जब चिंता कोई सताए साईं नाम का जाप करो मन घबराये साईं नाम का जाप करो कोई राह नज़र ना आये साईं नाम का जाप करो अगर बात समझ मे ना आये साईं नाम का जाप करो साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...

जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...

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🌿🥀🌹जय श्री राधे राधे कृष्णा🌹🥀🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 🙏🌹 ओम् साईं राम 🌹🌹🙏 🌹🌹🌹 *इच्छापूर्ति*🌹🌹🌹 एक घने जंगल में एक इच्छा पूर्ति वृक्ष था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी इच्छा करने से वह तुरंत पूरी हो जाती थी। यह बात बहुत कम लोग जानते थे क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई हिम्मत ही नहीं करता था। एक बार संयोग से एक थका हुआ व्यापारी उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गयी। जागते ही उसे बहुत भूख लगी, उसने आस पास देखकर सोचा- 'काश कुछ खाने को मिल जाए!' तत्काल स्वादिष्ट पकवानों से भरी थाली हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई। व्यापारी ने भरपेट खाना खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा.. काश कुछ पीने को मिल जाए.. तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक शरबत आ गए। शरबत पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा- कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ। हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना.. जरूर इस पेड़ पर कोई भूत रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में मुझे खा लेगा ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक भूत आया और उसे खा गया। इस प्रसंग से आप यह सीख सकते है कि हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे वह आपको अवश्य मिलेगी। अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलती हैं... क्योंकि वे बुरी चीजों की ही कामना करते हैं। इंसान ज्यादातर समय सोचता है- कहीं बारिश में भीगने से मै बीमार न हों जाँऊ.. और वह बीमार हो जाता हैं..! इंसान सोचता है - मेरी किस्मत ही खराब है .. और उसकी किस्मत सचमुच खराब हो जाती हैं ..! इस तरह आप देखेंगे कि आपका अवचेतन मन इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण करता है..! इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में विचारों को सावधानी से प्रवेश करने की अनुमति देनी चाहिए। विचार जादूगर की तरह होते है, जिन्हें बदलकर आप अपना जीवन बदल सकते है..! इसलिये सदा सकारात्मक सोचिए.। बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं। पूरा संसार हमारे अंदर समाया हुआ है, बस जरूरत है चीजों को सही रोशनी में रखकर देखने की। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🧘🏻‍♂️🔥🧘🏻‍♂️ *सदैव प्रसन्न रहिये!!* *जो प्राप्त है-वो पर्याप्त है!!*

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Lucky Sharma May 7, 2021

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