Bhagvan Sriman Narayan 108 Divya Bhavya Mandirien The Bhakti is spread all over our Country. Bhagvan

Bhagvan Sriman Narayan 108 Divya Bhavya Mandirien The Bhakti is spread all over our Country. Bhagvan

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Bhagvan Sriman Narayan 108 Divya Bhavya Mandirien

The Bhakti is spread all over our Country. Bhagvan Sriman Narayan who is the Paramathma is found in all of the minds and heart of all Jeevatmas. The bhagvan is found in various posture or position in various Sthal (Temples) from Kanyakumari to Himalayas.

About these Sthals, Azhwars who were ardent devotees or disciples of Sriman Narayanan, have sung (Mangalasasan) praising of the Bhagwan Vishnu, about 108 Sthals (Temples). These 108 Vishnu Sthals (Temples) are called as "Divyadesams".

They are;

Pallava Kingdom (Thondai Naadu) - Tamil nadu Temples   ||   
Chola Kingdom (Chozha Naadu) Tamil nadu Temples   ||   
Central Land (Nadu Naadu) Tamil nadu Temples ll
Pandiya Kingdom (Pandiya Naadu) Tamil nadu Temples   ||   
Kerala (Malayala Naadu) Temples   ||  
North India (Vada Naadu) Temples   ||   
Swarg lok (Vinnulaga Thiruppathigal) Temples ll

Bhagavan Sriman Narayan is found in various postures or positions. They are in 108 Divyadesams (Temples) are given below:

   In Sleeping Position  - 27 Divyadesams
   In Sitting Position      - 21 Divyadesams
   In Standing Position  - 60 Divyadesams

In these 108 Divyadesams, as we have seen that the Perumal is found on various Thirukkolam, he is also facing his Thirumugham on various directions and giving his seva, which are as follows:

   Towards East direction - 79 Divyadesams
   Towards West direction - 19 Divyadesams
   Towards North direction - 3 Divyadesams
   Towards South direction - 7 Divyadesams

These 108 Divyadesams are located in various parts of our country and Nepal. They are categorised in 7 parts.

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कामेंट्स

Sumant Gupta Jul 19, 2017
sri man narayan narayan hari hari,teri leela sabsey pyaree pyaree.

Mamta Chauhan Apr 4, 2020

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Raj Kumar Sharma Apr 4, 2020

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PRABHAT KUMAR Apr 4, 2020

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️🕉️ *#ऊँ_नमो_भगवते_वासुदेवाय_नमः* 🕉️🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#सभी_आदरणीय_साथियों_को_नमस्कार* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है। ऐसे में हिन्दू नव संवत्सर की पहली एकादशी चैत्र शुक्ल एकादशी को है, जो 4 अप्रैल यानि आज है। चैत्र शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कामदा एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है और कामदा एकादशी की ​कथा सुनते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे पापों से मुक्ति के लिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत किया जाता है। कामदा एकादशी का व्रत बहुत ही फलदायी होती है, इसलिए इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं। आइए जानते हैं ​कि कामदा एकादशी व्रत एवं पूजा विधि, मुहूर्त, पारण का समय आदि क्या है? 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️🕉️🕉️ । *#कामदा_एकादशी_मुहूर्त* । 🕉️🕉️🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 03 अप्रैल को देर रात 12 बजकर 58 मिनट पर हो रहा है। इसका समापन 04 अप्रैल को रात 10 बजकर 30 मिनट पर हो रहा है। इसके बाद से द्वादशी ति​थि का प्रारंभ हो जाएगा। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️🕉️ *#कामदा_एकादशी_पारण_का_समय* 🕉️🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 कामदा एकादशी का व्रत रखने वाले को अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण कर लेना चाहिए। द्वादशी तिथि के समापन से पूर्व पारण करना आवश्यक है अन्यथा वह पाप का भागी होता है। एकादशी व्रत रखने वाले को 05 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 06 बजकर 06 मिनट से 08 बजकर 37 मिनट के मध्य पारण करना है। व्रती के पास पारण के लिए कुल 02 घंटे 31 मिनट का समय ​है। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️🕉️ *#कामदा_एकादशी_व्रत_का_महत्व* 🕉️🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 कामदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा से कामदा एकादशी का व्रत करने वाले को बैकुण्ठ जाने का सौभाग्य मिलता है। इस व्रत को करने से प्रेत योनी से भी मुक्ति मिलती है। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️ । *#कामदा_एकादशी_व्रत_एवं_पूजा_विधि* । 🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 एकादशी के दिन प्रात:काल में स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ सुथरे वस्त्र पहन लें। फिर दाहिने हाथ में जल लेकर कामदा एकादशी व्रत का संकल्प लें। इसके पश्चात पूजा स्थान पर आसन ग्रहण करें और एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। फिर चंदन, अक्षत्, फूल, धूप, गंध, दूध, फल, तिल, पंचामृत आदि से विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करें। अब कामदा एकादशी व्रत की कथा सुनें। पूजा समापन के समय भगवान विष्णु की आरती करें। बाद में प्रसाद लोगों में वितरित कर दें। स्वयं दिनभर फलाहार करते हुए भगवान श्रीहरि का स्मरण करें। शाम के समय भजन कीर्तन करें तथा रात्रि जागरण करें। अगले दिन द्वादशी को स्नान आदि के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। किसी ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें। इसके पश्चात पारण के समय में पारण कर व्रत को पूरा करें। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️ । *#कामदा_एकादशी_की_पौराणिक_कथा* । 🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 कामदा एकादशी को लेकर पौराणिक कथा मिलती है। इसके मुताबिक प्राचीनकाल में भोगीपुर नामक एक नगर था। वहां पर पुण्डरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। भोगीपुर नगर का ऐसा प्रभाव था कि वहां अनेक अप्सरा, किन्नर और गंधर्व वास करते थे। वहीं ललिता और ललित नाम के दो स्त्री-पुरुष निवास करते थे। उनके बीच अत्‍यंत गहरा प्रेम था। वह एक-दूसरे से पल भर भी अलग नहीं रह पाते थे। अगर कभी ऐसी स्थिति आ भी जाए तो दोनों एक-दूसरे की याद में खो जाते थे। एक द‍िन जब लल‍ित राज दरबार में गान कर रहा था तो उसे अपनी पत्‍नी की ललिता की याद आ गई तो उसके सुर,लय और ताल बिगड़ने लगे। उसकी यह त्रुटि कर्कट नामक नाग ने पकड़ ली और राजा को पूरी बात बता दी। वह अत्‍यंत क्रोधित हुए और ललित को राक्षस योन‍ि में जन्‍म लेने का शाप दे द‍िया। जैसे ही इसकी सूचना ललिता को मिली वह अत्‍यंत दु:खी हुई। लेकिन शाप के आगे उसके आंसुओं की भी न चली और ललित वर्षों तक राक्षस योनि में रहा। रोती-परेशान ललिता अपनी यह तकलीफ लेकर ऋषि श्रृंगी के पास पहुंची। ललिता का दु:ख सुनकर श्रृंगी ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल एकादशी अर्थात् कामदा एकादशी व्रत करने को कहा। उन्‍होंने बताया कि इसका व्रत करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होते हैं। ऋषि ने कहा कि यदि वह कामदा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य का फल अपने पति को दे तो वह शीघ्र ही राक्षस योनि से मुक्त हो जाएगा और राजा का शाप भी स्‍वत: ही समाप्‍त हो जाएगा। ललिता ने ऋषि को प्रणाम किया और उनके बताए अनुसार व्रत का पालन किया। ललिता ने पूरी श्रद्धा से चैत्र शुक्‍ल एकादशी का व्रत किया। उसकी निष्‍ठा और व्रत से भगवान हरि अत्‍यंत प्रसन्‍न हुए। उनकी कृपा से ललित राक्षस योन‍ि से मुक्‍त हुए। व्रत का ऐसा प्रभाव हुआ कि ललिता और ललित दोनों को स्‍वर्गलोक की प्राप्ति हुई। मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से साधक कभी भी राक्षस योन‍ि में जन्‍म नहीं लेता। धर्म शास्‍त्रों में कहा जाता है कि संसार में इसके बराबर कोई और दूसरा व्रत नहीं है। इसकी कथा पढ़ने या सुनने मात्र से जीव का कल्‍याण हो जाता है। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🕉️ *#एकादशी_व्रत_के_करने_के_26_फायदे_हैं* 🕉️ 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 व्यक्ति निरोगी रहता है, राक्षस, भूत-पिशाच आदि योनि से छुटकारा मिलता है, पापों का नाश होता है, संकटों से मुक्ति मिलती है, सर्वकार्य सिद्ध होते हैं, सौभाग्य प्राप्त होता है, मोक्ष मिलता है, विवाह बाधा समाप्त होती है, धन और समृद्धि आती है, शांति मिलती है, मोह-माया और बंधनों से मुक्ति मिलती है, हर प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं, खुशियां मिलती हैं, सिद्धि प्राप्त होती है, उपद्रव शांत होते हैं, दरिद्रता दूर होती है, खोया हुआ सबकुछ फिर से प्राप्त हो जाता है, पितरों को अधोगति से मुक्ति मिलती है, भाग्य जाग्रत होता है, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, पुत्र प्राप्ति होती है, शत्रुओं का नाश होता है, सभी रोगों का नाश होता है, कीर्ति और प्रसिद्धि प्राप्त होती है, वाजपेय और अश्‍वमेध यज्ञ का फल मिलता है और हर कार्य में सफलता मिलती है। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *#नोट : उक्त जानकारी Google के माध्यम से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️🚩🔔🕉️

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Lal Mani Mishra Apr 4, 2020

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umesh bhardwaj Apr 4, 2020

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Akhilesh Awasthi Apr 4, 2020

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