारे कष्ट दूर हो,आपके घर परिवार में आरोग्यता हमेशा बनी रहें आप और आपका परिवार सदा स्वस्थ रहें सुखी रहें,🙌 आपका हर दिन शुभ व👌👌 मंगलमय हो मेरे आदरणीय चाचा जी 🙏🚩🙏

Seema Sharma. Himachal (chd) Nov 22, 2020
गाय के शरीर में सभी देवी देवता निवास करते हैं ऋषि मुनि निवास करते हैं नदी तथा तीर्थ निवास करते हैं इसीलिए तो गौ सेवा से सभी की सेवा का फल मिल जाता है। गोपाष्टमी की शुभकामनाएं 😊🌹🙏

दादाजी 🌷 Nov 22, 2020
गाय विश्व की माता है🙏🌹 माँ से बडा़ कोई नहीं🌹🙏 अतः गाय पूजनीय वन्दनीय सेवनीय है गाय के वरदान से सब कुछ संभव है🙏🌹 कामधेनु नन्दिनी गाय ही है गाय पशु नहीं जो गाय को केवल पशु मानते है वे भ्रमित है। वन्दे गोमातरम् 🌹🙏🙏🙏🙏🙏

Anupama Shukla Nov 22, 2020
Shree radhe 🌹🙏🌹 Good evening ji God bless you and your family 🙏🙏🌹

Neeta Trivedi Nov 22, 2020
जय श्री कृष्णा शुभ संध्या वंदन आदरणीय भाई जी आप का हर एक पल शुभ और मंगलमय हो 🙏🙏🌹🌹🙏

Poonam Aggarwal Nov 26, 2020

🙏🌷* ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः*🌷🙏 🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷🐚 एक बूढ़ी माता मन्दिर के सामने भीख माँगती थी। एक संत ने पूछा - आपका बेटा लायक है, फिर यहाँ क्यों? बूढ़ी माता बोली - बाबा, मेरे पति का देहान्त हो गया है। मेरा पुत्र परदेस नौकरी के लिए चला गया। जाते समय मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया था, वे खर्च हो गये इसीलिए भीख माँग रही हूँ। सन्त ने पूछा - क्या तेरा बेटा तुझे कुछ नहीं भेजता? बूढ़ी माता बोलीं - मेरा बेटा हर महीने एक रंग-बिरंगा कागज भेजता है जिसे मैं दीवार पर चिपका देती हूँ। सन्त ने उसके घर जाकर देखा कि दीवार पर 60 bank drafts चिपकाकर रखे थे। प्रत्येक draft ₹50,000 राशि का था। पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी सम्पत्ति है। संत ने उसे draft का मूल्य समझाया। उन माता की ही भाँति हमारी स्थिति भी है। *हमारे पास धर्मग्रन्थ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित करके रखते हैं जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब हम उनका अध्ययन, चिन्तन, मनन करके उन्हें अपने जीवन में उतारेगें*। *हम हमारे ग्रन्थों की वैज्ञानिकता को समझे , हमारे त्यौहारो की वैज्ञानिकता को समझे और अनुसरण करे | 🙏🙏🙏🙏🙏 आप सभी को देवउठनी एकादशी एवं तुलसी विवाह की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान विष्णु से प्रार्थना करता हूं कि वे आप सभी के जीवन में खुशहाली, सुख-शांति एवं समृद्धि का संचार करें। ‼️ जय श्री हरि नारायण ‼️🙏

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ramkumarverma Nov 25, 2020

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. 🌿देव उठनी एकादशी-तुलसी विवाह.. ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ कार्तिक मास शुक्ल पक्ष एकादशी तदनुसार दिनांक 25 नवम्बर 2020 बुधवार . 🌺 धार्मिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु निंद्रा से जागते हैं। इसी दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत भी होती है। देवउठनी एकादशी से जुड़ी कई परम्परायें हैं। ऐसी ही एक परंपरा है तुलसी-शालिग्राम विवाह की। शालिग्राम को भगवान विष्णु का ही एक स्वरुप माना जाता है। तुलसी शालिग्राम का विवाह क्यों होता है इसकी शिव पुराण में एक कथा है, जो इस प्रकार है। 🌷तुलसी-शालिग्राम विवाह कथा... ====================== शिवमहापुराण के अनुसार पुरातन समय में दैत्यों का राजा दंभ था। वह विष्णुभक्त था। बहुत समय तक जब उसके यहां पुत्र नहीं हुआ तो उसने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को गुरु बनाकर उनसे मंत्र प्राप्त किया और पुष्कर में जाकर घोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे पुत्र होने का वरदान दिया। भगवान विष्णु के वरदान स्वरूप दंभ के यहां पुत्र का जन्म हुआ। (वास्तव में वह श्रीकृष्ण के पार्षदों का अग्रणी सुदामा नामक गोप था, जिसे राधाजी ने असुर योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया था) इसका नाम शंखचूड़ रखा गया। जब शंखचूड़ बड़ा हुआ तो उसने पुष्कर में जाकर ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। शंखचूड़ की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए और वर मांगने के लिए कहा। तब शंखचूड़ ने वरदान मांगा कि मैं देवताओं के लिए अजेय हो जाऊं। ब्रह्माजी ने उसे वरदान दे दिया और कहा कि तुम बदरीवन जाओ। वहां धर्मध्वज की पुत्री तुलसी तपस्या कर रही है, तुम उसके साथ विवाह कर लो। ब्रह्माजी के कहने पर शंखचूड़ बदरीवन गया। वहां तपस्या कर रही तुलसी को देखकर वह भी आकर्षित हो गया। तब भगवान ब्रह्मा वहां आए और उन्होंने शंखचूड़ को गांधर्व विधि से तुलसी से विवाह करने के लिए कहा। शंखचूड़ ने ऐसा ही किया। इस प्रकार शंखचूड़ व तुलसी सुख पूर्वक विहार करने लगे। शंखचूड़ बहुत वीर था। उसे वरदान था कि देवता भी उसे हरा नहीं पाएंगे। उसने अपने बल से देवताओं, असुरों, दानवों, राक्षसों, गंधर्वों, नागों, किन्नरों, मनुष्यों तथा त्रिलोकी के सभी प्राणियों पर विजय प्राप्त कर ली। उसके राज्य में सभी सुखी थे। वह सदैव भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहता था। स्वर्ग के हाथ से निकल जाने पर देवता ब्रह्माजी के पास गए और ब्रह्माजी उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए। देवताओं की बात सुनकर भगवान विष्णु ने कहा कि शंखचूड़ की मृत्यु भगवान शिव के त्रिशूल से निर्धारित है। यह जानकर सभी देवता भगवान शिव के पास आए। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव ने चित्ररथ नामक गण को अपना दूत बनाकर शंखचूड़ के पास भेजा। चित्ररथ ने शंखचूड़ को समझाया कि वह देवताओं को उनका राज्य लौटा दे, लेकिन शंखचूड़ ने कहा कि महादेव के साथ युद्ध किए बिना मैं देवताओं को राज्य नहीं लौटाऊंगा। भगवान शिव को जब यह बात पता चली तो वे युद्ध के लिए अपनी सेना लेकर निकल पड़े। शंखचूड़ भी युद्ध के लिए तैयार होकर रणभूमि में आ गया। देखते ही देखते देवता व दानवों में घमासान युद्ध होने लगा। वरदान के कारण शंखचूड़ को देवता हरा नहीं पा रहे थे। शंखचूड़ और देवताओं का युद्ध सैकड़ों सालों तक चलता रहा। अंत में भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध करने के लिए जैसे ही अपना त्रिशूल उठाया, तभी आकाशवाणी हुई कि जब तक शंखचूड़ के हाथ में श्रीहरि का कवच है और इसकी पत्नी का सतीत्व अखंडित है, तब तक इसका वध संभव नहीं होगा। आकाशवाणी सुनकर भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारण कर शंखचूड़ के पास गए और उससे श्रीहरि कवच दान में मांग लिया। शंखचूड़ ने वह कवच बिना किसी संकोच के दान कर दिया। इसके बाद भगवान विष्णु शंखचूड़ का रूप बनाकर तुलसी के पास गए। वहां जाकर शंखचूड़ रूपी भगवान विष्णु ने तुलसी के महल के द्वार पर जाकर अपनी विजय होने की सूचना दी। यह सुनकर तुलसी बहुत प्रसन्न हुई और पति रूप में आए भगवान का पूजन किया व रमण किया। तुलसी का सतीत्व भंग होते ही भगवान शिव ने युद्ध में अपने त्रिशूल से शंखचूड़ का वध कर दिया। कुछ समय बाद तुलसी को ज्ञात हुआ कि यह मेरे स्वामी नहीं है, तब भगवान अपने मूल स्वरूप में आ गए। अपने साथ छल हुआ जानकर शंखचूड़ की पत्नी रोने लगी। उसने कहा आज आपने छलपूर्वक मेरा धर्म नष्ट किया है और मेरे स्वामी को मार डाला। आप अवश्य ही पाषाण ह्रदय हैं, अत: आप मेरे श्राप से अब पाषाण (पत्थर) होकर पृथ्वी पर रहें। तब भगवान विष्णु ने कहा ~ " देवी, तुम मेरे लिए भारत वर्ष में रहकर बहुत दिनों तक तपस्या कर चुकी हो। अब तुम इस शरीर का त्याग करके दिव्य देह धारणकर मेरे साथ आन्नद से रहो। तुम्हारा यह शरीर नदी रूप में बदलकर गंडकी नामक नदी के रूप में प्रसिद्ध होगा। तुम पुष्पों में श्रेष्ठ तुलसी का वृक्ष बन जाओगी और सदा मेरे साथ रहोगी।" तुम्हारे श्राप को सत्य करने के लिए मैं पाषाण (शालिग्राम) बनकर रहूँगा। गंडकी नदी के तट पर मेरा वास होगा। नदी में रहने वाले करोड़ों कीड़े अपने तीखे दांतों से कुतर-कुतर कर उस पाषाण में मेरे चक्र का चिह्न बनाएंगे। धर्मालुजन तुलसी के पौधे व शालिग्राम शिला का विवाह कर पुण्य अर्जन करेंगे। केवल नेपाल स्तिथ गण्डकी नदी में ही मिलते है शालिग्राम... परंपरा अनुसार देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम व तुलसी का विवाह संपन्न कर मांगलिक कार्यों का प्रारंभ किया जाता है। मान्यता है कि तुलसी-शालिग्राम विवाह करवाने से मनुष्य को अतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। जय श्री विष्णुप्रिया

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Poonam Aggarwal Nov 25, 2020

🌿🌷🌿 जय श्री कृष्णा जय तुलसी माता 🌿🌷🌿 🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷 कार्तिक महीने में एक बुढिया माई तुलसीजी को सींचती और कहती कि, हे तुलसी माता! सत् की दाता मैं तेरा बिडला सीचती हूँ, मुझे बहु दे, पीताम्बर की धोती दे, मीठा मीठा गास दे, बैकुंठा में वास दे, चटक की चाल दे, पटक की मौत दे, चंदन का काठ दे, रानी सा राज दे, दाल भात का भोजन दे, ग्यारस की मौत दे, कृष्ण जी का कन्धा दे। तुलसी माता यह सुनकर सूखने लगी तो भगवान ने पूछा कि, हे तुलसी! तुम क्यों सूख़ रही हो? तुलसी माता ने कहा कि एक बुढिया रोज आती है और यही बात कह जाती है। मैं सब बात तो पूरा कर दूँगी लेकिन कृष्ण का कन्धा कहां से लाऊंगी? भगवान बोले - जब वो मरेगी तो मैं अपने आप कंधा दे आऊंगा। तू बुढिया माई से कह देना। बाद में बुढिया माई मर गई। सब लोग आ गये। जब माई को ले जाने लगे तो वह किसी से न उठी। तब भगवान एक बारह बरस के बालक का रूप धारण करके आये। बालक ने कहा, मैं कान में एक बात कहूँगा तो बुढिया माई उठ जाएगी। बालक ने कान में कहा, बुढिया माई मन की निकाल ले, पीताम्बर की धोती ले, मीठा मीठा गास ले, बैंकुंठा का वास ले, चटक की चल ले, पटक की मौत ले, कृष्ण जी का कन्धा ले! यह सुनकर बुढिया माई हल्की हो गई। भगवान ने कन्धा दिया और बुढिया माई को मुक्ति मिल गयी। हे तुलसी माता! जैसे बुढिया माई को मुक्ति दी वैसे सबको देना🙌🏻🙌🏻🙏🙏 🌹जय मां तुलसी।🌹🙏 कॉपी पेस्ट by बाँके बिहारी वृन्दावन श्रीजी दास🙏🙇‍♂️🙇‍♀️🙏 ‼️ जय हो तुलसी मैया की ‼️🙏

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Adhikari Molay Nov 25, 2020

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ramkumarverma Nov 24, 2020

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Poonam Aggarwal Nov 25, 2020

🙏🌷*ॐ नमो नारायण जय तुलसी मैया *🌷🙏 🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷 कार्तिक महीने में एक बुढिया माई तुलसीजी को सींचती और कहती कि, हे तुलसी माता! सत् की दाता मैं तेरा बिडला सीचती हूँ, मुझे बहु दे, पीताम्बर की धोती दे, मीठा मीठा गास दे, बैकुंठा में वास दे, चटक की चाल दे, पटक की मौत दे, चंदन का काठ दे, रानी सा राज दे, दाल भात का भोजन दे, ग्यारस की मौत दे, कृष्ण जी का कन्धा दे। तुलसी माता यह सुनकर सूखने लगी तो भगवान ने पूछा कि, हे तुलसी! तुम क्यों सूख़ रही हो? तुलसी माता ने कहा कि एक बुढिया रोज आती है और यही बात कह जाती है। मैं सब बात तो पूरा कर दूँगी लेकिन कृष्ण का कन्धा कहां से लाऊंगी? भगवान बोले - जब वो मरेगी तो मैं अपने आप कंधा दे आऊंगा। तू बुढिया माई से कह देना। बाद में बुढिया माई मर गई। सब लोग आ गये। जब माई को ले जाने लगे तो वह किसी से न उठी। तब भगवान एक बारह बरस के बालक का रूप धारण करके आये। बालक ने कहा, मैं कान में एक बात कहूँगा तो बुढिया माई उठ जाएगी। बालक ने कान में कहा, बुढिया माई मन की निकाल ले, पीताम्बर की धोती ले, मीठा मीठा गास ले, बैंकुंठा का वास ले, चटक की चल ले, पटक की मौत ले, कृष्ण जी का कन्धा ले! यह सुनकर बुढिया माई हल्की हो गई। भगवान ने कन्धा दिया और बुढिया माई को मुक्ति मिल गयी। हे तुलसी माता! जैसे बुढिया माई को मुक्ति दी वैसे सबको देना🙌🏻🙌🏻🙏🙏 🌹जय मां तुलसी।🌹🙏 कॉपी पेस्ट by बाँके बिहारी वृन्दावन श्रीजी दास🙏🙇‍♂️🙇‍♀️🙏

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