मुब्रा देवी दर्शन 🌹🙏 भाग-२

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Shivsanker Shukla Jan 29, 2022

शुभ शनिवार के शुभ संध्या में मंदिर परिवार के सभी आदरणीय भगवत प्रेमी भाई बहन आप सभी को संध्या की राम राम प्रभु कृपा से अगर आपके पास विशेष धन है सुख सुविधा से आप संपन्न है ऐसी स्थिति में मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आप जीवन के मुख्य उद्देश तक नहीं पहुंच सके हैं शुभम का उपभोग कामनाओं को बढ़ाने वाला है बाबा तुलसी ने श्री रामचरितमानस में लिखा है यही तन कर् फल विषय ना भाई सांसारिक सुखों का उपभोग इस जीवन का लक्ष्य नहीं है अगर सुखों का उपभोग करने का शुभ अवसर मिलता है तो यह प्रभु की कृपा है प्रभु की कृपा का समा दर करते हुए प्रभु को धन्यवाद दीजिए मेरे भाई बहन जीवन का वास्तविक उद्देश्य तो यही है कि प्रभु के सानिध्य में प्रभु का ध्यान भजन संकीर्तन करने के बाद जो शांति मिलती है वही मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य है और यही मोक्ष है यही सद्गति है भोजन की चिंता नहीं मनवा बेपरवाह जिनको कछु ना चाहिए वही शहंशाह

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Ranjit Patel Jan 29, 2022

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Rakesh Singh Jan 29, 2022

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Gopal Jalan Jan 29, 2022

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🌹🙏 हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा 🙏🌹 💕💕🌼🌼💕💕🌼🌼💕💕🌼🌼💕💕 जय श्री खाटू वाले श्याम की 🌱💞🌱💞🌱💞🌱💞🌱💞🌱💞🌱 एक सन्यासी एक घर के सामने से निकल रहा था। एक छोटा सा बच्चा घुटने टेक कर चलता था। सुबह थी और धूप निकली थी और उस बच्चे की छायाआगे पड़ रही थी।वह बच्चा छाया में अपने सिर को पकड़ने के लिए हाथ ले जाता है, लेकिन जब तक उसका हाथ पहुँचता है छाया आगे बढ़ जाती है। बच्चा थक गया और रोने लगा। उसकी माँ उसे समझाने लगी कि पागल यह छाया है, छाया पकड़ी नहीं जाती। लेकिन बच्चे कब समझ सकते हैं कि क्या छाया है और क्या सत्य है? जो समझ लेता है कि क्या छाया है और क्या सत्य,वह बच्चा नहीं रह जाता। वह प्रौढ़ होता है। बच्चे कभी नहीं समझते कि छाया क्या है, सपने क्या हैं झूठ क्या है।वह बच्चा रोने लगा।कहा कि मुझे तो पकड़ना है इस छाया को।वह सन्यासी भीख माँगनेआया था।उसने उसकी माँ को कहा,मैं पकड़ा देता हूँ। वह बच्चे के पास गया। उस रोते हुए बच्चे की आँखों में आँसू टपक रहे थे। सभी बच्चों की आँखों से आँसू टपकते हैंज़िन्दगी भर दौड़ते हैं और पकड़ नहीं पाते। पकड़ने की योजना ही झूठी है। बूढ़े भी रोते हैं और बच्चे भी रोते हैं। वह बच्चा भी रो रहा था तो कोई नासमझी तो नहीं कर रहा था। उस सन्यासी ने उसके पास जाकर कहा,बेटे रो मत।क्या करना है तुझे? छाया पकड़नी है न?उस सन्यासी ने कहा, जीवन भर भी कोशिश करके थक जायेगा, परेशान हो जायेगा। छाया को पकड़ने का यह रास्ता नहीं है। उस सन्यासी ने उस बच्चे का हाथ पकड़ा और उसके सिर पर हाथ रख दिया।इधर हाथ सिर पर गया, उधर छाया के ऊपर भी सिर पर हाथ गया। सन्यासी ने कहा,देख, पकड़ ली तूने छाया। छाया कोई सीधा पकड़ेगा तो नहीं पकड़ सकेगा। लेकिन अपने को पकड़ लेगा तो छाया पकड़ में आ जाती है। जो अहंकार को पकड़ने को लिए दौड़ता है वह अहंकार को कभी नहीं पकड़ पाता। अहंकार मात्र छाया है। लेकिन जो आत्मा को पकड़ लेता है, अहंकार उसकी पकड़ में आ जाता है।वह तो छाया है। उसका कोई मुल्य नहीं। केवल वे ही लोग तृप्ति को, केवल वे ही लोग आप्त कामना को उपलब्ध होते हैं जो आत्मा को उपलब्ध होते हैं।

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