Krishna Singh
Krishna Singh Sep 23, 2017

आल्हा -ऊदल की कहानी

आल्हा -ऊदल की कहानी
आल्हा -ऊदल की कहानी
आल्हा -ऊदल की कहानी

परंपरा के मुताबिक दो वीर भाई आल्हा और ऊदल जिन्होंने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध लड़ा था, वो भी शारदा माता के भक्त हुआ करते थे। इन्हीं दोनों ने सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी। इसके बाद आल्हा ने इस मंदिर में बारह सालों तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था।

माता ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था, कहते हैं कि दोनों भाइयों ने भक्ति-भाव से अपनी जीभ माता शारदा को अर्पण कर दी थी, जिसे मां शारदा ने उसी क्षण वापस कर दिया। आल्हा माता को शारदा माई कह कर पुकारा करता था और तभी से ये मंदिर माता शारदा माई के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

आज भी मान्यता है कि माता शारदा के दर्शन सर्वप्रथम आल्हा और ऊदल ही करते हैं। मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है जिसे आल्हा तालाब कहा जाता है। तालाब से दो किलोमीटर और आगे जाने पर एक अखाड़ा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां आल्हा और ऊदल कुश्ती लड़ा करते थे। कहा जाता है कि यहां पर आल्हा और ऊदल अब भी रोजाना मां के दर्शन करने आते हैं।

कृष्णा सिंह

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कामेंट्स

Sajjan Singh Sep 23, 2017
जय माता रानी शारदा दी

dheeraj patel Sep 23, 2017
जय माता दी 🌹🙏🙏🌹 🌹🌹🌹🌹

white beauty Mar 27, 2020

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🎎🌲🐯 शुभ नवरात्रि 🐯🌲🎎 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🎎🌺नवरात्रि का तीसरा दिन🌺🎎 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🔔🚩👣ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः 👣🚩🔔 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 🌋🌻🌺 सुप्रभात 🌺🌻🌋 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🏵 🌿🌹शुभ शुक्रवार 🌹🌿 🏵 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता।🚩 🚩नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🚩 🏖मंगलमय सुबह की शुरुआत माँ चन्द्रघंटा देवी के चरण कमलों के दर्शन के साथ।🙏 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 3. 🔔 चंद्रघंटा 🔔 🎎पिंडज प्रवरारूढ चंडकोपास्त्रक औरुता। 🎎 🦁प्रसाद तनुते महे चंद्रघण्टेति विश्रुता ।।🦁 👣 माता शक्ति के तीसरे स्वरुप के माथे पर आधा चन्द्रमा है जो की एक घंटे (बेल) की तरह नजर आता है इसीलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा है | 🚩माता का चंद्रघंटा स्वरुप सुहागन स्त्री की स्वरुप है |🌹 🐯माता का स्वरूप। :-- 🔔 माँ दुर्गा के तीसरे स्वरुप चंद्रघंटा की सवारी शेर | उनके माथे पर आधा चन्द्रमा सुशोभित है | उनके 10 हाथ हैं | 🌷उनके बाएं हाथ में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल हैं | और पांचवा हत वरदमुद्रा में है | 🌺उनके दाहिने हाथों में कमल का फूल, धनुष बाण, और जप माला है और पाँचवा हत अभय मुद्रा में है | 👣माता का स्वरूप🌹 माता का यह स्वरुप स्पष्ट का नाश करने वाला है | स्पष्ट के दोहराए जाने से हमेशा लड़ने के लिए तैयार रहता है | 💐 माता के इस स्वरुप की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में शांति और खुशहाली आती है | 🎎 मंत्र: ऊँ देवी कैंड्रघैयै नमो न्द्र देवी चन्द्रघंटायै नम:🌷 🌹ध्यान :- वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्। सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम् चंद्र मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खंग, गदा, त्रिशूल, चापर, पदम कमण्डलु माला व्रहीतकराम्। पटाम्बर परिधान मृदुहास्या नानालंकार भूशिताम्। मंजीर हार केयूर, कि बुटी, रत्नकुंडल मण्डिताम य प्रफुल्ल वंदना बिबाइड कांत कपोलां तुगं कुचाम्। कमनीयां लावाण्या क्षीणकट्टी नितम्बनीम् ण 🦁स्तोत्र पाठ। :-- आपदुधर्नि त्व त्वहि आद्या शक्तिः शुभपराम्। अनिमादि सिद्धिदात्री चंद्रघटा प्रणमभ्यम् सि चन्द्रमुखी पदार्थ दात्री वं मन्त्र स्वरूपणीम्। धनदात्री, आनंददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यम् आनन्द नानारूपधारिणी अर्थानाय ऐश्वर्यदायनीम्। सौभाग्यरोग्यिनी चंद्रघंट्रपन्ममाभ्यम् दाय 🏵कवच :-- रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने। श्री चन्द्रघंटास्य कवचं सर्वसिद्धिप्रदम् न्ट बिना नापसँ बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं। स्नानं शुचादि नस्ति श्रध्दामत्रयेण सिद्धिधामम् ि कुशीश्याम कुटिलाय वंचित नाट्यशास्त्रीय च न दतिव्यं न दात्यं न दातव्यं न संचितम् ट 🎭भगवती चन्द्रघनता का ध्यान, स्तोत्र और कवच का पाठ करने से मणिपुर चक्र जाग्रत हो जाता है और सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिल जाता है। 🔔🚩👣 जय माता दी 👣🚩🔔 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔

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white beauty Mar 27, 2020

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Rudra sharma Mar 27, 2020

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🌹🌹जय हो मां भवानी🚩🚩 नवार्ण मंत्र' दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नौ शक्तियां जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ 'नौ' तथा अर्ण का अर्थ 'अक्षर' होता है। अतः नवार्ण नौ अक्षरों वाला वह मंत्र है । नवार्ण मंत्र- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ।' नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ' ऐं ' है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्रि' को की जाती है। दूसरा अक्षर ' ह्रीं ' है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है। तीसरा अक्षर ' क्लीं ' है, जो मंगल ग्रह को नियंत्रित करता है।इसका संबंध दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा से है, जिसकी पूजा तीसरे नवरात्रि को होती है। चौथा अक्षर 'चा' है जो बुध को नियंत्रित करता है। इनकी देवी कुष्माण्डा है जिनकी पूजा चौथे नवरात्री को होती है। पांचवां अक्षर 'मुं' है जो गुरु ग्रह को नियंत्रित करता है। इनकी देवी स्कंदमाता है पांचवे नवरात्रि को इनकी पूजा की जाती है। छठा अक्षर 'डा' है जो शुक्र ग्रह को नियंत्रित करता है। छठे नवरात्री को माँ कात्यायिनी की पूजा की जाती है। सातवां अक्षर 'यै' है जो शनि ग्रह को नियंत्रित करता है। इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। आठवां अक्षर 'वि' है जो राहू को नियंत्रित करता है । नवरात्री के इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। नौवा अक्षर 'च्चै ' है। जो केतु ग्रह को नियंत्रित करता है। नवरात्री के इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है,, जय माता दी अज्ञात

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white beauty Mar 27, 2020

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white beauty Mar 27, 2020

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Swami Lokeshanand Mar 27, 2020

गजब बात है, भगवान गर्भ में आए, भीतर उतर आए तो ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों पुष्ट हो गए। दशरथजी के चेहरे पर तो तेज आ ही गया, बाहर भी सब ओर मंगल ही मंगल छा गया, अमंगल रहा ही नहीं। देखो, जड़ को पानी देने से फूल पत्ते अपने आप छा जाते हैं, जलपात्र में नमक डाल दें तो सब जलकणों में नमक आ जाता है, यों भगवान को मना लें तो सब अनुकूल हो जाते हैं। वर्ना भीतर पढ़ाई न हो तो लाख चश्मा बदलो, पढ़ा कैसे जाए? विवेकानन्द जी कहते थे, ये दुनिया कुत्ते की दुम है, संत पकड़े रहे तो सीधी रहे, छोड़ते ही फिर टेढ़ी। ध्यान दो, दुनिया बार बार बनती है, बार बार मिटती है, पर ठीक नहीं होती, दुनिया बदलते बदलते कितने दुनिया से चले गए, दुनिया है कि आज तक नहीं बदली। जिन्हें भ्रम हो कि दुनिया आज ही बिगड़ी है, पहले तो ठीक थी, वे विचार करें कि हिरण्याक्ष कब हुआ? हिरण्यकशिपु, तारकासुर, त्रिपुरासुर, भस्मासुर कब हुए? देवासुर संग्राम कब हुआ? दुनिया तो ऐसी थी, ऐसी है, और रहेगी भी ऐसी ही। आप इसे बदलने के चक्कर में पड़ो ही मत, आप इसे यूं बदल नहीं पाओगे। आप स्वयं बदल जाओ, तो सब बदल जाए। जो स्वयं काँटों में उलझा है, जबतक उसके स्वयं के फूल न खिल जाएँ, वह क्या खाक किसी दूसरे के जीवन में सुगंध भरेगा? हाँ, उसे छील भले ही दे। जबतक भगवान आपके भीतर न उतर आएँ, अपना साधन करते चलो, दूसरे पर ध्यान मत दो। आप दूसरे को ठीक नहीं कर सकते, दूसरा आपको भले ही बिगाड़ डाले। लाख समस्याओं का एक ही हल है, भगवान को भीतर उतार लाओ। अब विडियो देखें- मंगल भवन अमंगल हारी https://youtu.be/_BF-H0AmPK4

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white beauty Mar 27, 2020

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