Anita Sharma
Anita Sharma Oct 4, 2019

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Nishant tyagi Oct 5, 2019
@achalsharma3 *Jai Shree Krishna🚩अधूरी भक्ति एक छोटी सी कहानी एक छोटे से गाँव में साधू रहता था, वहाँ हर वक्त कान्हा के स्मरण में लगा रहता था, वहाँ कान्हा के लिए रोज_ खीर_चावल बनाता था, और हर दिन उनकें इंतजार में आस लगाए बैठा रहता था, कि मेरे कान्हा कब आयेंगे, उस साधू की एक बुरी आदत थी, वहाँ गाँव में रहने वाले नीची जाती के लोगो से दूर रहता था, उन्हें आश्रम में नही आने देता था, उसका मानना था, कान्हा इससे नाराज हो जाएंगे, वो तो स्वामी हैं, इन नीच छोटी जाति वालों के, आश्रम में प्रवेश करने से और मुजे दर्शन नही देंगे, इसलिए वहाँ कभी किसी से ठीक से बात नही करता था........... उसके आश्रम से थोड़ी दूर एक कोड़ी रहता था, वहाँ भी कान्हा का भक्त था, नित्य प्रतिदिन वहाँ उनकी उपासना करता था, और हर वक्त कान्हा की भक्ति में डूबा रहता था, जब भी साधू, उसके घर के पास से गुजरता तो कोड़ी को कहता नीच तुज जैंसे कोड़ी से कान्हा क्या मिलने आयेंगे, वो तो स्वामी हैं, तुज जैंसे के घर में क्यूं आने लगें भला, और बोलते_बोलते वहाँ आश्रम चले जाता.......... कुछ वर्ष व्यतित हुये, अब साधू को लगने लगा, कान्हा क्यूं मुजे दर्शन नही दे रहे, और साधू उसकी मूर्ति के सामने रोने लगा, और कहने लगा प्रभु एक बार तो मुजे दर्शन दें दो, मैं प्रतिदन आपके लिए खीर_चावल बनाता हूं, एक बार तो आ कर भोज लगा लें, और उदास होकर कान्हा के चरणों में सो गया......... दूसरे दिन एक गरीब दरिद्र, छोटा सा बालक साधू के आश्रम आया, साधू उस वक्त कान्हा को भोग लगाने जा रहा था, उस बालक ने कहा, साधू महराज मुजे कुछ खाने दे दीजिए मुजे जोरो की भूख लगी हैं, साधू गुस्सें से तिलमिला गया, एक तो दरिद्र और दूसरा कान्हा की भक्ति में विध्न, उसने आव देखा ना ताव, एक पत्थर उठाकर बच्चें को दे मारा, उस दरिद्र बच्चें के सर से खून निकलने लगा, साधू ने कहा भाग यहाँ सें, बच्चा उसके आश्रम से निकल गया, और जाकर उस कोडी के घर में चला गया, कोड़ी ने उसके रक्त साफ किया पट्टी बाँधी और उस भूखें बच्चें को भोजन दिया, बच्चा भोजन कर के चला गया.......... दूसरे दिन फिर वो बच्चा साधू के आश्रम आया, साधू ने फिर उसे मारा और भागा दिया, फिर वहाँ कोड़ी के घर चला गया, कोड़ी ने फिर उसकी पट्टी बाँधी और खाने को दिया, बच्चा खाना खाकर चला जाता...... वो बच्चा रोज आता, साधू उसे मारता और वो कोड़ी के पास चला जाता, एक दिन साधू स्नान के लिए जा रहा था, उसे रास्तें पर वही कोड़ी दिखा, साधू ने उसे देखा तो अश्चाचर्य से भर गया, उस कोड़ी का कोड़ गायब हो चुका था, वहाँ बहुत ही सुंदर पुरूष बन चुका था, साधू ने कोड़ी नाम लेकर कहा, तुम कैंसे ठीक हो गयें, कोड़ी ने कहा, मेरे कान्हा की मर्जी, पर साधू को रास नही आया, उसने मन ही मन फैसला किया, पता लगाना पड़ेगा........... दूसरे दिन फिर वहाँ दरिद्र बच्चा साधू के आश्रम आया, साधू ने फिर उसे मारा, बच्चा जाने लगा, तो साधू उठ खड़ा हुआ और मन ही मन सोचने लगा, मैं इस दरिद्र बच्चें को रोज मारता हूं, ये रोज उस कोड़ी के घर जाता हैं, आखिर चक्कर क्या हैं देखना पड़ेगा, साधू पीछे_पीछे जाने लगता हैं जैसें ही वहाँ कोड़ी की झोपड़ी में पहुंचता हैं, उसकी ऑखें फटी की फटी रह जाती हैं............ स्वंय तीनो लोक के स्वामी कान्हा बांके बिहारी कोड़ी के घर पर बैंठे हैं और कोड़ी उनकी चोट पर मलहम लगा रहा हैं, और कान्हा जी भिक्षा में मांगी ना जाने कितनो दिनों की भासी रोटी को बड़े चाव से खा रहें हैं, साधू कान्हा चरणों गिरते कहने लगा, मेरे कान्हा मेरे स्वामी मेरे आराध्य आपने मुज भक्त को दर्शन नही दिये, और इस नीच को दर्शन दे दीये, मुजसे क्या गलती हो गयी, जो आप इस कोड़ी की झोपड़ी में आ गयें, भिख में मांगी भासी रोटी खा ली पर, मैं आपके नित्य प्रतिदिन खीर_चावल बनाता हूं उसे खाने नही खाए, बोलो कान्हा बोलो....... तब कान्हा जी ने कहा ये साधू, मैं तो रोज तेरे पास खाना मांगने आता था, पर तु ही रोज मुजे पत्थर से मारकर भागा देता था, मुजे भूख लगती थी, और मैं इतना भूखा रहता था, की इस मानव के घर चला आता था, वो जो मुजे प्यार से खिलाता मैं खाकर चला जाता, अब तु ही बता इसमें मेरी क्या गलती,,,,,,,,,,,, साधू पैर पकड़ कान्हा के रोने लगता हैं और कहता हैं, मुजसे गलती हो गयी, मैं आपको पहचान नही पाया, मुजे माफ कर दिजिए, और फिर कहता हैं, तीनो लोक के स्वामी गरीब भिखारी दरिद्र बच्चा बनकर आप मेरे आश्रम क्यूं आते थे, मैं तो आपको दरिद्र समझकर मारता था, क्यूकि मेरे कान्हा तो स्वामी हैं वो दरिद्र कैसें हो सकते हैं......... कान्हा जी ने कहा, हे साधू, तुजे किसने कहा मैं सिर्फ महलों में रहता हूं, तुजे किसने कहा, मैं सिर्फ 56 भोज खाता हूं, तुजे किसने कहा मैं, नंगे पैर नही आता, तुजे किसने कहा मैं दरिद्र नही, हे साधू, ये समस्त चरचरा मैं ही हूं, धरती आकाश पृथ्वी सब मैं ही हूं, मैं ही हूं महलों का स्वामी, तो मैं ही हूं झोपड़ी का दरिद्र भिखारी, मैं ही हूं जो प्यार और सच्ची श्राध्दा से खिलाने पर बासी रोटी खा लेता हैं और स्वार्थ से खिलाने पर 56 भोग को नही छूता, मैं हर जीव में बसा हूं, तु मुजे अमीर_गरीब में ढूंढता हैं............... तुजसे अच्छा तो ये कोड़ी हैं जो सिर्फ एक ही बात जानता हैं, ईश्वर हर किसी में निवास करते हैं ना की धनवान में, कान्हा कहने लगे, तुने मेरी भक्ति तो की पर अधूरी और कान्हा अंन्तरधय्न हो जाते हैं............ साधू उनकी चरण बज्र पकड़ फूट_फूटकर रोने लगता हैं और कहता हैं जिसका एक पल पाने के लिए लोग जन्मों_जन्म तप करते है वो मेरी कुटिया में भीख मांगने आता था और मैं मूर्ख दरिद्र समपन्न देखता था,,,, और कोड़ी के पैर पकड़ कहता हैं,,,,,, मैंने तो सारी जिंदगी अधूरी भक्ति की,,,,,, आप मुजे सच्ची भक्ति के पथ पर ले आइयें, मुझे अपना शिष्य बना लीजिए, कोड़ी उसे गले लगा लेता हैं......... "ईश्वर कण_कण में हैं वो भिखारी भी जो आपकी चौखट पर आता हैं ना, वो भी ईश्वर की मर्जी हैं क्यूकि किसी ने कहा हैं वो भिख लेने बस नही, दुआ देने भी आता हैं, और किसी महान आदमी ने कहा हैं,,,,, दानें_दानें पर लिखा हैं खाने वालें का नाम इसलिए कभी किसी का अनादर मत कीजिए" जय बाँकेबिहारी लाल की राधें_राधें* https://www.mymandir.com/p/nbFxdc 🚩*शुभ नवरात्रि*🚩 नवरात्रि पर्व की *शानदार फ़ोटो, वीडियो, भजन, आरती* पाने के लियें सबसे बड़ें *हिंदू ऐप्प - मायमंदिर* को अभी अपने मोबाइल में डाउनलोड करें। 👉 https://goo.gl/dUyZ2H

Sunil Oct 5, 2019
जय माता दी

anil bhargav Oct 6, 2019
माता रानी की कृपा बनी रहे

Anita Sharma Jan 25, 2020

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shiv prakash soni Jan 25, 2020

गुप्त नवरात्र के अवसर पर बाधा निवारण के लिए आप दुर्गा मां की साधना कर सकते हैं सबसे अच्छा है आप यह यंत्र भोजपत्र पर बना ले केसर से बना लें या अष्टगंध से बना ले और सबसे अच्छा यंत्र बनता है काम्या सिंदूर से यह यंत्र बनाकर के प्राण प्रतिष्ठा कर ले इस यंत्र की चेतना के लिए दुर्गा जी का मंत्र जप कर ले एवं संकल्प लेकर के आपको जिस भी प्रकार की बाधा है उस प्रकार का संकल्प ले ले उस बाधा निवारण के लिए संकल्प लेकर आप दुर्गा कवच जोकि दुर्गा सप्तशती में संस्कृत और हिंदी में दिया हुआ होता है उसके 108 पाठ पूरे करें 9 दिन में 108 पाठ पूरे हो जाएं या आप रोज भी 108 पाठ कर सकते हैं जैसा आपके पास समय हो और जितना आप साधना में बैठ सकें ज्यादा से ज्यादा दुर्गा कवच आप पाठ कर सकते नित्य 2121 भी कर सकते हैं 5151 भी कर सकते हैं 108 पाठ भी नित्य कर सकते हैं दुर्गा कवच पाठ के प्रभाव से आपके बहुत सी बाधाएं स्वता ही आपसे दूर होंगी✍🏻

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jatan kurveti Jan 24, 2020

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