जब चिंता कोई सताए साईं नाम का जाप करो मन घबराये साईं नाम का जाप करो कोई राह नज़र ना आये साईं नाम का जाप करो अगर बात समझ मे ना आये साईं नाम का जाप करो साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...

जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...
जब चिंता कोई सताए 
साईं नाम का जाप करो 
मन घबराये 
साईं नाम का जाप करो 
कोई राह नज़र ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
अगर बात समझ मे ना आये 
साईं नाम का जाप करो 
साईं.. साईं.. साईं.. साईं.. 
ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं...

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🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 शामा की सर्पदंश से मुक्ति 💜💙💜💙💜💙💜💙💜 एक बार शामा को विषधर सर्प ने उसके हाथ की उँगली में डस लिया । समस्त शरीर में विष का प्रसार हो जाने के कारण वे अत्यन्त कष्ट का अनुभव करके क्रंदन करने लगे कि अब मेरा अन्तकाल समीप आ गया है । उनके इष्ट मित्र उन्हें भगवान विठोबा के पास ले जाना चाहते थे, जहाँ इस प्रकार की समस्त पीड़ाओं की योग्य चिकित्सा होती है, परन्तु शामा मसजिद की ओर ही दौड़-अपने विठोबा श्री साईबाबा के पास । जब बाबा ने उन्हें दूर से आते देखा तो वे झिड़कने और गाली देने लगे । वे क्रोधित होकर बोले – अरे ओ नादान कृतघ्न बम्मन । ऊपर मत चढ़ । सावधान, यदि ऐसा किया तो । और फिर गर्जना करते हुए बोले, हटो, दूर हट, नीचे उतर । श्री साईबाबा को इस प्रकार अत्यंत क्रोधित देख शामा उलझन में पड़ गयाऔर निराश होकर सोचने लगा कि केवल मसजिद ही तो मेरा घर है और किसकी शरण में जाऊँ । उसने अपने जीवन की आशा ही छोड़ दी और वहीं शांतिपूर्वक बैठ गया । थोड़े समय के पश्चात जब बाबा शांत हुए तो शामा ऊपर आकर उनके समीप बैठ गया । तब बाबा बोले, डरो नहीं । तिल मात्र भी चिन्ता मत करो । दयालु फकीर तुम्हारी अवश्य रक्षा करेगा । घर जाकर शान्ति से बैठो और बाहर न निकलो । मुझपर विश्वास कर निर्भय होकर चिन्ता त्याग दो । उन्हें घर भिजवाने के पश्चात ही बाबा ने तात्या पाटील और काकासाहेब दीक्षित के द्घारा यह कहला भेजा कि वह इच्छानुसार भोजन करे, घर में टहलते रहे, लेटें नही और न शयन करें । कहने की आवश्यकता नहीं कि आदेशों का अक्षरशः पालन किया गया और थोड़े समय में ही वे पूर्ण स्वस्थ हो गये । इस विषय में केवल यही बात स्मरण योग्य है कि बाबा के शब्द (पंच अक्षरीय मंत्र-हटो, दूर हट, नीचे उतर) शामा को लक्ष्य करके नहीं कहे गये थे, जैसा कि ऊपर से स्पष्ट प्रतीत होता है, वरन् उस साँप और उसके विष के लिये ही यह आज्ञा थी (अर्थात् शामा के शरीर में विष न फैलाने की आज्ञा थी) अन्य मंत्र शास्त्रों के विशेषज्ञों की तरह बाबा ने किसी मंत्र या मंत्रोक्त चावल या जल आदि का प्रयोग नहीं किया । इस कथा और इसी प्रकार की अन्य अथाओं को सुनकर साईबाबा के चरणों में यह दृढ़ विश्वास हो जायगा कि यदि मायायुक्त संसार को पार करना हो 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 तो केवल श्री साईचरणों का हृदय में 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 ध्यान करो । 🔮🔮🔮🔮 ( from -- Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 भक्त तीन प्रकार के है 💜💙💜💙💜💙💜💙 👉 उत्तम 👉 मध्यम और 👉 साधारण प्रथम श्रेणी के भक्त वे है, जो अपने गुरु की इच्छा पहले से ही जानकर अपना कर्तव्य मान कर सेवा करते है । द्घितीय श्रेणी के भक्त वे है, जो गुरु की आज्ञा मिलते ही उसका तुरन्त पालन करते है । तृतीय श्रेणी के भक्त वे है, जो गुरु की आज्ञा सदैव टालते हुए पग-पग पर त्रुटि किया करते है । भक्तगण यदि अपनी जागृत बुद्घि और धैर्य धारण कर दृढ़ विश्वास स्थिर करें तो निःसन्देह उनका आध्यात्मिक ध्येय उनसे अधिक दूर नहीं है । श्वासोच्ध्वास का नियंत्रण, हठ योग या अन्य कठिन साधनाओं की कोई आवश्यकता नहीं है । जब शिष्य में उपयुक्त गुणों का विकास हो जाता है और जब अग्रिम उपदेशों के लिये भूमिका तैयार हो जाती है, तभी गुरु स्वयं प्रगट होकर उसे पूर्णता की ओर ले जाते है ( From -- Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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