Hemlata Soni
Hemlata Soni Sep 4, 2017

श्रीगणेशजी विसर्जन के शुभ मुहूर्त।।

श्रीगणेशजी विसर्जन के शुभ मुहूर्त।।
श्रीगणेशजी विसर्जन के शुभ मुहूर्त।।
श्रीगणेशजी विसर्जन के शुभ मुहूर्त।।

श्री गणेश की शुभ प्रतिमा 10 दिन आपके घर में विराजित रहीं। अब बेला है उनकी बिदाई की। आइए जानें मंगल मुहूर्त और वह विशेष मंत्र जो विसर्जन के समय बोलना चाहिए...
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को गणेशोत्सव का समापन होता है और भगवान श्रीगणेश का विसर्जन किया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार श्रीगणेश का विसर्जन नदी या तालाब में किए जाने का विधान है लेकिन सिर्फ बालूरेत से निर्मित गणेश प्रतिमा का। विसर्जन के पूर्व भगवान श्रीगणेश का पूजन पहले घर पर तथा इसके बाद विसर्जन स्थल पर भी किया जाता है। इसकी विधि इस प्रकार है-
विधि
विसर्जन से पूर्व स्थापित गणेश प्रतिमा का संकल्प मंत्र के बाद षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। मंत्र बोलते हुए 21 दुर्वा-दल चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास चढ़ाएं और 5 ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें। पूजन के समय यह मंत्र बोलें-
ॐ गं गणपतये नम:
दुर्वा-दल चढ़ाते समय यह मंत्र बोलें
गणेशजी को 21 दुर्वादल चढ़ाई जाती है। दो दुर्वा-दल नीचे लिखे नाममंत्रों के साथ चढ़ाएं।
ॐ गणाधिपाय नम:
ॐ उमापुत्राय नम:
ॐ विघ्ननाशनाय नम:
ॐ विनायकाय नम:
ॐ ईशपुत्राय नम:
ॐ सर्वसिद्धप्रदाय नम:
ॐ एकदन्ताय नम:
ॐ इभवक्त्राय नम:
ॐ मूषकवाहनाय नम:
ॐ कुमारगुरवे नम:
इसके बाद श्रीगणेश की आरती उतारें और विसर्जन स्थल पर ले जाकर पुन: एक बार आरती करें व गणेश प्रतिमा जल में विसर्जित कर दें और यह मंत्र बोलें-
यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च ॥
यदि नदी या तालाब से थोड़ा जल लेकर गणेश प्रतिमा पर चढ़ा दिया जाए तो यह भी विधिवत विसर्जन ही माना जाएगा, ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख है।
श्री गणेश प्रतिमा विसर्जन के शुभ मुहूर्त
सुबह 07:50 से 09:20 बजे तक- चल
सुबह 10:50 से दोपहर 12:20 बजे तक- अमृत
दोपहर 01:50 से 03:20 बजे तक- शुभ
शाम 06:20 से 07:50 बजे तक- शुभ

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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🌺🕉️ शुभ शनिवार 🌺शुभ प्रभात् 🕉️🌺 2077-विजय श्री हिंदू पंचांग-राशिफल-1942 🌺-आज दिनांक--27.02.2021-🌺 श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 74.30 - रेखांतर मध्य मान - 75.30 शिक्षा नौकरी आजीविका विवाह भागयोन्नति (प्रामाणिक जानकारी--प्रभावी समाधान) ____________________________________ -विभिन्न शहरों के लिये रेखांतर(समय) संस्कार- (लगभग-वास्तविक समय के समीप) दिल्ली +10मिनट---------जोधपुर -6 मिनट जयपुर +5 मिनट------अहमदाबाद-8 मिनट कोटा +5 मिनट-------------मुंबई-7 मिनट लखनऊ +25 मिनट------बीकानेर-5 मिनट कोलकाता +54 मिनट-जैसलमेर -15 मिनट ___________________________________ _____________आज विशेष_____________ कमाते हुये भी धन संग्रह नहीं हो पा रहा हो तो अपना सकते हैं कुछ उपयोगी सुझाव ____________________________________ आज दिनांक...................... 27.02.2021 कलियुग संवत्.............................. 5122 विक्रम संवत.................................2077 शक संवत....................................1942 संवत्सर.................................. श्री प्रमादी अयन..................................... उत्तरायण गोल......................................... .दक्षिण ऋतु.............................................वसंत मास............................................. माघ पक्ष............................................ शुक्ल तिथि......पूर्णिमा. अपरा. 1.46 तक / प्रतिपदा वार...........................................शनिवार नक्षत्र....मघा. पूर्वाह्न.11.17 तक / पू.फाल्गुनी चंद्र राशि...................सिंह. संपूर्ण (अहोरात्र) योग............. सुकर्मा. रात्रि. 7.36 तक / धृति करण..................... बव.. अपरा. 1.46 तक करण........बालव. रात्रि. 12.35 तक / कौलव ___________________________________ सूर्योदय.............................6.57.30 पर सूर्यास्त..............................6.31.05 पर दिनमान...............................11.33.34 रात्रिमान...............................12.25.31 चंद्रोदय..............अपरा. 6.39.24 PM पर चंद्रास्त........अगली प्रातः 7.28.58 AM पर सूर्य.......................(कुंभ) 10.14.31.20 चंद्रमा....................(सिंह) 04.10.46.19 राहुकाल..... प्रातः 9.51 से. 11.18 (अशुभ) यमघंट.........अपरा. 2.11 से 3.38 (अशुभ) अभिजित..... (मध्या)12.21 से 01.07 तक पंचक.................................आज नहीं है शुभ हवन मुहूर्त(अग्निवास)............ आज है दिशाशूल.................................पूर्व दिशा दोष निवारण.... उड़द का सेवन कर यात्रा करें ___________________________________ चौघड़िया (दिन-रात)........केवल शुभ कारक * चौघड़िया दिन * शुभ....................प्रातः 8.24 से 9.51 तक चंचल..............अपरा. 12.44 से 2.11 तक लाभ................ अपरा. 2.11 से 3.38 तक अमृत............... अपरा. 3.38 से 5.04 तक * चौघड़िया रात्रि * लाभ............सायं-रात्रि. 6.31 से 8.04 तक शुभ................रात्रि. 9.37 से. 11.11 तक अमृत......रात्रि. 11.11 से 12.44 AM तक चंचल...रात्रि. 12.44 AM से 2.17 AM तक लाभ......रात्रि. 5.23 AM से 6.57 AM तक ___________________________________ *शुभ शिववास की तिथियां* शुक्ल पक्ष-2-----5-----6---- 9-------12----13. कृष्ण पक्ष-1---4----5----8---11----12----30. ___________________________________ जानकारी विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड मूल(रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) नक्षत्रों में होता है तो नक्षत्र शांति को आवश्यक माना गया है.. आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार नामाक्षर.. 11.17 AM तक---------मघा---4-----(मे) 04.54 PM तक--पू.र्फाल्गुनी ---1-----(मो) 10.28 PM तक--पू.फाल्गुनी---2-----(टा) 04.02 AM तक--पू.फाल्गुनी---3-----(टी) उपरांत रात्रि तक--पू.फाल्गुनी---4-----(टु) (पाया-रजत्) _______सभी की राशि सिंह रहेगी________ ___________________________________ ____________आज का दिन____________ व्रत विशेष.................................. पूर्णिमा व्रत विशेष................. माघ स्नान व्रत संपूर्ण दिन विशेष.....संत रविदास /माघ कवि जयंती दिन विशेष.........................ललिता जयंती सर्वा.सि.योग...................................नहीं सिद्ध रवियोग................................. नहीं ___________________________________ _____________कल का दिन_____________ दिनांक.............................28.02.2021 तिथि.............. माघ कृष्णा प्रतिपदा रविवार व्रत विशेष..................................... नहीं दिन विशेष................ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस सर्वा.सि.योग........ प्रातः 9.35 से रात्रि पर्यंत सिद्ध रवियोग................................. नहीं ___________________________________ _____________आज विशेष ____________ कमाते हुये भी हाथ खाली रहते हैं तो करें ये उपाय, भरी रहेगी आप की जेब.. धन की इच्छा सभी को होती हैं। सभी लोग अपनी तिजोरियों में धन रखा हुआ देखना पसंद करते हैं। लेकिन धन चल सम्पति होती है. लक्ष्मी चंचल होती हैं, वो कहीं भी कभी भी नहीं रुकती हैं। लेकिन लक्ष्मी की कृपा हो जाये तो जिंदगी सुकून से कटती हैं. अब ऐसे में सवाल उठता हैं कि लक्ष्मी माँ की कृपा कैसे प्राप्त की जाये। जिससे कि भौतिक दुनिया का हर सुख मिल जाये। इसके लिये आइये आपको लक्ष्मी माँ के उन 18 पुत्रों की उपासना के बारे में जिनको पुकारने पर लक्ष्मी माँ दौड़ी चली जायेगी. ज्योतिषियों का कहना हैं कि माँ लक्ष्मी के 18 पुत्रों को पुकारने पर लक्ष्मी माँ भक्तों के पास चली आती हैं और मनचाहा वरदान दे जाती हैं। ज्योतिष तो यहाँ तक कहते हैं कि अगर अचानक पैसों की तंगी आ जाती हैं और माँ लक्ष्मी के पुत्रो का नाम पुकारने से पैसों की तंगी दूर हो जाती हैं। ज्योतिष के अनुसार लक्ष्मी जी तीन स्थानों पर सदैव निवास करती हैं। जहाँ गणपति की पूजा की जाती हैं वहाँ लक्ष्मी हमेशा निवास करती हैं। लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर लक्ष्मी जी के पुत्रों को पुकारने पर लक्ष्मी जी सदैव सहायता करती हैं. ऋग्वेद में लक्ष्मी जी के पुत्रों के नामों का एक श्लोक में जिक्र हैं। जब भी कभी जरूरत पड़े लक्ष्मी जी के पुत्रों का नाम शुक्रवार के दिन से ही जपना शुरू कर दे तो लक्ष्मी जी धन की व्यवस्था कर देती हैं. लक्ष्मी जी के 18 पुत्रों के नाम ऊं देवसखाय नम:, ॐ चिक्लीताय नम:, ॐ आनन्दाय नम: ॐ कर्दमाय नम:, ॐ श्रीप्रदाय नम:, ॐ जातवेदाय नम: ॐ अनुरागाय नम:, ऊं सम्वादाय नम:, ॐ विजयाय नम:, ॐ मदाय नम:, ॐ वल्लभाय नम:, ॐ हर्षाय नम:, ॐ बलाय नम:, ॐ तेजसे नम:, ॐ दमकाय नम, ॐ सलिलाय नम:, ॐ गुग्गुलाय नम:, ॐ कुरूण्टकाय नम: *संकलनकर्त्ता* श्री ज्योतिष सेवाश्रम सेवाश्रम संस्थान (राज) ___________________________________ ___________आज का राशिफल__________ मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ) आज आपका तल्ख़ रवैया दोस्तों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। आज घर से बाहर बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकलें इससे आपको धन लाभ हो सकता है। अपने जीवन-साथी के साथ प्यार, अपनापन और स्नेह महसूस करें। दूसरों की दख़लअन्दाज़ी गतिरोध पैदा कर सकती है। परिवार की जरुरतों को पूरा करते-करते आप कई बार खुद को वक्त देना भूल जाते हैं। लेकिन आज आप सबसे दूर होकर अपने आप के लिए वक्त निकाल पाएंगे। ख़र्चों को लेकर जीवनसाथी से तनातनी संभव है। आज आपको अपनी किसी पुरानी गलती का अहसास हो सकता है और आपका मन उदास हो सकता है। वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो) आज किसी पुराने दोस्त से मुलाक़ात आपका मन ख़ुश कर देगी। तंग आर्थिक हालात के चलते कोई अहम काम बीच में अटक सकता है। ग्लानि और पछतावे में वक़्त बर्बाद न करें, बल्कि ज़िन्दगी से सीखने की कोशिश करें। इसे महसूस करें। टैक्स और बीमे से जुड़े विषयों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है। आपका जीवनसाथी अन्य दिनों की अपेक्षा आपका ज़्यादा ख़्याल रखेगा। आज परिवार या मित्रों के साथ समय व्यतीत होगा। मुमकिन है कि आप झुंझलाहट या ख़ुद को फँसा हुआ महसूस करें, क्योंकि दूसरों के साथ ख़रीदारी में पूरी तरह मशगूल रह सकते हैं। मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह) आज के मनोरंजन में बाहर की गतिविधियों और खेल-कूद को शामिल किया जाना चाहिए। आकस्मिक मुनाफ़े या सट्टेबाज़ी के ज़रिए आर्थिक हालात सुदृढ़ होंगे। आपकी भरपूर ऊर्जा और ज़बरदस्त उत्साह सकारात्मक परिणाम लाएंगे व घरेलू तनाव दूर करने में मददगार रहेंगे। किसी से अचानक हुई मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। आपका कम्यूनिकेशन और काम करने की क्षमता असरदार सिद्ध होंगे। वैवाहिक जीवन में सब कुछ अच्छा महसूस होगा। मीडिया फील्ड से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो) आज के दिन खीज और चिढ़चिढ़ेपन के अहसास को ख़ुद पर छाने न दें। आज आपको अपना धन खर्च करने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि घर का कोई बड़ा आज आपको धन दे सकता है। दोस्त और जीवनसाथी आपके लिए सुकून और ख़ुशी लेकर आएंगे, नहीं तो आपका दिन बुझा-बुझा और दौड़-भाग से भरा रहेगा। अपने प्रिय की बातों के प्रति आप ज़रूरत से ज़्यादा संवेदनशील रहेंगे- आपको अपने जज़्बात पर क़ाबू रखने की ज़रूरत है और ऐसा कुछ करने से बचें जो मामले को और भी बिगाड़ दे। अगर कहीं बाहर जाने की योजना है तो वह आख़िरी वक़्त पर टल सकती है। अपने जीवनसाथी के किसी काम की वजह से आप कुछ शर्मिन्दगी महसूस कर सकते हैं। लेकिन बाद में आपको महसूस होगा कि जो हुआ, अच्छे के लिए ही हुआ। कोई फिल्म या नाटक देखकर आज आपका मन पहाड़ों में जाने का कर सकता है। सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे) आज आप अपने काम पर एकाग्रता बरक़रार रखने में दिक़्क़त महसूस करेंग, क्योंकि आज आपकी सेहत पूरी तरह ठीक नहीं होगी। आपके पिता की कोई सलाह आज कार्यक्षेत्र में आपको धन लाभ करा सकती है. कुल मिलाकर फ़ायदेमंद दिन है। लेकिन आप समझते थे जिसपर आप आँखें बंद करके यक़ीन कर सकते हैं, वह आपके भरोसे को तोड़ सकता है। एक लम्बा दौर जो काफ़ी समय से आपको दबोचे हुए था, ख़त्म हो चुका है- क्योंकि जल्दी ही आपको आपका जीवन-साथी मिलने वाला है। अपने व्यक्तित्व और रंग-रूप को बेहतर बनाने का कोशिश संतोषजनक साबित होगी। आपका जीवनसाथी वाक़ई आपके लिए फ़रिश्तों की तरह है और आपको आज यह एहसास होगा। रात के वक्त आज आप बिना किसी को बताए घर से बाहर निकल सकते हैं क्योंकि आपके दिमाग में कोई उलझन रहेगी और आप उसका हल नहीं ढूंढ पाएंगे। कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो) आज आपकी ओर से समर्पित दिल और बहादुरी का जज़्बा आपके जीवन-साथी को ख़ुशी दे सकता है। आपको मेरी सलाह है कि शराब सिगरेट जैसी चीजों पर पैसा खर्च न करें, ऐसा करना आपके स्वास्थ्य को तो खराब करता ही है आपकी आर्थिक स्थिति भी इससे बिगड़ती है। आपके माता-पिता की सेहत चिंता और घबराहट का कारण बन सकती है। आपकी मुस्कुराहट आपके प्रिय की नाराज़गी दूर करने के लिए सबसे अच्छी दवा है। दिन अच्छा है, आज के दिन अपने लिए समय निकालें और अपनी कमियों और खुबियों पर गौर फरमाएं। इससे आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे। मुमकिन है कि आज आपका जीवनसाथी ख़ूबसूरत शब्दों में यह बताए कि आप उनके लिए कितने क़ीमती हैं। रात को आज आप अपने किसी करीबी से कई देर तक फोन पर बात कर सकते हैं और अपने जीवन में चल रही बातों को बता सकते हैं। तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते) आज आप खाने-पीने की ऐसी चीज़ों से बचने की कोशिश करें, जिनमें कॉलेस्ट्रॉल की ज़्यादा मात्रा है। आज आपको किसी अज्ञात स्रोत से पैसा प्राप्त हो सकता है जिससे आपकी कई आर्थिक परेशानियां दूर हो जाएंगी। आपको बच्चों के साथ कुछ समय बिताने, उन्हें अच्छे संस्कार देने और उनकी ज़िम्मेदारी समझाने की ज़रूरत है। आपके प्रिय के कड़वे शब्दों के कारण आपका मूड ख़राब हो सकता है। आज आप सारे रिश्तों और रिश्तेदारों से दूर होकर अपना दिन किसी ऐसी जगह पर बिताना पसंद करेंगे जहां जाकर आपको शांति प्राप्त होती है। वैवाहिक जीवन में चीज़ें हाथ से निकलती हुई मालूम होंगी। धीरे-धीरे ही सही लेकिन जिंदगी अब ट्रैक पर आ रही है इस बात का अहसास आज आपको होगा। वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू) आज आपकी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं पर डर का साया पड़ सकता है। इसका सामना करने के लिए आपको उपयुक्त सलाह की ज़रूरत है। आपके द्वारा धन को बचाने के प्रयास आज असफल हो सकते हैं हालांकि आपको इससे घबराने की जरुरत नहीं है स्थिति जल्द ही सुधरेगी। हो सकता है कि आप अपने परिवार के लोगों की सभी बातों से सहमत न हों, लेकिन आपको उनके तजुर्बे से सीखने की कोशिश करनी चाहिए। आपके जीवन-साथी के पारिवारिक सदस्यों की वजह से आपका दिन थोड़ा परेशानीभरा हो सकता है। आज आप नए विचारों से परिपूर्ण रहेंगे और आप जिन कामों को करने के लिए चुनेंगे, वे आपको उम्मीद से ज़्यादा फ़ायदा देंगे। आज अपने जीवनसाथी को समझने में आपसे ग़लती हो सकती है, जिसकी वजह से सारा दिन उदासी में गुज़रेगा। अपने काम के प्रति आज आपका फोकस गजब का होगा। आपके काम को देखकर आज आपके अधिकारी आपसे खुश हो सकता है। धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे) आज आप ख़ुद को उत्साही बनाए रखने के लिए अपनी कल्पनाओं में कोई ख़ूबसूरत और शानदार तस्वीर बनाएँ। दिन की शुुरुआत भले ही अच्छी हो लेकिन शाम के वक्त किसी वजह से आपका धन खर्च हो सकता है जिससे आप परेशान होंगे। बढ़िया दिन है जब आप सबके ध्यान को अपनी तरफ़ खींचेंगे- आपके सामने चुनने के लिए कई चीज़ें होंगी और आपके सामने समस्या यह होगी कि किसे पहले चुना जाए। विवाह-प्रस्ताव के लिए सही समय है, क्योंकि आपका प्यार जीवन भर के साथ में बदल सकता है। ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा सकते हैं। क्या आपको लगता है कि शादी महज़ समझौतों का नाम है? अगर हाँ, तो आप आज हक़ीक़त महसूस करेंगे और जानेंगे कि यह आपके जीवन की सबसे अच्छी घटना थी। घर से बाहर रहने वाले जातकों को आज अपने घर की बहुत याद सताएगी। अपने मन को हल्का करने के लिए आप घर वालों से कई देर तक बात कर सकते हैं। मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी) आज के दिन आप अपने काम पर एकाग्रता बरक़रार रखने में दिक़्क़त महसूस करेंगे, क्योंकि आज आपकी सेहत पूरी तरह ठीक नहीं होगी। आज धन लाभ होने की संभावना तो बन रही है लेकिन ऐसा हो सकता है कि अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप पैसा कमाने में सक्षम न हो पाएं। दूसरों को प्रभावित करने की आपकी क्षमता आपको कई सकारात्मक चीज़ें दिलाएगी। अनपेक्षित रोमांटिक आकर्षण की संभावना है। घर के कामों को पूरा करने के बाद इस राशि की गृहणियां आज के दिन फुर्सत में टीवी या मोबाइल पर कोई मूवी देख सकती हैं। आज आप एक बार फिर समय में पीछे जाकर शादी के शुरुआती दिनों के प्यार को महसूस कर सकते हैं। सितारों की मानें तो आज आप अपने दोस्तों के साथ एक बेहतरीन शाम गुज़ारने वाले हैं। बस इतना याद रखें कि कोई भी चीज़ ज़रूरत से ज़्यादा हो तो अच्छी नहीं होती है। कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द) आज आप निराशावादी रवैये से बचें क्योंकि न सिर्फ़ यह आपकी संभावनाओं को कम कर देगा, बल्कि शरीर के आंतरिक संतुलन को भी बिगाड़ देगा। आर्थिक पक्ष के मजबूत होने की पूरी संभावना है। अगर आपने किसी शख्स को पैसा उधार दिया था तो आज आपको वो पैसा वापस मिलने की उम्मीद है। माता-पिता की तबियत में सुधार होगा और वे अपना प्यार आपके ऊपर बरसाएंगे। आज ही लंबे वक़्त से चले आ रहे झगड़ों को सुलझा लें, क्योंकि हो सकता है कि कल बहुत देर हो जाए। आज आप कोई नई पुस्तक खरीदकर किसी कमरे में खुद को बंद करके पूरा दिन गुजार सकते हैं। जीवनसाथी की वजह से आपको अनमने ढंग से बाहर जाना पड़ सकता है, जो बाद में आपकी झल्लाहट की वजह बनेगा। अगर आपकी आवाज सुरीली है तो कोई गाना गाकर आप अपने प्रेमी को आज खुश कर सकते हैं। मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची) आज आपको अपनी सेहत के प्रति ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है, ख़ास तौर पर रक्तचाप के मरीज़ों को। जो लोग लघु उद्योग करते हैं उन्हें आज के दिन अपने किसी करीबी की कोई सलाह मिल सकती है जिससे उन्हें आर्थिक लाभ होने की संभावना है। कोई चिट्ठी या ई-मेल पूरे परिवार के लिए अच्छी ख़बर लाएगी। अपने प्रिय की बातों के प्रति आप ज़रूरत से ज़्यादा संवेदनशील रहेंगे- आपको अपने जज़्बात पर क़ाबू रखने की ज़रूरत है और ऐसा कुछ करने से बचें जो मामले को और भी बिगाड़ दे। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है - जो काफ़ी दौड़-भाग भरा होगा - लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। आपकी भागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण आपका जीवनसाथी ख़ुद को दरकिनार महसूस कर सकता है, जिसका इज़हार शाम को होना मुमकिन है। अपनों का ख्याल रखना अच्छी बात है लेकिन उनका ख्याल रखते-रखते अपनी सेहत न बिगाड़ लें। __________________________________ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 - संकलनकर्त्ता- ज्योतिर्विद् पं. रामपाल भट्ट श्री ज्योतिष सेवा संस्थान भीलवाड़ा (राज.) 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 __________________________________

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Geeta Feb 26, 2021

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Ajay Verma Feb 26, 2021

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Garima Gahlot Rajput Feb 25, 2021

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*गाली देकर कर्म काट रही है* 🔸🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔸 एक राजा बड़ा धर्मात्मा, न्यायकारी और परमेश्वर का भक्त था। उसने ठाकुरजी का मंदिर बनवाया और एक ब्राह्मण को उसका पुजारी नियुक्त किया। वह ब्राह्मण बड़ा सदाचारी, धर्मात्मा और संतोषी था। वह राजा से कभी कोई याचना नहीं करता था, राजा भी उसके स्वभाव पर बहुत प्रसन्न था। उसे राजा के मंदिर में पूजा करते हुए बीस वर्ष गुजर गये। उसने कभी भी राजा से किसी प्रकार का कोई प्रश्न नहीं किया। राजा के यहाँ एक लड़का पैदा हुआ। राजा ने उसे पढ़ा लिखाकर विद्वान बनाया और बड़ा होने पर उसकी शादी एक सुंदर राजकन्या के साथ करा दी। शादी करके जिस दिन राजकन्या को अपने राजमहल में लाये उस रात्रि में राजकुमारी को नींद न आयी। वह इधर-उधर घूमने लगी जब अपने पति के पलंग के पास आयी तो क्या देखती है कि हीरे जवाहरात जड़ित मूठेवाली एक तलवार पड़ी है। जब उस राजकन्या ने देखने के लिए वह तलवार म्यान में से बाहर निकाली, तब तीक्ष्ण धारवाली और बिजली के समान प्रकाशवाली तलवार देखकर वह डर गयी व डर के मारे उसके हाथ से तलवार गिर पड़ी और राजकुमार की गर्दन पर जा लगी। राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। राजकन्या पति के मरने का बहुत शोक करने लगी। उसने परमेश्वर से प्रार्थना की कि 'हे प्रभु ! मुझसे अचानक यह पाप कैसे हो गया? पति की मृत्यु मेरे ही हाथों हो गयी। आप तो जानते ही हैं, परंतु सभा में मैं सत्य न कहूँगी क्योंकि इससे मेरे माता-पिता और सास-ससुर को कलंक लगेगा तथा इस बात पर कोई विश्वास भी न करेगा।' प्रातःकाल में जब पुजारी कुएँ पर स्नान करने आया तो राजकन्या ने उसको देखकर विलाप करना शुरु किया और इस प्रकार कहने लगीः "मेरे पति को कोई मार गया।" लोग इकट्ठे हो गये और राजा साहब आकर पूछने लगेः "किसने मारा है?" वह कहने लगीः "मैं जानती तो नहीं कि कौन था। परंतु उसे ठाकुरजी के मंदिर में जाते देखा था" राजा समेत सब लोग ठाकुरजी के मंदिर में आये तो ब्राह्मण को पूजा करते हुए देखा। उन्होंने उसको पकड़ लिया और पूछाः "तूने राजकुमार को क्यों मारा?" ब्राह्मण ने कहाः "मैंने राजकुमार को नहीं मारा। मैंने तो उनका राजमहल भी नहीं देखा है। इसमें ईश्वर साक्षी हैं। बिना देखे किसी पर अपराध का दोष लगाना ठीक नहीं।" ब्राह्मण की तो कोई बात ही नहीं सुनता था। कोई कुछ कहता था तो कोई कुछ.... राजा के दिल में बार-बार विचार आता था कि यह ब्राह्मण निर्दोष है परंतु बहुतों के कहने पर राजा ने ब्राह्मण से कहाः "मैं तुम्हें प्राणदण्ड तो नहीं देता लेकिन जिस हाथ से तुमने मेरे पुत्र को तलवार से मारा है, तेरा वह हाथ काटने का आदेश देता हूँ।" ऐसा कहकर राजा ने उसका हाथ कटवा दिया। इस पर ब्राह्मण बड़ा दुःखी हुआ और राजा को अधर्मी जान उस देश को छोड़कर विदेश में चला गया। वहाँ वह खोज करने लगा कि कोई विद्वान ज्योतिषी मिले तो बिना किसी अपराध हाथ कटने का कारण उससे पूछूँ। किसी ने उसे बताया कि काशी में एक विद्वान ज्योतिषी रहते हैं। तब वह उनके घर पर पहुँचा। ज्योतिषी कहीं बाहर गये थे, उसने उनकी धर्मपत्नी से पूछाः "माताजी ! आपके पति ज्योतिषी जी महाराज कहाँ गये हैं?" तब उस स्त्री ने अपने मुख से अयोग्य, असह्य दुर्वचन कहे, जिनको सुनकर वह ब्राह्मण हैरान हुआ और मन ही मन कहने लगा कि "मैं तो अपना हाथ कटने का कारण पूछने आया था, परंतु अब इनका ही हाल पहले पूछूँगा।" इतने में ज्योतिषी आ गये। घर में प्रवेश करते ही ब्राह्मणी ने अनेक दुर्वचन कहकर उनका तिरस्कार किया। परंतु ज्योतिषी जी चुप रहे और अपनी स्त्री को कुछ भी नहीं कहा। तदनंतर वे अपनी गद्दी पर आ बैठे। ब्राह्मण को देखकर ज्योतिषी ने उनसे कहाः "कहिये, ब्राह्मण देवता ! कैसे आना हुआ?" "आया तो था अपने बारे में पूछने के लिए परंतु पहले आप अपना हाल बताइये कि आपकी पत्नी अपनी जुबान से आपका इतना तिरस्कार क्यों करती है? जो किसी से भी नहीं सहा जाता और आप सहन कर लेते हैं, इसका कारण है?" "यह मेरी स्त्री नहीं, मेरा कर्म है। दुनिया में जिसको भी देखते हो अर्थात् भाई, पुत्र, शिष्य, पिता, गुरु, सम्बंधी - जो कुछ भी है, सब अपना कर्म ही है। यह स्त्री नहीं, मेरा किया हुआ कर्म ही है और यह भोगे बिना कटेगा नहीं। अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्। नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतेरपि॥ 'अपना किया हुआ जो भी कुछ शुभ-अशुभ कर्म है, वह अवश्य ही भोगना पड़ता है। बिना भोगे तो सैंकड़ों-करोड़ों कल्पों के गुजरने पर भी कर्म नहीं टल सकता।' इसलिए मैं अपने कर्म खुशी से भोग रहा हूँ और अपनी स्त्री की ताड़ना भी नहीं करता, ताकि आगे इस कर्म का फल न भोगना पड़े।" "महाराज ! आपने क्या कर्म किया था?" "सुनिये, पूर्वजन्म में मैं कौआ था और मेरी स्त्री गधी थी। इसकी पीठ पर फोड़ा था, फोड़े की पीड़ा से यह बड़ी दुःखी थी और कमजोर भी हो गयी थी। मेरा स्वभाव बड़ा दुष्ट था, इसलिए मैं इसके फोड़े में चोंच मारकर इसे ज्यादा दुःखी करता था। जब दर्द के कारण यह कूदती थी तो इसकी फजीहत देखकर मैं खुश होता था। मेरे डर के कारण यह सहसा बाहर नहीं निकलती थी किंतु मैं इसको ढूँढता फिरता था। यह जहाँ मिले वहीं इसे दुःखी करता था। आखिर मेरे द्वारा बहुत सताये जाने पर त्रस्त होकर यह गाँव से दस-बारह मील दूर जंगल में चली गयी। वहाँ गंगा जी के किनारे सघन वन में हरा-हरा घास खाकर और मेरी चोटों से बचकर सुखपूर्वक रहने लगी। लेकिन मैं इसके बिना नहीं रह सकता था। इसको ढूँढते-ढूँढते मैं उसी वन में जा पहुँचा और वहाँ इसे देखते ही मैं इसकी पीठ पर जोर-से चोंच मारी तो मेरी चोंच इसकी हड्डी में चुभ गयी। इस पर इसने अनेक प्रयास किये, फिर भी चोंच न छूटी। मैंने भी चोंच निकालने का बड़ा प्रयत्न किया मगर न निकली। 'पानी के भय से ही यह दुष्ट मुझे छोड़ेगा।' ऐसा सोचकर यह गंगाजी में प्रवेश कर गयी परंतु वहाँ भी मैं अपनी चोंच निकाल न पाया। आखिर में यह बड़े प्रवाह में प्रवेश कर गयी। गंगा का प्रवाह तेज होने के कारण हम दोनों बह गये और बीच में ही मर गये। तब गंगा जी के प्रभाव से यह तो ब्राह्मणी बनी और मैं बड़ा भारी ज्योतिषी बना। अब वही मेरी स्त्री हुई। जो मेरे मरणपर्यन्त अपने मुख से गाली निकालकर मुझे दुःख देगी और मैं भी अपने पूर्वकर्मों का फल समझकर सहन करता रहूँगा, इसका दोष नहीं मानूँगा क्योंकि यह किये हुए कर्मों का ही फल है। इसलिए मैं शांत रहता हूँ। अब अपना प्रश्न पूछो।" ब्राह्मण ने अपना सब समाचार सुनाया और पूछाः "अधर्मी पापी राजा ने मुझ निरपराध का हाथ क्यों कटवाया?" ज्योतिषीः "राजा ने आपका हाथ नहीं कटवाया, आपके कर्म ने ही आपका हाथ कटवाया है।" "किस प्रकार?" "पूर्वजन्म में आप एक तपस्वी थे और राजकन्या गौ थी तथा राजकुमार कसाई था। वह कसाई जब गौ को मारने लगा, तब गौ बेचारी जान बचाकर आपके सामने से जंगल में भाग गयी। पीछे से कसाई आया और आप से पूछा कि "इधर कोई गाय तो नहीं गया है?" आपने प्रण कर रखा था कि 'झूठ नहीं बोलूँगा।' अतः जिस तरफ गौ गयी थी, उस तरफ आपने हाथ से इशारा किया तो उस कसाई ने जाकर गौ को मार डाला। गंगा के किनारे वह उसकी चमड़ी निकाल रहा था, इतने में ही उस जंगल से शेर आया और गौ एवं कसाई दोनों को खाकर गंगाजी के किनारे ही उनकी हड्डियाँ उसमें बह गयीं। गंगाजी के प्रताप से कसाई को राजकुमार और गौ को राजकन्या का जन्म मिला एवं पूर्वजन्म के किये हुए उस कर्म ने एक रात्रि के लिए उन दोनों को इकट्ठा किया। क्योंकि कसाई ने गौ को हंसिये से मारा था, इसी कारण राजकन्या के हाथों अनायास ही तलवार गिरने से राजकुमार का सिर कट गया और वह मर गया। इस तरह अपना फल देकर कर्म निवृत्त हो गया। तुमने जो हाथ का इशारा रूप कर्म किया था, उस पापकर्म ने तुम्हारा हाथ कटवा दिया है। इसमें तुम्हारा ही दोष है किसी अन्य का नहीं, ऐसा निश्चय कर सुखपूर्वक रहो।" कितना सहज है ज्ञानसंयुक्त जीवन ! यदि हम इस कर्मसिद्धान्त को मान लें और जान लें तो पूर्वकृत घोर से घोर कर्म का फल भोगते हुए भी हम दुःखी नहीं होंगे बल्कि अपने चित्त की समता बनाये रखने में सफल होंगे। भगवान श्रीकृष्ण इस समत्व के अभ्यास को ही 'समत्व योग' संबोधित करते हैं, जिसमें दृढ़ स्थिति प्राप्त होने पर मनुष्य कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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Chander Bhan GARG Feb 26, 2021

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Renu Singh Feb 24, 2021

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