बाल संस्कार : अपने बच्चों को अवश्य सिखाएं ये दिव्य श्लोक हमारे पुराणों में वर्णित मंत्र-श्लोक अपने बच्चों को जरूर सिखाएं,जीवन की विपरीत परिस्थिति में इनके स्मरण से शक्ति मिलती है.... 1.प्रात: कर-दर्शनम् कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ 2.पृथ्वी क्षमा प्रार्थना समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडिते। विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे॥ 3.त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण ब्रह्मा मुरारी स्त्री पुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥ 4.स्नान मंत्र गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु॥ 5.सूर्य नमस्कार ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।। आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ मित्राय नम: ॐ रवये नम: ॐ सूर्याय नम: ॐ भानवे नम: ॐ खगाय नम: ॐ पूष्णे नम: ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ॐ मरीचये नम: ॐ आदित्याय नम: ॐ सवित्रे नम: ॐ अर्काय नम: ॐ भास्कराय नम: ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम: आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ 6.संध्या दीप दर्शन शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥ 7.गणपति स्तोत्र गणपति: विघ्नराजो लम्बतुंडो गजानन:। द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥ विनायक: चारुकर्ण: पशुपालो भवात्मज:। द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्॥ विश्वं तस्य भवेद् वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्। विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय। लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥ नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय। गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥ 8.आदिशक्ति वंदना सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 9.शिव स्तुति कर्पूर गौरं करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्रहारं। सदा वसंतं हृदयारविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि॥ 10. विष्णु स्तुति शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥ 11. श्री कृष्ण स्तुति कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणु करे कंकणम्॥ सर्वांगे हरिचन्दनं सुललितं, कंठे च मुक्तावलि। गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपाल चूडामणी॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥ 12.श्रीराम वंदना लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥ 13. एक श्लोकी रामायण आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद् श्री रामायणम्॥ 14.सरस्वती वंदना या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥ या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥ 15.हनुमंत वंदना अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्। दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥ 16.स्वस्ति-वाचन ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ 17.शांति पाठ ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ ॥ॐ शांति: शांति:शांति:॥

बाल संस्कार : अपने बच्चों को अवश्य सिखाएं ये  दिव्य श्लोक

हमारे पुराणों में वर्णित मंत्र-श्लोक अपने बच्चों को जरूर सिखाएं,जीवन की विपरीत परिस्थिति में इनके स्मरण से शक्ति मिलती है....

1.प्रात: कर-दर्शनम्
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
2.पृथ्वी क्षमा प्रार्थना
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडिते।
विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे॥

3.त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण
ब्रह्मा मुरारी स्त्री पुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

4.स्नान मंत्र
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

5.सूर्य नमस्कार
ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।।
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्
सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥
ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

6.संध्या दीप दर्शन
शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते॥
दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

7.गणपति स्तोत्र
गणपति: विघ्नराजो लम्बतुंडो गजानन:।
द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥
विनायक: चारुकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्॥
विश्वं तस्य भवेद् वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्।
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

8.आदिशक्ति वंदना
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

9.शिव स्तुति
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्रहारं।
सदा वसंतं हृदयारविन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि॥

10. विष्णु स्तुति
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

11. श्री कृष्ण स्तुति
कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणु करे कंकणम्॥
सर्वांगे हरिचन्दनं सुललितं, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपाल चूडामणी॥
मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥

12.श्रीराम वंदना
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

13. एक श्लोकी रामायण
आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद् श्री रामायणम्॥

14.सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्याऽपहा॥

15.हनुमंत वंदना
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्।
दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥

16.स्वस्ति-वाचन
ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

17.शांति पाठ
ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

॥ॐ शांति: शांति:शांति:॥

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Sahil yadav Aug 18, 2020
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🥀🥀 Sep 20, 2020

Heart touching post...Speechless 😔 *कुछ रह तो नहीं गया ?* *तीन* महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जाने वाली माँ को दाई ने पूछा... "कुछ रह तो नहीं गया...? पर्स, चाबी सब ले लिया ना...?" अब वो कैसे हाँ कहे... पैसे के पीछे भागते भागते... सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है, *वह ही रह गया है...!* 😑 *शादी* में दुल्हन को बिदा करते ही शादी का हॉल खाली करते हुए दुल्हन की बुआ ने पूछा... "भैया, कुछ रह तो नहीं गया ना...? चेक करो ठीक से...!" बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे। सब कुछ तो पीछे रह गया... 25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड़ से... वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था, वो नाम भी पीछे रह गया अब... "भैया, देखा...? कुछ पीछे तो नहीं रह गया ?" बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला.... पर दिल में एक ही आवाज थी... *सब कुछ तो यहीं रह गया...!* 😑 *बड़ी* तमन्नाओं के साथ बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और वह पढ़कर वहीं सैटल हो गया... पौत्र जन्म पर बमुश्किल 3 माह का वीजा मिला था और चलते वक्त बेटे ने प्रश्न किया... "सब कुछ चेक कर लिया ना...? कुछ रह तो नहीं गया...?" क्या जबाब देते कि... *अब छूटने को* *बचा ही क्या है...!* 😑 *सेवानिवृत्ति* की शाम पी.ए. ने याद दिलाया... "चेक कर लें सर...! कुछ रह तो नहीं गया...? " थोड़ा रूका और सोचा कि पूरी जिन्दगी तो यहीं आने-जाने में बीत गई... *अब और क्या रह गया होगा...?* 😑 *श्मशान* से लौटते वक्त बेटे ने एक बार फिर से गर्दन घुमाई एक बार पीछे देखने के लिए... पिता की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया... भागते हुए गया पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया। दोस्त ने पूछा... "कुछ रह गया था क्या...?" भरी आँखों से बोला... *नहीं कुछ भी नहीं रहा अब...* *और जो कुछ भी रह गया है...* *वह सदा मेरे साथ रहेगा...!* 😑 *एक* बार समय निकालकर सोचें, शायद... पुराना समय याद आ जाए, आंखें भर आएं और... *आज को जी भर जीने का* *मकसद मिल जाए...!* सभी दोस्तों से ये ही बोलना चाहता हूँ... *यारों क्या पता कब* *इस जीवन की शाम हो जाये...!* इससे पहले कि ऐसा हो सब को गले लगा लो, दो प्यार भरी बातें कर लो... *ताकि कुछ छूट न जाये...!!!* 🙏 🙏

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आशुतोष Sep 20, 2020

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आशुतोष Sep 20, 2020

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आशुतोष Sep 20, 2020

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Neha Sharma Sep 20, 2020

🔴*खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है। *हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये। *बाल रंगने है तो रंगिये, *वज़न कम रखना है तो रखिये, *मनचाहे कपड़े पहनने है तो पहनिए, *बच्चों की तरह खिलखिलाइये, *अच्छा सोचिये, *अच्छा माहौल रखिये, *शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये। *कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती, *कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता, *कोई तेल बाल नही उगाता, *कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता। *चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि .....सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। *ये सब कुदरती होता है। *उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है। *पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नहीं कर सकते। *ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम। *किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती ! *कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो, *कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो, *कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं *या आपके होंठों की shape perfect नही हैं.... *फिर भी हम सुंदर हैं, *अपनी सुंदरता को पहचानिए। *दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से *ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना। *हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं ...और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं। *मन की खूबसूरती पर ध्यान दो। *पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नहीं। *आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये। *सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है, *यह खाओ,वो मत खाओ *ठंडा खाओ , गर्म पीओ, *कपाल भाती करो, *सवेरे नीम्बू पीओ , *रात को दूध पीओ *ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो *दाहिने से सोइये , *बाहिने से उठिए, *हरी सब्जी खाओ, *दाल में प्रोटीन है, *दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा। *अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !! आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे * अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं, *कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ। *हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, *हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। *भोजन का संबंध मन से होता है *और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है। *मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता। *थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए, *टहलने जाइये, *लाइट कसरत करिये *व्यस्त रहिये, *खुश रहिये , *शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये। *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌷🌷

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