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hiren
hiren May 26, 2019

🌹🌹🌹 Jai Shree Ganesh 🌹🌹🌹 Good night everyone

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       Good night everyone

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Sandhya Nagar May 27, 2019
(( श्री राधारानी के आभूषण )) . एक बार की बात है श्री श्यामसुंदर माता अम्बिका के मंदिर गए, और उनसे प्रार्थना करने लगे l हे अंबिके, आप मुझ पर कृपा करो- . माँ बोली, गोबिंद आप यहाँ आ गए हो सायं में यशोदा मैया आपकी इंतज़ार कर रही होगी तो मैंने आपका एक रूप मैया के पास स्थापित कर दिया है ताकि आपकी माँ आपके विरह में रोवे ना l . आप बताओ कन्हैया क्या प्रार्थना है आपकी अम्बिका माँ बोली . कन्हैया बोले माँ एक बात बताओ " सारे विश्व में सबसे कोमल वस्तु कौन सी है" . माँ बोली - कन्हैया इस दुनिया में सबसे कोमल दो वस्तु है जो मैंने बनायी हैं.. एक श्री राधारानी और दूसरे आप श्री कृष्ण.. . कन्हैया आश्यर्चजनित अवस्था में बोले .. माँ यह तो मैं जानता हूँ " श्री राधारानी" अति कोमल है पर मैं भी कोमल हूँ यह मुझे आज पता चला हैl . आज आपसे एक विनय करता हूँ मुझे आशीर्वाद दीजिए माँ... हे अम्बिका माँ, एक आशीर्वाद दीजिए जैसा आपने कहा के मैं अति कोमल हूँ तब मुझे आशीर्वाद दो " मैं जो चाहूँ वहीं बन जाऊँ" . माँ बोली - जाओ कन्हैया आपको दे दिया मैंने आशीर्वाद "आप जो चाहो वो बन जाओगे" कन्हैया अति प्रसन्न हुए और अपने गृह चले गए" . तब कन्हैया ठीक श्री राधारानी के सम्मुख पहुँच गए. कन्हैया, श्री राधारानी के आभूषणों की तरफ़ देखते है जो श्री ललिताजी सज़ा रही थी श्री राधारानी को ... . तभी श्री कृष्ण सोचे " यह आभूषण कितने कठोर होते है जो मेरी राधारानी को कष्ट देते होंगे l . वो इन कठोर आभूषणों को पहन ज़रूर लेती है केवल और केवल मेरी प्रसन्नता के लिए के मैं सुखी रहूँ l . परंतु इतनी सुंदर कोमल श्री राधारानी को आभूषणों की क्या आवश्यकता यह देखो यह " कर्ण" झुमका कैसे इनके कोमल कानो को कष्ट दे रहा है l . गले में लम्बा हार तो देखो इतनी कोमल और ऊपर से लम्बा हार कैसे झुकी झुकी चल रही है मेरी कोमलांगी राधा, . साड़ी तो देखो कितनी भारी, नथ बेसर कोमल नासिका को जकड़ कर बैठी है l . तब श्री कृष्ण बोले- अम्बिका माँ आप ने मुझे कहा है मैं अत्यंत कोमल हूँ इस पूरी सृष्टि में और मैंने उनसे वरदान भी ले लिया है के मैं जो चाहूँ वो बन जाऊँ . तब कन्हैया ने उसी समय अपने एक रूप से श्री राधारानी के सारे आभूषण बन गए, . उनकी साड़ी लहंगा काँचुकि, सिंदूर महावर, नथ बेसर, करधानि अँगूठी आदि सब कन्हैया स्वयं बन गए क्यूँकि वो अति कोमल है l . और श्री राधारानी को कोमलता लगे इन आभूषणों से जो मेरे रूप से बने है.. . कन्हैया सब आभूषण स्वयं बन गए और दूसरे रूप में ललिताजी से बोले " आप राधारानी को यह आभूषण पहनाओ जो अत्यंत कोमल है " . ललिताजी अट्ठास करती हुई बोली ... " नंदगाओं के आभूषण कोमल भी होते है..?? . ललिता जी ने सारे आभूषण ले लिए और राधा रानी को पहनाने लगी तब एक एक आभूषण से " श्री राधा" नाम के ध्वनि होने लगी ... . तब राधारानी बोली " यह आभूषण मेरा नाम क्यूँ गा रहे है " . कन्हैया जानते थे के यह सब आभूषण वो स्वयं बने है तभी आभूषणों, वस्त्रादि से राधा राधा की धुनी हो रही है.. . एक एक आभूषण और वस्त्रादि जो अत्यंत कोमल थे श्री राधारानी को अत्यंत सुख पहुँचा रहे थे l . राधारानी बोली .. ललिताजी पहली बार आभूषण, वस्त्रादि मुझे " श्याम सुख आलिंगन का आनंद पहुँचा रहे है l . कन्हैया अति प्रसन्न हुए के मेरी कोमलांगी को मैं स्वयं अपनी कोमल देह से वस्त्र आभूषण बन उन्हें सुखी कर दिया l . ऐसा क्यूँ हुआ ? क्यूँ कृष्ण राधारानी के आभूषण वस्त्र कोमल बने ? . क्यूँकि एक दिन " श्री चित्रा सखी राधारानी की वेणी में फूल का गज़रा बाँध रही थी ... . और गुणमंजरी फूलो का गज़रा बना बना के श्री चित्रा को दे रही थी और चित्रा राधारानी की वेणी में बाँध रही थी और यह दृश्य श्री कृष्ण झाड़ियों में छिप के देख रहे थे l . तभी राधारानी की वेणी में जैसे ही चित्राजी पुष्प बाँधती तभी राधारानी अपने केशों को फैलाकर सारे फूलो के गज़रे को धरती पर फैला देती l . तब चित्रा जी कहती यह क्या कर रही हो राधारानी .. आप सारे पुष्पों की माला गज़रा जो हम आपको पहना रही है आप सारे केश फैला क्यूँ गिरा रही हो, . राधारानी के आँखों में आँसू आ गए और यह सब श्री कृष्ण देख रहे थे . राधारानी चित्रा का हाथ पकड़ बोली "सखी मैं तुम पर वारी वारी जाती हूँ परंतु.. "जब तुम मेरे केश में यह फूल की माला डाल उन्हें बाँधती हो तब मुझे अत्यंत वेदना होती है l . क्योंकि यह " काले केश मुझे श्यामसुंदर के वर्ण की याद दिला देते है और जब तुम मेरे श्यामसुंदर रूपी केश को " फूलो से बाँधने का प्रयास करती हो तब मैं दुखी हो जाती हूँ ... . के तुम कैसे मेरे श्यामसुंदर रूपी केश को बाँध सकती हो ... मैं अपने श्याम को बँधता नहीं देख सकती l . बस तभी ही " अपने सारे केश शिंगार को पल में ख़राब कर सब केश को खोल देती हूँ के मेरे कन्हैया को कोई ना बांधे चाहे मैं ही क्यूँ ना खुले केश में विक्षिप्त सी लगूँ l . कन्हैया ने चुपके से जब राधारानी का इतना प्रेम अपने लिए देखा बस तभी मन में सोचे के.... . जो मेरे सुख के लिए अपने केश में मेरा स्वरूप देख उन्हें फूलो से बाँधने को हिचकती है तब मैं उनके लिए अपने कोमल अँगो से आभूषण वस्त्र नहीं बन सकता l . जय हो राधा कृष्ण का प्रेम.. ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

PRAKASH..PATEL May 27, 2019
जयमातादी हमेशा-खुश रहो 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹हरिओम

PRAKASH..PATEL May 27, 2019
जयमातादी 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹हरिओम 🌹🌹🌹हमेशा-खुश रहो

Ramesh vaghela May 27, 2019
jai shree ganeshaya nmoh nmami 🙏🏻 bhai 🙏🏻 prnam 🙏🏻

hiren May 28, 2019
@sanjayawasthi2 Radhe Radhe ji Good morning ji Happy Tuesday Have a nice day god bless you and your family thank you so much

Kishor N Padshala May 28, 2019
जय श्री मंगलमुर्ती गणेशाय नमः महादेव के प्यारा है मागौरी के दुल्हारा है सबका विध्न हरता श्री गणेश जी हमारा है शुभ प्रभात स्नेह वंदन भाई जी प्रणाम 🌹🌹🙏🙏👌👌👌👌👌👌👌👌

hiren May 28, 2019
@knpadshala Thank you Bhai jai Shree Ganesh God bless you Bhai Good morning 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Madhu sharma May 29, 2019
Shree Ganeshay Namah jai sairam ji brother ji 🙏very beautiful post ji Ganesh ji ka Aashirwad Sada aap avam aap ki family par bana rhe mangalmurti Aap ki Har manokamna Puri Kare Aap ke Har pal Shubh aur mangalmay ho Good Afternoon ji 🙏🙏🌹🌹

hiren May 29, 2019
@madhusharma22 Jay Shree Ganesh sister ji thank you very much Meri post pasand Karne k liye God bless you Good evening

Vijay Yadav Jul 17, 2019

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Kamlesh Jul 16, 2019

+73 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 4 शेयर
Vijay Yadav Jul 17, 2019

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