https://youtu.be/gjmnDG5kk7o

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Varsha lohar Jun 1, 2020

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Sushma Bedi Sama Jun 1, 2020

#जयसच्चिदानंदजी 👏 #गंगादशमी😊 #GoodMorning☀😊 #Happy_Ganga_Dussehra😊 😊🌹😊🌹😊🌹😊🌹😊😊🌹😊 #विशेष – आज गंगा दशमी है. आज श्री यमुना जी एवं श्री गंगा जी का उत्सव मनाया जाता है. श्री यमुना जी ने कृपा कर अपनी बहन गंगा का प्रभु के साथ शुभ मिलन कराया एवं जल-विहार के निमित गंगाजी ने भी प्रभु मिलन का आनंद लिया था. आज ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को ही गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था एवं सभी दस इन्द्रियों के ऊपर अधिपत्य प्राप्त कर उनकी प्रभु मिलन की आकांक्षा श्री यमुना जी द्वारा पूर्ण हुई अतः आज के दिन को गंगा दशहरा भी कहा जाता है. श्री यमुना जी पृथ्वी के जीवों पर कृपा कर गंगाजी से मिले हैं. श्री यमुना जी के स्पर्श मात्र से गंगाजी भी पवित्र हो गयी हैं अतः गंगा जी के स्नान एवं पान से भी जीवमात्र का उद्धार हो जाता है. गंगाजी और श्री यमुना जी के भाव से आज सभी पुष्टिमार्गीय मंदिरों में जल भरा जाता है और प्रभु जल-विहार करते हैं. कुछ पुष्टिमार्गीय हवेलियों में आज के दिन नौका-विहार के मनोरथ भी होते हैं. सेवाक्रम - पर्व रुपी उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं. आज के दिन ही नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलाल जी महाराज श्री का गादी उत्सव भी है. दो उत्सव होने के कारण आज श्रीजी को गोपीवल्लभ में दो प्रकार की सामग्रियां अरोगायी जाती हैं. आज श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनोर (इलायची-जलेबी) के लड्डू, केशरयुक्त जलेबी के टूक व दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है. राजभोग समय उत्सव भोग रखे जाते हैं जिसमें केशर युक्त सुंवाली (मैदे की कड़क खरखरी) एवं खस्ता मठड़ी (पपची) अरोगायी जाती हैं. श्रीजी में राजभोग दर्शन पश्चात मणिकोठा और डोल-तिबारी में घुटनों तक जल भरा जाता है. जल में इत्र भी पधराये जाते हैं. चहुँ दिशाओं में कुंज के भाव से केले के स्तम्भ खड़े किये जाते हैं. प्रभु के सम्मुख रुई की बतखें रखी जाती है वहीँ लकड़ी के खिलौना (मगरमच्छ, कछुआ आदि) व एक छोटी नाव जल में तैराये जाते हैं. सुन्दर कमल और अन्य पुष्प भी जल में तैराये जाते हैं. डोल-तिबारी में ध्रुव-बारी के नीचे की ओर चांदी का बड़ा सिंहासन और गंगाजी-यमुना जी के घाटों के भाव से चार सीढियाँ भी साजी जाती हैं. पनघट और जल-विहार के पद गाये जाते हैं. अनोसर भोग में प्रभु को रत्नागिरी हापुस आम की चांदी की डबरिया और शाककेरी (हापुस आम की छिलके बगैर की फांक) की डबरिया अरोगायी जाती है. उत्थापन के दर्शन नहीं खोले जाते और भोग समय सर्व-सज्जा हटाकर डोल-तिबारी का जल छोड़ दिया जाता है. वैष्णव जल में ही खड़े हो कर दर्शनों का आनंद लेते हैं. मणिकोठा का जल संध्या-आरती के पश्चात छोड़ा जाता है. आज मुखिया जी विशेष रूप से संध्या-आरती की आरती मणिकोठा में जल में खड़े रह कर करते हैं. सायंकाल संध्या-आरती में श्री नवनीतप्रियाजी में गादी-उत्सव के निमित अदकी भोग अरोगाये जाते हैं जिसमें आमरस की बूंदी के लड्डू, पतली पूड़ी-खीर, गुंजा-कचौरी, दहीवड़ा, चना-दाल, बूंदी का रायता, चालनी का सूखा मेवा, आमरस, बिलसारु आदि अरोगाये जाते हैं. राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) जाको वेद रटत ब्रह्मा रटत शम्भु रटत शेष रटत, नारद शुक व्यास रटत पावत नहीं पाररी l ध्रुवजन प्रह्लाद रटत कुंती के कुंवर रटत, द्रुपद सुता रटत नाथ अनाथन प्रति पालरी ll 1 ll गणिका गज गीध रटत गौतम की नार रटत, राजन की रमणी रटत सुतन दे दे प्याररी l ‘नंददास’ श्रीगोपाल गिरिवरधर रूपजाल, यशोदा को कुंवर प्यारी राधा उर हार री ll 2 ll साज - आज श्रीजी में चंदनिया रंग की मलमल की, उत्सव के कमल के काम (Work) और रुपहली तुईलैस की किनारी से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है. वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनिया रंग का पिछोड़ा धराया जाता है. श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर चंदनिया रंग की पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, नागफणी (जमाव) का कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार श्वेत व गुलाबी पुष्पों की दो मालाजी हमेल की भांति धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं

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sandeep sharma Jun 1, 2020

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Pankaj Kr Gupta Jun 1, 2020

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