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।। आज का सुविचार ।।

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Gour.... Jun 19, 2019
जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। भगवान् आपको हमेशा खुश रखें, मैं भगवान् से प्रार्थना करता हूँ कि आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें जी।

Sandhya Nagar Jun 19, 2019
: *जिंदगी का बहुत* *सीधा सा परिचय है......* *गुस्सा वास्तविक है* *मुस्कान में अभिनय है........* *शुभप्रभात*

Sunil upadhyaya Jul 19, 2019

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Swami Lokeshanand Jul 18, 2019

तुलसीदासजी ने विचित्र चौपाइयाँ लिखीं। "मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा" और "भवन एक पुनि दीख सुहावा" एक विभीषण के ही घर को घर कहा, रावण सहित शेष राक्षसों के घरों को घर नहीं कहा, मंदिर कह दिया। जब लंका में आग लग गयी, तब- "जारा नगर निमिष एक माहीं। एक विभीषण कर गृह नाहीं॥" वह "घर" तो छूट गया,"मंदिर" सभी जल गए। विचार करें, मंदिर वह है जो प्रीति का केन्द्र हो। घर उपयोग के लिए है, रहने के लिए है, प्रीत लगाने के लिए नहीं है। भवन से प्रीत लगाने वाला ही तो प्रेत बनता है। जिसे भवन से प्रीत है, उसे घर में ही आसक्ति है, गृहासक्ति है, तो घर ही उसके जीवन का लक्ष्य हो गया, मंदिर हो गया। जबकि विभीषण जिस घर में रहता है, उसमें उसे आसक्ति नहीं है। मंदिर तो वहाँ भी है, पर अलग से बना है- "हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा" इसे समझें, मंदिर दो प्रकार के हैं, देव मंदिर और देह मंदिर। विभीषण के मंदिर में देव पूजा होती है, वहाँ श्रीसीतारामजी विराजते हैं, वह तो देव मंदिर है। शेष सबमें देह की पूजा होती थी, वे देह मंदिर हैं। देखो, देह संभालो, पर उसे भी तो देखो जिससे यह जीवित है, उसी से इसकी कीमत है। हिसाब लगाओ! कितने टिन तेल, साबुन, पाउडर, क्रीम इस पर मले, कितना घी, गेहूँ, चावल, दाल, फल, सब्जी, मिठाइयाँ, पापड़, पकोड़े, अचार, चटनी, मुरब्बे इसे खिलाए, इसकी पूजा का कोई अंत है? देव को न जाने, देह को ही पूजे, इसी के सुख के लिए जीवन बिता दे, कमाना खाना और पैखाना ही जिसके जीवन का लक्ष्य है, वही तो असली राक्षस है। तुलसीदासजी का संकेत है कि अ दुनियावालों! इस देह की कितनी ही पूजा कर लो, सज़ा लो, संवार लो, इसे तो जलना ही पड़ेगा, जलना ही पड़ेगा। अब यह विडियो देखें- हनुमानजी ने देह मंदिरों में आग लगा दी- https://youtu.be/_DW_XzDxzQk

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शिव समान दाता नहीं विपत्ति विदारण हार,, लज्जा मेरी राखियो शिव वरदा के असवार,, विचारणीय विंदु, आजकल प्रतिदिन संदेश आ रहे हैं कि महादेव को दूध की कुछ बूंदें चढाकर शेष निर्धन बच्चों को दे दिया जाए। सुनने में बहुत अच्छा लगता है लेकिन हर हिन्दू त्योहार पर ऐसे संदेश पढ़कर थोड़ा दुख होता है। दीवाली पर पटाखे ना चलाएं, होली में रंग और गुलाल ना खरीदें, सावन में दूध ना चढ़ाएं, उस पैसे से गरीबों की मदद करें। लेकिन त्योहारों के पैसे से ही क्यों? ये एक साजिश है हमें अपने रीति-रिवाजों से विमुख करने की। हम सब प्रतिदिन दूध पीते हैं तब तो हमें कभी ये ख्याल नहीं आया कि लाखों गरीब बच्चे दूध के बिना जी रहे हैं। अगर दान करना ही है तो अपने हिस्से के दूध का दान करिए और वर्ष भर करिए। कौन मना कर रहा है। शंकर जी के हिस्से का दूध ही क्यों दान करना? आप अपने व्यसन का दान कीजिये दिन भर में जो आप सिगरेट, पान-मसाला, शराब, मांस अथवा किसी और क्रिया में जो पैसे खर्च करते हैं उसको बंद कर के गरीब को दान कीजिये | इससे आपको दान के लाभ के साथ साथ स्वास्थ्य का भी लाभ होगा। महादेव ने जगत कल्याण हेतु विषपान किया था इसलिए उनका अभिषेक दूध से किया जाता है। जिन महानुभावों के मन में अतिशय दया उत्पन्न हो रही है उनसे मेरा अनुरोध है कि एक महीना ही क्यों, वर्ष भर गरीब बच्चों को दूध का दान दें। घर में जितना भी दूध आता हो उसमें से ज्यादा नहीं सिर्फ आधा लीटर ही किसी निर्धन परिवार को दें। महादेव को जो 50 ग्राम दूध चढ़ाते हैं वो उन्हें ही चढ़ाएं। !!ॐ नम: शिवाय !! शिवलिंग की वैज्ञानिकता .... भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा लें, तब हैरान हो जायेगें ! भारत सरकार के नुक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स ही हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे किए बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, आदि सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले है। क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसीलिए तो जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता। भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है। शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है। तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि महादेव शिवशंकर अगर नाराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जाएगी। ध्यान दें, कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है। जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो तो चिर सनातन है।विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।.. हो सके तो शेयर भी कर दें, दूसरे भक्त भी बाबा के दर्शन का आनंद ले पाएंगे. जय बाबा अपना व्यवहार बदलो हमारे धर्म को बदलने का प्रयास मत करो 🙏🕉🙏

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🕉️🕉️जय श्री सच्चिदानंद स्वरूपाय नमः 🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 सतसंग वाणी 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 एक समय ऋषभदेव के पुत्र नौ योगी ऋषियों के साथ चौमासा व्यतीत करने के लिए महाराज जनक जी के यहाँ ठहरने के लिए आये हुए थे। तब वही पर महाराज जनक जी ने योगीश्वर से हाथ जोड़कर पूछा हे-- महात्मन ! भक्ति किस प्रकार हो सकती है। ***** योगी सुखद और सुहावने वचन के साथ बोला ---हे विदेहराज जनक मै उसके सुन्दर लक्षण बतलाता हू सुनो- कभी हँसते हुए जब चित प्रसन्न हो जाता है, तो उसी को कभी क्रोध के लक्षण भी हो जाते हैं। इसलिए तुम भगवान् से स्नेह कर सकने के लिए भक्ति धारण करो।सगुण ज्ञान से ही सब भवसागर से तर जाते हैं। **** हमारी आयु बड़ी बीत गई , हम ममता में फसे रहे आयु रोती है कि बिना हरि भक्ति के इतनी आयु बीत गई। **** भक्ति के तीन लक्षण बताये गए हैं--उत्तम, मध्यम और निष्कृत । जो सारे चराचर जगत में उस एक ही परब्रम्ह को देखता है वही भक्ति का सर्वोत्तम लक्षण है। *** संतजनों की संगति से सत्यमार्ग पर चलना मध्यम भक्ति के लक्षण है। ***** जो रज के बराबर भी एक को नही समझते हैं उस निष्कृत लक्षण में तो सारी दुनिया मोह माया में फँसी हुयी है। जब तक तृष्णा नही मिटती तब तक विरक्त नही होता है। ******************************************* सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। अर्थात :- सर्वदा सत्य की विजय और असत्य की पराजय और सत्य से ही विद्वानों व् महर्षियो का मार्ग विस्तृत होता है। ।।। 🌷🌷🕉️ जय श्री गुरुदेवाय नमः 🕉️🌷🌷 🔲✔️ सत्य सनातन धर्म की सदा जय हो।👏 🔲✔️ धर्म की जय हो। 🔲✔️अधर्म का नाश हो। 🔲✔️मानव समाज का कल्याण हो। 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🕉️जय श्री राम🕉️

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👉झुकना ही जीवन का सर्व श्रेष्ठ प्रदर्शन हैं, 👈 घमंडी का सिर नीचा नारियल के पेड़ बड़े ही ऊँचे होते हैं और देखने में बहुत सुंदर होते हैं। एक बार एक नदी के किनारे नारियल का पेड़ लगा हुआ था। उस पर लगे नारियल को अपने पेड़ के सुंदर होने पर बहुत गर्व था। सबसे ऊँचाई पर बैठने का भी उसे बहुत मान था। इस कारण घमंड में चूर नारियल हमेशा ही नदी के पत्थर को तुच्छ पड़ा हुआ कहकर उसका अपमान करता रहता। एक बार, एक शिल्प कार उस पत्थर को लेकर बैठ गया और उसे तराशने के लिए उस पर तरह – तरह से प्रहार करने लगा। यह देख नारियल को और अधिक आनंद आ गया उसने कहा – ऐ पत्थर ! तेरी भी क्या जिन्दगी हैं पहले उस नदी में पड़ा रहकर इधर- उधर टकराया करता था और बाहर आने पर मनुष्य के पैरों तले रौंदा जाता था और आज तो हद ही हो गई। ये शिल्पी तुझे हर तरफ से चोट मार रहा हैं और तू पड़ा देख रहा हैं। अरे ! अपमान की भी सीमा होती हैं। कैसी तुच्छ जिन्दगी जी रहा हैं। मुझे देख कितने शान से इस ऊँचे वृक्ष पर बैठता हूँ। पत्थर ने उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया। नारियल रोज इसी तरह पत्थर को अपमानित करता रहता। कुछ दिनों बाद, उस शिल्पकार ने पत्थर को तराशकर शालिग्राम बनाये और पूर्ण आदर के साथ उनकी स्थापना मंदिर में की गई। पूजा के लिए नारियल को पत्थर के बने उन शालिग्राम के चरणों में चढ़ाया गया। इस पर पत्थर ने नारियल से बोला – नारियल भाई ! कष्ट सहकर मुझे जो जीवन मिला उसे ईश्वर की प्रतिमा का मान मिला। मैं आज तराशने पर ईश्वर के समतुल्य माना गया। जो सदैव अपने कर्म करते हैं वे आदर के पात्र बनते हैं। लेकिन जो अहंकार/ घमंड का भार लिए घूमते हैं वो नीचे आ गिरते हैं। ईश्वर के लिए समर्पण का महत्व हैं घमंड का नहीं। पूरी बात नारियल ने सिर झुकाकर स्वीकार की जिस पर नदी बोली इसे ही कहते हैं घमंडी का सिर नीचा,,, हर हर महादेव जय शिव शंकर

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gopal Krishna Jul 18, 2019

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gopal Krishna Jul 18, 2019

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gopal Krishna Jul 18, 2019

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gopal Krishna Jul 18, 2019

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