madanpal singh
madanpal singh Apr 10, 2020

🌹🕉️🙏 jai shree radhe radhe jíiii 🌷 🌹🕉️🙏 Jai shree Karisana Jiiii 🙏🏻🌷 🌹🕉️🙏 Shubh sandaya Jiiii 🙏🕉️🌹 🌹🕉️🙏 AAL my mandir family jiiii 🌹 💛💛💛💛💛💛💛💛💛💛💛💛💛💛

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कामेंट्स

Radha Sharma Apr 10, 2020
जय श्री राधे कृष्णा 🙏

MADHUBEN PATEL Apr 10, 2020
जय श्री राधे कृष्णा जी शुभसंध्या स्नेहवंदन भाईजी ठाकुरजी सदैव आपकी मनोकामनाएं पूरी करे भाईजी

hiren Apr 10, 2020
Jai Shree Krishna Bhai

Pawan Saini Apr 10, 2020
jai Shri radhey radhey Shubh Sandhya vandan ji 🙏💐 aap ka har ak pal manyalmay ho ji 🙏💐

Brajesh Sharma Apr 10, 2020
जय जय श्री राधे कृष्णा जी...

🌼कृष्णा🌼 Apr 10, 2020
🌷🙏🌷जय श्री कृष्ण जय श्री माता की भाई जी,सादर नमस्कार करता हूँ, श्रीमाता आपका मङ्गल करें भाई जी,श्रीमाता की कृपा से आप सदा सुखी रहें स्वस्थ रहें, घर पर रहें स्वस्थ रहें,शुभसँध्या वन्दन🌹🙏🌹

shriram Patil Apr 10, 2020
Shubh sandhya vandan Jay Shree Radhe Krishna very good song

Rk Soni(Ganesh Mandir) Apr 10, 2020
सुप्रभात संध्या वंदन जी🌹🌹 🙏जय गणेश देवा🙏 🙏जय लक्ष्मी माता २ानी आप व आपके परिवार की सुख समृद्धि,धन वैभव बनाऐ २खे व खुश व स्वस्थ २खे जी🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏

Mamta Chauhan Apr 10, 2020
Radhe radhe ji shubh ratri vabdan bhai ji aapka har pal khushion bhra ho 🌷👌🌷🙏🌷🙏🌷🙏

seema soni Apr 10, 2020
Good night ji jai shree krishna ji🙏🙏🌹🌹🕉️🕉️😴😴🌿🌿🌿🌿🌿

Renu Singh Apr 10, 2020
Shubh Ratri Vandan Bhai ji 🙏🌹🙏🌹 Thakur ji ki kripa Se Aàpka Aane Wala pl Shubh V Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Manoj manu Apr 10, 2020
🚩🙏🏵जय माता दी -राधे राधे जी ,माँ भगवती की अनंत सुंदर सदा - कल्याणी,करुणामयी एवं ममतामयी कृपा दृष्टि के साथ में शुभ रात्रि वंदन भाई जी ☘️🙏

Neha Sharma, Haryana Apr 11, 2020
जय श्री राधेकृष्णा 🥀🙏🏼 शुभ शनिवार 🙏 ईश्वर 👣🚩🐚 की असीम कृपा ✋ आप और आपके परिवार 👨‍👩‍👧‍👦 पर सदैव बनी रहे जी 🙏🏼 आप सभी भाई-बहनों 🎎 का हर पल शुभ व मंगलमय 🔯 हो जी 🙏🏼🙏

*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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rekha sunny May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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Sanjay Singh May 10, 2020

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BIJAY PANDAY May 10, 2020

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rekha sunny May 10, 2020

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Sharma May 10, 2020

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Meena Dubey May 10, 2020

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