saroj singh Baghel
saroj singh Baghel Sep 25, 2020

🅾️⁉️जै माता शेरावाली की✍️शुभसंध्या वंदन भजन⁉️ 🌷🙋शुभ शुक्रवार विशेष पोस्ट🙋🌷 ♨️❤️♨️ जयकारा शेरावाली का हो,ओ,ओ,: बोलो सच्चे दरबार की जै ((आ मां आ)) तुझे दिल ने पुकारा आ मां आ 🎋🙋तुझे दिल ने पुकारा🎋 दिल ने पुकारा तू है::::::🙋🍥👁️‍🗨️🍥 माता जी का👁️‍🗨️🍥 आशीर्वाद सदा👁️‍🗨️🍥👁️‍🗨️🍥 बना रहे जी🍥आज का दिन शुभ मंगलमय हो👁️‍🗨️‼️🐾 सितंबर महीने के🍥आखिरी शुक्रवार की शुभ संध्या की बहुत सारी ढेर शुभकामनाएं🍥♨️🍥♨️🍥♨️🍥♨️🍥♨️🍥♨️🍥 आप सभी को हमारी तरफ से राधे राधे जी शुभ संध्या वंदन जी‼️🐾🎣🐾🎣🐾🎣🐾♨️🙏👬💏👬 दोस्ती यारी🙋सदा बनी रहे जी 🙏♨️🎋⁉️🎋 ⁉️🎋⁉️🎋⁉️ 🎋⁉️🎋 ⁉️🎋 ⁉️🎋👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️ 👁️‍🗨️👁️‍🗨️ 👁️‍🗨️ 👁️‍🗨️ 👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️

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कामेंट्स

saroj singh Baghel Sep 25, 2020
‼️🙋‼️ जय शेरावाली माता जी शुभ संध्या वंदन जी माता जी का आशीर्वाद सदा ही आप और आपके परिवार पर बना रहे जी आप सभी को आज के शुभ संध्या की ढेर सारी शुभकामनाएं 🍥🎋 माताजी आप सभी के हर मनोकामनाएं खयाल रखें ✍️ इसी दुआ के साथ आज की शुभ संध्या शुभ वंदन जी 🍇🌷🍇👁️‍🗨️🍇👁️‍🗨️❌👁️‍🗨️⁉️⁉️⁉️🍇🌷

simran Oct 19, 2020

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🌹VANITA KALE Oct 19, 2020

🙏🍀शुभ सोमवार 🍀🙏🙏🍀हरहर महादेव 🍀🙏🙏🍀🌹 जय माता दी🌹🍀🙏🌹 माता रानी का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे....👏🙏🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒🍒👏☜☆☞☜☆☞☜☆☜☆☞ ☜☆☞☜☆☞☜☆☞☜☆ 🙏🌹माता रानी के 108नाम👇👇👇👇👇👇👇👇 दुर्गा के 108 नाम सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा, चंद्रघंटा, महातपा, बुद्धि, अहंकारा, चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमंत्रमयी, सत्ता, सत्यानंदस्वरुपिणी, अनंता, भाविनी, भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता, चिंता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला, पाटलावती, पट्टाम्बरपरिधाना, कलमंजरीरंजिनी, अमेयविक्रमा, क्रूरा, सुन्दरी, सुरसुन्दरी, वनदुर्गा, मातंगी, मतंगमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, एंद्री, कौमारी, वैष्णवी, चामुंडा, वाराही, लक्ष्मी, पुरुषाकृति, विमला, उत्कर्षिनी, ज्ञाना, क्रिया, नित्या, बुद्धिदा, बहुला, बहुलप्रिया, सर्ववाहनवाहना, निशुंभशुंभहननी, महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहंत्री, चंडमुंडविनाशिनी, सर्वसुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी, सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिनी, अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिनी, कुमारी, एककन्या, कैशोरी, युवती, यति, अप्रौढ़ा, प्रौढ़ा, वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी, घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी, कालरात्रि, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली, विष्णुमाया, जलोदरी, शिवदुती, कराली, अनंता, परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्षा, ब्रह्मावादिनी।

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Ravi Mishra Oct 19, 2020

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jatan kurveti Oct 19, 2020

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Neha Sharma, Haryana Oct 18, 2020

*नवरात्रि द्वितीय दिवस माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप श्री ब्रह्मचारिणी जी की उपासना विधि एवं फल...... 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है। *देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है। *देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली *मां ब्रह्मचारिणी. यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं. मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोको को उजागर कर रहा है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बायें हाथ में कमण्डल होता है. देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं. इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता है। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता है। *माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि..... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें *“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। * देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा” *इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल (लाल रंग का एकविशेष फूल) व कमल काफी पसंद है उनकी माला पहनायें. प्रसाद और आचमन के पश्चात् पान सुपारी भेंट कर प्रदक्षिणा करें और घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें. अंत में क्षमा प्रार्थना करें *“आवाहनं न जानामि न जानामि वसर्जनं। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी।। *माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र..... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। *दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। *देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। *माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान..... 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। *जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ *गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। *धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ *परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। *पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ *ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ..... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। *ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ *शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। *शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ *मां ब्रह्मचारिणी कवच..... 〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️ *त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। *अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ *पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ *षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। *अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। *नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं *माँ ब्रह्मचारिणी कथा...... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। *कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। *कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। *जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है. देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता है जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती है और साधक मोक्ष का भागी बनता है। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता है उसकी साधना सफल हो जाती है और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है। *आरती माँ ब्रह्माचारिणी जी की..... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। *जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। *ब्रह्मा जी के मन भाती हो। *ज्ञान सभी को सिखलाती हो। *ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। *जिसको जपे सकल संसारा। *जय गायत्री वेद की माता। *जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। *कमी कोई रहने न पाए। *कोई भी दुख सहने न पाए। *उसकी विरति रहे ठिकाने। *जो ​तेरी महिमा को जाने। *रुद्राक्ष की माला ले कर। *जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। *आलस छोड़ करे गुणगाना। *मां तुम उसको सुख पहुंचाना। *ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। *पूर्ण करो सब मेरे काम। *भक्त तेरे चरणों का पुजारी। *रखना लाज मेरी महतारी। *माँ दुर्गा की आरती..... 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ *जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । *तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… *मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । *उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… *कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । *रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… *केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । *सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… *कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । *कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… *शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । *धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… *चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । *मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… *ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । *आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… *चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । *बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… *तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । *भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… *भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । *मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… *कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । *श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… *श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । *कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… *जय माता की*🚩🙏🌸 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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